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Tuesday, October 11, 2016

महाशक्ति, हम और पाकेटमार...............

महाष्टमी का दिन
प्रातः दुर्गा पाठ, फिर दिन भर का भागम भाग, उसके बाद ऑफिस आना और वहां के कार्य को संपन्न करना, तत्पश्चात् रात्रि में हम अपनी पत्नी के साथ रांची के विभिन्न पंडालों में स्थापित मां दुर्गा का दर्शन करने के लिए घर से निकले। सर्वप्रथम हम पहुंचे चर्च रोड स्थित मां दुर्गा के पंडाल में, वहां श्रद्धा निवेदित किया। उसके बाद ओसीसी क्लब, राजस्थान मित्र मंडल, भारतीय युवक संघ बकरी बाजार, शक्ति श्रोत संघ, सत्य अमर लोक होते हुए आर आर स्पोर्टिंग क्लब रातू रोड पहुंचे।
यहां भारी भीड़ थी, महिला और पुरुषों के लिए अलग – अलग कतार बने थे, मैंने अपनी पत्नी को कहा कि आप महिला वाली कतार से होते हुए भगवती के दर्शन कर बाहर निकलिये और हम पुरुषों वाली कतार से होकर बाहर निकलते है। कुछ कदम ही उपर बढ़ाये कि मेरे आस-पास पांच-छ व्यक्तियों का ग्रुप मेरे चारों ओर घेरा बनाकर चलने लगा। एक के हाथ मेरे फुलपेंट के पाकेट की ओर बार-बार बढ़ रहे थे। मुझे अब जानते देर नहीं लगी कि हम पाकेटमारों के घेरे में आ गये है। हम भी पाकेटमारों के घेरे में आने के बाद सचेत हो गये और उन पर अपनी नजरे टिका दी और साथ ही अपने फुलपेंट के पाकेट पर अपने हाथ को एक सिपाही की तरह मुस्तैद कर दिया। जब हम आर आर स्पोटिंग क्लब से बाहर आये, तो हमने पाया कि वह पाकेटमारों का दल, पाकेटमारी में सफल नहीं होने के कारण बेचैन दीखा।
अब उन्होंने मेरी पाकेटमारी करने के लिए ब्रह्म कुमारियों द्वारा लगाये गये स्टाल को चुना, जहां जीवंत देवियों की झांकियां दिखाई जा रही थी। पाकेटमारों का दल यहां मुस्तैद था, पर मेरी पत्नी ने कहा कि वह इस प्रकार की झांकियां देख चुकी है, बारिश हो रही है, जल्द घर भी पहुंचना है, नहीं तो मकान मालिक दरवाजा बंद कर देगा तो फिर रात भर बाहर ही गुजारना पड़ेगा, इसलिए यहां से चला जाये। मैंने भी सोचा की बात में दम है, इसलिए निकला जाये। तभी पाकेटमारों का दल जो यहां हमारी पाकेटमारी करने के लिए मुस्तैद था, मुझे उस ओर से गुजरते हुए, फिर मेरी ओर लपकने की कोशिश की। पाकेटमारों की इस हरकत को देख, मैने उन पाकेटमारों को स्पष्ट रुप से कह दिया कि भाई, मैं अच्छी तरह जानता हूं कि तुम सभी पाकेटमार हो, और मेरे पाकेट में रखे हुए रुपयों पर तुम्हारी नजर है। अच्छा रहेगा कि तुम लोग दूसरी जगह पाकेटमारी की तलाश करों, नहीं तो तुम्हें दिक्कत हो जायेगी, क्योंकि पहली बात कि तुम हमारी पाकेटमारी नहीं कर सकते, क्योंकि मैं तुम्हें जान गया हूं कि तुम सभी पाकेटमार हो और अब हमारा पीछा किया तो हमें पुलिस की सेवा लेते देर नहीं लगेगी। इतना कहना था कि स्वयं को पोल खुलता देख, वे सारे पाकेटमार उसके बाद फिर हमारी पीछा नहीं कर पाये, शायद उन्हें लगा कि मेरे सामने उन सबकी पोल खुल गयी है। ऐसे मैं इन सारे पाकेटमारों को देख कर पहचान सकता हूं, अगर रांची पुलिस हमारी मदद लेनी चाहे, तो मैं यह मदद देने को भी तैयार हूं।
इसके बाद हम कचहरी रोड पहुंचे, फिर बिहार क्लब। बिहार क्लब से आगे बढ़ते ही हमारे साथ एक घटना घट गयी। एक जगह प्रसाद बंट रही थी, हम दोनों ने प्रसाद ग्रहण किया और प्रसाद ग्रहण करने के बाद जैसे ही हाथ धोने के लिए हम झुके, तभी एक 14 वर्षीय एक किशोर ने हमारी उपरी पाकेट से सैम्संग जी 7 मोबाइल आराम से निकाल लिया और चुपके से भागने की कोशिश करने लगा। जैसे ही वह किशोर हमारे पाकेट से पाकेटमारी करते हुए सैम्संग जी 7 मोबाइल निकाला, हमें आभास हुआ कि किसी ने मोबाइल हमारी निकाल ली, और तभी हमने झट से उक्त किशोर को पकड़ा, उस किशोर को अपने चंगुल में, मैंने जैसे ही लिया। वह बोला कि मेरा मोबाइल नीचे गिर गया था, यानी पकड़ में आने के बाद झूठ बोलकर बचने की कोशिश। तभी गुस्सा आया और मैंने चार-पांच थप्पड़ जड़ दिये। अंततः मुझे दया आयी और मैंने उसे छोड़ दिया। मेरा छोड़ना था कि वह दनदनाते हुए भाग निकला। यानी महाष्टमी के दिन हमारे साथ पाकेटमारी की दो घटना और दोनों घटनाओं से हम बच निकले, कोई नुकसान नहीं।
हम आपको बता दे कि जैसे ही यह दोनों घटनाएं घटी थी, हमें लगा कि कोई अदृश्य शक्ति ने हमें बताया कि तुम्हारे साथ घटना घट रही है, बचो और मैं स्वयं को बचा लिया। जरा सोचिये, अगर दोनों घटनाओं को अंजाम देने में पाकेटमार सफल हो जाते तो हमारा क्या होता? हम महाष्टमी का आनन्द नहीं ले पाते, फिर दो – तीन दिनों के लिए तनाव की स्थिति आ जाती और हम दुर्गा पूजा का आनन्द कम, विषाद में ज्यादा डूब जाते। सचमुच मां ने कृपा किया और हम पाकेटमारों द्वारा मिलनेवाले दुख से बाल – बाल बच गये।