Showing posts with label महेन्द्र सिंह धौनी. Show all posts
Showing posts with label महेन्द्र सिंह धौनी. Show all posts

Thursday, February 23, 2017

मुख्यमंत्री रघुवर दास, क्रिकेटर महेन्द्र सिंह धौनी से इतने चिढ़ते क्यों है.......

याद करिये, मोमेंटम झारखण्ड की ब्रांडिंग या झारखण्ड का इमेज दूसरे राज्यों में चमकाने के लिए महेन्द्र सिंह धौनी ने एक भी पैसे नहीं लिये। यह भी याद रखिये कि महेन्द्र सिंह धौनी लगातार मोमेंटम झारखण्ड के कार्यक्रम में अपने सारे कार्यों को छोड़ कर, इसमें स्वयं को हृदय से समायोजित किया है और ऐसे व्यक्ति से मुख्यमंत्री का चिढ़ जाना, उसके पोस्टर व बैनर देखकर भड़क जाना, हमें कुछ अच्छा नहीं लगा। कल की ही बात है रांची से प्रकाशित हिन्दुस्तान अखबार ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि मोमेंटम झारखण्ड के क्रम में कुछ अफसरों के बीच झड़प हुई थी। क्रिकेटर धौनी का बड़ा कट आउट देखकर सीएम भड़क गये थे, हालांकि सीएमओ ने इन सारे आरोपों से इनकार किया है। भले ही सीएमओ इन बातों से इनकार करें, पर सूत्रों के हवाले से दी गई इस खबर में छुपी सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता। सूत्र तो ये भी बताते है कि सीएम इतने भड़क गये थे कि वे गुस्से में कह रहे थे कि क्या महेन्द्र सिंह धौनी की ब्रांडिग करने से झारखण्ड में पूंजी निवेश होगा? मुख्यमंत्री रघुवर दास ने यह भी कहा था कि सिर्फ रघुवर दास ही इस राज्य में पूंजी निवेश करा सकता है, जो भी पूंजी निवेश होगा, वह रघुवर के कहने पर, न कि धौनी के कहने पर। जिस दिन यह घटना घटी, उसी दिन से धौनी का हाथी उड़ाते बैनर और पोस्टर की जगह, रघुवर ही रघुवर नजर आने लगे और इसके लिए दोषी एक अधिकारी को ठहरा दिया गया, जो निर्दोष था और बाकी वहां खड़े अधिकारी मुस्कुरा रहे थे, क्योंकि उनकी कारगुजारी सफल हो चुकी थी, कनफूंकवे कामयाब हो गये थे, राज्य के असली दो मुख्यमंत्री प्रसन्न मुद्रा में आ चुके थे, और जिस अधिकारी पर झूठा आरोप लगा, उसने उसी वक्त संकल्प लिया कि वह अब ज्यादा दिनों तक झारखण्ड में नहीं रहेगा और ठीक इस घटना के बाद उक्त अधिकारी ने केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए सीएम से अपनी मंशा जाहिर कर दी। ये अधिकारी कौन थे?  सब को पता है। हिन्दुस्तान अखबार ने स्पष्ट रुप से उक्त सत्यनिष्ठ अधिकारी का नाम प्रकाशित कर दिया है।
...और मुख्यमंत्री रघुवर दास का धौनी से चिढ़ने का एक नया उदाहरण देखना हो, तो जरा आज का प्रभात खबर देख लीजिये। धौनी जिसने मोमेंटम झारखण्ड की ब्रांडिंग की, उसे ही अपनी अकादमी खोलने के लिए जमीन नहीं मिली। आश्चर्य इस बात की है कि जो उस वक्त रांची के उपायुक्त हुआ करते थे, और जो आज राजस्व सचिव है, उन्हें ही पता नहीं कि धौनी को जमीन क्यों नहीं मिली? 6 वर्ष से यह मामला राजस्व विभाग ने लटका कर रखा है, और बड़े ही सहजता से राजस्व सचिव ये बयान देते है कि जब वे रांची के उपायुक्त थे, तब सरकार के आदेश पर यह प्रस्ताव बना था, अभी उसकी स्थिति की जानकारी, उन्हें नहीं है, इस बारे में जानकारी लेकर वे बतायेंगे। ये अधिकारी है – के के सोन। हद हो गयी, इससे बड़ा आश्चर्य और धौनी के साथ हुए धोखे का कोई दुसरा उदाहरण नहीं हो सकता।  अब बात आती है कि इससे नुकसान किसका हुआ, धौनी का या इस राज्य का। क्या इस सवाल का जवाब मुख्यमंत्री रघुवर दास दे सकते है?
मोमेंटम झारखण्ड का आयोजन करा लेने से क्या होगा? जरा आज का टेलीग्राफ का बॉटम लीड खबर पढ़ लीजिये कि महेश भट्ट रघुवर सरकार के अधिकारियों के कारगुजारियों से कितने खुश है?  मैं स्पष्ट बता देना चाहता हूं कि यहां के भ्रष्ट अधिकारियों ने पूरी तरह से प्रशासन को अपने कब्जे में कर रखा है, जिससे नाराज होकर कई अधिकारी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति का रूख कर रहे है, जैसे कल ही पता चला कि आईपीएस अजय भटनागर भी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते है, अगर ऐसा होता है तो सारे के सारे अच्छे अधिकारी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले जायेंगे और झारखण्ड लूटखंड में परिवर्तित हो जायेगा। एक बात और हिन्दुस्तान में ही दो और अधिकारियों के केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की बात कही गयी है, इसका मतलब ये भी नहीं कि जो भी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना चाह रहे है, वे सभी ईमानदार और देशभक्त ही है। मैंने उनकी देशभक्ति और ईमानदारी कई वर्षों से देख रखी है, ऐसे लोगों को तो जितना जल्दी हो सके, केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति का पत्र हाथ में थमा देना चाहिए, ताकि राज्य का भला हो।
अंत में जाते-जाते, सरकार की पारदर्शिता और ईमानदारी देखिये। मंगलवार-बुधवार की मध्य रात्रि में स्टेशन रोड पर एक घटना घटी, एक शराब पीये एक युवक ने अपनी चार चक्के की गाड़ी से होटल बीना के पास खड़ी इनोवा और मोटरसाइकिल को ऐसा धक्का मारा कि इनोवा और मोटरसाइकिल का नक्शा ही बदल गया, चूंकि ये दोनों गाड़ियां खड़ी थी, इसलिए किसी की जान नहीं गयी। कानूनी पचड़े में न पड़े, इसके लिए दोनों पक्ष चुटिया थाने में दूसरे दिन सुलह के लिए पहुंचे। दोनों पक्षों में सुलह भी हो गया और इस सुलह तथा कानूनी प्रक्रिया से मुक्त कराने के लिए इसमें बने आइओ ने बीस हजार रुपये दक्षिणा वसूले, जब मैंने उस आइओ से पूछा कि क्या आप ही आइओ है, तो उसने बड़ी ही शान से कहा, हां हम है आइओ।
बदलता झारखण्ड
विकास की ओर उन्मुख झारखण्ड।