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Saturday, April 29, 2017

क्या है अक्षय तृतीया...........

अमिता पिछले पन्द्रह दिनो से अपने पति राज से झगड़ रही है कि पिछले साल जिस प्रकार से राज ने अक्षय तृतीया के दिन धोखा दिया था, वह इस बार धोखा नहीं देगा। इस साल अक्षय तृतीया के दिन सोने के कंठहार वह लेकर रहेगी, क्योंकि पिछले दिनों एक पंडित जी ने कहा था कि अक्षय तृतीया के दिन सोने का कोई न कोई आभूषण अवश्य खरीदना चाहिए, क्योंकि सोना कभी क्षय नहीं होता, उससे लाभ ही लाभ होता है, घर में सुख-शांति आती है, समृद्धि आती है। बेचारा राज, उसे पिछले साल की तरह इस साल भी आमदनी में कुछ खास वृद्धि नहीं हुई, पर पत्नी ने ऐसा आंदोलन खड़ा कर दिया है कि उसके हालत पस्त है। अमिता और राज की तरह ऐसे कई घर और परिवार है, जो अक्षय तृतीया के नये मिजाज से अपने घर को तबाह करने में लग गये है।
उसका कारण है कि इन दिनों नये ढंग के पंडितों, नये ढंग के अखबारों-चैनलों और नये ढंग के व्यापारियों ने जन्म ले लिया हैं। इन तीनों ने मिलकर इस प्रकार से अक्षय तृतीया की ब्रांडिंग कर दी है, कि आम आदमी इस पर्व के चक्कर में अपनी खुशियां बड़े-बड़े धन्ना सेठों के यहां गिरवी रखने को मजबूर हैं।
पंडितों (पंडित का मतलब जाति नहीं समझ लीजियेगा, अगर आप इसे जाति से तौलेंगे तो धोखे में पड़ जायेंगे, आजकल हर जातियों में नये – नये पंडित जन्म ले लिये है, जो गांवों-शहरों में जन्मकुंडली देखने का दुकान खोल लिये है, मैं उनकी बात कर रहा हूं) को देखिये तो वे बेसिर-पैर की बातें वैदिक मंत्रों से जोड़कर आम-आदमी को मूर्ख बना रहे है, जबकि उन वैदिक मंत्रों का उससे कोई लेना – देना नहीं होता।
दूसरी ओर अखबार और चैनलवाले बड़े-बड़े व्यापारियों, जिनकी दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठानें शहरों में चल रही है, उनसे विज्ञापन इस प्रकार वसूलते है, वह भी उनके गर्दन पर छुरी रखकर, कि अगर वे विज्ञापन नहीं देंगे तो वे आयकर विभाग से उसकी शिकायत करके, उसकी सारी दुकानदारी मटियामेट कर देंगे और इस प्रकार व्यापारियों और मीडिया के लोगों का मधुर संबंध बनता है, भर-भर पेज विज्ञापन मुक्त कंठ से ये व्यापारी वर्ग अखबारों को उपलब्ध कराते है और इस प्रकार झूठ का व्यापार जमकर एक दिन चलता है, जिसका नाम है – अक्षय तृतीया।
मैं पूछता हूं कि आम जनता पूछे, उन ढोंगी पंडितों, अखबारवालों और व्यापारियों से कि वे बतायें कि...
• किस सनातन-वैदिक ग्रंथों में लिखा है कि हमारे भगवान राम सीता के संग, भगवान शिव पार्वती के संग, भगवान विष्णु लक्ष्मी के संग या कोई भी देवता अपनी-अपनी पत्नी के संग, किसी व्यापारी के यहां जाकर अक्षय तृतीया के दिन स्वर्णाभूषण या अन्य वस्तूएं खरीदी थी?
• अक्षय का अर्थ क्या होता है?
• दुनिया में वह कौन ऐसा चीज है, जो अक्षय है, जिसकी प्राप्ति के बिना जीवन सफल नहीं हो सकता, आगे नहीं बढ़ सकता?
• अक्षय तृतीया के दिन किस चीज को प्राप्त करने से जीवन सुलभ हो जाता है?
• आखिर अक्षय तृतीया के दिन सोने-चांदी या अन्य सुख-सुविधाओं के सामान क्यों नहीं खरीदने चाहिए?
इन सारे प्रश्नों का उत्तर आपको कोई ढोंगी पंडित, कोई अखबार या कोई व्यापारियों का समूह नहीं देगा, क्योंकि ये सभी व्यापार के नाम पर यहां की जनता को बेवकूफ बना रहे है और अपना उल्लू सीधा करते है।
और
अब हम आपको सारे प्रश्नों का जवाब दे देते है...
• हमारे भगवान कभी भी विलासिता संबंधी वस्तुओं को खरीदने की सलाह नहीं देते, उनका केवल यहीं कहना होता है कि आप उन्हें स्मरण करें, जीवन सफल हो जायेगा।
• अक्षय का अर्थ होता है, जिसका कभी क्षय नहीं हो।
• दुनिया में जितनी वस्तूएं हैं, सभी क्षय होनेवाली है। उनका नाश तय है, इसलिए ये अक्षय हो ही नहीं सकती, इसलिए इन चीजों को खरीदना नहीं चाहिए, लेकिन दुनिया में एक चीज है, जिसका कभी क्षय नहीं होता, वह है प्रभुकृपा अथवा अपने से बड़ों का आशीर्वाद। यह ऐसी वस्तु है, जिसका कभी क्षय नहीं हो सकता, इसलिए हमें प्रभुकृपा और आशीर्वाद की ललक को जागृत करना चाहिए।
• जो भी व्यक्ति प्रभुकृपा और अपने से बडों का आशीर्वाद को त्याग कर भौतिक वस्तुओं की प्राप्ति के लिए दिमाग लगाता है, वह उसी तरह नष्ट हो जाता है, जैसे भौतिक वस्तूएँ।
और अंत में,
इन ढोंगियों से पूछिये कि बताओं, राम, कृष्ण, स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, कबीर, तुलसी, सूरदास, मीराबाई, लक्ष्मीबाई, सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी महान विभूतियां किस साल अक्षय तृतीया के दिन भौतिक वस्तूओं की प्राप्ति के लिए, सुख-सुविधा की प्राप्ति के लिए अक्षय तृतीया तुम्हारे कथनानुसार मनाया था और जब उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो हमें आप ऐसा करने को प्रेरित क्यों कर रहे हो? आओ देश बनाएं, न कि स्वयं रसातल में चले जाये और ढोंगियों का बराबर शिकार बनते रहे।

Thursday, August 18, 2016

अखबारों का भटियारापन...............

मौत गरीबों का और पटना से प्रकाशित एक-दो अखबारों को छोड़कर सभी अखबारों ने आज गरीबों के मौत का मजाक उड़ाया हैं और नीतीश भक्ति से स्वयं को अलंकृत कर लिया है। भटियारापन दिखाने में इस बार पटना से प्रकाशित हिन्दुस्तान अखबार ने बाजी मार ली है, इस बार हिन्दुस्तान प्रथम स्थान पर और प्रभात खबर दूसरे स्थान पर है, जबकि दैनिक जागरण ने अपनी गरिमा बचाने में कुछ हद तक सफलता पायी, वहीं दैनिक भास्कर ने सही खबरें प्रकाशित कर गरीबों के मौत पर मरहम और नीतीश को डायरेक्ट चुनौती दे दी है।
जरा खबर क्या है, उसे जानिये – खबर यह है कि जहरीली शराब पीने से गोपालगंज में 15 लोगों की मौत हो गयी, प्रशासन मानने को तैयार ही नहीं कि यह मौत जहरीली शराब पीने से हुई है, जबकि जिनके घर में ये घटना घटी, वे चीख-चीखकर कह रहे हैं कि यह मौत जहरीली शराब के कारण हुई, पर बेशर्म अखबारों को देखिये, क्या हेडिंग बनायी है...
सबसे पहले पटना से प्रकाशित हिन्दुस्तान को देखिये...
हेंडिग बनाई है...
“गोपालगंज में कै दस्त से 14 मरे”
प्रभात खबर को देखिये, ये हेंडिग बनाया है
“गोपालगंज में मरनेवालों की संख्या 14 तक पहुंची”
दैनिक जागरण ने हेडिंग दिया
“जहरीली शराब से 14 मरे”
दैनिक भास्कर ने हेडिंग दिया
“पहले आंखों की रोशनी गई, फिर जान, जहरीली शराब से 15 लोगों की मौत”
ये हैं कुछ अखबारों का दोगला चरित्र और नीतीशायण गाने की प्रतियोगिता...
और अब अपनी बात...
जो लोग हमारे फेसबुक से जुड़े है, और हमारा फेसबुक पढ़ते है। वे जानते होंगे कि मैंने 4 अगस्त 2016 को क्या लिखा था, पर जो नहीं पढ़े है, उनके लिए मैं पुनः उद्धृत कर रहा हूं, वो यह हैं...
“बिहार के बबुआ नीतीश को समर्पित...
ए भाई इ देश में दहेज के खिलाफ कानून बना है...भ्रष्टाचार रोकने के खिलाफ भी कानून बना है...कम उम्र में शादी रोकने का भी कानून बना है...चोरी, बलात्कार, गुंडागर्दी रोकने के लिए भी कानून बना है...लगे हाथों एक और भी कानून बन गया, क्या कहते है दारु पीने से रोकने का कानून...हम सभी का स्वागत करते है...जैसे पहले के कानून का किया...जैसे आज भी दहेज लेते है, भ्रष्टाचार का सारा रिकार्ड अपने नेता जी अपने पास रखते है, कम उम्र में शादी भी करते और करा देते है, चोरी, बलात्कार और गुंडागर्दी तो नेताओं के आभूषण ही है...इसलिए दारु के बारे में क्या कहना हैं, नई - नई दुल्हन बनी है, देखते है आगे कितने लोग इसका घूंघट उठाते है...”
ये लिखने का अभिप्राय यहीं था कि आप कुछ भी कर लो, जो गलत लोग है, जो चरित्रहीन लोग है, वे अपनी कलाबाजी दिखायेंगे ही, उन्होंने अपनी कलाबाजी आज दिखा दी...
पर इससे हुआ क्या?
मरा कौन गरीब, मरा कौन था गरीब और मरेगा कौन गरीब
और इस पर मजा लूटेगा कौन, वहीं हिन्दुस्तान, वहीं प्रभात खबर जो दांत निपोड़ कर फिलहाल नीतीशभक्ति में सर से पांव तक डूबा है...
बेशर्म है ये लोग, पत्रकारिता क्या करेंगे...
ये तो नीतीशायन गायेंगे और गरीबों के शव पर ठुमके लगायेंगे...
हम ऐसी पत्रकारिता पर थूकते हैं...

Monday, May 23, 2016

।। अथ चपलकांत कथा ।।

बहुत दिनों की बात है...
जंगलों से आच्छादित एक भूखण्ड प्रदेश था...
जहां चपलकांत नामक एक सियार पत्रकार था...
उसकी धूर्त बातों से अनभिज्ञ जंगलों के अन्य जीव-जंतु उसे महान बुद्धिजीवी समझते और चपलकांत उस भूखण्ड प्रदेश में सारे जीव-जंतुओं को बेवकूफ बनाकर राज किया करता था। उसकी धूर्तता से अनभिज्ञ उसके ज्ञान के कायल सत्तापक्ष और विपक्ष के लोग भी थे। उसकी पत्रकारिता से भय खा कर कई प्रशासनिक अधिकारी उसकी सेवा में लगे रहते, और उसे अपने – अपने विभागों की सुंदर-सुंदर कॉटेजों और अतिथिगृहों में आनन्द की सारी सामग्रियां उपलब्ध किया करते। चपलकांत अपनी प्रिय पत्नी और बच्चों के साथ परम आनन्द की प्राप्ति करता, साथ ही अगर सेवा के दौरान कुछ गड़बड़ियां दीख जाती तो वह पत्रकारिता का धौंस दिखाकर जंगल के छोटे-छोटे कर्मचारियों को अपना भय दिखाना नहीं भूलता...
उसकी इस धौंस और धूर्तता से धीरे-धीरे भूखण्ड प्रदेश के सभी वन्य प्राणी परेशान होने लगे...
पर सत्ता के सर्वोच्च सिंहासनों तक उसकी धौंस और उसकी पत्नी के भी एक न्यूज पोर्टल के संपादक बन जाने से सभी की नींद उड़ गयी थी, कि अब क्या होगा...क्योंकि वह नाना प्रकार के कुटिल हरकतें करता और पुरस्कार के लालचियों और घटियास्तर के भ्रष्ट लोगों को श्रेष्ठनायक का पुरस्कार देकर अपने आपको और मजबूत करता चला जाता...
यहीं नहीं भूखण्ड प्रदेश में कार्यरत सत्तावचन प्रसारित भवन में भी उसकी धमक रहती और वह इसका फायदा उठाने में कोई कोताही नहीं बरतता...
उसकी इस हरकत से धीरे-धीरे उस भूखण्ड प्रदेश की पत्रकारिता की छवि धूमिल होने लगी। भूखण्ड प्रदेश के कई बुद्धिजीवियों ने भूखण्ड प्रदेश में रहनेवाले सभी जीव-जंतुओं को उससे सावधान करने का मन बनाया...
तभी भूखण्ड प्रदेश में चल रहे एक महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान में एक भयंकर ज्ञान-विस्फोट हुआ, जिसमें उसकी हवा निकल गयी, यहीं उसे पहला झटका मिला...फिर भी उसे लगा कि जब वह चपलकांत ही है, तो इस प्रकार की झटकों से उसके सम्मान को कुछ नहीं होता, क्योंकि सारे संसार में उसके जैसे लोग भरे पड़े हैं, ऐसे भी उसका जन्म ही इसी प्रकार की हरकतों को करने के लिए हुआ है...
इसलिए वह हर प्रकार के हथकंडों में निपुण होता जाता...कभी वो गायक बन जाता, तो कभी साहित्यकार, तो कभी प्रोफेसर तो कभी विद्यार्थी, यानी जब जैसा तब तैसा...पत्रकार तो था ही...
इसी चक्कर में उसने सर्वश्रेष्ठ धनपशु बनने का लालसा पा लिया...
इस लालसा को पा लेने के बाद उसे परमज्ञान हुआ कि ये तो भूखण्ड प्रदेश है...
यहां तो सारे के सारे नेता और अधिकारी गधे और मूर्ख है...एक सबसे ज्यादा तेज तो वहीं हैं, जिसकी ज्ञान से भूखण्ड प्रदेश के सारे जीव-जंतु हैरान है...
इसलिए, उसने एक स्वज्ञान आधारित एक स्मारिका निकालने की सोची, जिससे उसे अपार धन हासिल हो...उसने भूखण्ड प्रदेश के सारे नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के आगे नाचना शुरू किया...जिससे उसकी रही-सही इज्जत भी धूल में मिल गयी, साथ ही उसके परम मित्रों में भी जो सम्मान बचा था, वह भी धुल गया...
पर उसकी धन कमाने की लालसा नहीं गयी...
वह धन कमाने के चक्कर में अपने छोटे-छोटे बच्चों को भी तथाकथित धूर्तनिष्ठ पत्रकारिता का चरणामृत चखा दिया...
जिससे बच्चे बड़ी तेजी से उसके कुकृत्यों के शिकार होने लगे...
वो कहावत है न
बाढ़हु पुत पिता के धर्में, खेती उपजे अपना कर्मे
जब पिता के धर्म पर पुत्र आगे बढ़ सकता है, तो पिता के कुकर्म पर बच्चे नीचे जायेंगे ही।
उस चपलकांत सियार के बच्चे सत्यनिष्ठ बनना तो दूर, धूर्तनिष्ठ होने लगे...
पर सर्वश्रेष्ठ धनपशु बनने के चक्कर में चपलकांत सियार नामक पत्रकार इतना खो गया कि उसे पता ही नहीं चला कि उसका सारा तेज धीरे – धीरे कुकर्मों से युक्त होकर धूमिल होता जा रहा है...
एक दिन वह भूखण्ड प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनके मातहत अधिकारियों को अपने ज्ञान का स्वाद चखाने के लिए ताना-बाना बुना, पर उसकी चालाकी को जान लेने के बाद भूखण्ड प्रदेश के मुख्यमंत्री और उनके मातहत काम करनेवाले अधिकारियों ने उसकी एक न सुनी और उस धनपशु चपलकांत को औकात बता दी और कहा कि वह ज्यादा काबिल न बने, नहीं तो उसे लेने के देने पड़ जायेंगे...
बेचारा चपलकांत, उसकी रही-सही बुद्धि भी खत्म हो गयी...
और शीर्ष पर रहनेवाला चपलकांत धड़ाम से जमीन पर आकर गिर पड़ा...
शिक्षा – क. पत्रकारिता में ईमानदारी अवश्य बरतनी चाहिये...
ख. आपके किये कुकर्म आपको उपर नहीं, बल्कि नीचे ले जाते हैं...
ग. चरित्रवान होना, सारी सफलता की कुंजी है, इससे ईश्वर प्रसन्न होते हैं...