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Friday, December 11, 2015

अरविंद और नरेन्द्र मोदी में बेशर्म कौन............

अरविंद और नरेन्द्र मोदी में बेशर्म कौन ?
हमारे देश में बेशर्मों की कमी नहीं, उन्हीं बेशर्मों में से एक है –अरविंद केजरीवाल। ईमानदारी का ढोल पीटकर, दिल्ली की 70 सीटों में से 67 सीटों पर कब्जा कर लिया और अपने 67 विधायकों का वेतन 400 फीसदी बढ़ा लिया। क्या अरविंद केजरीवाल बता सकता है? कि उसने अपने राज्य के कर्मचारियों और कामगारों को 400 फीसदी वेतन बढ़ायी, जैसा कि खुद के लिए कर लिया...उत्तर होगा नहीं। क्या दिल्ली में आम आदमी की हैसियत बढ़ी? अगर नहीं बढ़ी तो फिर अरविंद केजरीवाल किस हैसियत से अपना और अपने मातहतों विधायकों का जीवन स्तर सुधारने के लिए स्वयं के वेतन में अप्रत्याशित वृद्धि कर ली।
यह है 100 प्रतिशत सत्ता का चरित्र...सत्ता खुद को ईमानदार घोषित करने से मिलती है और जब सत्ता मिल जाये तो अपने परिवारों और अपने शुभचिंतकों का ख्याल रखों, जनता जाये भाड़ में....और मजाक उड़ाओ, उनका जो कभी तुम्हारा मजाक उड़ाया करते थे, ये कहकर कि रह गये न...
ये है हमारे देश के नये – नये नेता अरविंद केजरीवाल, कभी बोलता था कि उसकी पार्टी आम आदमी की पार्टी है, इसलिए पार्टी का नाम रखा – आम आदमी पार्टी। जरा पूछो अरविंद केजरीवाल से कि क्या आम आदमी की सैलरी उतनी है?, जितनी उसकी है...क्योंकि वो तो आम आदमी का नेता है...
जब कथनी और करनी में अंतर होता है, तभी भ्रष्टाचार का जन्म होता है। भ्रष्टाचार केवल धन लोलुपता ही नहीं, भ्रष्टाचार आचरण की मर्यादा को तोड़ना भी है, पर हम ऐसे घटियास्तर के नेताओं से उसकी आचरण की मर्यादा के बारे में भी बात नहीं कर सकते, क्योंकि ज्यादा दिनों की बात नहीं है, वो हाल ही में भ्रष्टाचार शिरोमणि सजायाफ्ता लालू प्रसाद के भी गले मिल चुका है, शायद वो दिखलाना चाहता हो कि लालू तुम क्या जानते हो? भ्रष्टाचार में हम तुम्हारे भी बाप सिद्ध होंगे। सत्ता का स्वाद भी चखेंगे, खूब पैसे भी कमायेंगे, जनता को लूटेंगे भी, फिर आनन्द से उपर भी जायेंगे और बाद में दिल्ली या देश की सड़कों पर अपनी मूर्ति बनवाकर सदा के लिए खुद को पूजवायेंगे भी...
लेकिन इस के विपरीत सत्ता में ही रहकर सत्ता का सुख लेने से वंचित त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार को देखिये, इन सबसे अलग उन्हें क्या करना है?, वे करते जा रहे है?
ठीक उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देखिये, उनके उपर लगातार छीटाकशीं व हमले जारी हैं, पर इनसे बेफिक्र, वे देश सेवा में लगे है, हालांकि नरेन्द्र मोदी की सत्ता जल्द समाप्त हो, इसके लिए तो कांग्रेस के कई नेता पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ के तलवे तक चाट चूके है, ऐसे –ऐसे बयान दिये है, जिसे पढ़ व सुनकर शर्म महसूस होती है कि ऐसे नेता इस भारत में ही क्यों पैदा होते है?, अन्य जगहों पर क्यों नहीं? कुछ दिनों पूर्व, एक कांग्रेसी ने नेपाल संकट पर जो बयान दिया, उस बयान से एक बात फिर पुष्ट हो गयी कि कांग्रेस सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है, पर फिलहाल उसका वश नहीं चल रहा...
दूसरी ओर जरा अरविंद केजरीवाल का बड़बोलापन देखिये, अपने प्रधानमंत्री का किस प्रकार मजाक उड़ाते है...विधानसभा में अपने मंत्रियों और विधायकों की सैलरी में 400 फीसदी का इजाफा करनेवाले अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर उनकी सैलरी को लेकर उनका मजाक उड़ाया था। कहा था कि ओबामा यदि मोदी से उनकी सैलरी पूछेंगे, तो क्या बतायेंगे कि उन्हें 1.60 लाख रुपये मिलते है। मोदी जी को अपनी सैलरी बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक कर लेनी चाहिए...पर शायद अरविंद केजरीवाल और उनके पिछलग्गूओं को पता नहीं कि...
देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसा व्यक्तित्व कहीं नहीं...
अरविंद जान लो, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में और उनके वेतन के बारे में...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ज्यादातर सैलरी दान कर देते है।
गुजरात के सीएम थे, तब भी ऐसा ही करते थे।
गुजरात से दिल्ली चले, तो 21 लाख रुपये गुजरात की बेटियों के नाम कर दिया, ताकि वह पढ़े और आगे बढ़े।
इस महीने की तनख्वाह चेन्नई में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए देंगे।
मई में अपने हिस्से की सैलरी नेपाल पीड़ितों के नाम की थी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टेक होम सैलरी भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी कम है। मनमोहन सिंह की टेक होम सैलरी करीब 48,000 रुपये होती थी।
अब निर्णय जनता करें...
कि बेशर्म और बदतमीज कौन है?
अरविंद केजरीवाल या नरेन्द्र मोदी?

Sunday, December 29, 2013

दिल्ली के रामलीला मैदान में राम हंस रहे थे........

याद करिये त्रेतायुग। इस त्रेतायुग में एक भारत का लाल जन्मा था। नाम था - राम। उसने ऐसी आदर्श व्यवस्था कायम की,  ऐसी मर्यादाएं उकेरी कि वो राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम हो गये। राम की एक छोटी कहानी सुनाता हूं, शायद आपको अच्छा लगे। राम की तीन माताएं थी। तीनों माताओं में से जन्म देनेवाली मां कौशल्या से भी अधिक स्नेह कैकेयी राम से किया करती थी, पर कैकेयी ने ही जब राम को राज्याभिषेक करने की तैयारी चल रही थी तो राम के लिए बाधाएं बन कर खड़ी हो गयी और महाराज दशरथ से राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। राम वनवास जाने को तैयार हो गये। यहीं नहीं उनके साथ उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी वन जाने को तैयार हो गये। पर अवध नरेश महाराज दशरथ इसके लिए तैयार नहीं थे, वे बार - बार राम को अपने पिता से द्रोह करने की विनती करते हैं, फिर भी देश काल और समाज के कल्याण के लिए राम वन गमन को तैयार हो गये। सारी अयोध्या राम के साथ वन जाने को तैयार हैं, पर राम अपने सत्य मार्ग से विचलित होने को तैयार नहीं, वे अयोध्या, अयोघ्या की राजगद्दी, अयोध्या की जनता को छोड़ने को तैयार हैं पर सत्य और धर्म को छोड़ने को तैयार नहीं। 
जिस कांग्रेस पार्टी को आम आदमी पार्टी और अन्य पार्टियां गाली दे रही हैं। उसमें भी एक महिला नेत्री हैं - सोनिया गांधी। विदेश में जन्मी, पर भारतीय संस्कृति के मूल भाव त्याग को इस प्रकार अपनायी कि वह दस वर्षों से सत्ता में हैं, पर प्रधानमंत्री पद का लालच उन्हें डिगा नहीं सका। याद करिये संसद के सेन्टर हाल में उनके दल के सारे नेता, दिल्ली की जनता उनके दरवाजे पर खड़ी थी, बार - बार अनुरोध कर रही थी, मैडम आप प्रधानमंत्री बन जाइये, पर वो प्रधानमंत्री नहीं बनी और न ही राहुल को सत्ता के केन्द्र बिन्दु में रहने के बावजूद कोई महत्वपूर्ण विभाग दिलवाया। 
हां एक और बात। देश में एक महात्मा हुए, जो मोहनदास से महात्मा गांधी बन गये, क्या वो चाहते तो भारत के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते थे, पर वो नहीं बने, जवाहर लाल को बनाया। शायद वो जानते थे कि जो सब कुछ बन जाता हैं, वो कुछ नहीं बनता और जो कुछ भी नहीं बनता वो बहुत कुछ बन जाता हैं, जैसे कि मोहनदास, महात्मा और राष्ट्रपिता बन गये। ऐसै भी जब देश की सेवा करनी हैं तो इसमें पद क्या हैं? आप कहीं भी रहकर वो काम कर सकते हैं, जिससे देश खिल उठे। उदाहरण  तो अन्ना हजारे भी हैं, जिन्होंने अपने अनशन से पूरे सदन का ध्यान अपने आंदोलन की ओर खींचा और आज उनके प्रयास से देश में जनलोकपाल विधेयक सामने हैं।
आप पूछेंगे कि ये सब लिखने की आवश्यकता क्यों पड़ गयी। कल सुबह सुबह उठा। चैनल खोला। तो पता चला कि देश की राजधानी दिल्ली में सरकार बनने- बनाने का बवडंर थमने जा रहा है। आम आदमी पार्टी जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ी हैं, कांग्रेस के खिलाफ लड़ी हैं, वो कांग्रेस के साथ ही सत्ता प्राप्त कर रही हैं। अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री बन रहे हैं, और देखते ही देखते अरविंद अपने छह साथियों के साथ दिल्ली की सत्ता संभाल ली। खूब भाषण दिये। गाना गाया। श्रीमद्भागवद्गीता के रहस्यों की विवेचना की। लगा कि बस अब राम राज्य आ ही गया।  पर क्या जो अनैतिक तरीके से सत्ता प्राप्त करता हैं, वो क्या सत्य मार्ग को प्रशस्त कर सकता है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा सकता हैं, उत्तर होगा- नहीं।
कुछ सवालों के जवाब क्या अरविंद दे सकते हैं...................
क. जिसके खिलाफ आप चुनाव लड़े और उसी के साथ मिलकर आप सरकार बनाये, क्या ये भ्रष्टाचार नहीं हैं?
ख. आप कहेंगे कि आपने जनता से राय मांगी और जनता ने राय दिया, तब सरकार आपने बनायी, तो फिर सवाल आप से ही कि उसी जनता ने आपको स्पष्ट जनादेश क्यों नहीं उस वक्त दे दिया, जब चुनाव हुए थे?
ग. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, जनता से यह कहना कि जब आप कोई सरकारी विभाग में काम कराने जाओ और कोई घूस मांगे तो घबराओं नहीं, इनसे कैसे सलटना हैं, हम सलट लेंगे,  क्या ये मुख्यमंत्री की भाषा हो सकती है?
घ. लोकतंत्र में एक बड़ी पार्टी को सत्ता से हटाकर, दूसरे नंबर और तीसरे नंबर की पार्टी मिलकर सरकार बनाये और कहे कि हमें जनादेश मिला हैं, इससे बड़ा भ्रष्टाचार और क्या हो सकता हैं?
ड. पिछले कई दिनों से अरविंद के भाषण सुन रहा हूं, जो आदमी अपने ही दिये गये भाषणों और वक्तव्यों पर कायम नहीं रहे, उस पर हम ये कैसे विश्वास करें कि वो अच्छा करेगा? जैसा कि अरविंद ने दिल्ली चुनाव परिणाम आने के पहले कहा था कि हम न भाजपा और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनायेंगे और न ही सरकार को सहयोग देंगे और अब कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता हथिया ली। ये तो भ्रष्टाचार का रिकार्ड तोड़ेनेवाला कीर्तिमान हैं। आप कहेंगे कि जनता से राय लिया तब सरकार बनायी। अरविंद जी, यहीं जनता राम को भी वनवास न जाने के लिए अनुरोध किया था पर राम ने जनता के उस अनुरोध को अस्वीकार करते हुए, अपने वचनों पर कायम रहे। अरे सोनिया को तो जनता ने जनादेश तक दे दिया पर सोनिया ने प्रधानमंत्री की पद ठुकरा दी। आप तो सोनिया की पार्टी कांग्रेस से भी गये गुजरे हो।
उपनिषद् कहता हैं ----------------
जो अच्छे लोग हैं वे मन, वचन ओर कर्म से एक होते हैं
जबकि दुर्जन, मन, वचन और कर्म इन तीनों से अलग होते हैं।
अब आप बताओ केजरीवाल कि आपने दिल्ली चुनाव परिणाम आने के पहले कहा कुछ और चुनाव परिणाम आने के बाद किया कुछ ये क्या बताता हैं, सज्जनता या दुर्जनता? चलो एक बात के लिए आपको बधाई तुम्हारा बेटा आज ये कहने के लायक हो गया कि मेरा पापा दिल्ली का मुख्यमंत्री हैं, पत्नी कहेगी कि मेरा पति दिल्ली का मुख्यमंत्री हैं। दिल्ली की जनता कहेंगी कि दिल्ली का मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं। पर जिन्हें राजनीति में आदर्श और शुचिता स्थापित करनी हैं या देश को एक बेहतर राजनीतिक स्थिति में ले जाना चाहते हैं, उन्हें तुम्हारी सत्ता स्थापित होने से कोई फर्क नहीं पड़ा हैं। 
हां एक बात हैं, आप कुछ ऐसा करों कि जिससे लगे कि आपने कुछ किया। अभी तक तो आप बोलते ही रहे हो। और वो बोले जो किये ही नहीं, अथवा वचन पर कायम नहीं रहे। ऐसे में आपसे आशा भी रखना, मूर्खता को सिद्ध करने के बराबर हैं। हां एक बात और, अभी सारे के सारे चैनल और दूसरे मीडिया हाउस आपकी चरणवंदना में लगे हैं, पर ये कब तक आपके साथ रहेंगे, वो आपको भी मालूम होना चाहिए, क्योंकि ये किसी के नहीं हैं, कब पलटी मारेंगे और फिर आप कहां दीखेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। शायद यहीं कारण था कि दिल्ली के रामलीला मैदान में जब अरविंद लीलाएं कर रहे थे, भगवान राम आकाश से उन लीलाओं को देख हंस रहे थे............