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Wednesday, April 26, 2017

देश के मूर्धन्य पत्रकारों और चैनलों का महापाप.............

देश के मूर्धन्य पत्रकारों और चैनलों का महापाप...
दिल्ली नगर निगम चुनाव को देश का चुनाव बना दिया...
ये आज के पत्रकार है, ये नगर निगम की चुनाव को देश का चुनाव बना देते है, लोगों की मजबूरियां है, उनके पास कोई विकल्प नहीं है, इसलिए मजबूरी में दिल्ली नगर निगम के चुनाव परिणाम को देखने के मजबूर है। दिल्ली नगर निगम के चुनाव परिणाम का कोई असर, देश के दूसरे इलाकों में नहीं पड़ने जा रहा, पर देश के मूर्धन्य पत्रकार विभिन्न चैनलों पर स्वयं और देश की जनता के दिमाग का दही बनाने में लगे हुए है, इसमें उन्हें बहुत आनन्द भी आ रहा है।
आज किसी भी चैनल ने अपने मर्यादा का ख्याल नहीं रखा, चाहे वह कोई चैनल हो, सभी पागलों की तरह एमसीडी-एमसीडी का रट लगा रहे है, ठीक उसी प्रकार जैसे देश में लोकसभा के चुनाव परिणाम आ रहे होते हैं। देश की जनता को भी देखिये, वे कर ही क्या सकते हैं? मजबूरी में देखने को मजबूर है, वे झेल रहे है, इन चैनलों के महापाप को।
आखिर दिल्ली नगर निगम को इतना माइलेज ये चैनलवाले क्यों दे रहे है? इसके लिए भी कोई सर्वाधिक दोषी है तो वह है यहां के राजनीतिबाज। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिल्ली नगर निगम के चुनाव में दिलचस्पी लेना, आप के अरविन्द केजरीवाल का तो जवाब ही नहीं, उन्हें लगता है कि भगवान ने फुर्सत में बनाया है, कांग्रेस तो एक तरह से खत्म ही हो गयी और भाजपा ने जिस प्रकार से कांग्रेसियों और अन्य दलों के घटियास्तर के नेताओं का आयात करना प्रारंभ किया है, यकीन मानिये कांग्रेस को तो यहां की जनता ने 60 साल झेला, इन्हें पांच साल भी झेल पायेगी, कहना मुश्किल है। कमाल की बात है कि भाजपा जिन पार्टियों अथवा नेताओं को गाली दे रही होती है, वहीं पार्टी अथवा उसके नेता के लोग जब भाजपा का दामन थाम लेते है, तो वह पवित्र हो जाता है, पता नहीं भाजपा के पास कौन से नदी का पवित्र जल है, जिससे सभी का पाप धूल जाता है। उदाहरण के लिए झारखण्ड के बाघमारा विधानसभा सीट से जीता ढुलू महतो और हाल ही में दिल्ली में लवली नामक नेता जो कल तक कांग्रेस का झंडा ढोता था और आज भाजपाई बन गया। ज्यादा दूर मत जाइये, दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी को देखिये जो कल तक अटल बिहारी वाजपेयी को गरियाता था, गोरखपुर लोकसभा सीट से योगी के खिलाफ समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और आज भाजपा में जाकर, हर प्रकार के आनन्द को प्राप्त कर रहा है यानी पग-पग पर अपना जमीर बेचनेवाला, ऐसे नेता देश के भाग्य विधाता बन रहे और पत्रकारों का समूह ऐसे नेताओं के आधार पर समाचार की प्राथमिकता तय कर रहे है।
देश के हालात ऐसे है, कि पूछिये मत...
• हमारा पड़ोसी पाकिस्तान हमेशा हमें गरिया रहा है।
• चीन अरुणाचल प्रदेश को लेकर आंखे तरेर रहा है।
• नक्सली गुंडों का समूह हमारी आंतरिक व्यवस्था को चोट पहुंचा कर पूरे देश की आंतरिक व्यवस्था को बर्बाद कर, विदेशी ताकतों के हाथों को मजबूत कर रहा है।
• पूंजीपतियों का समूह केवल अपना लाभ देख रहा है और देश के आर्थिक हालात पर चोट पहुंचा रहा है।
• देश के संतों को उद्योगपति बनने का सनक सवार हो रहा है, और पत्रकारों का समूह ऐसे संतों की आरती उतार रहा है, उन पर पुस्तक लिख रहा है।
जरा सोचिये, ऐसे हालात में इस देश की हालात क्या होगी?  गुंडे पत्रकार बनेंगे, गुंडे नेता बनेंगे तो यहीं होगा, हमें बेवजह के नगर – निगम चुनाव परिणाम जबर्दस्ती देखने होंगे। आज तो देश के सारे चैनल यहीं कर रहे, कोई इससे अलग नहीं दीख रहा। हम ऐसी व्यवस्था और ऐसे चैनलों और ऐसे पत्रकारों की कड़ी भर्त्सना करते है।

Sunday, April 9, 2017

भाजपाइयों, पहले रघुवर को हटाओ.............

भाजपाइयों, पहले रघुवर को हटाओ फिर केजरीवाल से इस्तीफा मांगों...
सीएम रघुवर दास ने भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना की...
इस साल 30 मार्च को दिल्ली के सभी अखबारों ने उस समाचार को प्रथम पृष्ठ पर प्रमुखता से छापा हैं, जिसमें दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल द्वारा बुधवार को आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ रुपये की वसूली करने के आदेश दिये है, यह धनराशि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर प्रचार पर खर्च की गयी थी। जांच समिति की रिपोर्ट के बाद यह आदेश जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन विज्ञापनों में आम आदमी पार्टी को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गयी थी। उप राज्यपाल अनिल बैजल ने मुख्य सचिव एम. एम. कुट्टी को आदेश दिया है कि वे इस मामले में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करें और 30 दिनों के अंदर यह वसूली कर लें।
अखबार ने लिखा है कि दिल्ली सरकार विज्ञापन एजेंसियों को करीब 42 करोड़ रुपये की धनराशि जारी भी कर चुकी है। आदेशों के मुताबिक ये विज्ञापन तय मानकों के मुताबिक जारी नहीं किये गये थे। उप राज्यपाल अनिल बैजल ने सचिव सूचना प्रचार निदेशालय को तत्काल नोटिस जारी करने के भी आदेश दिये है। ज्ञातव्य है कि विज्ञापनों के माध्यम से सीएम अरविन्द केजरीवाल के चेहरे का धड़ल्ले से प्रयोग किया गया था। जिसके खिलाफ दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन ने शिकायत दर्ज करायी थी, जिनमें अरविन्द केजरीवाल सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने का आरोप था। इन शिकायतों में स्वयं के प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का भी आरोप शामिल था, साथ ही इन्हें सुप्रीम कोर्ट के 13 मई 2015 के आदेशों का उल्लंघन भी बताया गया था।
ज्ञातव्य है कि इस प्रकरण पर दिल्ली के महालेखाकार ने भी सवाल खड़े किये थे। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली सरकार ने करीब 24 करोड़ रुपये के ऐसे विज्ञापन जारी किये जो नियमानुसार जारी नहीं किये जाने चाहिए थे।
जरा ध्यान दें, क्या कहता है, सुप्रीम कोर्ट...
• नेताओं की तस्वीरें विज्ञापनों में किसी भी स्थिति में प्रयोग नहीं होंगी।
• सिर्फ प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और सीजेआई के ही फोटो लगाये जा सकते हैं।
• मृत नेताओं की याद में उनकी तस्वीरों को इस्तेमाल किया जा सकता है।
इधर उप-राज्यपाल अनिल बैजल द्वारा आम आदमी पार्टी से 97 करोड़ रुपये वसूलने के आदेश पर दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह खेद का विषय है कि जो व्यक्ति शुचिता की राजनीति का वादा करने सत्ता में आया था। वह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है। अरविन्द केजरीवाल की जगह कोई और होता, तो इस पद से अब तक इस्तीफा दे देता।
अब यहीं सवाल मनोज तिवारी और भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं से जो रांची से लेकर दिल्ली तक फैले है, ठीक इसी प्रकार की हरकत झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने की है, आप इन्हें कब हटा रहे हो, हटाने की बात इसलिए हमने की है, चूंकि इनसे इस्तीफा तो विपक्षी मांगेंगे, हटाने का काम तो आप ही का है, क्योंकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जैसा ही अपराध झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी की है।
क्या किया है झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने...
• अपना चेहरा चमकाने के लिए जमकर अब तक करोड़ों खर्च किये, अकेले 100 करोड़ से भी ज्यादा तो केवल मोमेंटम झारखण्ड में सिर्फ दो दिन के कार्यक्रम में फूंक दिये, जबकि सर्वोच्च न्यायालय का सख्त आदेश है कि नेताओं की तस्वीरें विज्ञापनों में किसी भी स्थिति में प्रयोग नहीं होंगी। सिर्फ प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और सीजेआई के ही फोटो लगाये जा सकते हैं। मृत नेताओं की याद में उनकी तस्वीरों को इस्तेमाल किया जा सकता है, पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जमकर अपना चेहरा चमकाया। मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा बेहिसाब किये गये इस खर्चें को सीएम रघुवर दास से कैसे वसूला जायेगा?
• ब्रांडिंग करनेवाली कंपनियों को रांची बुलाया और उन पर जमकर करोड़ों खर्च किये, इनमें कई तो पूर्व में ब्लैक लिस्टेड कंपनियां भी है, जो आज नाम बदलकर यहां काम कर रही है, इन ब्रांडिंग कंपनियों ने जितने भी विज्ञापन निकाले, वो ज्यादातर गड़बड़ थे, ये आज भी गड़बड़ ही कर रहे है, अशुद्धियां इतनी है, कि पूछिये मत, फिर भी रघुवर सरकार, इन पर क्यों प्यार लूटा रही है, आप समझ सकते है, जबकि सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, मुख्यमंत्री रघुवर दास के पास ही है।
• यहीं नहीं ऐसे विज्ञापन भी प्रचारित और प्रसारित किये गये, जिनका आज की तिथि में कोई उपयोग नहीं है, पर अपना चेहरा चमकाने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ऐसा किया। विज्ञापनों को भी मानक के अनुरुप नहीं रखा गया है।
लेकिन सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि जिन मुद्दों को लेकर अरविन्द केजरीवाल की आज किरकिरी हुई, उसमें मुख्य भूमिका कांग्रेस पार्टी की रही, उसके अजय माकन ने इसकी लड़ाई लड़ी और उनकी जीत हुई पर झारखण्ड की प्रमुख विपक्षी पार्टियां सरकार के इस गलत निर्णयों के विरोध की जगह, उनके आगे ठुमरी गा रही है।
जो दिल्ली के भाजपा नेता अरविन्द केजरीवाल से इसी मुद्दे पर इस्तीफा मांग रहे है, आज यहीं के भाजपा नेता बगले झांक रहे हैं... इस पर किसी को जवाब भी नहीं सूझ रहा...
रही बात, यहां के महालेखाकार की, देखते है कि वे इस प्रकरण पर क्या रोल अदा करते है? पर इतना तय है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने में और अपना चेहरा चमकाने में झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास किसी भी प्रकार से अरविन्द केजरीवाल से उन्नीस नहीं, बल्कि बीस है...
#Narendramodi #Amitshah #RSS

Friday, December 11, 2015

अरविंद और नरेन्द्र मोदी में बेशर्म कौन............

अरविंद और नरेन्द्र मोदी में बेशर्म कौन ?
हमारे देश में बेशर्मों की कमी नहीं, उन्हीं बेशर्मों में से एक है –अरविंद केजरीवाल। ईमानदारी का ढोल पीटकर, दिल्ली की 70 सीटों में से 67 सीटों पर कब्जा कर लिया और अपने 67 विधायकों का वेतन 400 फीसदी बढ़ा लिया। क्या अरविंद केजरीवाल बता सकता है? कि उसने अपने राज्य के कर्मचारियों और कामगारों को 400 फीसदी वेतन बढ़ायी, जैसा कि खुद के लिए कर लिया...उत्तर होगा नहीं। क्या दिल्ली में आम आदमी की हैसियत बढ़ी? अगर नहीं बढ़ी तो फिर अरविंद केजरीवाल किस हैसियत से अपना और अपने मातहतों विधायकों का जीवन स्तर सुधारने के लिए स्वयं के वेतन में अप्रत्याशित वृद्धि कर ली।
यह है 100 प्रतिशत सत्ता का चरित्र...सत्ता खुद को ईमानदार घोषित करने से मिलती है और जब सत्ता मिल जाये तो अपने परिवारों और अपने शुभचिंतकों का ख्याल रखों, जनता जाये भाड़ में....और मजाक उड़ाओ, उनका जो कभी तुम्हारा मजाक उड़ाया करते थे, ये कहकर कि रह गये न...
ये है हमारे देश के नये – नये नेता अरविंद केजरीवाल, कभी बोलता था कि उसकी पार्टी आम आदमी की पार्टी है, इसलिए पार्टी का नाम रखा – आम आदमी पार्टी। जरा पूछो अरविंद केजरीवाल से कि क्या आम आदमी की सैलरी उतनी है?, जितनी उसकी है...क्योंकि वो तो आम आदमी का नेता है...
जब कथनी और करनी में अंतर होता है, तभी भ्रष्टाचार का जन्म होता है। भ्रष्टाचार केवल धन लोलुपता ही नहीं, भ्रष्टाचार आचरण की मर्यादा को तोड़ना भी है, पर हम ऐसे घटियास्तर के नेताओं से उसकी आचरण की मर्यादा के बारे में भी बात नहीं कर सकते, क्योंकि ज्यादा दिनों की बात नहीं है, वो हाल ही में भ्रष्टाचार शिरोमणि सजायाफ्ता लालू प्रसाद के भी गले मिल चुका है, शायद वो दिखलाना चाहता हो कि लालू तुम क्या जानते हो? भ्रष्टाचार में हम तुम्हारे भी बाप सिद्ध होंगे। सत्ता का स्वाद भी चखेंगे, खूब पैसे भी कमायेंगे, जनता को लूटेंगे भी, फिर आनन्द से उपर भी जायेंगे और बाद में दिल्ली या देश की सड़कों पर अपनी मूर्ति बनवाकर सदा के लिए खुद को पूजवायेंगे भी...
लेकिन इस के विपरीत सत्ता में ही रहकर सत्ता का सुख लेने से वंचित त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार को देखिये, इन सबसे अलग उन्हें क्या करना है?, वे करते जा रहे है?
ठीक उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देखिये, उनके उपर लगातार छीटाकशीं व हमले जारी हैं, पर इनसे बेफिक्र, वे देश सेवा में लगे है, हालांकि नरेन्द्र मोदी की सत्ता जल्द समाप्त हो, इसके लिए तो कांग्रेस के कई नेता पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ के तलवे तक चाट चूके है, ऐसे –ऐसे बयान दिये है, जिसे पढ़ व सुनकर शर्म महसूस होती है कि ऐसे नेता इस भारत में ही क्यों पैदा होते है?, अन्य जगहों पर क्यों नहीं? कुछ दिनों पूर्व, एक कांग्रेसी ने नेपाल संकट पर जो बयान दिया, उस बयान से एक बात फिर पुष्ट हो गयी कि कांग्रेस सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है, पर फिलहाल उसका वश नहीं चल रहा...
दूसरी ओर जरा अरविंद केजरीवाल का बड़बोलापन देखिये, अपने प्रधानमंत्री का किस प्रकार मजाक उड़ाते है...विधानसभा में अपने मंत्रियों और विधायकों की सैलरी में 400 फीसदी का इजाफा करनेवाले अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर उनकी सैलरी को लेकर उनका मजाक उड़ाया था। कहा था कि ओबामा यदि मोदी से उनकी सैलरी पूछेंगे, तो क्या बतायेंगे कि उन्हें 1.60 लाख रुपये मिलते है। मोदी जी को अपनी सैलरी बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक कर लेनी चाहिए...पर शायद अरविंद केजरीवाल और उनके पिछलग्गूओं को पता नहीं कि...
देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसा व्यक्तित्व कहीं नहीं...
अरविंद जान लो, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में और उनके वेतन के बारे में...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ज्यादातर सैलरी दान कर देते है।
गुजरात के सीएम थे, तब भी ऐसा ही करते थे।
गुजरात से दिल्ली चले, तो 21 लाख रुपये गुजरात की बेटियों के नाम कर दिया, ताकि वह पढ़े और आगे बढ़े।
इस महीने की तनख्वाह चेन्नई में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए देंगे।
मई में अपने हिस्से की सैलरी नेपाल पीड़ितों के नाम की थी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टेक होम सैलरी भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी कम है। मनमोहन सिंह की टेक होम सैलरी करीब 48,000 रुपये होती थी।
अब निर्णय जनता करें...
कि बेशर्म और बदतमीज कौन है?
अरविंद केजरीवाल या नरेन्द्र मोदी?

Saturday, January 11, 2014

मैं हूं आम आदमी पार्टी..........

मैं हूं आम आदमी पार्टी..........
मैं एक छोटे बच्चे के गेंद से टूटी कार के शीशे की तुलना बड़े पत्थर से कर देती हूं, बच्चा माफी भी मांगता हैं तो माफ नहीं करती, उलटे प्राथमिकी करवा देती हूं, यानी बात का बतंगड़ बनाने में विश्वास रखती हूं।
मैं कश्मीर को भारत से अलग करने का मन में सुंदर भाव रखता हूं।
मैं भ्रष्टाचार हटाने के लिए चिरकूट टाइप के लोगों पर कार्रवाई करता हूं पर भ्रष्टाचार का रिकार्ड बनाने वाले के साथ मिलकर सरकार चलाता हूं।
मैं पीत पत्रकारिता करनेवाले लोगों जैसे आजतक, एबीपी, आईबीएन 7 आदि चैनलों के साथ मिलकर देश का निर्माण करने का ठेका ले रखा हूं।
मैं बिजली का बिल आधा करने के लिए, अपने सरकार का खजाना खाली कर देता हूं और सब्सिडी का सहारा लेता/देता हूं।
मैं मुफ्त में 700 लीटर पानी देता हूं पर हमारे यहां ऐसा मीटर हैं, जहां 700 के बाद मीटर आगे बढ़ ही नहीं पाता, चाहे आप कितना भी पानी क्यों न निकाल लें।
मैं आते के साथ ही 9 अधिकारियों का तबादला कर देता हूं, क्योंकि तबादला हमारा विशेष अधिकार हैं।
मैं विकास की बात नहीं करता, मैं तो सिर्फ स्टिंग की बात करता हूं क्योंकि देश विकास से नहीं स्टिंग से चलती हैं, इसलिए मैं दिल्ली की सारी जनता से कह दिया हूं कि वो सारा काम छोड़कर केवल स्टिंग करें, इससे उनका काम बहुत जल्दी हो जायेगा............
मैं झूठ बोलने का रिकार्ड बनाने की ओर अग्रसर हूं, जैसे मात्र दो दिनों में 23 हजार लोगों की शिकायत सुन ली, कमाल हैं, एडवाइज देनेवाले लोग 23 हजार शिकायतें कैसे सुन ली, वो भी दो दिनों के अँदर,हैं न आश्चर्य.......

मैं जब शपथ लेने जाता हूं तो मेट्रो का इस्तेमाल करता हूं पर विधानसभा जाता हूं तो अपने औकात दिखा देता हूं, बड़ी- बड़ी गाडि़यों का इस्तेमाल करता हूं, जब कोई टोकता हैं तो बड़ी ही बेशर्मी से ये कह देता हूं कि मैंने तो लाल बत्ती इस्तेमाल नहीं करने को कहा था, न कि बड़ी गाड़ियों के इस्तेमाल करने से स्वयं को रोकने को कहा था।
मैं चुनाव के पहले चीख-चीखकर चिल्लाता हूं, कहता हूं कि कांग्रेस और भाजपा के लोगों को जेल के अंदर कर दूंगा पर सत्ता में आते ही ये सब भूल जाता हूं।
मैं जब सत्ता से बाहर रहता हूं तो दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाता हूं और जैसे ही सत्ता प्राप्त हो जाती हैं तो उसे भूल जाता हूं।
जब विपक्ष हमसे सदन में कुछ सवाल पूछता हैं तो उसका जवाब देने में मैं खुद को असमर्थ पाता हूं और 18 सूत्री कार्यक्रम का प्लान विपक्ष को समझाता हूं, इंदिरा गांधी की 20सूत्री कार्यक्रम के अंदाज में.........
मैं हूं आम आदमी पार्टी जो सभी राजनीतिक पार्टियों को गाली देता हूं पर जब सत्ता पाने की लालच हममें जगती हैं तो बड़ी ही बेशर्मी से कांग्रेस के साथ बैठ जाता हूं, यहीं नहीं सदन में कोर्ट उतारनेवाले जदयू के एक मात्र विधायक को भी अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए ललक पड़ता हूं।
आइये मिलकर आम आदमी पार्टी के हाथों को मजबूत करें, ताकि ये फिर कांग्रेस के साथ मिलकर देश में मनमोहन सिंह की तरह राज करें। ताकि चीन और अमेरिका के सपने जल्द पूरे हो जाये, देश में एक कमजोर पार्टी का शासन हो जाये, देश में एक कमजोर प्रधानमंत्री दीखे, जो अमेरिका और चीन के इशारे पर ताता थैया करें, 

कैसी रही..................

Wednesday, January 8, 2014

स्टिंग के बहाने अरविंद की स्तुति............

एक कहानी सुनाता हूं। चंपकपुर प्रदेश में एक चुल्लू पाल नामक राजा था। एक दिन वह अपने मंत्रियों और सहकर्मियों के साथ नाटक देख रहा था। नाटक जब चल ही रहा था कि नाटक के एक परिदृश्य में किन्नरों का आगमन हुआ। किन्नर सैनिकों की भूमिका में थे। साथ ही ये सैनिक बने किन्नर इस प्रकार की तलवारबाजी कर रहे थे कि चुल्लू पाल राजा को लगा कि उसके प्रदेश में सैनिकों की जगह इन किन्नरों की बहाली कर ली जाये तो उसका प्रदेश शत्रु के भय से मुक्त हो जायेगा। उसने तुरंत आदेश जारी किया कि चंपकपुर प्रदेश से सारे सैनिकों को हटाया जाये और उसके जगह पर इन किन्नरों की बहाली की जाय। फिर क्या था राजा का आदेश का पालन हुआ। वर्तमान सैनिकों की जगह किन्नरों ने ले ली। इधर चंपकपुर का शत्रु राजा वनपुर नरेश धूमल को इस बात की जानकारी मिली तो वह तुरंत चंपकपुर पर आक्रमण करने का आदेश दिया था। इधर चुल्लू पाल ने सैनिक बने किन्नरों को बुलाया और तुरंत आक्रमण का जवाब देने को कहा। चुल्लु पाल के इस बात को सुनते ही, सैनिक बने किन्नर ये कहकर भाग खड़े हुए कि भला हम क्या लडेंगे, भगवान ने तो उन्हें सिर्फ हाथ से ताली बजाकर छक्के लगाने को पैदा किया और इस प्रकार वनपुर नरेश धूमल का चंपकपुर प्रदेश पर कब्जा हो गया.............।
ठीक इसी प्रकार की कहानी हमारे देश के दिल्ली प्रदेश में दिखाई पड़ रही हैं। जिसे करना चाहिए, वो कर नहीं रहा और जिसे नहीं करना चाहिए, वो करने का साहस नहीं बल्कि ढीठई दिखा रहा हैं, जैसे लगता हैं कि दूनिया का सारा सदाचार उसके अंदर समा गया हैं और वो दिल्ली को बेहतर करके रहेगा। इसी चक्कर में दिल्ली की भद्द पीट रही है, जिसकी चिंता किसी को नहीं हैं। अभी हाल ही में दिल्ली में कल तक कांग्रेस को गाली देनेवाली आम आदमी पार्टी, कांग्रेस के सहयोग से ही सरकार बनायी हैं। एक राष्ट्रीय चैनल हैं, आजतक - आम आदमी पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की बिरदावली गा रहा हैं। आपायण गा रहा हैं। इधर कुछ स्टिंग भी दिखाई जा रही हैं, इस चैनल पर। स्टिंग में कुछ चिरकुट टाइप के कर्मचारी, अधिकारी घूस लेते पकड़े गये, दिखाये गये हैं। जैसा कि सर्वविदित हैं इस प्रकार कि हरकत दिखाये जाने पर, कोई भी सरकार संबंधित लोगों पर कार्रवाई करती हैं, निलंबित करती हैं, दिल्ली की सरकार ने भी किया हैं। इसी दौरान इस प्रकार की हरकतों के बीच आम आदमी पार्टी, आज तक चैनल की भूरि- भूरि प्रशंसा करने में लग गयी हैं, और आज तक वाले आम आदमी पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं की प्रशंसा करने में लग  गये हैं। जैसे लगता हैं कि दिल्ली में राम राज्य आ गया। पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं। जबकि सच्चाई ये हैं कि सिर्फ चिरकुट जैसे लोगों पर ही कार्रवाई हुई हैं, घाघ लोगों पर नहीं और न ही इन चैनल के स्टिंग करनेवाले पत्रकार बने कलाकारों की हिम्मत हैं कि घाघ लोगों को पकड़ सकें।
एक बात और, जो स्टिंग कर रहे हैं, मैं तो कहूंगा कि थोड़ा अपने संस्थान में काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों तथा दूर दराज के इलाकों में काम कर रहे अपने संवाददाताओं की भी स्टिंग करा लेते तो पता चलता कि उनके यहां कितना सदाचार हैं। अरे भाई तो स्टिंग का कैमरा का मुंह जिधर रहेगा, वहीं फंसेगा न, गर कैमरा का मुंह संवाददाताओं और चैनल के प्रंबंधनकर्ताओं पर रहेगा तो क्या होगा, सभी जानते हैं। यानी ये कितने देशभक्त और समाजभक्त हैं, उसका चरित्र उजागर हो जायेगा। इधर आजतक वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम की जय जयकार करने में लगे हैं। जय - जयकार ऐसी, जैसा लगता हैं कि दोनों एक दूसरे के लिए बने हैं। इनकी दोस्ती और भाईचारे पर तो श्रीरामचरितमानस की पंक्तियां भी फेल हो जायेगी। जब दोस्ती और भाईचारे की ऐसी दास्तां टीवी पर शो के दौरान दिखाई जा रही हैं तो हमारा विचार हैं कि आजतक को आप में विलय कर देना चाहिए। पुण्य प्रसुन वाजपेयी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बना देना चाहिए, क्योंकि अब अरविंद केजरीवाल तो देश के प्रधानमंत्री की कैंडिडेट हो गये हैं। ऐसे में दिल्ली की जिम्मेदारी पुण्य प्रसुन जी संभाल लें तो कितना सुंदर होगा। आजतक और आप दोनों का बेड़ा पार। हम भी कह सकेंगे कि देखों फिल्म नायक का ये रियल हीरो। और इसी खुशी में पूरे दिल्ली प्रदेश में नायक फिल्म को कर मुक्त कर फिर से हर सिनेमा हाल में दिखाया जायेगा। लोगों को मुफ्त में पानी, मुफ्त में बिजली और अब मुफ्त में फिल्म भी, क्या बात हैं। 
कहने का तात्पर्य हैं कि आज के पत्रकारों को क्या हो गया है। पत्रकार किसी की चाटुकारिता करता हैं क्या। पत्रकार संदर्भ रखता हैं। निर्णय जनता को करना हैं, पर यहां तो समाचार दिखाने के क्रम में चाटुकारिता हो रही हैं। इस प्रकार आप पार्टी का गुणगाण हो रहा हैं, जैसे लगता हो कि ये आप के राष्ट्रीय सलाहकार की तर्ज पर काम कर रहे हो। और इसी क्रम में पूरे देश की जनता गुमराह हो रही हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे कभी आसाराम, तो कभी तरुण तेजपाल की चक्कर में यहां की जनता स्वयं को लूटा बैठी हैं। मेरा मानना हैं कि किसी को भी देश की जनता ने ये अधिकार नहीं दिया कि वो चैनल पर बैठकर अनाप शनाप बोले, प्रवचन करें। सरकार को चाहिए कि इस प्रकार की हरकतों को देखते हुए, राष्ट्रीय चैनलों के लिए भी कुछ मानक तय करें, नहीं तो देश और समाज हाथ से निकल जायेगा और ये लोग बैठकर जनता को मूरख बना, देश पर राज करते रहेंगे, देश गुलाम बनता रहेगा। जैसा कि शुरुआत में हमनें कहानी से अपनी बात कह दी...........

Monday, January 6, 2014

जब पत्रकार कलाकार हो जाये तो क्या होगा..........

जब पत्रकार कलाकार हो जाये तो क्या होगा....................
वहीं होगा जो आप देख रहे हैं
1. दिल्ली में बैठा राष्ट्रीय चैनलों का एंकर आपायण गायेगा।
2. अरविंद केजरीवाल की स्तुति गायेगा।
3. अरविंद की हर गलतियों पर पर्दा डालेगा।
4. अरविंद को जो पसंद आयेगा, वहीं बात करेगा।
5. पाकिस्तान का प्रधानमंत्री, विदेशों में भारत के प्रधानमंत्री की जब इज्जत उतारेगा तो उस समय उसके साथ बैठकर नाश्ता करेगा।
6. अपनी पत्रकारिता की जमीर बेचेगा।
7. जब संसद में बैठे सांसदों को पैसे से खरीदा जायेगा, तो उस वक्त की विजूयल उसके पास रहने के बावजूद उस विजूयल को नहीं दिखायेगा, जब देश और विदेश में उस पर थू थू होगी तब जाकर, बहुत अर्से बीत जाने के बाद कांट छांट कर समाचार दिखायेगा, तब तक उक्त समाचार की अहमियत भी नहीं रह जायेगी।
8. देश का सबसे बड़ा उद्योगपति या उसका परिवार कुछ भी अतःतः करेगा, तो उसके खिलाफ वह आवाज नहीं उठायेगा।
9. एक नहीं कई तरीकों से पैसे कमायेगा।
10. अपनी अंतरात्मा को बार-बार बेचेगा और ढिंढोरा पीटेगा कि दुनिया का सबसे बडा़ और नेक पत्रकार वहीं हैं, वहीं हैं, वहीं हैं............
11. एक ही पत्रिका में खुद भी लिखेगा और अपनी पत्नी से भी लिखवायेगा।
12. राज्य सरकार से मिलनेवाली किसी भी मीडिया फैलोशिप को गलत तरीके से पाने की कोशिश करेगा, और दूसरो को भी दिलवायेगा, एक कोशिश और करेगा कि वह अपनी पत्नी को जरुर उपकृत करवाये।
13. पत्रकारिता की आड़ में कई संस्थानों में अपनी गाड़ी भी चलवायेगा, कई कंपनियों का काम भी करवायेगा और अपनी पत्नी अथना प्रेमिका को स्विटजरलैंड की सैर करवायेगा।
पत्रकारिता में फैले इन दुराचारियों से पत्रकारिता को मुक्त कराइये,
देश को आगे बढ़ाईये............ 

Sunday, December 29, 2013

दिल्ली के रामलीला मैदान में राम हंस रहे थे........

याद करिये त्रेतायुग। इस त्रेतायुग में एक भारत का लाल जन्मा था। नाम था - राम। उसने ऐसी आदर्श व्यवस्था कायम की,  ऐसी मर्यादाएं उकेरी कि वो राम से मर्यादा पुरुषोत्तम राम हो गये। राम की एक छोटी कहानी सुनाता हूं, शायद आपको अच्छा लगे। राम की तीन माताएं थी। तीनों माताओं में से जन्म देनेवाली मां कौशल्या से भी अधिक स्नेह कैकेयी राम से किया करती थी, पर कैकेयी ने ही जब राम को राज्याभिषेक करने की तैयारी चल रही थी तो राम के लिए बाधाएं बन कर खड़ी हो गयी और महाराज दशरथ से राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। राम वनवास जाने को तैयार हो गये। यहीं नहीं उनके साथ उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी वन जाने को तैयार हो गये। पर अवध नरेश महाराज दशरथ इसके लिए तैयार नहीं थे, वे बार - बार राम को अपने पिता से द्रोह करने की विनती करते हैं, फिर भी देश काल और समाज के कल्याण के लिए राम वन गमन को तैयार हो गये। सारी अयोध्या राम के साथ वन जाने को तैयार हैं, पर राम अपने सत्य मार्ग से विचलित होने को तैयार नहीं, वे अयोध्या, अयोघ्या की राजगद्दी, अयोध्या की जनता को छोड़ने को तैयार हैं पर सत्य और धर्म को छोड़ने को तैयार नहीं। 
जिस कांग्रेस पार्टी को आम आदमी पार्टी और अन्य पार्टियां गाली दे रही हैं। उसमें भी एक महिला नेत्री हैं - सोनिया गांधी। विदेश में जन्मी, पर भारतीय संस्कृति के मूल भाव त्याग को इस प्रकार अपनायी कि वह दस वर्षों से सत्ता में हैं, पर प्रधानमंत्री पद का लालच उन्हें डिगा नहीं सका। याद करिये संसद के सेन्टर हाल में उनके दल के सारे नेता, दिल्ली की जनता उनके दरवाजे पर खड़ी थी, बार - बार अनुरोध कर रही थी, मैडम आप प्रधानमंत्री बन जाइये, पर वो प्रधानमंत्री नहीं बनी और न ही राहुल को सत्ता के केन्द्र बिन्दु में रहने के बावजूद कोई महत्वपूर्ण विभाग दिलवाया। 
हां एक और बात। देश में एक महात्मा हुए, जो मोहनदास से महात्मा गांधी बन गये, क्या वो चाहते तो भारत के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते थे, पर वो नहीं बने, जवाहर लाल को बनाया। शायद वो जानते थे कि जो सब कुछ बन जाता हैं, वो कुछ नहीं बनता और जो कुछ भी नहीं बनता वो बहुत कुछ बन जाता हैं, जैसे कि मोहनदास, महात्मा और राष्ट्रपिता बन गये। ऐसै भी जब देश की सेवा करनी हैं तो इसमें पद क्या हैं? आप कहीं भी रहकर वो काम कर सकते हैं, जिससे देश खिल उठे। उदाहरण  तो अन्ना हजारे भी हैं, जिन्होंने अपने अनशन से पूरे सदन का ध्यान अपने आंदोलन की ओर खींचा और आज उनके प्रयास से देश में जनलोकपाल विधेयक सामने हैं।
आप पूछेंगे कि ये सब लिखने की आवश्यकता क्यों पड़ गयी। कल सुबह सुबह उठा। चैनल खोला। तो पता चला कि देश की राजधानी दिल्ली में सरकार बनने- बनाने का बवडंर थमने जा रहा है। आम आदमी पार्टी जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ी हैं, कांग्रेस के खिलाफ लड़ी हैं, वो कांग्रेस के साथ ही सत्ता प्राप्त कर रही हैं। अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री बन रहे हैं, और देखते ही देखते अरविंद अपने छह साथियों के साथ दिल्ली की सत्ता संभाल ली। खूब भाषण दिये। गाना गाया। श्रीमद्भागवद्गीता के रहस्यों की विवेचना की। लगा कि बस अब राम राज्य आ ही गया।  पर क्या जो अनैतिक तरीके से सत्ता प्राप्त करता हैं, वो क्या सत्य मार्ग को प्रशस्त कर सकता है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा सकता हैं, उत्तर होगा- नहीं।
कुछ सवालों के जवाब क्या अरविंद दे सकते हैं...................
क. जिसके खिलाफ आप चुनाव लड़े और उसी के साथ मिलकर आप सरकार बनाये, क्या ये भ्रष्टाचार नहीं हैं?
ख. आप कहेंगे कि आपने जनता से राय मांगी और जनता ने राय दिया, तब सरकार आपने बनायी, तो फिर सवाल आप से ही कि उसी जनता ने आपको स्पष्ट जनादेश क्यों नहीं उस वक्त दे दिया, जब चुनाव हुए थे?
ग. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, जनता से यह कहना कि जब आप कोई सरकारी विभाग में काम कराने जाओ और कोई घूस मांगे तो घबराओं नहीं, इनसे कैसे सलटना हैं, हम सलट लेंगे,  क्या ये मुख्यमंत्री की भाषा हो सकती है?
घ. लोकतंत्र में एक बड़ी पार्टी को सत्ता से हटाकर, दूसरे नंबर और तीसरे नंबर की पार्टी मिलकर सरकार बनाये और कहे कि हमें जनादेश मिला हैं, इससे बड़ा भ्रष्टाचार और क्या हो सकता हैं?
ड. पिछले कई दिनों से अरविंद के भाषण सुन रहा हूं, जो आदमी अपने ही दिये गये भाषणों और वक्तव्यों पर कायम नहीं रहे, उस पर हम ये कैसे विश्वास करें कि वो अच्छा करेगा? जैसा कि अरविंद ने दिल्ली चुनाव परिणाम आने के पहले कहा था कि हम न भाजपा और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनायेंगे और न ही सरकार को सहयोग देंगे और अब कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता हथिया ली। ये तो भ्रष्टाचार का रिकार्ड तोड़ेनेवाला कीर्तिमान हैं। आप कहेंगे कि जनता से राय लिया तब सरकार बनायी। अरविंद जी, यहीं जनता राम को भी वनवास न जाने के लिए अनुरोध किया था पर राम ने जनता के उस अनुरोध को अस्वीकार करते हुए, अपने वचनों पर कायम रहे। अरे सोनिया को तो जनता ने जनादेश तक दे दिया पर सोनिया ने प्रधानमंत्री की पद ठुकरा दी। आप तो सोनिया की पार्टी कांग्रेस से भी गये गुजरे हो।
उपनिषद् कहता हैं ----------------
जो अच्छे लोग हैं वे मन, वचन ओर कर्म से एक होते हैं
जबकि दुर्जन, मन, वचन और कर्म इन तीनों से अलग होते हैं।
अब आप बताओ केजरीवाल कि आपने दिल्ली चुनाव परिणाम आने के पहले कहा कुछ और चुनाव परिणाम आने के बाद किया कुछ ये क्या बताता हैं, सज्जनता या दुर्जनता? चलो एक बात के लिए आपको बधाई तुम्हारा बेटा आज ये कहने के लायक हो गया कि मेरा पापा दिल्ली का मुख्यमंत्री हैं, पत्नी कहेगी कि मेरा पति दिल्ली का मुख्यमंत्री हैं। दिल्ली की जनता कहेंगी कि दिल्ली का मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हैं। पर जिन्हें राजनीति में आदर्श और शुचिता स्थापित करनी हैं या देश को एक बेहतर राजनीतिक स्थिति में ले जाना चाहते हैं, उन्हें तुम्हारी सत्ता स्थापित होने से कोई फर्क नहीं पड़ा हैं। 
हां एक बात हैं, आप कुछ ऐसा करों कि जिससे लगे कि आपने कुछ किया। अभी तक तो आप बोलते ही रहे हो। और वो बोले जो किये ही नहीं, अथवा वचन पर कायम नहीं रहे। ऐसे में आपसे आशा भी रखना, मूर्खता को सिद्ध करने के बराबर हैं। हां एक बात और, अभी सारे के सारे चैनल और दूसरे मीडिया हाउस आपकी चरणवंदना में लगे हैं, पर ये कब तक आपके साथ रहेंगे, वो आपको भी मालूम होना चाहिए, क्योंकि ये किसी के नहीं हैं, कब पलटी मारेंगे और फिर आप कहां दीखेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। शायद यहीं कारण था कि दिल्ली के रामलीला मैदान में जब अरविंद लीलाएं कर रहे थे, भगवान राम आकाश से उन लीलाओं को देख हंस रहे थे............

Sunday, March 17, 2013

ये भीख मांगने का नया तरीका हैं, बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश का..................................

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने, देश के अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भीख मांगने की नयी तरकीब दिखायी हैं, पर देश के अन्य अविकसित राज्यों के मुख्यमंत्री दिल्ली में इस प्रकार की अधिकार रैली कर, भीख मांगना शुरु करेंगे, ऐसा हमें संदेह हैं। भाजपा की वैशाखी पर बिहार का सत्तासुख भोग रहे नीतीश को, भाजपा के ही कई नेता अच्छे नहीं लगते हैं। वे समय - समय पर अपनी गीदड़-भभकी से भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं को उनकी औकात बताते रहते हैं, पर वे जानते हैं कि बिना भाजपा की वैशाखी पर टिके वे बिहार में एक दिन भी सत्ता में नहीं रह सकते, इसलिए समय - समय पर भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं के आगे झूकने का नौटंकी खूब किया करते हैं। 
हम आपको बता दें कि किसी भी रैली में भीड़ कैसे जुटती हैं या जुटायी जाती हैं, सब को पता हैं। कोई भी काम करनेवाला व्यक्ति जो काम करता हैं, वो अपने काम को नष्ट कर, किसी नेता का भाषण सुनने नहीं जायेगा, क्योंकि वो जानता हैं कि आज का नेता लाल बहादुर शास्त्री या महात्मा गांधी नहीं हैं। बिहार में इस तरह की रैली करने में माहिर लालू यादव, बहुत अच्छी तरह बता सकते हैं कि दिल्ली में हुई नीतीश की रैली में कौन - कौन से हथकंडे अपनाये गये हैं, गर लालू को मौका मिले तो वे नीतीश की अधिकार रैली से भी बड़ी रैली, दिल्ली में कर सबको आश्चर्यचकित कर सकते हैं, क्योंकि लालू ने सत्ता रहते, पटना में कभी रैली की ही नहीं, वे तो रैला किया करते थे।
बिहार की शान और बिहारियों के सम्मान करने की बात करनेवाले नीतीश ये भूल जाते हैं कि अधिकार रैली कर, केन्द्र पर दबाव बनाना, बार - बार पिछड़ों की रट लगाकर भाजपा को आंख दिखाना भी भीख मांगने की शैली हैं। नीतीश को ये भी जान लेना चाहिए कि बिहार से ज्यादा तरक्की सिक्किम और गोवा जैसे प्रांत कर रहे हैं, उन प्रांतों ने कभी भी केन्द्र को आंख नहीं दिखाया और न ही अधिकार रैली करके भीख मांगने में विश्वास किया।
रही बात बिहारियों के सम्मान की या अपमान की तो उन्हें मालूम होना चाहिए कि अब आतंकी गतिविधियों में लिप्त बिहारी भी खूब दिखाई पड़ रहे हैं। दिल्ली में जो महिला के साथ रेप की घटना हुई तो उसमें एक बिहारी भी था। जब ऐसी - ऐसी घटनाओं में बिहारियों की संलिप्तता होगी तो फिर बिहार को सम्मान कहां से मिलेगा। आज भी गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली या अन्य विकसित अथवा अविकसित प्रांतों में जो बिहारी मिल रहे हैं, जो वहां रहकर अपने बिहार में रह रहे परिवारों को भरण पोषण कर रहे हैं, वो बताता हैं कि बिहारी कितने गैरत वाले हैं। कभी - कभी बिहारियों के खिलाफ विभिन्न प्रांतों में जो गुस्सा दिखता हैं, उसका मूल कारण हैं कि वहां के लोगों को लगता हैं कि ये बिहारी, उनका हक छीन रहे हैं। जब बिहार के राजनीतिज्ञ व सत्ता में शामिल लोग, अपने ही प्रांत के लोगों के साथ कभी दलित तो कभी महादलित, पिछड़ा तो कभी अंत्यत पिछड़ा के नाम पर भेदभाव बरतते हो तो वो प्रांत क्या खाक तरक्की करेगा।
जदयू में तो एक नेता हैं - नरेन्द्र सिंह, उसे तो बात करने की तमीज ही नहीं मालूम। विभिन्न चैनलों में उसके जो भाषण व बाइट दिखाई पड़ते हैं, उससे साफ पता लग जाता हैं कि बिहार में नेताओं की क्या सोच हैं। जदयू के ही  नेता हैं - अनंत सिंह, सुनील पांडे, शिवानंद तिवारी। जिनकी हरकतों से पूरे राज्य की तस्वीर साफ हो जाती हैं। ऐसे - ऐसे नेताओं व मंत्रियों से ये बिहार की सम्मान बढ़ने और बढ़ाने की बात करते हैं। ये वहीं मुख्यमंत्री नीतीश हैं जो लड़कियों के सीने से काले दुपट्टे तक उतरवा लिये, जो महिला शिक्षकों के साथ बदतमीजी में सबसे आगे रहे और बिहार के सम्मान की बात करते हैं।
जिन्होंने दलितों में भी एक और महादलित बना डाला, यानी नरकों में ठेला ठेली की बात करनेवाले को बिहार के विकास की चिंता हैं। जिसने पत्रकारों को अपने पैसों से, विज्ञापन से खरीदकर, नचनियां बना डाला। वे बिहार और बिहारियों की बात करते हैं, इन्हें शर्म भी नहीं आती। जो फूट डालों शासन करो की आधारशिला रखकर, पूरे बिहार के लोगों को बेवकूफ बना डाला। वे बिहार की चिंता करते हैं। जरा पूछिये नीतीश से जब वे रेलमंत्री थे, केन्द्र में बड़े मंत्री थे, गुजरात दंगा, उसी समय हुआ था। उस वक्त वे नरेन्द्र मोदी के खिलाफ विषवमन क्यों नहीं करते थे, उस वक्त उन्हें मुस्लिम प्रेम क्यूं नहीं जगा था। उन्होंने राम विलास पासवान की तरह केन्द्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र क्यो नहीं दिया और आज मुस्लिम प्रेम का ढोंग  इस प्रकार रचते हैं कि पूछिये मत। सचमुच इसने जो बिहार का अपमान किया, आज तक किसी ने नहीं की। अरे इसने तो हद कर दी, महाराष्ट्र जाकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राज ठाकरे के इशारों पर ताता थैया  किया, पर शर्म नहीं आती। शर्म आयेगा कैसे, जमीर हो, तब न.............................

Sunday, December 30, 2012

काला शनिवार.............................

शनिवार को सुबह, मैं जैसे ही जगा। एक बुरी खबर, मेरे कानों को सुनाई दी। 16 दिसम्बर को सामूहिक दुष्कर्म की शिकार 23 वर्षीया लड़की अब दुनिया में नहीं रही। सारा देश हतप्रभ था। देश की बहादुर बिटिया चल बसी। उसके साथ हुए अमानुषिक कुकृत्य ने पूरे देश को अंदर से झकझोर दिया था। दिल्ली क्या, दूर गांवों में भी इसकी गूंज सुनाई दी। सभी ने एक स्वर से मांग किया कि दुष्कर्मियों को कठोर से कठोर सजा मिले। संसद में भी इसकी शोर सुनाई दी। सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री जया भादुड़ी तो इस घटना से इतनी मर्माहत हुई कि वो रो पड़ी, पर इसी संसद में कांग्रेस का एक ऐसा भी नेता था, जो संसदीय कार्य मंत्री होते हुए भी इस घटना के समय़, संसद में चल रही बहस के दौरान हंस रहा था। जिसका नाम था -- राजीव शुक्ला। वो स्वयं को पत्रकार भी समय - समय पर कहा करता हैं। ऐसे तो नेता, नेता होता हैं। चाहे वो किसी भी पार्टी का क्यों न हो। बेशर्मी में इसका रिकार्ड तोड़ना सामान्य व्यक्तियों के वश की बात नहीं। हाल ही में कांग्रेस पार्टी का ही एक नेता संजय निरुपम, भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी को ठुमके लगानेवाली कह डाला था, वो भी टीवी बहस के दौरान। इसी तरह राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने भी नारियों के खिलाफ घटियास्तर की टिप्पणी कर डाली पर इससे भी आगे निकल गये माकपा नेता अनीसुर्रहमान जिन्होंने प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर ऐसी टिप्पणी कर डाली, जिसे सभ्य समाज कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकता।
सवाल उठता हैं कि जब देश में सामूहिक दुष्कर्म के खिलाफ, स्वतः स्फूर्त आंदोलन प्रारंभ हो जाते हो। उसके बाद भी देश के नेताओं की मानसिकता में कोई परिवर्तन नहीं दिखाई देता हो। नारियों के खिलाफ उनके बयान घटियास्तर के आते हो। साथ ही उक्त आंदोलन को दबाने के लिए नाना प्रकार के षडयंत्र रचे जाते हो। ऐसे में हम इन नेताओं पर और उनकी पार्टियों से हम ये भरोसा क्यों रखे, कि ये सामूहिक दुष्कर्म की शिकार युवती को मरणोपरांत भी न्याय दिलायेंगे। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ये बयान कि, उनकी भी लड़किया हैं, और इस घटना से वे भी मर्माहत हैं, पर ये मर्माहत होने के बावजूद भी खुद बचने का प्रयास करते हो। उक्त लड़की को सिंगापुर इलाज के नाम पर, इसलिए ट्रांसफर करते हो, कि देश में ये मैसेज जाय कि सरकार, उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास की हैं। ये जानते हुए भी कि उस लड़की की स्थिति यहां पर ही, इतनी बिगड़ गयी हैं कि उसे बचाया नहीं जा सकता, क्या दिखाता हैं।
जनता मांग कर रही हैं कि त्वरित न्याय के तहत इस दुष्कर्म कांड के आरोपियों को सजा दिलायी जाय, पर सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही। मैं तो कहता हूं कि जिन लोगों ने नारियों को सम्मान नहीं दिया हैं, जिनकी मानसिकता नारियों के प्रति कभी ठीक नहीं रहा, जिन्होंने हमेशा विवादास्पद बयान नारियों के खिलाफ दिया हो, क्या इन्हें ऐसे ही छोड़ देना चाहिए। जिन नेताओं ने नारियों के खिलाफ घटियास्तर का बयान दिया हैं, क्या उन्हें इसलिए छोड़ देना चाहिए कि वे नेता हैं, या उन्हें भी दंडित करना चाहिए।
मेरा मानना हैं कि ये दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि हमारी नारियों के प्रति मानसिकता बदल गयी हैं। गलती खुद करें, और इसके लिए लड़कियों और नारियों के ड्रेस पर इल्जाम लगा दे। कमाल हैं, ऐसे कई कांग्रेसी-भाजपाई नेताओं के हास्यास्पद बयान, मीडिया में भरे पड़े हैं। जो इसके लिए लड़कियों के पोशाक को जिम्मेवार मानते हैं। मेरा मानना हैं कि जब इन नेताओं के मन में ही गंदगी भरी पड़ी हैं, जिसकी वे चर्चा नहीं करते, क्योंकि ये जानते हैं कि जैसे ही वे मन के अंदर, जागृत होनेवाली अपनी गंदी भावनाओं को देखेंगे, तो वे खुद शर्म से गड़ जायेंगे, पर हमें नहीं लगता कि इनकी जमीर इतनी मजबूत हैं कि वे शर्म से खुद मरेंगे, ये तो पैदा ही लिए हैं, हम सामान्य जन को जिंदा मार डालने के लिए। ये तब तक कुकर्म करेंगे, बयान देंगे, जब तक जिंदा रहेंगे, क्योंकि ये जानते हैं कि देश में जो भी हो रहा हैं, उससे वे परे हैं। इसकी आंच भी, उनके घरों तक नहीं पहुंचेगी। इसलिए आम जनता की इज्जत व आबरु जाये भाड़ में, हमें क्या पड़ी हैं। बस घटना घटेंगी। देखने जायेंगे।  घड़ियाली आँसू बहायेंगे। अपने विवेकाधीन कोटे से कुछ रुपये दें देंगे और जनता तो मूर्ख हैं ही, ये छोटी - मोटी घटनाएं थोड़े ही याद रखेंगी, बस पांच साल के लिए फिर से चुनाव के बाद, अपनी सीटे आरक्षित करा लेंगे।

Wednesday, December 19, 2012

दिल्ली में दुष्कर्म, पूरा देश आंदोलित, संसद में बहस - वो रो रही थी, मंत्री जी हंस रहे थे..........................

पूरे देश ने देखा कि दिल्ली में दुष्कर्म, संसद में बहस  - वो रो रही थी, मंत्री जी हंस रहे थे। सारा देश दिल्ली में हुई गैंगरैप वाली घटना को लेकर शर्मसार हैं, आंदोलित हैं। जिनके पास चरित्र हैं, वे स्वयं को मानव कहने पर अपमानित महसूस कर रहे हैं, पर कांग्रेसियों को लज्जा नहीं आती, ये देखिये, संसद में क्या कर रहे हैं। जब राज्यसभा में दिल्ली में गैंग रैप को लेकर, समुचा सदन अवाक् था। घटना को अंजाम देनेवालों आततायियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहा था। देश के संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला मंगलवार को उस गंभीर बहस के दौरान मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे। जबकि इसी सदन में जया बच्चन अपनी भावनाओं को रोक नहीं पायी और उनकी आँखों से आंसू छलक पड़े, हालांकि जिस पार्टी से जया बच्चन आती हैं, उनके नेता मुलायम सिंह यादव की तो बात ही निराली हैं। इनके नेता मुलायम सिंह यादव, विधानसभा चुनाव के दौरान, सिद्धार्थनगर जिले में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान ये कह डाला था कि हमें सत्ता में लाईये, आपको देंगे बलात्कार भत्ता। ऐसे भी हम आपको बता दें कि जैसे हर विषय पर हर पार्टियों की अलग - अलग विचारधारा होती हैं, और वे उन विचारधाराओं को मूर्तरुप देने के लिए सतत प्रयत्नशील रहते हैं। उसी प्रकार बलात्कार जैसे विषय पर भी इनकी अलग - अलग विचारधारा हैं।  संयोग से गर किसी ने इनके घर में ऐसी घटना कर डाली तो उसकी खैर नहीं, वे कानून खुद अपने हाथों में ले लेंगे, पर सामान्य जनों के लिए कानून, संविधान और पता नहीं क्या - क्या कह डालेंगे। जो उन्हें पता तक नहीं होता।
सबसे पहले कांग्रेसियों को देखिये कि इन्होंने समय - समय पर बलात्कार के बारे में क्या कहा हैं। सबसे पहले हरियाणा चलिए, जहां 2012 में इतने रेप के कांड हुए कि ये प्रदेश इसी के नाम से ज्यादा जाना जाने लगा। यहां के कांग्रेसी नेता इस कांड पर क्या - क्या बयान दिये हैं। जरा गौर करे। हरियाणा कांग्रेस के प्रवक्ता धरमवीर गोयल के अनुसार बलात्कार के लिए महिलाएं ही जिम्मेवार हैं, 90 फीसदी महिलाएं स्वेच्छा से रेप कराती हैं।
हरियाणा के ही विधायक संपत मीणा कहते हैं कि बलात्कार के लिए चाउमिन और पिज्जा जिम्मेवार हैं। कभी सोनिया गांधी ने ही हरियाणा कांड पर कहा था कि बलात्कार सिर्फ हरियाणा में ही नहीं पूरे देश में होते हैं। ऐसे में हम आपको बता दें कि कांग्रेसी सिर्फ बलात्कारियों पर ही इतनी उदारता नहीं दिखाते ये तो देश को मिट्टी में मिलानेवाली ताकतों पर भी अपनी कृपा बरसाते हैं। जैसे हाल ही में आपने गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को सुना होगा कि कैसे उन्होंने सदन में हाफिज सईद को श्री लगाकर संबोधित किया। ऐसे इसी पार्टी का एक पागल नेता, जिसे दिग्विजय सिंह के नाम से जाना जाता हैं, ये ऐसी हरकतें बराबर किया करता हैं।
आप कहेंगे कि मुझे ये बात लिखने की आवश्यकता क्यों पड़ गयी। मेरा कहना हैं कि जहां के राजनीतिज्ञों की सोच बलात्कार वाले मुद्दे पर एकमत नहीं हैं. जो इस प्रकार की अमानुषिक घटना को सामान्य ढंग से लेते हो। अपराधियों को सम्मान देते हो तथा गंभीर विषयों पर जब बहस हो तो उसे हंसी में उडा़ देते हो। तब ऐसी हालत में हम ऐसे राजनीतिज्ञों से ये क्यूं आशा रखे, कि ये देश में कानून का शासन स्थापित करेंगे और बलात्कार के दोषियों को सजा दिलवायेंगे। ये तो हमारी लाशों पर राजनीति कर रहे हैं। हमारी संतानों को, वे पशुओं से भी बदतर समझते हैं, तभी तो सत्ता का स्वाद चख रहे, इन मंत्रियों के चेहरे पर मुस्कान दिखी, गर ऐसा नहीं होता तो फिर ये भी हमारी तरह, आंदोलित व आक्रोशित होते। साथ ही गैर - जिम्मेदारानां बयान नहीं देते।
हम आपको बता दें कि आज जरुरत हैं, हर परिवार को कि वे अपनी बेटियों को लक्ष्मीबाई बनाये। ये संभव हैं। गर आपने लक्ष्मीबाई बना दिया यानी स्वरक्षा के उपाय बता दिये तो फिर किसी की हिम्मत नहीं होगी कि वो आपकी बेटी को छू भी सकें। क्योंकि सरकार और पुलिस से स्वरक्षा का विश्वास रखना मूर्खता के सिवा कुछ भी नहीं। ये सरकार और ये पुलिस, सिर्फ और सिर्फ नेताओं और उनकी बहु-बेटियों की हिफाजत के लिए हैं। आम जनता के लिए नहीं। आम जनता तो बनी ही हैं - इन नेताओं की खुराक, जमकर, जहां होता हैं ये अपने पेट में, अपने हिसाब से खुराक डाल लेते हैं।

Monday, October 4, 2010

अयोध्या से दिल्ली तक...!

संपूर्ण विश्व के देशों में अयोध्या से दिल्ली तक की चर्चा हैं। चर्चा इस बात की है आखिर भारत जैसा देश अयोध्या जैसे मसले पर कैसे शांत रहा और कल तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा कॉमनवेल्थ गेम्स आज कैसे अपने शानदार आयोजन के लिए पूरे विश्व से बधाई संदेश प्राप्त कर रहा हैं, जबकि कॉमनवेल्थ गेम्स व अयोध्या मुद्दे को लेकर हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी खूब शेखी बघार चुका हैं।
अयोध्या --- नाम लेते ही, 6 नवम्बर 1992 का चित्र उभरता है, जब कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर डाला, और भगवान श्रीराम की बालस्वरुप जिसे रामलला कहते हैं, उनकी प्रतिमा विध्वंस हुए जगह पर आनन फानन में एक टेंट बनाकर प्रतिस्थापित कर डाली। इसे लेकर पूरे देश में कई जगहों पर दंगे हुए, भारत की छवि को गहरा धक्का लगा, ऐसे भी ये कोई पहली घटना नहीं थी, राम और अयोध्या के नाम पर कई बार ऐसी हिंसक घटनाएं हुई हैं, पर जब 30 सितम्बर को अयोध्या का अदालती फैसला आया, तब देश में एक खून का कतरा भी नहीं बहा, इस पर सभी आश्चर्यचकित हैं, केवल भारत के ही लोग नहीं, बल्कि विश्व के सभी देश के लोग व मीडिया जगत भी, कि आखिर भारत आज शांत क्यों हैं। वो भारत जो हर छोटे-बड़े मुद्दे पर एक दूसरे से भिड़ जाता हैं, आज क्यों नहीं भिड़ा।
तभी ऐसे हाल में हमारे देश के ऋषि मनीषियों की याद बरबस आ जाती हैं कि जब बिगड़ने के समय आते हैं तो हालात बिगड़ने के हो जाते हैं और जब संवरने के दिन आते हैं तो हालात संवरने से हो जाते हैं। मैं देख रहा हूं कि भारत के कई संतों ने 19 वीं शताब्दी के दौरान विश्व के कई देशों में प्रवास के दौरान कहां था कि 21 वीं सदी भारत का हैं, और आज 21 वीं सदी के दस साल गुजरने को तैयार हैं, और जो लक्षण दिखाई पड़ रहे हैं, उससे हमें एहसास हो रहा हैं कि सचमुच 21 वीं सदी भारत का हैं और ये इतिहास शायद अयोध्या के द्वारा ही लिखा जाय तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।
ज्यादातर तथाकथित बुद्धिजीवी राम को काल्पनिक मानते हैं, कुछ तो राम के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह लगा देते हैं कि राम का जन्म कभी हुआ ही नहीं था, पर ऐसा कहनेवाले भूल जाते हैं कि राम भारत के प्राण हैं, आत्मा हैं, राम के बिना भारत की परिकल्पना नहीं की जा सकती, और राम के आधार को किसी भी प्रकार से चुनौती नहीं दी जा सकती। ऐसे भी बिना राम की कृपा के भारत अपनी खोयी प्रतिष्ठा को प्राप्त नहीं कर सकता। राम को हिन्दू और मुसलमान में बांटना भी मूर्खता हैं। राम तो सभी के हैं, उन पर एकाधिकार कैसे हो सकता हैं। राम की शान में तो कई मुस्लिम कवियों और बुद्धिजीवियों ने भी बहुत कुछ लिखे हैं। सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा लिखनेवाले अल्लामा इकबाल ने तो राम को इमामे हिन्द तक कह डाला। क्या कोई बता सकता हैं कि इमामे-हिन्द का मतलब क्या होता हैं।
गर सच पूछा जाये तो राम के नाम पर झगड़े आज तक भारत में नहीं हुए, भारत में जब भी झगड़े हुए तो राजनीति के चलते, राजनीतिबाजों के चलते, और ये राजनीतिबाज सभी दलों में हैं, सभी अपने अपने ढंग से राम को देखते हैं और इसी दौरान वे सब कुछ कर डालने की कोशिश करते हैं, जिसमें गांधी के राम दम तोड़ रहे होते हैं। गांधी के राम की गर आप परिकल्पना करें तो साफ पता लग जायेगा कि वे किस राम को पसंद करते है। गर गांधी राम राज्य की परिकल्पना अथवा सुराज की परिकल्पना करते थे, तो गांधी के राम किस आदर्शवादिता पर खड़े उतरते थे। ये उनसे पूछिये, जिस राजनीतिबाजों के बयान, बेडरुम के चादर की तरह, राम के नाम पर बदलते रहते हैं।
अयोध्या में जब फैसले आ रहे थे, तब कई मीडियाकर्मियों ने अखबारों में लिखा और कई इलेक्ट्रानिक मीडिया के दोस्तों ने दिखाया कि आज के भारत का युवा राम में कम, मंदिर – मस्जिद विवाद में ध्यान कम, और अपने कैरियर, पावर और अपनी आर्थिक शक्ति मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान दे रहा हैं, इसलिए अयोध्या में राम मंदिर बने अथवा न बनें इस पर वो ध्यान नहीं देता। जबकि सच्चाई ये हैं कि इस प्रकार के युवाओं की तादाद स्वतंत्रता आंदोलन में भी थी, जिसे आजादी के आंदोलन में दिलचस्पी कम और अन्य कामों में दिलचस्पी ज्यादा थी। ऐसे लोगों के तादाद हर युग में होते हैं जिन्हें देश से कम और अपने आप में ज्यादा दिलचस्पी होती हैं, पर जो राष्ट्र की चिंता करते हैं उनकी तादाद सदियों से बहुत ही कम होती हैं। आज के युवा जिन्हें राष्ट्र में दिलचस्पी हैं, वे अयोध्या के राम मंदिर को मंदिर मस्जिद के रुप में नहीं लेते, वे राष्ट्र के स्वाभिमान से इसे जोड़ते हैं, बात आज राम मंदिर के निर्माण की नहीं, मुद्दा इस बात का हैं कि भारत राम के नाम से जाना जायेगा या विदेशी आक्रांता बाबर के नाम से। अब तो अदालत ने भी मान लिया है कि विवादित स्थल रामजन्मभूमि स्थल हैं, जहां बाबर ने मंदिर की जगह मस्जिद बना दी। तो क्या उस विदेशी आक्रांता द्वारा निर्मित मस्जिद को इसलिए छाती से लगाकर रखा जाय कि उसने हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचायी या स्वतंत्रता के बाद उस काम को करें, जिससे हमारे पूर्वज गौरवान्वित हो। क्या ये सहीं नहीं कि स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का हमारे सरदार वल्लभ भाई पटेल ने उद्धार करवाया था, क्यों उद्धार कराया था, इसकी जानकारी क्या किसी के पास हैं गर नहीं हैं, तो क्या ये जानने की कोशिश की।
हमें अच्छी तरह पता हैं कि देश का कोई सच्चा मुसलमान, रामजन्मभूमिस्थल पर मंदिर निर्माण हो, इसका विरोध नहीं करता, विरोध तो वो करते हैं, जिनकी राजनीति की दाल नहीं गलती, जैसे देखिये, कल तक हर छोटे छोटे मुद्दे पर अदालत का सम्मान करनेवाले, राजनीतिबाज और उनके समर्थक कैसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आये फैसले को राजनीति के चश्मे से देख कर बयान दे रहे हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को गलत ठहरा रहे हैं, चुनौती दे रहे हैं और एक बार फिर वे उस वर्ग को बरगलाने का काम कर रहे हैं जो अब रामजन्मभूमि पर अलग राय रख रहा हैं। ये वे लोग हैं, जिन्हें लग रहा हैं कि इस प्रकार के फैसले से उनकी राजनीति बर्बाद हो जायेगी, इसलिए वोट और राजनीतिक समर्थन पाने के लिए वे हर प्रकार का बयान दे रहे हैं, जिसकी खुलकर आलोचना होनी चाहिए, पर खुशी इस बात की हैं कि कई मुस्लिम संगठनों ने ही उन राजनीतिबाजों के बयान की हवा निकाल दी। कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवी संगठनों ने तो अब इस मुददे को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती न दी जाय, इसकी अपील भी की हैं, साथ ही कई मुस्लिम संगठनों ने रामजन्मभूमि स्थल पर मंदिर बनाने की पहल भी की हैं, जो ये बताने के लिए काफी है कि भारत अब किस ओर चल पड़ा हैं।
जान लीजिये, ये भारत अब पूरी तरह से परिपक्व हो गया है. भारत की जनता पूरी तरह से परिपक्व हो गयी हैं। वो दिन अब दूर नहीं कि ये मुसलमान, हिन्दूओं के साथ मिलकर विवादितस्थल जो अब विवादित नहीं रही हैं, एक साथ मिलकर राममंदिर का निर्माण करेंगे और दूनियां को दिखायेंगे कि भारत अब वो राम के नाम पर लड़ने भिड़नेवाला भारत नहीं, बल्कि राम के नाम पर एक साथ चलनेवाला भारत हैं, वो अब मीडिया और राजनीतिबाजों के चिकनीचुपड़ी बातों में न आकर भारत की एकता अखंडता को मजबूत करनेवाले मार्ग को प्रशस्त करनेवाला भारत हैं। अब इसे कोई छू नहीं सकता, बस उसका लक्ष्य सामने हैं, अपने देश को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने का.............................। उसका उदाहरण भी साफ साफ दिखाई पड़ रहा हैं, क्योंकि इसी 21 वीं शताब्दी में भारत पर राम की कृपा स्पष्ट रुप से नजर आयी। जब पूरा विश्व आर्थिक मंदी से जूझ रहा था, जहां विकसित राष्ट्र के बैंकों का समूह औंधे मूंह गिर रहा था, वहीं भारत पर इसका प्रभाव न के बराबर था। भारत आर्थिक रुप से मजबूती से खड़ा रहा। 2007 में महात्मा गांधी जिनकी प्रार्थना ही राम से शुरु हुआ करती थी, उनके जन्मदिवस पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित कर भारत को प्रतिष्ठा दी। विश्व के कई देशों में भारतीय आर्थिक रुप से मजबूत होकर, भारत का लोहा मनवा रहे हैं, कई देशों में तो भारतीयों का प्रत्यक्ष रुप से शासन चल रहा हैं तो कहीं अप्रत्यक्ष रुप से। कई देशों में तो भारतीय मूल के लोगों ने अपनी प्रतिभा से सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया हैं, तभी तो अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी सभी से भारतीयों से सीख लेने की अपील तक कर डाली और अब दिल्ली की बात कामनवेल्थ गेम्स जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा था, आज वो पूरे विश्व में शानदार आयोजन के लिए तालियां बटोर रहा हैं, ये हैं राम के देश का कमाल, ये राम की कृपा। बस इसे आध्यात्मिकता की नजरों से देखिये, भारत त्यागभूमि हैं भोगभूमि नहीं।

Tuesday, May 11, 2010

भाजपा को शर्म आनी चाहिए.

भाजपा को शर्म आनी चाहिए। --- विद्रोही

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक राजनीतिक इकाई, पं. दीन दयाल उपाध्याय, डा.श्यामा प्रसाद मुख्रर्जी जैसे महान शख्सियतों की पार्टी, देश में पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री का खिताब पाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की पार्टी, तीन प्रदेशों की जन्मदाता, मूल्यों और सिद्धांतों की बात करनेवाली भाजपा आज झारखंड में क्या कर रही हैं। झामुमो के साथ सत्ता की लालच में चूहे – बिल्ली का खेल, खेल रही हैं।
कथनी और करनी में एक समानता की बात करनेवाली पार्टी अब कथनी और करनी में अंतर रखने का रिकार्ड अपने नाम करने जा रही हैं। जरा देखिये, इस भाजपा को जिसने मूल्यों और सिद्धांतों की झारखंड में कैसे धज्जियां उड़ा रही हैं।
लोकसभा में कटौती प्रस्ताव पर जब वोटिंग की बात आयी, तब सीबीआई के भय और आनेवाले समय में भविष्य को लेकर सशंकित, कांग्रेस के साथ जाने के लिए मन बना चुकी झामुमो ने कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग कर दी। कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग करना भाजपा को इतना नागवार गूजरा कि उसने झारखंड के शिबू सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर दी, राज्यपाल से मिलकर समर्थन वापसी का पत्र देने का समय तक मांग डाला, पर जैसे ही झामुमो ने माफी और भाजपा को ही सरकार बनाने का अनुरोध पत्र दे डाला, समर्थन वापसी की बात इस भाजपा ने हवा-हवाई कर दी। भाजपा को लगा, बस अब झारखंड में उसका मुख्यमंत्री होना सुनिश्चित हैं, पर वो भूल गयी कि झामुमो एक ऐसे पार्टी का नाम हैं, जो कब क्या बोलेगा और क्या करेगा, खुद उसके सुप्रीमो तक को पता नहीं होता, जिस पार्टी की सभा और विधायक दल की बैठक कब शुरु होती है और कब खत्म होती हैं, खुद उस पार्टी तक को पता नहीं होता, ये पार्टी कब झूमर और कब सोहर गा दे, खुद झारखंड की जनता को मालूम नहीं होता। तो भला भाजपा की क्या औकात की, झामुमो के अंदर की बात जान लें।
हुआ भी ऐसा ही, एक झामुमो के मंत्री ने हमसे ऑफ दि रिकार्ड बात कही थी, कि विद्रोही जी, आप जान लीजिये, भाजपा को हम इस मुद्दे पर ऐसा नाच नचायेंगे कि वो लोग जानेंगे, भाजपा वाले समझते हैं कि हम महतो-मांझी की पार्टी हैं, राज चलाना क्या जाने, पर हम वो सब जान गये हैं, जिसे लेकर सत्ता चलती हैं, अरे जब बड़े लोग मूल्यों और सिद्धांतों को तिलांजलि देने में एक मिनट तक नहीं देते तो हम भला मूल्यों और सिद्धांतों पर क्यूं चले, क्यूं हमने ही सिर्फ मूल्यों और सिद्धांतों पर चलने का ठेका ले रखा हैं। ये बात तो झारखंड के सभी पार्टियों को सोचना चाहिए। ये बात हैं उस वक्त की जब पहले राउँड की बात कर दिल्ली से झामुमो के नेता विजयी मुद्रा में लौटे थे।
झामुमो जहां इसकी पकड़ हैं, वहां दूसरे नंबर पर भाजपा हैं, कांग्रेस तीसरे नंबर पर हैं, ऐसे में अपने दूसरे नंबर के शत्रू पर विजय पताका फहराते हुए शासन करना झामुमो के लिए कितनी आनन्द देने की बात हैं, इसे समझा जा सकता हैं, क्योंकि झामुमो का मानना हैं कि जितना भाजपा को उसकी औकात बता कर शासन करेंगे, झामुमो प्रदेश में उतना ही मजबूत होगा, पर केन्द्र और प्रदेश में बैठे इन भाजपा नेताओं को ये छोटी सी बात समझ में नहीं आ रही और वे सत्ता की लालच में इतने अंधे हो गये कि उन्हे पता नहीं चल रहा हैं कि राज्य की राजनीतिक अनिश्चितता के इस दौर ने प्रदेश को कहां लाकर खड़ा कर दिया।
दिल्ली और रांची में बैठकों का दौर जारी हैं, एक छोटी सी पार्टी झामुमो ने भाजपा के नीति सिद्धांतों की चूलें हिला दी, पर केन्द के भाजपा नेताओं को इसका भान नहीं हो रहा. भान हो भी तो कैसे, उन्हें पता हैं कि जब भाजपा की सरकार थी, तो उन्हें कितना मजा लिया हैं, झारखंड में शासन नहीं रहने पर उन्हें कितना नुकसान हुआ हैं, ऐसे में कुछ ले – देकर बात बन जाये तो क्या फर्क पड़ता हैं। ऐसे भी झारखंड की जनता ने जो जनादेश दिया था, उसका हश्र तो यहीं होना हैं, इसलिए जो चाहे जो करों अपनी बला से। हमें तो सत्ता चाहिए, चाहे अट्ठाईस महीने की हो या छह महीने की। गर छह महीने की हुई तो उसे पूरे साढ़े चार साल तक करने के लिए फिर राजनीतिक गोटी फिट करेंगे, नहीं तो जितनी की अवधि हैं, उतना तो अपना वारा-न्यारा हैं ही।
कुछ नेता व विधायक कहते हैं कि यहां सीटों की संख्या कम हैं, इसलिए यहां ऐसा हो रहा हैं, गर सीटों की संख्या बढ़ जाये, तो ऐसी स्थिति नहीं रहेंगी, यानी नाच न जाने अंगना टेढ़ा, चरित्र नहीं हैं और सीटे कम होने का बहाना ढूंढने लगे, अरे इसकी कौन सी गारंटी होगी कि सीटे बढ़ जाने पर त्रिशंकु विधानसभा नहीं होगी. यहां सीट से मतलब थोड़े ही हैं, यहां तो नेताओं के चरित्र का संकट हैं, सभी का लक्ष्य एकमात्र कुर्सी पाना और सत्ता पाना हैं, सेवा भाव ही जब हृदय से खत्म हो गया तो फिर पार्टी और सीट का मतलब क्या, राज्य की राजनीतिक हालात देख तो हमारे हृदय से इन भ्रष्ट नेताओं के प्रति कुछ ऐसी ही पंक्तियां निकल रही हैं ------------------
नेता आओं, सत्ता पाओ,
पार्टी का मतभेद भूलाओं,
एकमेव तुम कुर्सी पाओं
पत्नी और पुत्र को लाओ
जनता से जयकार कराओं
और उन्ही की छाती पर,
मूंग दराओं,
नीति विवेक के गहने उतारकर,
सप्त जन्म तुम सफल कराओं
नेता आओ, सत्ता पाओ ----------------------------------