Showing posts with label दुष्कर्म. Show all posts
Showing posts with label दुष्कर्म. Show all posts

Monday, December 31, 2012

ये नया वर्ष हैं..................


कल भी आया, कल आयेगा भी,
हंसो, खेलो, ये नया वर्ष हैं
हंसो, खेलो, ये नया वर्ष हैं..................
भ्रष्टाचार-दुष्कर्म, निरंतर
भारत की दिन-रात भयावह
सिसकती, कराहती, जैसे-तैसे
जीने की ये नयी चाह हैं
हां हां, सुनो
ये नया वर्ष हैं.....................
कल दल-गण आंदोलन करती थी
अब, आंदोलन से पीछे हटती हैं
अब जनता आगे बढ़ कहती
हटो, अरे ये मेरा वक्त हैं
क्योंकि,
ये नया वर्ष हैं....................
गंगा – जमना, अब रोती कहती
कभी हरती थी, वो पापों को
अब खुद मैली होकर भी,
त्राहिमाम संदेश सुनाती
घाटों की सुनी दिन रातें
कलकल निनाद न, अब सुन पाती
फिर भी बोलो, कि हम खुब खुश हैं
झूठ बोल, मन को बहलाओ
और कहो
ये नया वर्ष हैं.............................

Sunday, December 30, 2012

काला शनिवार.............................

शनिवार को सुबह, मैं जैसे ही जगा। एक बुरी खबर, मेरे कानों को सुनाई दी। 16 दिसम्बर को सामूहिक दुष्कर्म की शिकार 23 वर्षीया लड़की अब दुनिया में नहीं रही। सारा देश हतप्रभ था। देश की बहादुर बिटिया चल बसी। उसके साथ हुए अमानुषिक कुकृत्य ने पूरे देश को अंदर से झकझोर दिया था। दिल्ली क्या, दूर गांवों में भी इसकी गूंज सुनाई दी। सभी ने एक स्वर से मांग किया कि दुष्कर्मियों को कठोर से कठोर सजा मिले। संसद में भी इसकी शोर सुनाई दी। सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री जया भादुड़ी तो इस घटना से इतनी मर्माहत हुई कि वो रो पड़ी, पर इसी संसद में कांग्रेस का एक ऐसा भी नेता था, जो संसदीय कार्य मंत्री होते हुए भी इस घटना के समय़, संसद में चल रही बहस के दौरान हंस रहा था। जिसका नाम था -- राजीव शुक्ला। वो स्वयं को पत्रकार भी समय - समय पर कहा करता हैं। ऐसे तो नेता, नेता होता हैं। चाहे वो किसी भी पार्टी का क्यों न हो। बेशर्मी में इसका रिकार्ड तोड़ना सामान्य व्यक्तियों के वश की बात नहीं। हाल ही में कांग्रेस पार्टी का ही एक नेता संजय निरुपम, भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी को ठुमके लगानेवाली कह डाला था, वो भी टीवी बहस के दौरान। इसी तरह राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के बेटे अभिजीत मुखर्जी ने भी नारियों के खिलाफ घटियास्तर की टिप्पणी कर डाली पर इससे भी आगे निकल गये माकपा नेता अनीसुर्रहमान जिन्होंने प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर ऐसी टिप्पणी कर डाली, जिसे सभ्य समाज कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकता।
सवाल उठता हैं कि जब देश में सामूहिक दुष्कर्म के खिलाफ, स्वतः स्फूर्त आंदोलन प्रारंभ हो जाते हो। उसके बाद भी देश के नेताओं की मानसिकता में कोई परिवर्तन नहीं दिखाई देता हो। नारियों के खिलाफ उनके बयान घटियास्तर के आते हो। साथ ही उक्त आंदोलन को दबाने के लिए नाना प्रकार के षडयंत्र रचे जाते हो। ऐसे में हम इन नेताओं पर और उनकी पार्टियों से हम ये भरोसा क्यों रखे, कि ये सामूहिक दुष्कर्म की शिकार युवती को मरणोपरांत भी न्याय दिलायेंगे। गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ये बयान कि, उनकी भी लड़किया हैं, और इस घटना से वे भी मर्माहत हैं, पर ये मर्माहत होने के बावजूद भी खुद बचने का प्रयास करते हो। उक्त लड़की को सिंगापुर इलाज के नाम पर, इसलिए ट्रांसफर करते हो, कि देश में ये मैसेज जाय कि सरकार, उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास की हैं। ये जानते हुए भी कि उस लड़की की स्थिति यहां पर ही, इतनी बिगड़ गयी हैं कि उसे बचाया नहीं जा सकता, क्या दिखाता हैं।
जनता मांग कर रही हैं कि त्वरित न्याय के तहत इस दुष्कर्म कांड के आरोपियों को सजा दिलायी जाय, पर सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही। मैं तो कहता हूं कि जिन लोगों ने नारियों को सम्मान नहीं दिया हैं, जिनकी मानसिकता नारियों के प्रति कभी ठीक नहीं रहा, जिन्होंने हमेशा विवादास्पद बयान नारियों के खिलाफ दिया हो, क्या इन्हें ऐसे ही छोड़ देना चाहिए। जिन नेताओं ने नारियों के खिलाफ घटियास्तर का बयान दिया हैं, क्या उन्हें इसलिए छोड़ देना चाहिए कि वे नेता हैं, या उन्हें भी दंडित करना चाहिए।
मेरा मानना हैं कि ये दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि हमारी नारियों के प्रति मानसिकता बदल गयी हैं। गलती खुद करें, और इसके लिए लड़कियों और नारियों के ड्रेस पर इल्जाम लगा दे। कमाल हैं, ऐसे कई कांग्रेसी-भाजपाई नेताओं के हास्यास्पद बयान, मीडिया में भरे पड़े हैं। जो इसके लिए लड़कियों के पोशाक को जिम्मेवार मानते हैं। मेरा मानना हैं कि जब इन नेताओं के मन में ही गंदगी भरी पड़ी हैं, जिसकी वे चर्चा नहीं करते, क्योंकि ये जानते हैं कि जैसे ही वे मन के अंदर, जागृत होनेवाली अपनी गंदी भावनाओं को देखेंगे, तो वे खुद शर्म से गड़ जायेंगे, पर हमें नहीं लगता कि इनकी जमीर इतनी मजबूत हैं कि वे शर्म से खुद मरेंगे, ये तो पैदा ही लिए हैं, हम सामान्य जन को जिंदा मार डालने के लिए। ये तब तक कुकर्म करेंगे, बयान देंगे, जब तक जिंदा रहेंगे, क्योंकि ये जानते हैं कि देश में जो भी हो रहा हैं, उससे वे परे हैं। इसकी आंच भी, उनके घरों तक नहीं पहुंचेगी। इसलिए आम जनता की इज्जत व आबरु जाये भाड़ में, हमें क्या पड़ी हैं। बस घटना घटेंगी। देखने जायेंगे।  घड़ियाली आँसू बहायेंगे। अपने विवेकाधीन कोटे से कुछ रुपये दें देंगे और जनता तो मूर्ख हैं ही, ये छोटी - मोटी घटनाएं थोड़े ही याद रखेंगी, बस पांच साल के लिए फिर से चुनाव के बाद, अपनी सीटे आरक्षित करा लेंगे।

Wednesday, December 19, 2012

दिल्ली में दुष्कर्म, पूरा देश आंदोलित, संसद में बहस - वो रो रही थी, मंत्री जी हंस रहे थे..........................

पूरे देश ने देखा कि दिल्ली में दुष्कर्म, संसद में बहस  - वो रो रही थी, मंत्री जी हंस रहे थे। सारा देश दिल्ली में हुई गैंगरैप वाली घटना को लेकर शर्मसार हैं, आंदोलित हैं। जिनके पास चरित्र हैं, वे स्वयं को मानव कहने पर अपमानित महसूस कर रहे हैं, पर कांग्रेसियों को लज्जा नहीं आती, ये देखिये, संसद में क्या कर रहे हैं। जब राज्यसभा में दिल्ली में गैंग रैप को लेकर, समुचा सदन अवाक् था। घटना को अंजाम देनेवालों आततायियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहा था। देश के संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव शुक्ला मंगलवार को उस गंभीर बहस के दौरान मंद-मंद मुस्कुरा रहे थे। जबकि इसी सदन में जया बच्चन अपनी भावनाओं को रोक नहीं पायी और उनकी आँखों से आंसू छलक पड़े, हालांकि जिस पार्टी से जया बच्चन आती हैं, उनके नेता मुलायम सिंह यादव की तो बात ही निराली हैं। इनके नेता मुलायम सिंह यादव, विधानसभा चुनाव के दौरान, सिद्धार्थनगर जिले में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान ये कह डाला था कि हमें सत्ता में लाईये, आपको देंगे बलात्कार भत्ता। ऐसे भी हम आपको बता दें कि जैसे हर विषय पर हर पार्टियों की अलग - अलग विचारधारा होती हैं, और वे उन विचारधाराओं को मूर्तरुप देने के लिए सतत प्रयत्नशील रहते हैं। उसी प्रकार बलात्कार जैसे विषय पर भी इनकी अलग - अलग विचारधारा हैं।  संयोग से गर किसी ने इनके घर में ऐसी घटना कर डाली तो उसकी खैर नहीं, वे कानून खुद अपने हाथों में ले लेंगे, पर सामान्य जनों के लिए कानून, संविधान और पता नहीं क्या - क्या कह डालेंगे। जो उन्हें पता तक नहीं होता।
सबसे पहले कांग्रेसियों को देखिये कि इन्होंने समय - समय पर बलात्कार के बारे में क्या कहा हैं। सबसे पहले हरियाणा चलिए, जहां 2012 में इतने रेप के कांड हुए कि ये प्रदेश इसी के नाम से ज्यादा जाना जाने लगा। यहां के कांग्रेसी नेता इस कांड पर क्या - क्या बयान दिये हैं। जरा गौर करे। हरियाणा कांग्रेस के प्रवक्ता धरमवीर गोयल के अनुसार बलात्कार के लिए महिलाएं ही जिम्मेवार हैं, 90 फीसदी महिलाएं स्वेच्छा से रेप कराती हैं।
हरियाणा के ही विधायक संपत मीणा कहते हैं कि बलात्कार के लिए चाउमिन और पिज्जा जिम्मेवार हैं। कभी सोनिया गांधी ने ही हरियाणा कांड पर कहा था कि बलात्कार सिर्फ हरियाणा में ही नहीं पूरे देश में होते हैं। ऐसे में हम आपको बता दें कि कांग्रेसी सिर्फ बलात्कारियों पर ही इतनी उदारता नहीं दिखाते ये तो देश को मिट्टी में मिलानेवाली ताकतों पर भी अपनी कृपा बरसाते हैं। जैसे हाल ही में आपने गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को सुना होगा कि कैसे उन्होंने सदन में हाफिज सईद को श्री लगाकर संबोधित किया। ऐसे इसी पार्टी का एक पागल नेता, जिसे दिग्विजय सिंह के नाम से जाना जाता हैं, ये ऐसी हरकतें बराबर किया करता हैं।
आप कहेंगे कि मुझे ये बात लिखने की आवश्यकता क्यों पड़ गयी। मेरा कहना हैं कि जहां के राजनीतिज्ञों की सोच बलात्कार वाले मुद्दे पर एकमत नहीं हैं. जो इस प्रकार की अमानुषिक घटना को सामान्य ढंग से लेते हो। अपराधियों को सम्मान देते हो तथा गंभीर विषयों पर जब बहस हो तो उसे हंसी में उडा़ देते हो। तब ऐसी हालत में हम ऐसे राजनीतिज्ञों से ये क्यूं आशा रखे, कि ये देश में कानून का शासन स्थापित करेंगे और बलात्कार के दोषियों को सजा दिलवायेंगे। ये तो हमारी लाशों पर राजनीति कर रहे हैं। हमारी संतानों को, वे पशुओं से भी बदतर समझते हैं, तभी तो सत्ता का स्वाद चख रहे, इन मंत्रियों के चेहरे पर मुस्कान दिखी, गर ऐसा नहीं होता तो फिर ये भी हमारी तरह, आंदोलित व आक्रोशित होते। साथ ही गैर - जिम्मेदारानां बयान नहीं देते।
हम आपको बता दें कि आज जरुरत हैं, हर परिवार को कि वे अपनी बेटियों को लक्ष्मीबाई बनाये। ये संभव हैं। गर आपने लक्ष्मीबाई बना दिया यानी स्वरक्षा के उपाय बता दिये तो फिर किसी की हिम्मत नहीं होगी कि वो आपकी बेटी को छू भी सकें। क्योंकि सरकार और पुलिस से स्वरक्षा का विश्वास रखना मूर्खता के सिवा कुछ भी नहीं। ये सरकार और ये पुलिस, सिर्फ और सिर्फ नेताओं और उनकी बहु-बेटियों की हिफाजत के लिए हैं। आम जनता के लिए नहीं। आम जनता तो बनी ही हैं - इन नेताओं की खुराक, जमकर, जहां होता हैं ये अपने पेट में, अपने हिसाब से खुराक डाल लेते हैं।