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Thursday, October 20, 2016

अरे चीन, पगला गया भइया................

जब से भारतीयों ने चीन और चीनियों को आर्थिक चोट पहुंचाने का संकल्प लेते हुए, अपने सपने साकार करने की कोशिश प्रारंभ की है, तभी से चीन और चीनियों की बौखलाहट सातवें आसमान पर हैं। वे भारत और भारतीयों के बारे में अनाप-शनाप बक रहे हैं। वे कोई भी ऐसी जगह नहीं छोड़ रहे, जहां वे अपनी हरकतों से भारत को नीचा दिखाने की कोशिश न कर रहे हो। दोस्त का दोस्त अपना दोस्त और दोस्त का दुश्मन अपना दुश्मन की कहावत को सार्थक करते हुए, वे पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों पर भी प्यार लूटा रहे है। वे हमारी ही बदौलत आर्थिक शक्ति को बढ़ाए है और हमें ही आंख दिखा रहे है। वे समझते है कि जैसे वे गुंडागर्दी करते हुए 1962 में हमारा बड़ा भू-भाग पर कब्जा कर लिया, तिब्बत पर कब्जा कर लिया। वैसे ही वे बार – बार करते रहेंगे और हम चुपचाप इनकी गुंडागर्दी के आगे नतमस्तक हो जायेंगे, पर उन्हें ये पता नहीं कि आज देश में एक नये युवाओं की टोली का जन्म हुआ है। वह अपने देश भारत को महाशक्ति बनाने के लिए वचनबद्ध है। उसके साथ 125 करोड़ की भारतीय आबादी भी साथ है। आज वह जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के साथ आगे निकल पड़ा है।
चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स का पागलपन देखिये, वह हर दम हमें धौंस दिखाता है। वह समझ लिया है कि जैसे उसने तिब्बत को कब्जे में कर लिया, जैसे वह समय-समय पर अपने पड़ोसी जापान, ताइवान, विएतनाम, फिलीपीन्स को आंखे दिखाता है, उसी तरह भारत को भी आँख दिखायेगा और भारत उसके चरणों में जाकर झूक जायेगा। हम अच्छी तरह जानते है कि चीन को ये सब करने का मौका हमारी पूर्ववर्ती सरकारों ने दिया है, जिस पर अंकुश लगाने का काम वर्तमान सरकार और यहां की वीर युवाओं की टोली ने प्रारंभ किया है। हम चीन को बता देना चाहते है कि वे गीदड़भभकी दिखाना बंद करें और सच्चाई को समझे।
चीन का यह कहना कि भारत के लोग मेहनती नहीं, सिर्फ हल्ला करना जानते है, माल उससे ही खरीदेंगे तो फिर वो बौखलाहट में क्यों है?, वो हमें गाली क्यों दे रहा है?, जब वह सब कुछ जानता है। हम आपको बता देते है कि चीन समझ चुका है कि भारतीयों ने अब ये पूर्णतः समझ लिया है कि बिना चीन को उसकी औकात बताएं भारत का निर्माण हो ही नहीं सकता। तभी तो देश की करोड़ों जनता ने चीन को उसकी औकात बताने के लिए इस दीपावली में संकल्प कर लिया और चीन को उसकी औकात बतानी शुरु कर दी। पूरे भारत में एक प्रकार का चीनी सामानों के बहिष्कार का लहर है, जिस पर सारी जनता एक है।
आखिर चीनी सामानों का बहिष्कार क्यों?
1. चीन का सामान भारतीय सामानों की अपेक्षा घटिया होता है।
2. चीन के सामान से प्रदुषण का खतरा होता है।
3. चीन के खाद्य पदार्थों की विश्वसनीयता नहीं के बराबर होता है, वह किन चीजों से बनाकर भारत या अन्य देशों में भेजता है, उसकी विश्वसनीयता ही नहीं होती।
4. चीन कभी भी विश्वसनीय नहीं रहा।
5. चीन सिर्फ अपनी भलाई में ही मग्न रहता है और अपनी भलाई के लिए वह कुछ भी कर सकता है, जैसे दुसरे देश पर चढ़ाई और उसका मान-मर्दन। जैसे उसने तिब्बत पर चढ़ाई कर उस तिब्बत को सदा के लिए बर्बाद कर दिया। भारत का कई हजार वर्गमील उसने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।
6. चीन पाकिस्तान के उन आतंकी समूहों की सराहना और बचाव करता है, जो भारत में आतंक फैलाता है।
7. चीन पाकिस्तान को हर मोर्चें पर मदद करता है, जिससे भारत को नुकसान पहुंचने की शत प्रतिशत गारंटी रहती है।
8. चीन के सैनिक हमेशा भारतीय सीमाओं का अतिक्रमण करते हैं।
चीन के समर्थक – भारत में चीन के भारत विरोधी और उसकी आक्रमणकारी गतिविधियों का समर्थन यहां के वामपंथी खुलकर करते है। वे अमरीकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद के नारे लगाते है, पर चीन के साम्राज्यवादी नीतियों को खुलकर समर्थन करते है, कई वामपंथी कार्यालयों में चीनी साम्यवादी नेताओं के चित्र और उन पर लदे फूल मालाएं आप स्वयं जा कर देख सकते है।
चीन अब जान चुका है कि भारत और भारत के लोग जाग चुके है, इसलिए वह अपनी भड़ास अब भारत और भारतीयों को गाली देकर निकाल रहा है। बस भारतीय सिर्फ इतना ही करें, अपने लिये संकल्प को पूरा करने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहे। जहां भी देखे, चीनी सामान उसका बहिष्कार करें। सरकार और यहां के नेता मजबूर हो सकते है, पर हम मजबूर नहीं, चीन को हम औकात बता कर रहेंगे, भारत को आर्थिक महाशक्ति बना कर रहेंगे। हम अपने पैसे से चीन की ताकत नहीं बल्कि चीन की ताकत को मटियामेट करेंगे और अपने जवानों को कहेंगे कि देखों हम तुम्हारे साथ है। डटे रहो सीमा पर। चीन को जवाब दो। हम सब मिलकर भारत की कायाकल्प करेंगे। चीन मुर्दाबाद। उसकी साम्राज्यवादी नीतियां मुर्दाबाद। उसकी भारत विरोधी गतिविधियां मुर्दाबाद। आंतक समर्थक पाकिस्तान समर्थक चीन और चीन की नीतियां मुर्दाबाद। मुर्दाबाद वे अखबार, वे नेता जो भारत में ही रहकर चीन की स्तुति गाते है, मेरा इशारा किस ओर है, आप समझ गये होंगे।

Wednesday, October 5, 2016

लो शुरू हो गया अपनी ढपली अपना राग..............

अरविंद केजरीवाल, अरुण शौरी, दिग्विजय सिंह के बाद संजय निरुपम और पता नहीं और कौन – कौन से लोग आयेंगे। इन सभी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग की है कि वे सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो जारी करें। इन्होंने प्रत्यक्ष रुप से ये भी कह डाला कि इस प्रकार के स्ट्राइक पूर्व में भी होते रहे पर किसी ने इस प्रकार से मीडिया के समक्ष इन बातों को नहीं उठाया, पर भाजपा की मोदी सरकार ने पालिटिकल माइलेज के लिए ऐसा किया। हमें पूरा विश्वास था कि कुछ दिनों के बाद इस प्रकार के बयान सुनने को मिलेंगे, इसकी संभावनाएं हमें पहले से थी, क्योंकि विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है, जहां देशद्रोहियों की एक परंपरा रही है। उन परंपराओं की ओर जायेंगे तो देखेंगे कि इसकी बहुत बड़ी लिस्ट है, पर मैं ज्यादा तो नहीं, पर कुछ महान देशद्रोहियों का नाम यहां जरुर रखना चाहेंगे। मो. गोरी के समय जयचंद, ब्रिटिश हुकुमत के समय जब महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ रही थी, तो सिंधिया परिवार ने लक्ष्मीबाई को मदद न कर, अंग्रेजों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसका वर्णन तो सुप्रसिद्ध कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने भी किया – यह कहकर कि अंग्रेजों के मित्र सिंधिंया ने छोड़ी रजधानी थी, खुब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी। सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी व देश की युवाओं के धड़कन भगत सिंह को फांसी के तख्ते तक पहुंचाने में सुप्रसिद्ध पत्रकार खुशवंत सिंह के पिता शोभा सिंह का बहुत बड़ा हाथ था। इसलिए जब हाफिज सईद जैसे आतंकियों को सईद जी कहकर संबोधित करनेवाला वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह जब ये कहता है कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसी चीज कुछ हुई ही नहीं तो हमें यह आश्चर्य नहीं होता और रही बात संजय निरुपम की तो फिलहाल शिव सेना से कैरियर शुरु करनेवाला अभी सेकुलर राजनीति का प्याज खा रहा है, अरविंद केजरीवाल तो दुनिया के एकमात्र ईमानदार नेता है, इसलिए उनकी ईमानदारी तो इसी में है कि वे प्रधानमंत्री के साथ – साथ भारतीय सेना पर भी अंगूली उठा दें। अरुण शौरी के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो वो बैंटिग की है कि उनका वश चले तो वे जयचंद को भी मात दे दें। ये तो रहा भारतीय पक्ष अब देखते है पाकिस्तान के क्या हाल है... पाकिस्तान भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर इतना घबराया हुआ है कि पाकिस्तानी सेना पिछले दिनों पत्रकारों का एक दल बार्डर के समीप ले गया। उसके इस हरकत पर फ्रांसीसी न्यूज एजेंसी एएफपी ने पाकिस्तान के इस हरकत को एक दुर्लभ कदम करार दिया। पाकिस्तानी मीडिया डॉन और द न्यूज इंटरनेशनल के मुताबिक वहां सर्जिकल स्ट्राइक के कोई निशान नहीं मिले पर एएफपी ने पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल असीम बाजवा का बयान छापा कि जिसमे बाजवा ने कहा कि उनका इलाका मीडिया के लिए खुला है, आप देख सकते है कि यहां शांति है, यहां कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई, हालांकि एएफपी ने यह भी लिखा बाजवा के दावों की पुष्टि करना संभव नहीं था कि भारतीय सेना ने उन क्षेत्रों में सर्जिकल स्ट्राइक नहीं की। इधर आतंकी दाउद इब्राहिम का समधी जावेद मियांदाद अपने स्वभावानुरुप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गालियों से नवाजा है। पाकिस्तान के पूर्व वायुसेना प्रमुख रह चुके एयर मार्शल असगर खान ने कहा है कि पाकिस्तान को भारत से कभी कोई खतरा नहीं रहा, सच्चाई यह है कि पाकिस्तान ने ही भारत पर ज्यादा हमले किये। इसी बीच भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इतनी विकट परिस्थितियों में भी मानवीय मूल्यों को तरजीह देकर दोनों देशों में सुर्खियां बटोर ली है, जब उन्होने पाकिस्तानी यूथ डेलिगेशन के साथ मित्रवत् व्यवहार किया। हुआ यह कि एक अक्टूबर को पीस फोरम आगाज दोस्ती की कन्वेनर आलिया हरीर ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से अपनी सुरक्षा को लेकर बात की। सुषमा ने आलिया को सुरक्षित वापसी को लेकर भरोसा दिलाया। सुषमा स्वराज ने इस टीम को हृदय को छू लेनेवाली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बेटियों के लिए कोई सरहद नहीं होती। बेटियों का ताल्लुक सबसे होता है।
इसी बीच यूनाइटेड नेशन में रूस के राजदूत और अक्टूबर महीने के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष ने पाकिस्तान को तगड़ा झटका दिया है। उन्होंने यूनाइटेड नेशन जैसी वैश्विक संस्था में कश्मीर मसले और भारत की सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा उठानेवाले पाकिस्तान को स्पष्ट तौर पर झिड़की लगायी है और कह दिया कि यह सुरक्षा परिषद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनावों पर चर्चा नहीं करने जा रहा। संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत विताली चर्किन ने तो मीडिया के द्वारा पूछे गये सवाल पर भी नो कमेंट्स कहकर निकल गये। कुल मिलाकर पूरे विश्व स्तर पर भारत को मिल रही साख और भारतीय सेना को मिल रहे साथ पर अब भारत के कुछ जयचंदों की फौज अंगूलियां उठानी शुरु कर दी है, वह भी क्षुद्रस्वार्थ के लिए। यही भारत की सही इमेज है, जो कभी भी खत्म नहीं हो सकती।
(यह आर्टिकल रांची से प्रकाशित समाचार पत्र आजाद सिपाही में आज के अंक में संपादकीय पृष्ठ 11 पर प्रकाशित है।)

Saturday, October 1, 2016

सर्जिकल स्ट्राइक ने पाकिस्तानियों के बैंड बजा दिये, पूरा पाकिस्तान सदमें में.................

सर्जिकल स्ट्राइक ने पाकिस्तानियों के बैंड बजा दिये, पूरा पाकिस्तान सदमें में
पाकिस्तान की सड़कों पर पिछले दो दिनों से नहीं दीख रहे आतंकी...
भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक को क्या अंजाम दे दिया। पूरा पाकिस्तान ही सदमें में है। पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल आपरेशन के खात्मे के बाद, न तो लश्करे तैय्यबा, न हिजबुल मुजाहिद्दीन और न ही जैशे मोहम्मद के आतंकियों की ओर से इस संबंध में कोई बयान आये है। बात-बात में जमात उत दावा का आतंकी जो भारत के खिलाफ जहर उगलता था, उसकी भी बोलती बंद है। कल तक हर बात में भारत को देख लेनेवाले पाकिस्तान आतंकियों का समूह जो पाकिस्तान की सड़कों पर एक भारी भीड़ लेकर जमा होता था, वो दिखाई नहीं दे रहा। न तो पाकिस्तान के अखबार में उनके बयान नजर आ रहे है और न ही भारत के अखबारों में। चूंकि ये सर्जिकल वार उन आतंकियों के खिलाफ था, जो भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों में लिप्त होते हुए पाकिस्तान की सरजमीं को अपना जन्नत समझते है, ऐसे में उनकी प्रतिक्रिया ज्यादा जरुरी थी, पर हमें लगता है कि जिस प्रकार से भारतीय सेना ने उड़ी का बदला लिया है। अब वे भी समझ गये होंगे कि वे पाकिस्तान में भी सुरक्षित नहीं है। भारतीय सेना उनका हर जगह, उन्हें सबक सिखाने को अब तैयार है। भारत अब पाकिस्तान के इस गीदड़भभकी से भी डरने को तैयार नहीं कि पाकिस्तान एक न्यूक्लियर पावर है।
आश्चर्य इस बात की है कि पूरे पाकिस्तान के ये हाल है कि उसका प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, नेता प्रतिपक्ष और सेना इन सब के बयान सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर समानता लिये हुए नहीं हैं, जबकि इसके ठीक उलट भारत की ओर से भारत के प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, नेता प्रतिपक्ष और सेना के बयानों में समानता है।
यहीं नहीं पहले पाकिस्तानी नागरिक और अब भारतीय नागरिकता प्राप्त कर चुके अदनान सामी के ट्वीट ने पाकिस्तानियों के नींद उड़ा दिये है। अदनान सामी ने ट्वीट कर भारतीय प्रधानमंत्री और भारतीय सैनिकों को आतंक के खिलाफ कार्रवाई करने पर बधाई दे दी है। पाकिस्तानियों ने अदनान सामी के खिलाफ गालियों का बौछाड़ कर दिया है, स्थिति ऐसी है कि अदनान सामी के इस ट्वीट पर पाकिस्तानियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
अगर पाकिस्तान की अखबारों की बात करें, तो उनके भी सुर बदले हुए है, अपने पोर्टलों पर कभी कुछ तो कभी कुछ लिखकर आत्मसंतुष्टि दिखा रहे है, जिसमें डॉन जिसे एक जिम्मेदार अखबार माना जाता है, उसकी ओर से भी गलतियां साफ दिखाई पड़ रही है, जैसे डॉन ने लिख दिया कि पाकिस्तान की ओर से जवाबी कार्रवाई में 8 भारतीय सैनिक मारे गये, जबकि इस खबर में कोई सच्चाई नहीं, बाद में उसने संशोधित किया। यानी एक सर्जिकल स्ट्राइक ने पाकिस्तानियों के दिमाग में ऐसे स्ट्राइक किये है कि पूछिये मत।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री, वहां के सरकार में शामिल अन्य नेता व विपक्ष, यहां तक की मीडिया और सेना तक यह बात मानने को तैयार नहीं कि भारत ने उनसे उड़ी का बदला ले लिया, सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया पर विश्व के अन्य देशों के अखबारों ने सिद्ध कर दिया कि भारतीय सेना ने आक्रामकता दिखाई और पाकिस्तान को बैकफूट पर भेजने में कामयाबी हासिल किये। इसके लिए आप बीबीसी और न्यूयार्क टाइम्स का आधार ले सकते है।
हालांकि ये सवाल पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के लोग पूछ रहे है कि अगर उनके अनुसार भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक नहीं की तो फिर उन्हें बेचैनी क्यूं है। वे इस घटना की गुरुवार से लेकर बार-बार निंदा क्यूं कर रहे है। जब मामला लाइन ऑफ कंट्रोल पर सामान्य घटना से जुड़ा है तो वहां के रक्षा मंत्री और सेना के चेहरे, यहां तक मीडिया में काम कर रहे लोगों के चेहरों पर हवाइयां क्यों उड़ रही। बार –बार परमाणु बम की धौंस कहा गयी। एक गैर-जिम्मेदारानां मुल्क की तरह बयानबाजी करनेवाला देश आज असहाय क्यूं है, ये पाकिस्तान को चिंतन करना चाहिए। क्या वजह है कि आज बांगलादेश, भूटान, अफगानिस्तान, भारत यहां तक ईरान आप से खफा है। एक समय था कि कश्मीर मुद्दे को ही लेकर विश्व के कई देश आपके साथ हो जाया करते थे, पर आपने आतंकियों को ऐसा पाला कि इक्के-दुक्के को छोड़ कोई आपके साथ नहीं।
भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा केरल में दिया गया बयान आज पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है कि हमें गरीबी, बेरोजगारी के लिए लड़ना है, अपने देश को विकसित करने के लिए काम करना है, पर आप तो नरेन्द्र मोदी को सुनने को ही तैयार नहीं। आज पता नहीं कैसे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने स्वयं के द्वारा बुलाये गये फेडरल कैबिनेट की बैठक में गरीबी और बेरोजगारी से लड़ने की बात कह दी, पर वे ये कहना नहीं भूले कि भारत के इस आक्रामक प्रहार का जवाब देने के लिए उनकी सेना तैयार है। वे आज भी कश्मीर को लेकर अपनी नीति स्पष्ट कर दी, कि हम नहीं सुधरेंगे। हम भी जानते है कि पाकिस्तान कभी नहीं सुधरेगा, क्योंकि पाकिस्तानियों को जो इतिहास पढ़ाये जा रहे है, उस मूल में ही भारत के प्रति नफरत कूट-कूट कर भरा जाता है, ऐसे में आप पाकिस्तान से बेहतर संबंध किसी कालखंड में संभव नहीं। हम आपको बता दें कि अगर कश्मीर समस्या हल भी हो जायेगा तो ये मत भूलिये कि ये देश आपको शांति से रहने देगा, क्योंकि इसकी बुनियाद में ही भारत के प्रति नफरत भर दी गयी है, जबकि इसके विपरीत आप भारत के किसी भी शिक्षा केन्द्र में चल रहे पुस्तकों को टटोलें तो उसमें पाकिस्तान के खिलाफ एक भी शब्द नहीं मिलेगा, जिससे यह पता चलता हो कि भारत ने कभी अपने पड़ोसी के खिलाफ सपने में भी बुरा सोचा हो।
(यह आर्टिकल रांची से प्रकाशित समाचार पत्र आजाद सिपाही में आज के अंक में संपादकीय पृष्ठ 11 पर प्रकाशित हुई है।)

Friday, September 30, 2016

भारतीय सेना पहली बार लाइन ऑफ कंट्रोल के पार..................

मोदी ने किये पाकिस्तानी हुक्मरानों के बोलती बंद, भारतीय सेना पहली बार लाइन ऑफ कंट्रोल के पार
भारतीय जनमानस को बहुत बड़ी राहत देनेवाली खबर, बरसों बाद सुनने को मिली। भारत ने पाकिस्तान की नींद उड़ायी है। बरसो बाद भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में एक बड़े हमले को अंजाम दिया और सर्जिकल स्ट्राइक को सफलता पूर्वक संपन्न किया है। इस घटना के साथ ही
भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे विश्व को बता दिया कि अब भारत नियोजित आतंक को नहीं सहेगा, बल्कि उसका जवाब भी देगा। याद करिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण का समय, जब उन्होंने सभी पड़ोसियों को आमंत्रित कर अपने पड़ोसियों के साथ बेहतर संबंध बनाने की ओर कदम बढ़ाया था। याद करिये वे कभी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर भी अचानक पहुंच गये थे, यानी उन्होंने लगातार पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने के प्रयास किये, यहां तक कि पठानकोट में हुए हमले पर भी उन्होंने कड़वे घूंट पीये। भारतीय प्रधानमंत्री के इस कड़वे घूंट पीने और बार-बार संयम अपनाने से पाक हुक्मरानों को लगा कि वे भारत के साथ पिछले इंदिरा युग से चले आ रहे प्रॉक्सी वार को मोदी युग में भी कामयाबी दिलाकर रख देंगे, पर उन्हें पता नहीं कि मोदी, तो मोदी है, जहां जाते हैं, अपनी वाकपटुता और कार्यशैली से सभी को अपना मुरीद बना लेते है, ऐसा मुरीद की सामने वाले शत्रुओं के परम मित्र भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिभा के कायल हो जाते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहनशीलता पर पाक हुक्मरानों ने तो यहां तक कह दिया कि अगर पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार किया तो उसके बम केवल शो पीस के लिए नहीं बना है, यानी हर वक्त धमकी, हर वक्त उन्माद फैलाने की बात, आतंकियों की भी एक जमात बनाना, एक अच्छा आतंकी और दूसरा बुरा आतंकी। हर वक्त भारत को देख लेने की बात, पाकिस्तान की ओर से सुनाई पड़ रही थी। जिसका जवाब पाकिस्तान को देना जरुरी था। इसी बीच उड़ी की घटना और 18 भारतीय जवानों की मौत ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अंदर से हिलाकर रख दिया। जब यह घटना घटी थी तो हम एक-दो दिनों के बाद रांची के खादी बोर्ड के मुख्यालय में पहुंचे थे, जहां खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ, अरुण श्रीवास्तव और कई गण्यमान्य नागरिक उपस्थित थे। मैंने उसी समय कहा था कि उड़ी घटना के बाद, आज जो सोशल साइट्स या भारत के विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बेवजह हमले हो रहे है, शायद उन्हें पता नहीं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे मिट्टी के बने हुए है। मैंने उसी समय कह दिया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि वे इसका बदला जरुर लेंगे तो इसका मतलब है कि वे बदला जरुर लेंगे और लीजिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बदला ले लिया। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो साफ कह दिया था कि कश्मीर के गीत गानेवाले पाकिस्तान के हुक्मरानों से हमें अब बात नहीं करनी। उन्होंने साफ कहा कि आतंकी कान खोलकर सुन लें, हमारा देश उड़ी हमले के शहीदों की कुर्बानी कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि हमसे हजार साल लड़ने की बात कहनेवाले पाक के हुक्मरानों की चुनौती मैं स्वीकार करता हूं।
ऐसे में हम अपने माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बातों पर कैसे विश्वास नहीं करते। गर्व करिये, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज इतिहास बनाया है, पहली बार 1971 में बनी लाइन ऑफ कंट्रोल को भारतीय सेना ने पार किया, जिसका ऐलान संवाददाता सम्मेलन कर भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने किया। उन्होंने बताया कि पैरा कमांडोज हेलिकॉप्टर से एलओसी पहुंचे, फिर पैदल ही पाक के कब्जे वाले कश्मीर में 3 किलोमीटर अंदर घुसकर आतंकियों के 7 कैम्प ध्वस्त कर दिये। इस घटना से पाकिस्तान इतना तिलमिलाया कि उसके प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस स्ट्राइक की निंदा कर दी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का बयान था कि यह सर्जिकल स्ट्राइक पाकिस्तान पर हमला है, उसे कमजोर समझने की कोशिश न समझा जाये।
लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह के अनुसार उन्हें विश्वस्त सूत्रों से सटीक जानकारी मिली थी कि आतंकी एलओसी के साथ लॉन्चपैड्स पर इकट्ठे हुए है। उनका मकसद भारत में घुसपैठ करने आतंकी हमले को अंजाम देना था। भारत ने उन लॉन्चपैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया। इन हमलों के दौरान आंतकियों और उनके समर्थकों को भारी नुकसान हुआ है। कई आतंकियों को मार गिराया गया है। इस घटना की जानकारी पाकिस्तानी सेना को भी दे दी गयी। इधर पाकिस्तान इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने स्वीकार किया कि भारत ने भीमबेर, हॉटस्प्रिंग, केल और लिपा सेक्टर पर हमले किये है। इधर पाकिस्तान सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि इस हमले में उसके दो सैनिक मारे गये और नौ घायल हुए। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के इस बयान को पाकिस्तानी अखबार डान ने प्रमुखता दी है। हमें अपने भारतीय सेना पर गर्व है, हम भारतीयों को गर्व है, ऐसे कमांडोज पर जिन्होंने उड़ी की घटना का बहुत जल्द ही बदला ले लिया। हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उन नीतियों की भी प्रशंसा करते है, जिन नीतियों के कारण आज पाकिस्तान पूरे विश्व में मुंह दिखाने के लायक नहीं। हम प्रशंसा करते है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जिनके कार्यों से आज पूरे विश्व में भारत का मान बढ़ा है, भारत की साख बढ़ी है और विश्व के विभिन्न देशों में रह रहे भारतीय शान से स्वयं को भारतीय कहलाने पर गर्व महसूस कर रहे है।
(यह आर्टिकल आज रांची से प्रकाशित आजाद सिपाही नामक समाचार पत्र में संपादकीय पृष्ठ संख्या 11 पर प्रकाशित हुई है।)

Saturday, May 28, 2016

2 साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल के...

अगर एक शब्द में कोई पूछे इस सवाल के जवाब तो मैं यहीं कहूंगा – प्रशंसनीय।
याद करिये, जब नरेन्द्र मोदी ने शासन का बागडोर संभाला था तो देश की क्या स्थिति थी? सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार और पूरे विश्व में भारत की गिरती साख का था और इन दोनों मुद्दों पर नरेन्द्र मोदी ने शानदार तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहण किया। दो साल हो गये पर विपक्षी दल के किसी भी नेता में ये हिम्मत नहीं कि नरेन्द्र मोदी ही नहीं बल्कि नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल किसी भी मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दें, जब इन विपक्षियों को कुछ भी नहीं मिल रहा तो वे ऐसे-ऐसे आरोप लगा रहे है, जिसे देख और पढ़कर सामान्य जनता अपनी हंसी को नहीं रोक पा रही, उन्हीं आरोपों में से एक आरोप है केजरीवाल की पार्टी द्वारा लगाया गया प्रधानमंत्री पर डिग्री संबंधी आरोप है, जिसका कोई भ्रष्टाचार से लेना-देना नहीं, सिवाय रायता फैलाने के। भ्रष्टाचार पर विराम लगाकर और दूसरी ओर संपूर्ण विश्व में भारत की साख को स्थापित कर नरेन्द्र मोदी ने सिद्ध कर दिया कि भारत में फिलहाल उनका कोई विकल्प नहीं। अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात साथ ही पड़ोसी भूटान, नेपाल, चीन, पाकिस्तान, मालदीव, श्रीलंका, बांगलादेश जैसे देशों के साथ मधुर संबंध स्थापित कर भारत की शान बढ़ा दी। भारत और बांगलादेश सीमा विवाद का 40 साल पुराना विवाद सदा के लिए समाप्त कराया। जब नेपाल में भूकम्प के रूप में त्रासदी आयी, सबसे पहले भारत नेपाल के साथ खड़ा हुआ, जिसका संपूर्ण विश्व ने तहेदिल से समर्थन और प्रशंसा किया, यहीं नहीं यमन में जब भारतीयों के उपर संकट गहराया, तब भारत का उस वक्त कौन ऐसा देश था, जिसने प्रशंसा नहीं किया, यहां पर तो भारत ने विदेशियों को भी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कल तक नरेन्द्र मोदी को वीसा नहीं देने की बात करनेवाला अमरीका आज उनके कशीदे पढ़ रहा है, आखिर क्या खास है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में...
नरेन्द्र मोदी की खासियत पर ध्यान दीजिये...
देश में तीन ही शानदार प्रधानमंत्री हुए, जिन पर किसी भी किस्म का दाग नहीं, जो अपनी काबिलियत के आधार पर प्रधानमंत्री बने, न कि किसी की कृपा या कहने पर...
वे पहले प्रधानमंत्री थे – लाल बहादुर शास्त्री, दूसरे अटल बिहारी वाजपेयी और तीसरे नरेन्द्र मोदी।
बाकी जितने लोग हुए, उन्होंने किसी न किसी की कृपा या जोड़-तोड़ का सहारा अवश्य लिया। आज नरेन्द्र मोदी को ही लीजिये, उन्होंने परिवारवाद पर चोट करते हुए, दिखाया कि उनके लिए देश ही सर्वोपरि है, जब से वे सत्ता में आये है, तब से लेकर आज तक उन्होंने कभी भी छुट्टी ही नहीं ली, बहुत ही कम खर्च में वे कई देशों की यात्रा की, साथ ही भारत के संदेश को वहां के जन-जन तक पहुंचाया, ये पहला मौका था कि जब भारत का प्रधानमंत्री, दूसरे देशों में बैठे अपने नागरिकों और वहां की जनता के साथ, उसी धरती पर इस प्रकार संवाद स्थापित कर रहा था, जैसे लगता हो कि वह कोई वहां चुनावी सभा को संबोधित कर रहा हो।
पहली बार भारत के किसी प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र संघ को योग पर झकझोरा और पूरे विश्व ने भारत की देन योग को स्वीकारा, देखते ही देखते संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत के योग को स्वीकृत करते हुए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की। यहीं नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता को जनांदोलन बना दिया, आज पूरा देश स्वच्छता अभियान से जुड़ गया है, कई निजी स्वैच्छिक संस्थाएं और बड़े-बड़े नेता-अभिनेता इस अभियान से जुड़कर देश की दशा – दिशा बदलने के लिए निकल पड़े। देश की बेटियों को मान बढ़ाया, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ अभियान चलाया, सुकन्या समृद्धि योजना से बालिकाओं के बेहतर भविष्य के लिए कार्यक्रम चलाये। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना चलाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए विशेष योजना चलायी। जन-धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना चलाकर देश की गरीब जनता को एक नई आर्थिक ताकत दी, वहीं स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, डिजिटल इंडिया आदि चलाकर देश को हर स्तर पर संबल प्रदान करने की सफल कोशिश की। पहली बार बिना किसी भेदभाव के सबको एक साथ ले चलने की बात कही गयी, ये नहीं कि अल्पसंख्यक कहकर उन्हें बहुसंख्यक से अलग करने और दलित-पिछड़े कहकर उन्हें अन्य से भेदभाव करने का बीज रोपा गया। सबका साथ- सबका विकास के नारे के साथ सभी को बराबर का मौका देते हुए, सभी को देश बनाने के लिए उनके मनोबल को बढ़ाया गया, जिससे देश काफी आगे निकलने की कोशिश में है। जरा देखिये जहां पूरा विश्व आर्थिक मंदी का शिकार है, वहीं भारत की आर्थिक विकास दर आज भी 7.57 प्रतिशत है, जो पूरे विश्व को आश्चर्यचकित कर रहा है, ये सब नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता का कमाल है, ये कमाल है, उस व्यक्ति का जिसकी सोच पूर्णतः देश को समर्पित है, यहीं कारण है कि वर्तमान अमरीकन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इसी सोच पर टिप्पणी की थी कि यह व्यक्ति की पहली और अंतिम सोच भारत की प्रगति है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देना हो, लोगों की क्रय शक्ति बढ़ानी हो, देश की अर्थव्यवस्था को एक मुकाम देना हो, सब में प्रधानमंत्री का विजन क्लियर है। हाल ही में वे 24 अप्रैल को जमशेदपुर आये, मौका था राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन का, उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा था कि वे चाहते है कि गांधी के सपनों का भारत बनाएं, और ये तभी बनेगा जब गांव की पंचायत सशक्त होगी, जब गांव के पंचायत सही निर्णय लेने प्रारंभ करेंगे, वे एक साल में एक योजनाएं बनायेंगे और उसे मूर्तरूप देंगे, इसी से ग्रामोदय होगा और जब ग्रामोदय होगा तो भारत के उदय होने से कोई रोक नहीं सकता। आज का प्रधानमंत्री अपने बेटे या अपनी पत्नी को सुख प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नहीं बना है, उसकी विजन है, भारत निर्माण की, वह निकल पड़ा है, निर्माण के लिए, भारत बन रहा है, भारत बदल रहा है, आज का युवा भी अपने प्रधानमंत्री के साथ है, तभी तो बेंगलूरु के एक शिक्षण संस्थान में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने वहां उपस्थित युवाओं से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संबंधित कुछ सवाल पूछे तो उन्हें उनकी आशा के अनुरूप उत्तर नहीं मिले। ये घटना साफ बताती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की युवाओं की सोच बदली है और जब युवा की सोच बदलेगी तो देश का तकदीर जरूर बदलेगा। मेरा भारत बदल रहा है, हमारा भारत बदल रहा है, इसमें कोई मत नहीं कि पहली बार हुआ है कि विश्व में कही भी भारतीय है, आज वह शान से बोल रहा है कि वह भारतीय है, वह जहां भी हैं, उसके दिल में भारत का दिल धड़क रहा है, और ये सब हुआ है मात्र दो वर्षों में, जरा सोचिये दो वर्षों में ये हाल है, तो पांच वर्षों में क्या होगा? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आप के इस बीते दो साल के लिए आपको दिल से बधाई।

Monday, December 28, 2015

कहीं मोदी जी, जवाब कर न लगा दें...........

एक स्कूल में...
मैडम – बच्चों से,
बच्चों बताओं भाजपा व कांग्रेस के शासनकाल में क्या समानता है?
बच्चे – मैडम,
1. कांग्रेस राहुल और राबर्ट वाड्रा के लिए काम करती है और भाजपा अंबानी और अडानी के लिए...
2. कांग्रेस ने भी महंगाई का रिकार्ड बनाया, और भाजपा ने भी रहर दाल और तेल के माध्यम से महंगाई का रिकार्ड बना चुकी है...
3. कांग्रेस के समय भी पाकिस्तान भारत को लतियाता था, उसके वीर बांकुड़ों का सर काट कर ले जाता था फिर भी कांग्रेस के लोग पाकिस्तान की जय-जय करते थे, आज भाजपा के समय भी पाकिस्तान हर बार सीज फायर का उल्लंघन कर भारत को लतियाता है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नवाज शरीफ के मां का चरण छू कर गदगद हो जाते है...
4. कांग्रेस भ्रष्टाचार के कारण ही गयी, भाजपा भी जायेगी, क्योंकि अरुण जेटली जैसे लोगों ने भाजपा को मिट्टी में मिलाने के लिए हर संभव कार्य करना प्रारंभ कर दिया है...
5. कांग्रेस शासनकाल में कांग्रेसी अपने कार्यकर्ताओं को अपने पास फटकने नहीं देते थे और उन्हें गरियाने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे तथा अपने चापलूसों और चरणोदक पीनेवालों को धन-धान्य से परिपूर्ण कर देते थे, अब भाजपावाले भी उसी का अनुसरण कर रहे है...
6. और सबसे बड़ी बात कांग्रेस में भी अनुशासनहीनता का रिकार्ड बनानेवालों की कोई कमी नहीं, ठीक उसी प्रकार भाजपा में भी अनुशासनहीनता का रिकार्ड तोड़नेवालों की कोई कमी नहीं...
मैडम – वाह बच्चों, तुमने सही उत्तर दिये...
तुम्हें मिलते है, दस में दस अंक...
मैडम – बच्चों से, एक और सवाल...
क्या अच्छे दिन आ गये?
बच्चे – जी हां...अच्छे दिन आ गये...
भाजपा शासित राज्यों में अंबानी और अडानी के समूह उदयोग लगा रहे है, और उन्हें हर प्रकार की सुविधा मिल रही है और जनसामान्य दो रोटी के लिए तरस रही है...
रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेलयात्रियों को सब्जबाग दिखाकर प्रतिदिन लूट रहे हैं कभी सुरक्षा व स्वच्छता के नाम पर तो कभी तत्काल टिकट के दाम बढ़ाकर, यानी जनसामान्य तो अब रेल का नाम सुनते ही डर जाती है, ये कहकर कि पता नहीं कब रेलमंत्री जेबकतरे की तरह आसानी से उनके पाकेट से रुपये निकाल लें और वे देखते रह जाये...
बच्चे – मैडम अब छोड़ दीजिये, और सवाल मत पूछिये, नहीं तो हो सकता है कि जवाब देने पर भी मोदी भाई, सेवा कर के जैसा, जवाब कर न वसूलने लगे...
शिक्षक – हा हा हा हा...................

Monday, January 6, 2014

जब पत्रकार कलाकार हो जाये तो क्या होगा..........

जब पत्रकार कलाकार हो जाये तो क्या होगा....................
वहीं होगा जो आप देख रहे हैं
1. दिल्ली में बैठा राष्ट्रीय चैनलों का एंकर आपायण गायेगा।
2. अरविंद केजरीवाल की स्तुति गायेगा।
3. अरविंद की हर गलतियों पर पर्दा डालेगा।
4. अरविंद को जो पसंद आयेगा, वहीं बात करेगा।
5. पाकिस्तान का प्रधानमंत्री, विदेशों में भारत के प्रधानमंत्री की जब इज्जत उतारेगा तो उस समय उसके साथ बैठकर नाश्ता करेगा।
6. अपनी पत्रकारिता की जमीर बेचेगा।
7. जब संसद में बैठे सांसदों को पैसे से खरीदा जायेगा, तो उस वक्त की विजूयल उसके पास रहने के बावजूद उस विजूयल को नहीं दिखायेगा, जब देश और विदेश में उस पर थू थू होगी तब जाकर, बहुत अर्से बीत जाने के बाद कांट छांट कर समाचार दिखायेगा, तब तक उक्त समाचार की अहमियत भी नहीं रह जायेगी।
8. देश का सबसे बड़ा उद्योगपति या उसका परिवार कुछ भी अतःतः करेगा, तो उसके खिलाफ वह आवाज नहीं उठायेगा।
9. एक नहीं कई तरीकों से पैसे कमायेगा।
10. अपनी अंतरात्मा को बार-बार बेचेगा और ढिंढोरा पीटेगा कि दुनिया का सबसे बडा़ और नेक पत्रकार वहीं हैं, वहीं हैं, वहीं हैं............
11. एक ही पत्रिका में खुद भी लिखेगा और अपनी पत्नी से भी लिखवायेगा।
12. राज्य सरकार से मिलनेवाली किसी भी मीडिया फैलोशिप को गलत तरीके से पाने की कोशिश करेगा, और दूसरो को भी दिलवायेगा, एक कोशिश और करेगा कि वह अपनी पत्नी को जरुर उपकृत करवाये।
13. पत्रकारिता की आड़ में कई संस्थानों में अपनी गाड़ी भी चलवायेगा, कई कंपनियों का काम भी करवायेगा और अपनी पत्नी अथना प्रेमिका को स्विटजरलैंड की सैर करवायेगा।
पत्रकारिता में फैले इन दुराचारियों से पत्रकारिता को मुक्त कराइये,
देश को आगे बढ़ाईये............ 

Thursday, May 2, 2013

सरबजीत की बहन दलबीर की ललकार के बावजूद भारतीय जगेंगे, मनमोहन और सोनिया की जमीर जगेगी, इसकी संभावना हमें दूर - दूर तक नहीं दीखती........

भारतीय बेटी और बहन - दलबीर कौर ने आज मीडिया के समक्ष जो बाते कही, वो दिल को दहलानेवाला हैं। अपने भाई सरबजीत की पाकिस्तान में की गयी हत्या के बाद जो दलबीर ने कहा, वो प्रमुख वाक्यांश इस प्रकार हैं...................
पाक में चुनाव के चलते सरबजीत की हत्या।
भारतीय होने की वजह से सरबजीत का कत्ल।
लाहौर के जिन्ना अस्पताल की घटना - सरबजीत का हाल पूछने पर डाक्टर हंसते थे।
सरबजीत की बहन ने कहा - अंसार बर्नी, पाकिस्तान का बड़ा मानवाधिकार कार्यकर्ता, जिसने कहा 25 करोड़ दो, सरबजीत लो।
चुनाव के लिए जरदारी ने मरवाया।
पाक को पता था सरबजीत जिंदा नहीं हैं।
सरबजीत देश के लिए शहीद हुआ।
पाक मे हमारे साथ सही बर्ताव नहीं।
सही कोशिश होती तो सरबजीत जिंदा रहता।
पाक ने भारत की पीठ पर छुरा घोपा।
अब पाक को बर्दाश्त करने का वक्त नहीं।
बेईमान हैं पाक, कायर हैं पाक।
पाक को सारी दुनिया को जवाब देना होगा।
और अब दुनिया का सबसे घटिया मीडिया बीबीसी ने क्या लिखा, उसे भी जानिये - बीबीसी ने जो समाचार बनायी है। उसमें उसने सरबजीत को भारतीय जासूस बताया हैं। पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाकर बीबीसी ने बता दिया कि वो भी भारत और भारतीयों के प्रति क्या रुख रखता हैं, यानी उसने भी भारत के साथ पत्रकारिता के नाम पर गद्दारी की सारी सीमा रेखा लांघ दी। ऐसे भी बीबीसी कभी भी भारत और भारत के प्रति संवेदना नहीं दिखायी, इसलिए इस गद्दार बीबीसी से भारत प्रेम की संभावना तलाशना मूर्खता के सिवा कुछ भी नहीं। पता नहीं, कैसे भारतीयों का एक वर्ग - बीबीसी से प्रेम रखता हैं और उससे आजीविका चलाता हैं। मुझे तो बीबीसी न कल अच्छा लगता था और ऩ आज ही अच्छा लगा, क्योंकि इस बीबीसी ने भारत के प्रति आज भी आग उगल कर करोड़ों भारतीयों के छाती पर गहरे जख्म दिये हैं। 
पाकिस्तान और चीन से भारतीयों के प्रति प्रेम की संभानाएं तलाशना भी कायरता हैं। हमारे देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ( सोनिया गांधी के इशारे पर ठुमके लगानेवाले प्रधानमंत्री ), या अन्य मंत्रालय संभाल रहे मंत्रियों का समूह जो सोनिया के इशारे पर ठुमके लगाते हैं, उन्हें सरबजीत की हत्या से क्या लेना - देना, एक बार फिर घड़ियाली आंसू बहायेंगे। दलबीर को झूठे दिलासे दिलायेंगे और आगे  बढ़ जायेंगे। सरबजीत की हत्या के बाद भी शायद भारतीयों के आंख खुले। क्योंकि मैं जानता हूं कि ये भारतीय कुछ दिनों तक पाकिस्तान को भला - बुरा कहेंगे और फिर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने, पाकिस्तान के साथ संगीत का कार्यक्रम शेयर करने और पाकिस्तानियों को भारत में बुलाकर उसका स्वागत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इसके बदले पाकिस्तान उसके बदले में हर जगह, हर मोर्चे पर हमें नीचा दिखायेगा, वो हमारे जवान का सरकलम करके, हमारी गैरत को ललकारेगा और हम अपनी सेनाओं को सरहद तक ले जाकर, फिर अपने अपने बैरकों में वापस ले आयेंगे। 
हद तो तब हो गयी कि चीन हमारी सीमा में 20 किलोमीटर अंदर घूस आया हैं और हमारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ( सोनिया गांधी के इशारे पर ठुमके लगानेवाला प्रधानमंत्री ) कहता हैं कि इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए। हां प्रधानमंत्री जी, जरुरत क्या हैं तूल देने का। आपका जमीन तो गया नहीं हैं, आप तो आराम से सोनिया के इशारे पर ठुमके लगाते हुए प्रधानमंत्री कहलायेंगे और फिर दूसरे देश जाकर आराम फरमायेंगे। आपको क्या पता कि देश की मिट्टी क्या होती हैं। देश के लिेए मरना क्या होता हैं। देश को अपना मानना क्या होता हैं। आप मस्ती मारिये, और भारत के सम्मान को चीन और पाकिस्तान के पैरों तले रौंदवाते जाइये। ऐसे भी भारत की जनता को क्या चाहिए, आप और आपकी पार्टी को अच्छी तरह से मालूम हैं। पर ये जान लीजिये कि जिस दिन भारत की जनता देशभक्ति के पागलपन से लवरेज हुई तो फिर आप लोग कहां होंगे, शायद आपको पता नहीं। फिलहाल सभी अपने - अपने में मस्त हैं। आप भी मस्त रहिए। इतनी गद्दारी के बावजूद, चीन द्वारा 20 किलोमीटर जमीन ताजा - ताजा हड़पने के बावजूद आपके लिए एक अच्छी खबर कि आप कर्नाटक में वापस आ रहे हैं, और ये सारी घटनाएं सिर्फ भारत में ही दीखती हैं, क्योंकि देश की जमीन गवां देने वाली सरकार की वापसी सिर्फ भारत में ही होती हैं, दूसरे देशों में नहीं...........।

Friday, March 15, 2013

देश गलत हाथों में तो नहीं..................................

पाकिस्तान कश्मीर पर अपना दावा ठोकता है................
पाकिस्तान कश्मीर के एक तिहाई भाग पर अवैध रुप से कब्जा जमा रखा है....................
पाकिस्तान कश्मीर को लेकर, कई युद्ध हमसे लड़ चुका हैं और इसके लिए वो असंख्य युद्ध लड़ने का, समय - समय पर संकल्प भी लेता रहता है.................
पाकिस्तान ने कभी भी हमसे दोस्ती नहीं निभाई, बल्कि शत्रुता उसके रोम रोम में भरा पड़ा है...............
पाकिस्तान ने हमारे संसद पर हमला बोला...............
पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध के दौरान हमारे पांच सौ से अधिक जवानों को मौत के घाट उतार डाला.........
पाकिस्तान और उसका आईएसआई भारत के विभिन्न महत्वपूर्ण शहरों में आतंकी विस्फोट करके, हमसे करीब पच्चीस - तीस वर्षों से परोक्ष युद्ध लड़ रहा हैं..................
उसने भारत में एक नया संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन बना डाला हैं, जिसको लेकर वो पूरे देश में भारत के खिलाफ ऐसा नफरत पैदा कर रहा हैं कि इससे बचना भारत के लिए मुश्किल की घड़ी हैं..............
हाल ही में कई साल पहले इनके आकाओं ने दस आतंकियों की खेप मुंबई में भेजी, जिन्होंने मुंबई में ऐसा कोहराम मचाया कि उस आतंक के सदमे से अभी तक देश निकल नहीं पाया...................
हाल ही में इसके आतंकी संगठनों ने कश्मीर में हमारे एक जवान का सिर काटकर ले गये.................
हाल ही में कश्मीर के सीआरपीएफ के कैंप पर इन्होंने आतंकी हमले कर कई जवानों को मार डाला...........
और 
अब एक नयी आंतकी घटना, पाकिस्तानी संसद ने अफजल की फांसी पर भारत के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया.....................
ऐसे तो जितने आतंकी घटनाएं पाकिस्तान ने भारत में कराये हैं, उसका लेखा जोखा ठीक से लिया जाये तो अब तक लाखों भारतीयों की इन आंतकी घटनाओं में जान जा चुकी हैं, पर हमारे देश के पालिटिशियनों को देखिये..............
खासकर कांग्रेसियों को, जिनके दिल में भारत, भारतीय सैनिकों और भारतीय नागरिकों के लिए जरा भी रहम नहीं हैं, वे क्या करते हैं। ये जानते हुए कि पाकिस्तान हमारे सैनिक का सर काट कर ले गया है उस पाकिस्तान के प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ का जयपुर में शानदार स्वागत करते है, उनके साथ भोज करते है। इससे बड़ी शर्मनाक घटना भी कोई हो सकती हैं क्या.......................
हमें तो इनकी देशभक्ति पर ही प्रश्नचिह्न लगता हैं..............
इन पालिटिशियनों को देखिये, जब इनके खानदान के किसी भी व्यक्ति का जब कोई आतंकी संगठन अपहरण कर लेता हैं, तो वे अपने परिवार के सदस्य को बचाने के लिए ये पालिटिशियन कुख्यात आतंकियों को छोड़ देते हैं ( याद करिये वी पी सिंह के शासनकाल में मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद को छुड़ाने के लिेए कई आंतकी छोड़ दिये गये थे).......................
जिस देश में नेताओं का ऐसा चरित्र हो, उस देश का भी कोई सम्मान होता हैं या कोई अन्य देश सम्मान करता है क्या........उत्तर होगा - कभी नहीं.
अब एक नयी घटना देखिये...................
भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोप में भारत के जेल में बंद दो इतालवी नागरिकों को छोड़ दिया गया। ये दोनों नागरिक जैसे ही इटली पहुंचे, वहां की सरकार ने भारत को दो टुक जवाब दिया कि वो अपने इन दो इतालवी नागरिकों को भारत के हाथों नहीं सौंपेगा, गर भारत को लगता हैं कि ये दोषी हैं तो वो अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाये। 
इसके बाद क्या हुआ, वहीं जो होता हैं, हमारे देश की सरकार, सांप के बिल में घूस जाने के बाद, बिल के उपर लाठी पटकने लगी..................
आश्चर्य तो इस बात की हैं कि जब इटली प्रकरण पर कई चैनलों ने कांग्रेसी नेताओं को बहस के लिए अपने यहां बुलाया तो इन्होंने आने से इनकार कर दिया। ये घटना क्या बताती हैं। हमें लगता हैं कि ज्यादा बताने की जरुरत नहीं। इनका भारत प्रेम साफ झलक जाता हैं........................
अब बात आती हैं, जिस देश में सरकार में ऐसे लोग शामिल हो, जो अपने देश के प्रति वफादार न होकर, अपने परिवार और ऐसे लोगों के प्रति वफादार हो, जिनका दिल भारत के लिए धडकता ही न हो, तो क्या ऐसे लोगों के हाथों में भारत सुरक्षित हैं या यूं ही भारत, पाकिस्तान और अन्य भारत विरोधी देशों के हाथों अपमानित होता रहेगा...................
ये भारत से प्यार करनेवाले नागरिकों के सामने यक्ष प्रश्न हैं कि क्या भारत को घटिया स्तर के नेताओं, अपनी जमीर बेचनेवाले नेताओं के हाथों सौपकर निश्चिंत हो जायेंगे..................
जरा सोचिये................
क्योंकि फिलहाल देश गलत हाथों में है........................

Saturday, November 26, 2011

पता नही पाकिस्तान भारत और हिन्दूओं से इतनी नफरत क्यों करता है...........

पाकिस्तान में बनी फिल्म बेदारी से लेकर आज के जमाने में बनी फिल्म खुदा के लिए तक में भारत और भारत में रहनेवाले हिंदुओं के प्रति इतनी ऩफरत क्यों भरी रहती हैं। हमें आज तक समझ में नहीं आया, जबकि जन्म से लेकर आज तक मैंने कोई ऐसी भारतीय फिल्में नहीं देखी या ऐसी भारत में कोई पुस्तकें नहीं देखी या पढ़ी जो पाकिस्तान से नफरत का पाठ पढ़ाती हो। पता नहीं क्यों पाकिस्तानी फिल्मों में भारत और हिंदुओं के प्रति नफरत क्यों भर दी जाती हैं, कहीं ऐसा तो नहीं कि भारत और हिंदुओं का विरोध, वहां फिल्में हिट होने का आधार होती हैं, गर ऐसा हैं तो हम ये कह सकते हैं कि ये ऩफरत पाकिस्तान को और नर्क बना देगा। जरुरत हैं ऩफरत की जगह प्यार का पाठ याद करने और इसे सींचने की। हम अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में भी ऐसे लोगों की संख्या हैं जो पाकिस्तान से शत्रुता रखते हैं और पाकिस्तान में भी ऐसे लोग हैं जो भारत से शत्रुता रखते हैं, पर क्या इन दोनों देशों में एक दूसरे से शत्रुता रखनेवालों की संख्या इतनी अधिक हैं, जो प्रेम शब्द को ही मिटा दें। गर प्रेम शब्द ही मिटा दोगे तो काहे का हिंदु और काहे का मुसलमान। तब तो, तुम दोनों से अच्छे तो वो जाहिल हैं, जो मंदिर और मस्जिद दोनों के दरवाजे पर बैठकर, भीख मांगकर, अपनी दुनिया चला रहे होते हो, एक तरह से सीख भी देते हैं कि जिंदगी क्या हैं.........................।
ऩफरत कैसे भरी जा रही हैं -- पाकिस्तान में उसकी बानगी देखिये।
1954 में भारत में एक फिल्म बनी जागृति। जिसके गीत लिखे थे - पं. प्रदीप ने। उनके ये गीत आज भी अमर हैं और भारतीय स्वतंत्रता दिवस हो या गणतंत्र दिवस, सभी में ये खूब गाये और गंवाये जाते हैं। शायद ही कोई भारतीय हो, जो इस दिन इनके गाने न सुन पाये हो। मैं इनके ज्यादातर गीतों को यहां उदाहरण बनाना नहीं चाहता, पर एक गीत का उदाहरण जरुर देना चाहुँगा। एक गाना था जागृति में जिसके अंतरा थे -- आराम के तुम भूल भूलैंया में न भूलों, सपनो के हिंडोंले में मगन होके ना झूलो, अब वक्त आ गया मेंरे हंसते हुए फूलों, उठो छलांग मार के आकाश को छूलो, आकाश को छूलो, तुम गाड़ दो गगन में तिरंगा उछाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के। इस फिल्म में जिस बालकलाकार ने काम किया था, उसका नाम था रतन कुमार, जो मुस्लिम बाल कलाकार था। बाद में ये पाकिस्तान का रुख किया और इसनें 1957 में बेदारी बनायी, वहां जाकर उसने गीत का क्या पोस्टमार्टम कराया जरा सुनिये -- लेना हैं ये कश्मीर तुम ये बात न भूलो, ये बात न भूलों, कश्मीर में लहराना हैं झंडा उछाल के, इस मुल्क को रखना मेरे बच्चों संभाल के। यहीं नहीं -- दे दी हमें आजादी बिना खडग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल के तर्ज पर मो. अली जिन्ना के शान में इसनें गाना गाया -- यू दी हमें आजादी की दूनिया हुई हैरान, ऐ कायदे आजम तेरा अहसान हैं अहसान। इस गीत के माध्यम से गांधी को जिन्ना के सामने बौना और बेवकूफ दिखाने की कोशिश की गयी थी। कहां गांधी और कहां जिन्ना। गांधी आज विश्वव्यापी हो चुके और जिन्ना क्या हैं वो पाकिस्तान के लोग ही बेहतर बता सकते हैं। आज गांधी के जन्मदिवस पर पूरा विश्व 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाता हैं, क्यों मनाता हैं, हमें लगता हैं बताने की जरुरत नहीं। आकाश की ओर हम थूंकेंगे तो वह थूक मेरे उपर ही आकर गिरेगा। ये जान लेना चाहिए। ये उदाहरण इसलिए मैं दे रहा हूं कि एक पं. प्रदीप हैं जो अपने गीतों के माध्यम से अपने बच्चों में संस्कार डाल रहे हैं और कह रहे हैं कि भारत को कहां ले जाना हैं और पाकिस्तान की सोच देखिये वो सिर्फ कश्मीर पर ही आकर अटक जाता हैं, अरे कश्मीर तक अटकोगे तो कैसे अपने देश को आगे बढ़ाओंगे। पूरी दुनिया में अपना नाम और चरित्र दिखाओ ताकि तुम्हें लोग कहें कि हां एक पाकिस्तान की सोच कुछ विशेष प्रकार का हैं।
यहीं नहीं एक फिल्म देखी तेरे प्यार में, जिसमें पाकिस्तानी अभिनेता एक भारतीय सैनिक के केवल हाथ नहीं मिलाने पर पूरे भारत के हिदुओं पर ही गंदी टिप्पणी करते हुए कहता हैं कि पता नहीं कैसे यहां मुसलमान रहते होंगे, इस दोजख में। क्या एक भारतीय सैनिक किसी पाकिस्तानी नागरिक से हाथ नहीं मिलायेगा तो क्या पूरे देश के सौ करोड़ हिंदु गलत हो गये। इसी तरह इस फिल्म में तिरंगे का अपमान करते हुए दिखाया जाता हैं। और अब बात हाल ही में बनी फिल्म खुदा के लिए में, जिसमें इसी अभिनेता से एक विदेशी अभिनेत्री पूछ रही होती हैं कि पाकिस्तान कहां हैं। ये अभिनेता पाकिस्तान की चौहद्दी बताकर बता रहा होता हैं कि पाकिस्तान कहां हैं, पर जैसे ही वह भारत का नाम लेता हैं। वो विदेशी अभिनेत्री कहती हैं कि ओह इंडिया नेवर, आई लाईक इंडिया, हेयर इज ताजमहल। अभिनेता बोलता हैं कि यू नो, हू मेड ताजमहल। विदेशी अभिनेत्री पूछती हैं - हू। पाकिस्तानी अभिनेता बोलता हैं कि शाहजहां, जस्ट लाईक मी। ही वाज मुस्लिम। देन पाकिस्तान ऐंड इंडिया आर वन। शर्म आती हैं ऐसी सोच पर। शर्म आनी चाहिए, ऐसे संवाद लिखनेवाले लेखक, और फिल्म निर्माताओं पर। क्या एक मुस्लिम होने से सब कुछ ठीक हो जाता हैं और हिंदु हो जाने से सब कुछ गलत हो जाता हैं। ये कुछ उदाहरण हैं जो पाकिस्तानी फिल्म इंडस्ट़ीज में काम करनेवाले लोगों की सोच को दर्शाता हैं और जब ऐसी सोचवाली फिल्में वहां बनेंगी तो वहां का समाज कैसा बनेगा। आप सोच सकते हैं. यहां के बुद्धिजीवियों की कैसी सोच हैं।
ये तो रही फिल्मों की बात, आये दिन पाकिस्तानी समाचार पत्रों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में, तथा विदेशी समाचार जगत में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर किस प्रकार का अत्याचार होता हैं। पटी रहती हैं। पाकिस्तान में हाल ही में बाढ़ आया और उस बाढ़ में हिंदु बाढ़पीड़ितों को गोमांस परोस दिया गया, जब हिंदु भड़के तो सरकार और सरकार के नुमांइदों ने अपनी गलती स्वीकारी। यहीं नहीं पाकिस्तानी हिंदुओं की बेटियों का अपहरण करना, और उन्हें जबरन मुस्लिम बनाकर, उनसे शादी करना तो वहां आम बात हैं और अगर आपने उसका विरोध किया तो बस हो जाईये, उपर जाने के लिए तैयार। क्योंकि वहां की अदालत भी, आपको ठोकर ही मारेगी। पाकिस्तान में मंदिरों की क्या स्थिति हैं, वहां के अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति हैं, ये जानना हैं तो हाल ही में पर्यटन के नाम पर पाकिस्तान से लौटे सैकड़ों हिदु परिवार जो अब पाकिस्तान लौटना नहीं चाहते, उनके बयान सुन और पढ़ लीजिये पता लग जायेगा कि आखिर वे अपने वतन क्यों नहीं लौटना चाहते। पाकिस्तान बताये कि उसके देश में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति हैं, अब तक कितने लोग राष्ट्रपति अथवा पाकिस्तान के सर्वोच्च पदों पर पहुंचे हैं और हम बताते है कि जिन मुसलमानों की वो बात करते हैं और उनके दुख दर्द पर बेवजह चिल्लाते हैं, हम बताते हैं कि भारत में मुसलमानों की क्या स्थिति हैं। हमें तो बताने की जरुरत भी नहीं, पूरा विश्व जानता हैं कि भारत में अल्पसंख्यक किस प्रकार रह रहे हैं। यहां के अल्पसंख्यकों की जनसंख्या में वृद्धि हो रही हैं, पर पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या में लगातार गिरावट क्यों। कमाल हैं चलनी दूसे, सूप के, जिन्हें बहतर छेद।
पाकिस्तान के लोगों को जान लेना चाहिए कि नफरत से नफरत बढ़ती हैं, प्यार की सीख, सर्वाधिक जरुरी हैं। इसलिए प्यार करना सीखे और सीखाएँ, और भारत से ज्यादा प्यार करें, क्योंकि हम आपके सर्वाधिक निकट हैं, हमारे पुरखे और आपके पुरखे एक ही हैं, वेवजह खून की नदियां बहाने का ख्वाब पालकर कोई आप तीस मारखां या हम तीसमारखां नहीं बन जायेंगे।
और अगर आप ये सोचते हैं कि पूरे पाकिस्तान से हिंदुओं को मिटाकर या अल्पसंख्यकों का नामोनिसां मिटाकर आप महान बन जायेंगे तो ये आपकी सोच, आपको मुबारक। नफरत की आंधी में जन्म लेकर, आपने क्या पाया। आपने कभी सोचा। हमने क्या गंवाया और हमें क्या मिला, आपने सोचा, नहीं सोचा और आप सोचना भी नहीं चाहते, क्योंकि बस आपको तो हिंदुओं से नफरत हैं। हिंदुओं को गला काटने, उन्हें जबरत धर्मांतरण कराने, उनके बहु-बेटियों को बलात, अपहरण करने और उन्हें बलात्कार करने में बड़ा मजा आता हैं। वे भी बेचारे हिंदु क्या करेंगे, अदालत जायेंगे, कोई मुल्ला मौलवी आयेगा, बोल देगा कि वो तो अल्पसंख्यक थी, हिंदू थी। वो मुसलमान बना दी गयी, अदालत भी चुप। क्या बनाया हैं आपने पाकिस्तान को। ये मै इसलिए नहीं कह रहा हूं कि किसी ने हमें बोल दिया। अरे जनाब, दुनिया इंटरनेट की जगह पर बहुत छोटी हो गयी हैं। आप ही के यहां का आजाद चैनल और जियो चैनल में जो बहस होती हैं, और वो बहस कोई शख्स यू टूयब पर डाल देता हैं, मैं देख कर प्रतिक्रिया दे रहा हूं। आपके जिन्ना और अल्लामा इकबाल ने पाकिस्तान बनाया था, वो भी धर्मनिरपेक्ष और आपने उनकी मौत के बाद, वहां का राष्ट्रीय धर्म ही बना डाला - इस्लाम। और इस्लाम के नाम पर खुदा के नाम पर, आपने जो किया या कर रहे हैं, वो तो जियो के निर्माताओं ने फिल्म खुदा के लिए में दिखा ही दिया, कि आप किस पाकिस्तान में जी रहे हैं और अपने पाकिस्तान को कहां ले जाना चाहते हैं। पर मैं अपने हिंदुस्तान को वो हिंदुस्तान बनाना चाहता हूं, जहां सारे मजहब के लोग मिलकर रहे, खुश रहे, किसी को किसी से वैर न रहे। हमारे यहां भी कुछ सिरफिरे हैं, पर उनके लिए कानून अपना काम कर रहा हैं, उन्हें सजा भी मिलती हैं। सजा मिल भी रही हैं। ऐसा नहीं कि कोई पंडित या मुल्ला कह देगा तो कानून अपना काम करना बंद कर देगा। जो सपने हमारे पूर्वजों और देशभक्त नेताओं ने देखे हैं हमें खुशी हैं कि चाहे हमारे यहां किसी की सरकार आये, हिम्मत नहीं कि धर्मनिरपेक्षता की दीवार को दरकाने की कोशिश करे।
और अब आप हमसे 14 अगस्त 1947 को अलग हो गये, हमसे अलग होकर आपको क्या मिला और हमें क्या मिला, जरा गौर फरमाये ----------------
क. आपके यहां लोकतंत्र हमेशा मरता हैं और कभी - कभी ही दिखाई पड़ता हैं। इस लोकतंत्र को और कोई नहीं कभी पाक सेना का सेनाध्यक्ष जिया उल हक तो कभी परवेज मुशर्रफ गला घोंट देता हैं, जबकि हमारे यहां 15 अगस्त 1947 से लोकतंत्र जीवित हैं और प्रत्येक आमचुनाव में और मजबूत होकर निकलता हैं, गर आपको नहीं विश्वास हो तो याद करिये, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार, जो एक वोट से गिर गयी, फिर लोग जनता के बीच गये, और जनता ने एक बार फिर अटल बिहारी वाजपेयी को जनादेश दिया। सारा विश्व देख रहा हैं कि भारत में लोकतंत्र कैसे दिन प्रतिदिन मजबूत होता जा रहा हैं। यहीं नहीं आपका राष्ट्राध्यक्ष, राष्ट्राध्यक्ष पद से हटने के बाद इतना पाकिस्तान से डरता हैं कि वो विदेश में शरण ले लेता हैं, जबकि अपने देश में आज तक ऐसा देखने को नहीं मिला। आज भी देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति पद पर शोभायमान बड़े बड़े शख्स भारत में ही रहकर, अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं।
ख. भारत 15 अगस्त 1947 को जिस स्थिति में था, उसी स्थिति में हैं, लेकिन आपको कश्मीर से इतर नहीं सोचने की सनक ने आपके एक बहुत बड़े क्षेत्रफल को ही लील लिया। नहीं याद हैं तो मैं आपको बता देता हूं, पूर्वी पाकिस्तान आज बांग्लादेश हैं।
ग. भारत की संप्रभुता को कोई चुनौती नहीं दे सकता, पर आपकी संप्रभुता को कौन कौन देश चुनौती दे रहा हैं, वो शायद आपको भी मालूम हैं, पर नहीं मालूम होने का बहुत अच्छा नौटंकी कर लेते हैं। अमरीकन सेना ने आपके घर में घुसकर ऐबटाबाद में क्या किया। पूरा विश्व देखा, पर शर्म नहीं आती। आज आपके यहां से कोई विदेश जाता हैं तो उसे भारतीय कहना पड़ रहा हैं, क्योंकि वो जानता हैं कि विदेश में रहने पर पाकिस्तानी बोलने पर सम्मान नहीं मिलेगा।
घ. आज भारतीय हर क्षेत्र में अपनी लोहा मनवा रहे हैं, पर आपको शेखी बघारने, भारत के खिलाफ विषवमन करने में ज्यादा आनन्द आता हैं। आप खुद देखिये भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की पूरी दुनिया में क्या बिसात हैं और आप के यहां की क्या बिसात हैं। एक उदाहरण दे देना चाहता हूं आप खुद देखिये संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के वोट से आप कैसे अस्थायी सदस्य के रुप में नियुक्त हो गये, पर उसके बदले में आप क्या दे रहे हैं भारत को।
ड़. हमारे राजनीतिज्ञ, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान के साथ विकसित भारत बनाने का सपना लेकर आगे बढ़ रहे हैं, पर आप अभी तक वहीं अटके हैं, जहां से चले थे, हमे लगता हैं कि आप इससे उपर जाना भी नहीं चाहते, ऐसे में आपको क्या मिला। आपने मंदिर भी तोड़े और खुद उस मस्जिद में भी सेना भेजकर, वहां गोले बरसाये, जहां आपने कभी नमाज पढ़ी थी, उसका कारण क्या हैं, ये विचार करने की जरुरत हैं। धर्मांध बनने से काम नहीं चलेगा। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इस्लाम कभी किसी दूसरे की हत्या करने, उन्हें बर्बाद करने, दूसरे धर्म के लोगों को इज्जत लूटने की सीख नहीं देता, पर क्या किया जाये, जो आप सीखेंगे, वो खुद पर भी आजमायेंगे ही। पूरा विश्व आपको किस नजर से देख रहा हैं, इसकी भी चर्चा, आपके इलेट्रानिक मीडिया के लोग बखूबी कर रहे हैं, उसे भी देखिये।
च. आपकी खासियत हैं कि आपके यहां जो जाता हैं, आप उसका खातिरदारी खूब करते हैं, आप इसकी शान भी दिखाते हैं, खासकर फिल्मों में। हमारे यहां से भी जो लोग जाते हैं, आपके यहां. वे बताते हैं कि जब उन्होंने कहा कि वे हिंदुस्तान से आये हैं तो कई होटलवालों ने खाने - पीने के पैसे नहीं लिये। उसका प्रमाण मेरे यहां भी हैं, जब प्रभात खबर के हरिवंश जी और रांची एक्सप्रेस के बलबीर दत्त आपके यहां गये तो वहां से लौटने के बाद, इन दोनों हस्तियों ने आपकी खुब प्रशंसा की। बलबीर दत्त जी ने तो आपके यहां का मिला मानचित्र ही हु ब हु छाप दिया था, बाद में रांची एक्सप्रेस ने गलती सुधारकर छापना शुरु कर दिया। ऐसे हैं आप। पर हम भी, आप से कम नहीं - खातिरदारी में। आप एक मौका तो दें, पर क्या करें, जब भी आप आयेंगे, कश्मीर का राग अलापेंगे, हिंदुओं को काफिर और पता नहीं क्या क्या कहकर संबोधित करेंगे, ऐसे में, हम आपकी खातिरदारी कैसे करें। कुछ तो आपके यहां से इस प्रकार आते हैं कि एक जनाब मुबंई के जेलों में बंद हैं, वो नाम आपने सुना ही होगा -- कसाब का।
चलिए, बहुत कुछ हुआ, थोड़ा आप गिले शिकवे दूर करें, थोड़ा हम गिले शिकवे दूर करें, चलिये भाईयों की तरह नहीं तो कम से कम एक अच्छे पड़ोसी की तरह तो रहे, ताकि दुनिया कह सकें कि ये पाकिस्तान हैं और ये भारत, दोनों में कितना प्यार हैं, पर क्या करें, वो दिन आ पायेगा भी नहीं, इसका हमें बेसब्री से इंतजार रहेगा।

Thursday, October 13, 2011

शर्म करो, टीम अन्ना के लोगों ----------


गर लोकतंत्र में हिंसा का स्थान नहीं तो लोकंतत्र में पागलपन का भी कोई स्थान नहीं। जो लोग पागलपन की हद तक जाकर ये बयान दे डालते हैं कि कश्मीरी अवाम को जबरन अपने साथ रखना देशहित में नहीं, कश्मीर से सेना हटा लेना चाहिए, वहां जनमत संग्रह कराकर, उनकी मंशा पर छोड़ देना चाहिए, कि वे भारत में रहना चाहते हैं अथवा भारत से अलग रहना चाहते हैं। ऐसे पागलों को भी सोच लेना चाहिए कि इस पागलपन से भरे बयान पर पूरे देश में कड़ी प्रतिक्रिया हो सकती हैं और ये प्रतिक्रिया उग्र रुप धारण भी कर सकती हैं, जब प्रतिक्रिया उग्र होगी तो उसका रुप क्या होगा, शायद उन्हें इसका अंदाजा नहीं। और जब अंदाजा होता हैं तो ये पागलपन से भरे बयान देनेवाले लोग हठधर्मिता भी नहीं छोड़ते, कह डालते हैं कि वे अपने बयान पर कायम हैं, उनके साथ बदसलुकी करनेवाले, ऐसे लोगों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए, जो हिंसा का सहारा लेते हैं, पर यहीं घटियास्तर के लोग जब नक्सलियों, उग्रवादियों, आतंकियों द्वारा हिंसा फैलायी जाती हैं, बड़े पैमाने पर इनके द्वारा बेकसूर मार डाल दिये जाते हैं, कश्मीरी पंडितों का समूह थोक भाव में अपने ही देश में बेगानों की तरह इधर से उधर भटकते हैं तब इनका हृदय नहीं पसीजता, लेकिन आंतकियों पर जब नकेल हमारी सेना, हमारे जवान डालते हैं तो इनका हृदय पिघलने लगता हैं और वे जेल में बंद अथवा जेल के बाहर आंतक फैलाने में मशगूल नरपिशाचों यानी आतंकियों के समर्थन में बयान देने से भी नहीं चूकते। ये वहीं लोग हैं जो टीम अन्ना में भी मौजूद हैं - प्रशांतभूषण जैसे लोग इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। अरुंधति राय, स्वामी अग्निवेश न जाने कितने ऐसे लोगों की जमात हैं जो मानवाधिकार संगठनों के नाम पर नक्सलियों और आतंकियों के लिए प्राण वायु का काम करते हैं। मैं पत्रकार हूं, हमने देखा हैं कि ये जब भी देश के किसी ऐसे क्षेत्रों का दौरा करते हैं और जब उन दौरों में स्थानीय पत्रकारों को रखने की बात होती हैं तो एक सिरे से इसे नकारते हैं और जब कभी ज्यादा दबाब पड़ा तो अपने समर्थकों में ही किसी को पत्रकार बनाकर प्रोजेक्ट करते हैं और देश के विरुद्ध आग उगलते हैं। इन्हीं के घटियास्तर के बयानों से चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को भारत के विरोध में बोलने और संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत को नीचा दिखाने में बल मिलता हैं, पर भारत सरकार आज तक ऐसे लोगों पर नकेल नहीं कस सकी और न ही ऐसे लोगों पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा ही कर सकी। ये अलग बात हैं कि भाजपा और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियां हमेशा से कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा कहने में नहीं चूकती, पर इन घटियास्तर के व्यक्तियों, जिनकी देशसेवा में कभी रुचि नहीं रही, जिनका ज्यादातर समय देशतोड़क और देश की सीमाओं को छोटा करने में ज्यादा लगता हैं, इनके खिलाफ आज तक न तो बयान आया और न ही प्रतिक्रिया। ऐसे में देश के युवा चूड़ियां पहनकर तो बैंठेंगे नहीं, उनके दिमाग में जो आया कर दिया या करेंगे। जरुरत हैं कि जो लोग दिल्ली या महानगरों के आलीशान बंगलों में, एसी में बैठते या जीवनयापन करते हैं, जिन्होंने न तो खुद और न ही कभी उनके खानदान में किसी ने देश के लिए प्राण न्योछावर किया हैं, जिनके खानदान में आजतक किसी ने सेना में अपना योगदान नहीं दिया हैं और न आनेवाले दिनों में कोई इनके खानदान से ऐसा योगदान देगा, क्योंकि इन्होंने इतना पैसा कानून के पचड़ों से कमा लिया हैं कि ये कानूनी दांव पेच में ही अपने पूरे खानदान को लगाकर अपना और देश का सत्यानाश करेंगे, ऐसे पागलों से देश और भारतीय सेना के पक्ष में बयान सुनने को मिलेगा, ये मूर्खता के सिवा कुछ नहीं। इसलिए. हे टीम अन्ना के प्रशांत भूषण जैसे घटियास्तर के विचारकों, तुम इसी तरह देश को सीमा को छोटा करने का बयान देते रहो, पर समझ लो कि जिनके इशारे पर जो तुम बयान दे रहे हो, वहीं भारत के शत्रु तु्म्हारी इस हरकत के लिए ऐसा दंड देंगे कि तुम्हारा नाम विभीषण की श्रेणी में आ खड़ा होगा। क्योंकि विभीषण के भ और ष तुम्हारे नाम से भी जूड़े हैं। मैं तो भारत माता से यहीं प्रार्थना करुंगा कि तुम जैसे लोग अपने कोख से पैदा नहीं करें, न ही तो ये देश कभी खड़ा नहीं हो पायेगा। हमारी सेना - पाकिस्तान और चीन से क्या लड़ेंगी, जब तुम जैसे लोग भारत में ही रहकर पाकिस्तान और चीन की भाषा बोलते हैं। शर्म करो - टीम अन्ना के लोगों शर्म करों। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हो और खुद भ्रष्ट आचरण दिखाते हो, भारत की जमीं का अन्न खाते हो और भारत के खिलाफ ही आग उगलते हो।

Wednesday, June 29, 2011

काश! हमारे देश के नेता............

काश! हमारे देश के नेता गरीब होते,
वो दिन भर काम करने के बाद बीस रुपये कमा पाते,
उनके कम से कम एक बच्चे होते,
जिन्हें स्कूल भेजने का सपना होता,
वो कम से कम दिन में एक बार बाजार जाते,
बाजार जाकर, आटा, चावल, दाल और सब्जी लाते,
केवल आटा, चावल, दाल और सब्जी ही लाने में,
उनकी कमर टूट जाती,
तो फिर अखबारौं में हमें लगता हैं कि
आज जैसे विज्ञापन नहीं आते,
कि पाकिस्तान, नेपाल और बांगलादेश से भी कम रेट,
गैस सिलिंडरों के दाम भारत में हैं
मिट्टी तेल और डीजल के लिए आज भी अपनी सरकार सब्सिडी दे रही है,
कमाल ये भी हैं
कि भारत की जनता की कमाई अंकगणितीय ढंग से बढ़ती हैं
पर भारत के नेताओं की
कमाई ज्यामितीय प्रणाली सी बढ़ती हैं
एक नेता पांच साल में,
अपनी कमाई 200 से 1785 प्रतिशत तक बढ़ा लेता हैं,
पर हम आज तक ईमानदारी से,
दो जून रोटी भी ठीक से नहीं खा पाये,
ये कहते हैं कि अपने देश में लोकतंत्र हैं
पर ये लोकतंत्र सिर्फ,
इन्हीं के घरों में दिखता हैं,
इनकी बीवियां करोड़ों में नहाती हैं.
गरीबों की तो चिथड़ों में नजर आती हैं
पता नहीं बापू का लोकतंत्र कहां खो गया।
हम आज भी वहीं हैं,
नेता हमारा बहुत दूर निकल गया।
कोई ढूंढ कर ला दो,
मुझे वो गांधी,
जो लाठी लेकर चलता था,
चिथड़ों में दिखता था
अपना चेहरा उसमें नजर आता था,
हम खुश थे,
क्योंकि वो भी मेरे जैसा था,
पर आज तो अजब गजब हैं
जो नेता हैं,
खुद को गांधीवादी कहता हैं.
खूब टीप टॉप में रहता हैं
चम्मच कांटे से खाता हैं
पता नहीं क्या हैं य़े,
नेता का चक्कर की,
कुछ बनते ही,
बोलेरो से चलता हैं।
काश इस पर भी वे विज्ञापन लाते,
बताते कि उनके जीवन शैली का,
राज क्या हैं,
पर शायद ही ऐसा विज्ञापन दिखेगा,
ये नेता अपने ही लोगों को लहू पीयेगा,
झूठ बोलेगा,
अपने ही देशवासियों के धन से,
अपने परिवार को राजसुख देगा,
मरती रहे जनता अपनी बला से,
हम पैदा हुए हैं, राजभोगने को,
राज भोगेंगे।
दाम बढ़ायेंगे, महंगाई हमने थोड़ी बढाई
अमेरिकी ने कह दिया बढ़ा दी।
बाजार हमसे थोड़े ही नियंत्रित हैं,
इसका तो अंतर्राष्ट्रीय फंडा हैं,
केवल नामके हम मंत्री, प्रधानमंत्री हैं,
असली राजा तो विदेशों में बैठे हैं,
जिनके हम कठपुतली हैं।

Thursday, March 31, 2011

क्यों नहीं, क्रिकेट को राष्ट्रीय खेल घोषित कर दिया जाय..............!

भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर मोहाली में 29 रनों से हरा दिया। सचमुच एक बार फिर ये बात सिद्ध हो गयी कि पाकिस्तान भारत से खासकर वर्ल्ड कप में हमेशा से हारता रहा हैं और इस बार भी हारेगा। कुछ संयोग भी था कि कुछ कौतुक मोहाली में देखने को मिले, सचिन तेंदुलकर बार- बार आउट होते हुए बचे और उन्होंने 85 रनों का व्यक्तिगत स्कोर खड़ा कर लिया। ये घटनाएं भी बहुत कुछ बता रही थी कि मैच भारत के पक्ष में हैं। खैर ये मेरा विषय भी नहीं हैं, आज के समाचार पत्रों और बीती रात से विभिन्न इलेक्ट्रानिक मीडिया ने धौनी सेना की गुणगान करनी शुरु कर दी हैं और साथ ही ये भी राग अलाप दिया कि भारत ही वर्ल्ड कप जीतेगा, मैं भी भारतीय हूं चाहता हूं कि कप भारत में ही रहे। पर केवल क्रिकेट के ही क्यूं और अन्य खेलों के लिए भी ऐसी भावना क्यूं नहीं। खासकर, हॉकी के लिए, जो कि हमारे देश का राष्ट्रीय खेल हैं। यहीं बात पाकिस्तान के लिए भी क्योंकि हॉकी वहां का भी राष्ट्रीय खेल हैं, पर सच्चाई क्या हैं। सभी को मालूम हैं, दोनों देशों में हॉकी हाशिये पर चला गया हैं। न तो सरकार, न ही अधिकारी, न ही बड़े बड़े पूंजीपति-खेल के आयोजक ही इस खेल में रुचि लेते हैं। पूरे देश में जिस प्रकार से क्रिकेट का जूनून हैं। गांव – शहर, कस्बा मुहल्ला सभी जगह छोटे से लेकर बड़े विकेट और बल्ले की ही बात कर रहे हैं, ऐसे में हमारा अभिमत हैं कि क्यूं नहीं क्रिकेट को राष्ट्रीय खेल घोषित कर दिया जाय, क्यूं हम बेवजह उसे राष्ट्रीय खेल मानने को तैयार हैं- जिसपर हम बात करने को अपना समय देने को तैयार नहीं हैं। आखिर हम ऐसा क्यूं कह रहे हैं। उसके पुख्ता प्रमाण हैं। आप उन देशों को लीजिये जहां का राष्ट्रीय खेल फुटबॉल हैं, जरा उन देशों और वहां के निवासियों को देखिये कि वे फुटबॉल को किस प्रकार लेते हैं, पर हमारे देश में राष्ट्रीय खेल हॉकी के प्रति किस प्रकार अनादर का भाव हैं। वो हॉकी खेलनेवाले खिलाड़ियों की मनोदशा देखकर ही पता लग जाता हैं।
जबकि क्रिकेट की बात हो तो पूछिये मत, गांव – महल्ला, नगर –शहर तो दूर हमारे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तक इस पर चर्चा करने लगते हैं। दूसरे मित्र व पड़ोसी देश को क्रिकेट का आन्नद लेने के लिए निमंत्रण तक दे देते हैं। क्रिकेट को लेकर भारत और पाकिस्तान में जैसे मारामारी दीख रही होती हैं, वैसी मारामारी अन्य देशों के खिलाफ होनेवाले क्रिकेट मैचों में नहीं होती। आखिर ऐसा जुनून क्यूं हैं, क्यों हमें पाकिस्तान को हराने में परमानन्द की प्राप्ति होती हैं, जबकि ऐसा ही आनन्द फाइनल में जीतने पर देखने को नहीं मिलता। हमें लगता हैं कि ये शोध का विषय हैं, पर जो सामान्य लोग हैं, वे जानते हैं कि आखिर इसका आनन्द का कारण क्या हैं। किस प्रकार हमारे भारत और पाकिस्तान के राजनीतिज्ञों ने अपने-अपने पड़ोसी देशों को लेकर, हमारे मन में विषवमन पैदा किया हैं, जिसका परिणाम भारत और पाकिस्तान के साथ होनेवाले सिर्फ क्रिकेट में दिखायी पड़ता हैं, न कि इन दोनों देशों के साथ होनेवाले किसी अन्य मैचों में।
कमाल हैं, जैसे ही क्वार्टरफाइनल में ये श्योर हो गया कि भारत और पाकिस्तान सेमीफाईनल में भिड़नेवाले हैं, हमारे देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी और वहां के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को भारत मैच का आनन्द लेने के लिए आमंत्रित कर दिया। उधर से भी वहीं प्रतिक्रिया हुई, जिसका अंदेशा कि हम आ रहे हैं। क्या बात हैं जो काम और कोई नहीं कर सकता, क्रिकेट ने कर दिया। दोनों देश क्रिकेट देखने ही नहीं, बल्कि बातचीत को भी तैयार हो गये। जनाब गिलानी पाकिस्तान से आये, खाये-पीये, मैच का मजा लिया और गये। ऐसा लगा कि भारत और पाकिस्तान कभी लड़े ही नहीं थे और न ही कभी लड़ेंगे। यानी भारत और पाकिस्तान अब शांति की डगर पर चल पड़े हैं। इधर सोनिया गांधी और और राहुल गांधी भी मैच देखने के मोहाली पहुंचे और बाकी बचे तो अन्य नेता, व फिल्मी अभिनेता- अभिनेत्री व पूंजीपतियों का बड़ा समूह मोहाली पहुंच गया था। क्रिकेट मैच का आनन्द लेने के लिए। उस क्रिकेट का मजा लेने के लिए जो हमारा राष्ट्रीय खेल नहीं हैं, और जिनके पास अपने राष्ट्रीय खेल देखने के लिए समय नहीं होता। जरा पूछिये, अपने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से और उन अन्य नेताओं, अभिनेताओं व पूंजीपतियों से कि क्या ऐसी ही कशिश उनके दिलों में राष्ट्रीय़ खेल के प्रति होती हैं। उत्तर होगा – नहीं। जिस देश में सत्ता के सर्वोच्च सिंहासन पर बैठनेवालों के दिलों में अपने राष्ट्रीय खेल हॉकी के प्रति दर्द नहीं उभरता, उस देश में राष्ट्रीय खेल की क्या स्थिति होगी, वो जो हम देख रहे हैं, महसूस कर रहे हैं, हमसे बेहतर कौन समझ सकता।
हम झारखंड में हैं, जहां हॉकी जन-जन में रचा बसा हैं, जहां कई पुरुष और महिला खिलाड़ी हॉकी के द्वारा अपने देश का मान बढाया हैं। इस प्रांत में भी एक क्रिकेट के धौनी ने, उन हॉकी खिलाड़ियों की चमक थोड़ी फीकी कर दी हैं जिन्होंने हॉकी में अपना ही नहीं बल्कि इस राज्य और देश का मान बढ़ाया पर आज उनकी क्या स्थिति हैं, झारखंड की जनता से बेहतर और कौन जान सकता हैं। धौनी का तो कहना ही नहीं, उसके पास तो इतने धन आ चुके हैं कि पूछिय़े मत, पर इसी राज्य में हॉकी के बल पर देश व राज्य का मान बढ़ानेवाले लोगों की हालत पस्त हैं, उस पर न तो केन्द्र और न ही राज्य सरकार का ध्यान हैं। ले – देकर बेचारे अपने हालत पर आंसू बहा रहे हैं, पर क्रिकेट के पक्षधरों और उसके झंडाबरदारों ने उनकी सूध तक नहीं ली। वो भी उस राज्य में उस देश में जहां हॉकी राष्ट्रीय खेल हैं।
कल मैंने ये भी देखा कि जैसे ही भारत ने पाकिस्तान पर जीत दर्ज की, सोनिया गांधी और मनमोहन के चेहरे पर खुशी का ठिकाना नहीं था, वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री गिलानी के चेहरे पर हार का गम साफ दिखाई पड़ रहा था। पूरे देश की तो बात ही अलग थी। क्या दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और मुंबई की बात करे, सभी खुश, देश ने पाक पर फतह कर लिया। ऐसी खुशी, जिसको अभिव्यक्त करने के लिए शब्द नहीं थे, जब पूरे देश में ऐसा माहौल हो, तो फिर हम तो ये ही कहेंगे कि हे महान देश के महान राजनीतिज्ञों ( दोनों देशों ) आप जल्द ही ये घोषणा कर दो कि हमारे देश का राष्ट्रीय खेल हॉकी नहीं, क्रिकेट हैं। क्योंकि तुम घोषणा करों या न करों, आम जनता तो हॉकी को भूलाकर क्रिकेट के रंग में रंग ही चुकी हैं और क्रिकेट को राष्ट्रीयता से जोड़ दी हैं। साथ ही सचिन-धौनी इऩके सरताज हो चुके हैं। तो फिर देर कैसी।

Wednesday, February 23, 2011

वाह मुलायम...................!


समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेसनीत गठबंधन सरकार को आगाह किया है कि वे अपनी आदत तत्काल सुधारे और देश की जो स्थिति है, उस पर विचार करते हुए तत्काल प्रभाव से कदम उठाये, क्योंकि चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर, भारत पर हमला करने और भारतीय भूभाग को अपने कब्जे में करने के लिए लालायित है। मुलायम सिंह यादव, राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अपना पक्ष सदन में रख रहे थे, खुशी इस बात की कि उनके भाषण के दौरान किसी भी पार्टी के लोगों ने हो हंगामा खड़ा नहीं किया, जैसा कि आम तौर पर होता हैं, विभिन्न दलों के छुटभैये सांसद, बेवजह हो हंगामा खड़ा कर, संसद का समय नष्ट कर रहे होते हैं।
आश्चर्य इस बात की है कि मुलायम सिंह यादव ने खुद के पहले दिये गये भाजपा नेता राजनाथ सिहं के भाषण का भी समर्थन किया कि चीन ने अपने लोगों से ऑनलाईन वोटिंग कर, चीनवासियों का मत भी मांगा हैं कि भारत पर हमला किया जाये या नहीं। ऐसे भी चीन की नीतियां रही हैं कि जब कमजोर रहो, तो चुपचाप रहो और बलवान हो जाओ तो दूसरे देश पर हमला कर दो, यहीं नहीं चीन की नीतियां ये भी रही हैं कि सीमा अथवा किसी भी विवाद का हल, शांति से नहीं युद्ध से ही किया जा सकता हैं, जब उनकी नीतियां ही ऐसी है तो फिर उन पर विश्वास कैसे किया जा सकता है। ऐसे भी इन पिछले पांच छह वर्षों में चीन ने जो सीमा पार हरकत की है और भारतीय भूभाग पर कब्जा जमाने का जो पैतरेबाजी की हैं, उसका समाचार विभिन्न इलेक्ट्रानिक चैनलों व प्रिंट मीडिया के माध्यम से देशवासियों के बीच आता रहा है, जिससे भारतीय जनता भी सशंकित हैं कि चीन कल क्या कर बैठे, पर हमारे देश की कांग्रेस सरकार इन सभी मामलों में चुप्पी साधी बैठी हैं, और आराम से टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला, आदर्श घोटाला, एस बैंड घोटाला, खाद्यान्न घोटाला करते हुए देश का सम्मान प्रभावित कर रही है। यहीं नहीं जहां अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश विदेशों में गये अपने देश के धन को स्वदेश मंगवा रहे हैं, वहीं अपना देश का प्रधानमंत्री इस मामले पर किंकर्तव्यविमूढ़ है। इस पर अभी तक कोई नीति स्पष्ट नहीं कर पाया है। जहां चीन का प्रधानमंत्री अपने देश में आकर, बड़ी सफाई से अपनी बात कह कर चला जाता है, वहीं अपने देश का प्रधानमंत्री अपनी बात, अपने देश में हीं नहीं रख पाता। कमाल हैं, चीन, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों को स्टैप्ल वीजा जारी करता है, वहीं हमारे देश का शासक ये भी नहीं कह पाता कि गर उसने ऐसा करना जारी रखा तो भारत भी तिब्बत के लोगों के लिए स्टैपल वीजा जारी करना शुरु करेगा।
यहीं नहीं हमने खुद देखा कि यहां की वामपंथी पार्टियों के शीर्षस्थ नेताओं ने कैसे चीनी शासक से सम्मानित होने के लिए लालायित दीखे, यहीं नहीं सम्मानित होने में गर्व भी महसूस किया, ये जानते हुए कि चीन की नीतियां भारत के प्रति कभी ठीक नहीं रही, यहीं नहीं अभी भी भारतीय भू भाग के कई हिस्सों पर चीन का अवैध कब्जा हैं, और दूसरी ओर एक बार फिर चीन ने भारत के अन्य भू भाग पर कब्जा जमाने की अनैतिक तैयारी शुरु कर दी है, क्या ऐसे चीनी शासक से सम्मानित होने की लालसा, भारतीय वामपंथी नेताओं के चरित्र पर अंगूली नहीं उठाती।
मुलायम सिंह यादव ने सदन में ठीक ही कहा कि भारत की विदेश नीति तो अमेरिका के हाथों गिरवी रखी है, उन्होंने उदाहरण भी दिये, और वे उदाहरण सत्य भी प्रतीत होते हैं। कहां गयी भारत की विदेश नीति -------------------
जब आस्ट्रेलिया में भारतीय युवकों की पिटाई हो रही थी अथवा भारतीय छात्रों की हत्या की जा रही थी। अमेरिका में जब भारतीय छात्रों के पांवों में रेडियो कॉलर लगाये गये। नेपाल और श्रीलंका जो भारत के साथ कदम से कदम मिला कर चलते थे, वे आज भारत से दूर होते जा रहे हैं। आज कोई भी ऐसा देश नहीं हैं, जो भारत के साथ खड़ा होने की बात करता हो, जबकि पूर्व में भारत के कई पड़ोसी देश ही नहीं बल्कि अन्य दूसरे देश भी भारत के साथ मजबूती से खड़े होते थे।
कमाल हैं, देश का सैन्य प्रमुख खुलकर कह रहा हैं कि चीन के मंसूबे सहीं नहीं हैं पर भारतीय नेता, शांति की बात कहते हुए, आराम फरमा रहे है। गर यहीं हाल रहा, तो देश बचेगा या भी नहीं, ये कांग्रेसी क्यूं नहीं समझते। गर देश रहेगा, तो ये शासन भी कर सकते हैं, गर देश ही नहीं रहेगा, तो फिर शासन कैसे करेंगे, ऐसे में मुलायम का ये कहना कि अभी सरकार नहीं, पहले देश बचाने की बात करें कांग्रेसी, हमें सटीक लगती है। उन्होंने सुप्रसिद्ध समाजवादी नेता व चिंतक राम मनोहर लोहिया का हवाला देते हुए ठीक ही कहा कि इस देश को खतरा पाकिस्तान से उतना नहीं, जितना चीन से हैं, पर हमे लगता हैं कि राम मनोहर लोहिया की बातों को आज तक कांग्रेसियों ने स्वीकार ही नहीं किया।
सदन में कांग्रेसियों का ज्यादातर समय आरएसएस और भाजपाईयों पर हमला बोलने और उन्हें नीचा दिखाने में ही जाता हैं, ऐसा लगता हैं जैसे की देश की जनता, इन कांग्रेसी सांसदों को भाजपाईयों और आरएसएस के लोगों को गाली देने के लिए ही सदन में भेजती हैं। हमें लगता हैं कि गर वे चीन मामले पर इतना सजग होते, तो देश आश्वस्त भी होता कि इन कांग्रेसियों के हाथों देश सुरक्षित हैं, पर हमें नहीं लगता, कि देश इनके हाथों सुरक्षित है, ये तो चीन के हमले होने पर भी ये बयान दे देंगे कि भाजपाईयों और संघ के लोगों ने देश पर हमला बोलवा दिया हैं, जैसा कि इनके नेता दिग्विजय सिंह 26/11 मामले में बोलकर, पाकिस्तान की मदद करने में प्रमुख भूमिका निभायी और देश को ही कटघरे में रख दिया। कमाल हैं – कांग्रेसियों का चरित्र।
यहीं नहीं देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और देश की दुर्दशा पर, टीवी चैनलों के संपादक से बातचीत में हमारे प्रधानमंत्री का ये कहना कि विभिन्न मामलों में, जितना उन्हे दोषी बताया जाता हैं, उतना वे दोषी हैं नहीं, उन्होंने गठबंधन सरकार की मजबूरियां भी बतायी, इसी से साफ पता लगता हैं कि हमारे देश में कैसी मजबूर और कमजोर सरकार चल रही है, और इसे कौन चला रहा है। फिर भी। इस देश में पंचवर्षीय सरकार चलती हैं, आशा तो इन्हीं से हैं। गर देश पर बाहरी व आंतरिक खतरा आया तो इससे निजात दिलाना तो इन्हीं को हैं, आशा रखना होगा कि ये कुछ करेंगे और देश को बाहरी खतरों से बचाने में सक्षम होंगे, पर ये तो वक्त बतायेगा। कि इन्होंने क्या किया। पर मुलायम सिंह यादव जी, आपका जवाब नहीं, खूब बोले, देशहित में बोले। सरकार को जगाने की कोशिश की, गर सरकार जग गयी तो देश का बल्ले बल्ले होना तय है। कोशिश करते रहिये, इन्हें जगाते रहिये। अपना काम जगाते रहने का है, आपने देशहित में जो सदन में बाते रखी, आपको बहुत बहुत बधाई..............

Wednesday, November 10, 2010

तुम्हारी भी जय जय, हमारी भी जय जय, न तुम हारे, न हम हारे....!

संदर्भ अमरीकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा 2010...

अमरीकी राष्ट्रपति की जब कभी भारत यात्रा हुई है, तो ये यात्रा शुरु से लेकर आखिरी तक नयी नयी विवादों में घिरी होती है। जो लोग चाहते हैं कि अमरीका से हमारे संबंध मजबूत हो, उन्हें अमरीकी राष्ट्रपति का प्रत्येक संवाद मन को जीत लेनेवाला लगता हैं, जबकि इसके घुर विरोधी को हर बातों में कुछ न कुछ घालमेल दिखाई देते हैं, खासकर चीन और रुस के कटटर समर्थक भारतीय वामपंथियों को अमरीका और अमरीकन राष्ट्रपति एकदम नहीं सुहाते। आखिर क्यों, इस पचड़े में हम पड़ना नहीं चाहते, सभी लोग जानते है।
आज की स्थिति और परिस्थिति में भारत की नयी पीढ़ी अमरीका से बेहतर संबंध बनाने में विश्वास रखता है, क्योंकि वो जानता हैं कि बिना बेहतर संबंध के न तो भारत को वो स्थान मिल सकता हैं, जिसकी उसे जरुरत है और न ही आगे बढ़ने का रास्ता। अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा छठे राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने भारत की यात्रा में दिलचस्पी दिखायी और अपने हाव भाव और विचारों से भारतीयों के दिल जीतने में कामयाब रहे। खासकर मुबंई में दीवाली फेस्टिवल मनाने के क्रम में भारतीय बच्चों के साथ नृत्य करने का मामला हो अथवा दिल्ली के हुमायूं के मकबरे पर नन्हे – मुन्ने बच्चों के साथ मिलने का तरीका। सभी में वे बीस साबित हुए। रही बात मुंबई में भारतीय उद्योगपतियों से बातचीत और दिल्ली में संसद में उनके दिये गये भाषण बताने के लिए काफी थे कि उनकी आज की सोच क्या हैं। इसमे कोई दो मत नहीं कि जो आज पूरे विश्व की स्थिति है, उसने अमरीका के सोच में काफी बदलाव लाया है और भारत को ऐसे समय में नजरंदाज करना, अमरीका को मुश्किल सा लग रहा हैं। याद करिये जब पूर्व में हमारे देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति का अमरीका दौरा होता था तो क्या होता था, अमरीकन राजनीतिज्ञ उन्हें कितना भाव देते थे, यहीं नहीं वहां के समाचार पत्रों की क्या भूमिका होती थी और आज के वहां के राजनीतिज्ञों और समाचार पत्रों की क्या भूमिका है। आज तो वहां के अखबार भारत-अमरीका के इस दौरे और उसके नतीजों और सम्पादकीय से पटे हैं। ये है – बदलाव। और ये बदलाव। भारत के राजनीतिज्ञों के क्रियाकलापों से नही हुए, बल्कि उन सैकड़ों, हजारों, लाखों गुमनाम भारतीयों के उनकी मेहनत और उनसे निकले परिणामों का नतीजा हैं कि आज भारत ऐसे मोड़ पर खड़ा हैं कि अमरीकन राष्ट्रपति बराक ओबामा को कहना पड़ गया कि भारत एक विकसित राष्ट्र हैं, भारत को सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए और जब कभी सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्यों की संख्या बढाने को हुई तो अमरीका भारत के इस पक्ष का समर्थन करेगा। आज अमरीकन राष्ट्रपति भारतीय उद्योगपतियों से सहयोग मांग रहे हैं, वे भारत के साथ व्यापारिक समझौते करना चाह रहे हैं, क्यों चाह रहे हैं, इसका भी खुलासा करीब – करीब देश व विदेश के समाचार पत्रों ने कर दी है।
एक बहुत ही मशहूर पंक्ति में यहां उद्धृत करना चाहता हूं.......
किसी ने ठीक ही कहा हैं...

खुद ही कर बुलंद इतना, कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे, बता तेरी रजा क्या है।
क्या पहले के भारतीय प्रधानमंत्री की ये हैसियत थी कि किसी अमरीकन राष्ट्रपति के साथ संवाददाता सम्मेलन में भारतीय पक्ष को इतनी मजबूती से रख सके, जैसा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बार कह कर जता दिया कि भारत अमरीका की नौकरी चूरा नहीं रहा और हमारी भागीदारी, समान मूल्यों और हितों विश्व के प्रति समान दृष्टिकोण और हमारी जनता की गहरी मैत्री पर आधारित है।
आखिर क्या वजह हुई कि अमरीकन राष्ट्रपति आज जय हिंद तक बोलने पर मजबूर हैं, पाकिस्तान में आतंकी ठिकाने उन्हें मंजूर नहीं और 26 नवम्बर के हमलावरों को पाकिस्तान सजा दे, ये बोलने से नहीं चूके। इसका सीधा सा अर्थ हैं कि अमरीका फिलहाल आर्थिक मंदी से उबर नहीं पाया हैं और वह धीरे धीरे नीचे की ओर खिसकता जा रहा हैं। वहां बेरोजगारी बढ़ी हैं, और इसका परिणाम खुद अमरीकन राष्ट्रपति झेल रहे हैं, जबकि इसके विपरीत भारत में वैसी स्थिति नहीं हैं, जैसी अमरीका की हैं, और भारत ने जिस प्रकार आर्थिक मंदी को झेला और उबरा, ऐसी कूबत शायद किसी देश में नहीं और इसी का फायदा, अमरीका उठाना चाहता है। सचमुच आज हमें खुशी हैं कि महाशक्ति खुद को माननेवाला अमरीका और उसके राष्ट्रपति बराक ओबामा, भारत की ताकत का लोहा माना हैं और कहा कि भारत एक बड़ी ताकत बन चुका हैं, पर हमें इससे ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं क्योंकि इनके ये बोल, कितने सत्य हैं, ये आनेवाला समय बतायेगा, पर हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि हमारी एक बहुत बड़ी आबादी भूख और गरीबी से लड़ रही हैं। जिनके पास खाने पीने पहनने ओढ़ने और रहने को तक को नहीं हैं, हमे उनके लिए कुछ करना हैं, ताकि हम सचमुच भारत को विकसित राष्ट्र बना सकें। भारत विकसित राष्ट्र, झूठ और भ्रष्टाचार में लिप्त राजनीतिज्ञों से नहीं बनेगा, बल्कि उन करोड़ों युवाओं से होगा, जिसके बारे में आज कहा जा रहा हैं कि भारत में युवाओं की एक बहुत बड़ी फौज हैं, गर ये युवा सही मायनों में अपनी शक्ति को पहचान लेंगे तो समझ लीजिए, आनेवाला समय सही मायनों में हमारा हैं, 21वीं सदी भारत का है।

Monday, October 4, 2010

अरे ये तो चीन व पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं........!

पाकिस्तान तो अपने जन्म से ही कश्मीर पर अपना हक जताता रहा है, वहीं चीन ये मानने को तैयार ही नहीं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, इधर इस साल से वो कश्मीरियों के लिए अलग प्रकार के वीसा जारी कर अपना इरादा भी जाहिर कर दिया है और चीन के इस हरकत को हवा दी है, भारत में ही रह रहे वो लोग जो अपने आपको बुद्धिजीवी मानते हैं, जो अपने आप को वामपंथ की मुख्यधारा में रहने की बात करते हैं, जो खाते पीते भारतीय भूभाग पर हैं पर दिलों दिमाग से चीन व पाकिस्तान के ज्यादा निकट हैं। आश्चर्य है कि ये अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर उस हर प्रकार की राष्ट्रविरोधी हरकतें करते हैं, जिससे भारत की संप्रभुता को चोट पहुंचती है, पर भारत सरकार इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती।
हाल ही में अखबारों और मीडिया के माध्यम से एक बयान पढ़ने और सुनने को मिला कि अपने बयानों से हमेशा चर्चा में रहनेवाली एक महिला बूकर पुरस्कार विजेता अरुंधती राय मानती है कि कश्मीर भारत का कभी अभिन्न अंग नहीं रहा, ठीक इसी प्रकार लादेन की भाषा में नक्सली नेता किशन का कहना था कि कश्मीर को आजाद कर दिया जाय, साथ ही गर वहां भारतीय सेना कश्मीर में कुछ करती है तो वह ऐसे मुद्दे पर नक्सली, मुसलमानों का साथ देंगे, अरे तुम किसी का साथ दो, देश को और देशभक्तों को क्या फर्क पड़ता हैं, वो तुम जिसके लिए लड़ने की बात करते हो, उसका तुम कितना भला कर रहे हो, वो तो भारत की आत्मा और भारतीय जनता खूब जान रही हैं।
कमाल है ये अरुंधती राय और किशन जैसे नक्सली को, जब कश्मीर में हिंदूओं का कत्लेआम होता हैं, जब इस्लाम के नाम पर सिक्खों को धमकी दी जाती हैं कि वे इस्लाम कबूल करें तो ये दोनों उस वक्त वामपंथी किताबों में उलझे रहते हैं, लेकिन जैसे ही इस्लाम, पाकिस्तान और चीन की बात आती हैं तो ये दरवे से निकल कर पाकिस्तान और चीन जैसे देशों तथा इस्लाम के साथ होने की बात करते हैं।
ये नक्सली क्या कर रहे हैं, इससे देश रोज दो चार हो रहा हैं। खूलकर नक्सलियों और उनके गतिविधियों को समर्थन करनेवाली अरुंधती राय को जब ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस उड़ायी जाती है और निर्दोष रेलयात्रियों की लाशों से पुरा इलाका पट जाता हैं तो उसमें उन्हें इंसानियत नष्ट होता नहीं दीखता। जब आतंकी पूरे कश्मीर से हिंदूओं को एक कर निकाल बाहर कर रहे होते हैं तो इनकी छाती नहीं पसीजती, पर जब देश के स्वाभिमान की रक्षा, एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय सेना अपनी जान गवां रही होती हैं और देशद्रोहियों व आतंकियों को उनकी औकात बताती हैं, तो इनकी छाती फटने लगती हैं, इनकी क्यों छाती फटती हैं, भारतीय जनता अब खूब जान रही हैं।
सदियों से शांति व प्रेम का संदेश देनेवाले भारत में ये लोग बंदूक की गोली से शांति व प्रेम फैलाना चाहते हैं। इनका मानना हैं कि बंदूक की निकली गोली से ही शांति और विकास का द्वार खुलता हैं, क्योंकि ये जिनके आदर्शों पर चलने की बात करते हैं, इनके आका कभी भारत से जुड़े ही नहीं, और न ही उनकी भारतीय आदर्शों में दिलचस्पी थी, ये तो मार काट की ही भाषा समझते थे और है, और जो उनकी ये भाषा नहीं समझता या उनके विचारों को नहीं मानता, उसे सदा के लिए मौत की नींद सुला देते ताकि इनके खिलाफ दूसरा कोई विचार जन्म ही न ले। गर किसी को लगता हैं कि ये लिखे हुए शब्द गलत हैं तो चीन के थ्येन मन चौक की घटना याद कर लें।
इस अरुंधती और किशन को कश्मीर पर बोलना बहुत अच्छा लगता हैं और जो चीन तिब्बत पर बल पूर्वक कब्जा कर बैठा हैं, जहां के लाखों तिब्बती दूसरे देशों में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे हैं, उनके पक्ष में बोलने में इनका गला सूखता हैं कारण कि उन्हें अपने आका चीन के खिलाफ बोलने में शर्म महसूस होती हैं, वहां उन्हें चीन की ये गंदी हरकतें बहुत अच्छी लगती है, क्यों आप खूद समझिये। हर बात को समझाने के लिए शब्दों की आवश्यकता नहीं, बल्कि इनकी हरकतों, इनके विचारों, जहां ये बोलते हैं, केवल उस पर ध्यान दीजिए।
मेरा रांची से 25 सालों का संबंध रहा है, पर मैने निकट से देखा हैं कि जितने भी जनवादी कार्यक्रम होते हैं, या इस प्रकार के वामपंथी चिंतक, देशतोड़क बयान देनेवाले लोग आते हैं, उनके कार्यक्रम इसाई मिशनरी इलाकों में ही होते हैं, मिशनरी प्रेक्षागृहों में ही होती हैं, आज तक इनके कार्यक्रम मैंने सार्वजनिक जगहों पर होते नहीं देखा। ये धर्म को अफीम मानते हैं, पर सच्चाई ये हैं कि हिंदू धर्म के खिलाफ बोलने, उनके खिलाफ गाली देने में ये शान समझते हैं और चूंकि इस प्रकार के गाली देनेवाले शब्द, देश तोड़क बयान सिर्फ मिशनरीज इलाकों में आराम से बोले जा सकते हैं, कार्यक्रम आयोजित होते हैं। एक बार मैंने इन्हीं मुददों पर एक वामपंथी नेता से पूछा कि आखिर इस प्रकार के आयोजन मिशनरीज इलाकों अथवा मिशनरीज संगठनों के बीच क्यों, अन्य जगहों पर क्यों नहीं, तब इनका कहना था कि ऐसा संभव ही नहीं। आज भी नक्सल प्रभावित इलाकों में मिशनरीज धर्म प्रचार कर आदिवासियों का बलात् धर्म परिवर्तन कर रहे हैं और उनके मूल धर्म और मूल पहचान से अलग कर रहे हैं, किसके इशारे पर ये सब हो रहा हैं। शायद इसका जवाब भी अरुंधती और किशन के पास नहीं होगा। क्या कारण हैं कि विदेशों में लोग भारतीय धर्म के प्रति सहानुभूति रखते हैं पर अपने देश में केवल पेट के लिए लोग धर्म परिवर्तन कर ले रहे हैं।
आजकल इन्हें बहुत अच्छा बहाना मिल गया हैं नक्सलियों को समर्थन देने का कि केन्द्र और राज्य सरकार खनन के नाम पर, कल-कारखाने लगाने के नाम पर पूंजीपतियों को जमीन देने के लिए, जमीन हड़पने के लिए एमओयू कर रही हैं, ग्रीन हंट चला रही हैं। मैं भी मानता हूं कि इसमें कुछ सच्चाई हैं पर ये कौन सी बात हो गयी कि आप इसकी आड़ में देश को तोड़ने पर आमदा हो जाओ, कह दो कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नहीं है। ये बोलने का अधिकार किसने आपको दे दिया, आखिर चीन और पाकिस्तान के साथ आपको इतनी हमदर्दी हैं तो फिर भारत में रहने का क्या मतलब हैं, इसे भी तो यहां की जनता को बताओ पर आप ऐसा करोगे, हमें नहीं लगता, क्योंकि आप क्या हो, आज जनता जान चुकी हैं।

Sunday, August 15, 2010

आप माने या न माने, पर ये सच हैं --------------------------



आप माने या न माने, पर ये सच हैं ----------
आजादी के पहले --------
क. भारत परतंत्र था पर भारतीय मन से परतंत्र नहीं थे, उनकी सोच परतंत्र नहीं थी, अपनी आध्यात्मिक और राष्ट्रवाद की परिकल्पनाओं से यहां के लोग ओतप्रोत थे, अंग्रेजी सत्ता को इसका आभास था, तभी लार्ड मैकाले ने इस देश की सार्वभौमिकता और यहां के लोगों की मानसिकता को तोड़ने के लिए ऐसी शिक्षा पद्धति निकाली कि यहां के लोग अंदर से टूट जाये और अंग्रेजी मानसिकता को श्रेष्ठ समझ, अपनी संस्कृति से नफरत करने लगे, फिर भी अंग्रेज भारतीयों को मन से गुलाम बनाने में असफल रहे।
ख. पूरा देश चरित्रवान था, खासकर भारतीय राजनीतिज्ञों का जीवन आदर्शों से भरा रहता था, लोग उनकी बातों को ध्यान से सुनते और अपनाने की कोशिश करते।
ग. यहां की युवा पीढ़ी भी, देश को नयी दिशा दे रही थी, साथ ही अपने चरित्र पर ध्यान देती थी, अपने देश के पूर्वजों के सम्मान पर कोई आंच नहीं आये, इसका ध्यान रहता था, इनके लिए एक ही लक्ष्य था देश के लिए जीना और देश के लिए मरना।
घ. सभी का एक ही लक्ष्य था, कि भारत स्वतंत्र हो।
ङ. भारत अखंड था, आज का पाकिस्तान, बांगलादेश, चीन द्वारा बलपूर्वक और धूर्ततापूर्ण तरीके से भारत की हड़पी गयी जमीन, सभी भारत के नक्शे में नजर आते थे, भारत का मानचित्र भव्य दीखा करता था।
च. भारतीय गरीब थे, पर भारत के उपर कर्ज नहीं था।
छ. परतंत्र होने के बावजूद, देश की आध्यात्मिक शक्ति का लोहा विदेशी माना करते थे, जैसे स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो धर्म सम्मेलन में भारतीय धर्म का पताका फहराया, और बताया कि भारत क्या हैं।
ज. देश का ग्राम और कुटीर उद्योग बहुत ही मजबूत था, अंग्रेजों द्वारा इस उद्योग को सर्वनाश के कगार पर लाने के बावजूद स्वदेशी आंदोलन ने इनको नयी दिशा दी थी।
आजादी के बाद --------------------
क. भारत स्वतंत्र हुआ, पर लार्ड मैकाले की जीत भी हुई, कांग्रेस ने सत्ता संभाला और मैकाले की शिक्षा पद्धति को जन जन तक पहुंचाने की कोशिश शुरु हुई, देश में जो काम अंग्रेज नहीं कर सके, वो काम यहां की कांग्रेसी सरकार ने शुरु किया, लोग भारत और भारतीय संस्कृति से दूर होते चले गये और भारतीय मन पूरी तरह से परतंत्र हो गया।
ख. परतंत्र भारत में जहां सभी चरित्रवान थे, आजादी के बाद चरित्रवानों का टोटा पड़ गया, आप किसी भी क्षेत्र में जाये चरित्रहीनों की संख्या सर्वाधिक हैं, ज्यादातर लोग भ्रष्टाचार में डूबे हैं, और अपने हिस्से का भारत लूट लेना चाहते हैं, जो नहीं लूट रहे, उन्हें मूर्ख समझा जाता हैं।
ग. आज की युवा पीढ़ी, अब देश और समाज तथा परिवार के लिए भी नहीं सोचती, उसे सिर्फ अपने लिए धन कमाना और ऐश करने से मतलब हैं, इनके लिए देश व समाज कोई मायने नहीं रखता, इनके लिए तो परिवार भी कोई मायने नहीं रखता, सेल्फमेड जिंदगी जीने में ये ज्यादा आनन्द अनुभव करते हैं।
घ. आज भारत को कहां ले जाना हैं, कोई लक्ष्य ही नहीं हैं, भारत को कैसा और क्या बनाना हैं, इस पर किसी का ध्यान नहीं, सभी नौकरी कर रहे हैं चाहे वो राजा हो या प्रजा। नौकरी करने के क्रम में, सभी अपने बेटे-बेटियों के लिए, मरते दम तक कुछ ऐसा कर देना चाहते हैं, ताकि सात पुश्त तक गर नौकरी न भी मिले तो ये आराम से जिंदगी गुजार सकें। उसका अनेक उदाहरण हैं, सुबह होते ही, भारत की अखबारें ऐसी खबरों से पटी होती हैं। आज के नेता तो अपनी पत्नी और बच्चों के सिवा दूसरा कुछ सोचते नहीं, आज किसी पार्टी में कल किसी और पार्टी में, सुबह का नाश्ता किसी और पार्टी में दोपहर का भोजन किसी और पार्टी में, ये इनका चरित्र हो गया हैं, ऐसे में समझा जा सकता हैं कि ये देश के प्रति कितने वफादार हैं, अब तो शायद ही कोई ऐसा नेता हैं जो किसी भ्रष्टाचार के दलदल में न फंसा हो, ज्यादातर इस भ्रष्टाचाररुपी गंगोत्री में डूबकी लगा चूके हैं और कुछ लगाने के चक्कर में हैं।
ङ. आज भारत खंडित हैं, आजादी के समय ही भारत दो टुकड़ें में बंट गया था, बाद में चीन और पाकिस्तान ने भी भारत के हजारों वर्ग किलोमीटर भूभाग पर कब्जा कर बैठा. पर किसी की हिम्मत नहीं कि इन हजारों वर्ग किलोमीटर हड़पी गयी जमीन को पुनः भारत में मिला लें।
च. बहुत सारे भारतीय अब अमीर बन गये हैं, पर भारत के उपर विदेशियों का इतना कर्ज हैं कि भारत सरकार को बजट का बहुतेरे हिस्सा तो ब्याज देने में खत्म हो जाता हैं।
छ. स्वतंत्र होने के बाद देश का मान हर क्षेत्र में घटा हैं, हम विश्व कप फुटबाल में भाग लेने के लायक नहीं हैं, हमारे खिलाड़ी किसी भी खेल में गर कुछ जीतते हैं तो ये सरकार की देन नहीं, बल्कि उनकी अपनी मेहनत का फल होता हैं, जिस बांगलादेश को हमने आजाद कराया, वो हमारे लिए काल बन गया हैं, उसके आतंकवादी पूरे देश में फैलकर भारत के अमन चैन के लिए खतरा बन गये हैं, पूर्वोत्तर भारत तो बांगलादेशियों से पट गया हैं, और ये अब उत्तर की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं, और हमारी सरकार वोट बैंक की खातिर, आंख मूंद कर बैठी हैं, एक तो अपनी जनसंख्या और उपर से बांगलादेश की जनसंख्या का दबाव पूरे देश के लिए सरदर्द बन गयी हैं, पर इस पर भी यहां के नेता राजनीति करने से बाज नहीं आते, जबकि दूसरे देश में, ऐसा हैं ही नहीं, गर वहां पता लग जाये कि विदेशियों की बड़ी फौज उनके देश में आ गयी हैं, तो उसके साथ उनके द्वारा ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी जाती हैं कि बाद में उस देश में आने पर, वहां की जनता दस बार सोचने पर मजबूर हो जाती हैं।
ज. देश का लघु और कुटीर उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो चुका हैं, इसके जगह पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपना कब्जा जमा लिया हैं और देश की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से गिरवी हो गयी हैं।
कुछ लोग कहते हैं कि देश आजादी के बाद बहुत तरक्की किया हैं, मैं बता दूं कि गर ये देश स्वतंत्र नहीं होता, अंग्रेजों के अधीन रहता तब भी तरक्की करता, क्योंकि तरक्की किसी समय का मोहताज नहीं होता। क्या अंग्रेजों के समय डाक व्यवस्था, रेल परिवहन, दूरभाष, आदि जमीन पर नहीं उतरे थे क्या, क्या ये विकास नहीं था, विकास का मतलब कम्प्यूटर क्रांति, सूचना क्रांति होती हैं क्या, विकास का मतलब होता हैं, आंतरिक सोच और सम्मान के साथ बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक भारतीयों को बेहतर जिंदगी प्रदान करना, पर ये क्या आजादी के बाद संभव हुआ हैं।
क्या ये सही नहीं कि देश पर कारपोरेट जगत ने कब्जा जमा लिया हैं, और हमारे नेता इन कारपोरेट जगत की कठपुतली बन कर भरतनाट्यम कर रहे हैं, जमकर लूट मचा रखी हैं, एक बार विधायक अथवा सांसद बने नहीं कि जिंदगी की सारी सुख अपने कदमों पर लाकर खड़ा कर देने की चाहत, इन्होंने बढ़ा रखी हैं। क्या ये सही नहीं हैं कि एक तरफ गरीब जनता चालीस रुपये किलो चावल खरीदने पर मजबूर हैं, पर हमारे नेता संसद भवन और विधानसभा की कैंटिनों में भारतीयो के खून पसीने की कमाई को मुफ्त में उड़ाते चले जा रहे हैं। जरा खुद देखिये आजादी के पहले के नेताओं की जिंदगी और आजादी के बाद के नेताओं की जिंदगी पता लग जायेगा कि इनकी सोच क्या हैं और ये देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं।
आज चीन पूरे देश के लिए खतरा बनता जा रहा हैं, वो पूरे भूभाग को घेर रखा हैं, पर हमारे नेता को इसकी कोई चिंता नहीं।
इन सारी सच्चाईयों के बावजूद भी, भारी गड़बड़ियों के बावजूद भी गर्व कीजिये, क्योंकि आज भारतीय स्वतंत्रता दिवस का 64 वां दिवस हैं। इन बातों पर, पर याद रखिये, इसमें हमारे नेताओं का हाथ नहीं, बल्कि उन भारतीयों को हाथ हैं, जो तन मन धन से अभी भी देश को एक नयी पहचान दिलाना चाहते हैं ------------------------
आजादी के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारतीय चरित्र को सम्मान दिया, महात्मा गांधी के जन्म दिन को अतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया।
आजादी के बाद भारत ने चार युद्ध झेले और इन चारों युद्धों में भारतीय सेना ने भारत की लाज रखी, देश के सम्मान पर आंच आने नहीं दिया।
भारतीय किसानों ने कृषि में भारत को आत्मनिर्भर बनाया।
भारतीयों वैज्ञानिकों की नयी पीढ़ी ने संचार क्रांति और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारत को नयी पहचान दिलायी।
विश्व का सर्वश्रेष्ठ और महान लोकतंत्र जहां एक वोट से सरकार गिर जाती हैं, फिर जनता ही चूनती हैं, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान में जनता सरकार बनाती हैं, पर जनता सरकार गिराती नहीं, वहां इसका जिम्मा सेना संभालती हैं।
पूरे विश्व में भारतीय प्रतिभाओं की धाक, अमरीका, इँगलैंड और कई देशों में भारतीयों ने भारत का मान बढ़ाया।
देश के संतों ने विदेशों में जाकर भारतीय धर्म और संस्कृति का ऐसा पताका फहराया कि आज विदेशियों में भारतीय धर्म के प्रति आदर और सम्मान बढ़ता जा रहा हैं, हरे राम हरे कृष्ण आंदोलन के प्रणेता अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ के संस्थापक भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद जी, भारतीय योग को विदेशों में फैलानेवाले स्वामी योगानंद जी जैसे संत इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।