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Wednesday, May 3, 2017

मर जवान, मर किसान...........

कभी इसी देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक नारा दिया था – जय जवान, जय किसान। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने वैज्ञानिकों की कर्मठता को देखा तो उस नारे में दो शब्द और जोड़े और फिर हुआ – जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, पर आज देश की क्या स्थिति है? न जवान की जय हो रही है, न किसान की जय हो रही है और न ही विज्ञान की जय हो रही है, तब जय किसकी हो रही है...
जाहिर है...
• नेताओं की, उनकी पत्नियों की और उनके बेवकूफ औलादों की।
• उद्योगपतियों की, उनके उदयोगों की तथा उनके नाजायज संपत्तियों की।
• आईएएस व आईपीएस अधिकारियों की, जो जब तक जिंदा रहे, मस्ती से नौकरी किये और फिर बाद में नेताओं के तलवे चाटकर नेतागिरी में पिल पड़े है।
• नीच पत्रकारों के समूहों की, जो अपना जमीर बेचकर इन तीनों की आरती उतारने में लगा है।
आखिर ये कब तक चलेगा?, जाहिर है जब तक देश का युवा, गरीब, चरित्रवानों का समूह इन्हें लूटने का मौका देगा।
जरा स्थिति देखिये...
देश की गरीब जनता की औलादें, कभी आतंकियों के हाथों सरहद पर, तो कभी देश के अंदर नरपिशाचरुपी नक्सलियों के हाथों मारे जा रहे हैं, और सरकार का काम क्या रह गया है? बस कड़ी निंदा करने की, क्योंकि इनके पास ताकत ही नहीं, ताकत आयेगी भी कहां से, इस देश का नेता तो अपनी बेवकूफ औलादों और अपनी पत्नी तथा प्रेमिकाओं के आगे कुछ जानता ही नहीं।
आखिर देश का जवान क्यों शहीद हो रहा है? उसका कारण जानिये...
• क्योंकि देश के लिए मर-मिटनेवालों में कोई नेता, कोई अधिकारी या कोई उद्योगपतियों का बेटा या बेटी शामिल नहीं होता। इन सभी का मानना है कि उनके औलादों का जन्म केवल मस्ती करने के लिए पैदा हुआ हैं।
• जिन गरीबों के बच्चे जवान बनते है, उन्हें मरने के लिए उन्हें ऐसे ही छोड़ दिया जाता है, न तो उन्हें बेहतर खाना दिया जाता है, न बेहतर पोशाक और न ही आतंकियों और नरपिशाच रुपी नक्सलियों से लड़ने के लिए बेहतर हथियार उपलब्ध कराये जाते है। ये नेता इतने बेहूदे और कमीने होते है कि देश की रक्षा के लिए खरीदे जानेवाले हथियारों की खरीद में भी कमीशन खाते है।
• नरपिशाचरुपी नक्सलियों और आतंकियों के बचाव के लिए मानवाधिकार के नाम पर साम्यवादियों का दल देश के जवानों को ही कटघरें में खड़ा कर देता है।
जिस देश में बेईमान नेता, बेईमान अधिकारी, बेईमान पूंजीपति और बेईमान-लालची किस्म के पत्रकार होते है, उस देश में देश की रक्षा करनेवाला जवान तिल-तिल मरता हैं।
मैं कहता हूं कि ऐ देश में रहनेवालों गरीबों, वंचितों, भूख से मरनेवालों, क्या देश की सुरक्षा के लिए तुमने ही ठेका ले रखा है? 
मत भेजो, अपने बच्चों को, देश की रक्षा के लिए,  छोड़ दो तुम भी देश को अपने हाल पर, और तुम भी उसी प्रकार जिओ, जैसे तुम्हारा मन करता है, क्यों देश के लिए अपनी औलादों को शहीद करवा रहे हो?
अरे देश के सारे नेता एक ही है, चाहे वह मोदी हो या मनमोहन। सभी एक थैले के चट्टे-बट्टे है, जरा पूछो मोदी से, कि कल जैसे मनमोहन को इसी बात के लिए वह कटघऱे में खड़ा करता था, आज उसकी घिग्घी क्यों बंध गयी है?
पूछो, देश के रक्षा मंत्री अरुण जेटली से कि क्या उसे केवल धन इकट्ठे करने के सिवा, देश की रक्षा कैसे की जाती है? उसको पता है?
कमाल है, देश का रक्षा मंत्रालय प्रभार पर चल रहा है, प्रधानमंत्री मोदी के पास कोई ऐसा आदमी नहीं, जो रक्षा मंत्रालय को संभाल सकें?
देखो, इन नेताओं को अपने लिए पेंशन और हर प्रकार की सुविधा की व्यवस्था कर लिया और आपके बच्चे, जो अर्द्धसैनिक बलों में कार्य कर रहे है, उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया, यहां तक की उसकी पेंशन तक समाप्त कर दी, इन देश के गद्दारों ने। देश को नामर्द बना कर खड़ा कर दिया है, इनलोगों ने।
इसलिए, हम उन सारे लोगों से अपील करते है, खासकर उनसे...
• जो माता-पिता सुलेसन से चमड़े साटकर अपने बच्चों को जवान करते है...
• जो माता-पिता सफाईकर्मी का कार्य करते है...
• जो माता-पिता अट्टालिकाओं में स्वयं को शोषण का शिकार बनाते हुए, अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रहे है...
• जो पंडित दो पैसों के लिए, अपने जजमानों के यहां शंख फूंक रहे है।
• जो गली-कुची में छोटी-छोटी दुकानें खोलकर अपनी जिंदगी जी रहे है...
यानी वे सारे लोग, जो किसी भी जाति के क्यों न हो, पर गरीबी से जिनका नाता है, वे अब अपने बच्चों को सिर्फ मरने के लिए सेना या अर्द्धसैनिक बलों में न भेजे, क्योंकि वर्तमान सरकार हो, या पूर्व की सरकार या कोई भी आनेवाले समय में आनेवाली सरकार हो, सभी ने आपके बच्चों को मारने की तैयारी कर रखी है, ऐसे में, आप अपने बच्चों को अपने साथ रखे, भले गरीब रहेगा, पर कम से कम आंखों के सामने तो रहेगा, किसी नेता, किसी अधिकारी या किसी उदयोगपति के शोषण का शिकार तो नहीं बनेगा, नहीं तो सबसे पहले नेता, अधिकारी और उदयोगपतियों के घर की औलादे भी देश के लिए जवान गंवाने के लिए तैयार रहे, क्या देश की सुरक्षा के लिए जान गंवाने का ठेका, यहां के गरीबों ने ही केवल ले रखा है?

Saturday, May 28, 2016

2 साल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल के...

अगर एक शब्द में कोई पूछे इस सवाल के जवाब तो मैं यहीं कहूंगा – प्रशंसनीय।
याद करिये, जब नरेन्द्र मोदी ने शासन का बागडोर संभाला था तो देश की क्या स्थिति थी? सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार और पूरे विश्व में भारत की गिरती साख का था और इन दोनों मुद्दों पर नरेन्द्र मोदी ने शानदार तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहण किया। दो साल हो गये पर विपक्षी दल के किसी भी नेता में ये हिम्मत नहीं कि नरेन्द्र मोदी ही नहीं बल्कि नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल किसी भी मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा दें, जब इन विपक्षियों को कुछ भी नहीं मिल रहा तो वे ऐसे-ऐसे आरोप लगा रहे है, जिसे देख और पढ़कर सामान्य जनता अपनी हंसी को नहीं रोक पा रही, उन्हीं आरोपों में से एक आरोप है केजरीवाल की पार्टी द्वारा लगाया गया प्रधानमंत्री पर डिग्री संबंधी आरोप है, जिसका कोई भ्रष्टाचार से लेना-देना नहीं, सिवाय रायता फैलाने के। भ्रष्टाचार पर विराम लगाकर और दूसरी ओर संपूर्ण विश्व में भारत की साख को स्थापित कर नरेन्द्र मोदी ने सिद्ध कर दिया कि भारत में फिलहाल उनका कोई विकल्प नहीं। अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात साथ ही पड़ोसी भूटान, नेपाल, चीन, पाकिस्तान, मालदीव, श्रीलंका, बांगलादेश जैसे देशों के साथ मधुर संबंध स्थापित कर भारत की शान बढ़ा दी। भारत और बांगलादेश सीमा विवाद का 40 साल पुराना विवाद सदा के लिए समाप्त कराया। जब नेपाल में भूकम्प के रूप में त्रासदी आयी, सबसे पहले भारत नेपाल के साथ खड़ा हुआ, जिसका संपूर्ण विश्व ने तहेदिल से समर्थन और प्रशंसा किया, यहीं नहीं यमन में जब भारतीयों के उपर संकट गहराया, तब भारत का उस वक्त कौन ऐसा देश था, जिसने प्रशंसा नहीं किया, यहां पर तो भारत ने विदेशियों को भी बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कल तक नरेन्द्र मोदी को वीसा नहीं देने की बात करनेवाला अमरीका आज उनके कशीदे पढ़ रहा है, आखिर क्या खास है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में...
नरेन्द्र मोदी की खासियत पर ध्यान दीजिये...
देश में तीन ही शानदार प्रधानमंत्री हुए, जिन पर किसी भी किस्म का दाग नहीं, जो अपनी काबिलियत के आधार पर प्रधानमंत्री बने, न कि किसी की कृपा या कहने पर...
वे पहले प्रधानमंत्री थे – लाल बहादुर शास्त्री, दूसरे अटल बिहारी वाजपेयी और तीसरे नरेन्द्र मोदी।
बाकी जितने लोग हुए, उन्होंने किसी न किसी की कृपा या जोड़-तोड़ का सहारा अवश्य लिया। आज नरेन्द्र मोदी को ही लीजिये, उन्होंने परिवारवाद पर चोट करते हुए, दिखाया कि उनके लिए देश ही सर्वोपरि है, जब से वे सत्ता में आये है, तब से लेकर आज तक उन्होंने कभी भी छुट्टी ही नहीं ली, बहुत ही कम खर्च में वे कई देशों की यात्रा की, साथ ही भारत के संदेश को वहां के जन-जन तक पहुंचाया, ये पहला मौका था कि जब भारत का प्रधानमंत्री, दूसरे देशों में बैठे अपने नागरिकों और वहां की जनता के साथ, उसी धरती पर इस प्रकार संवाद स्थापित कर रहा था, जैसे लगता हो कि वह कोई वहां चुनावी सभा को संबोधित कर रहा हो।
पहली बार भारत के किसी प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र संघ को योग पर झकझोरा और पूरे विश्व ने भारत की देन योग को स्वीकारा, देखते ही देखते संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत के योग को स्वीकृत करते हुए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रुप में मनाने की घोषणा की। यहीं नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता को जनांदोलन बना दिया, आज पूरा देश स्वच्छता अभियान से जुड़ गया है, कई निजी स्वैच्छिक संस्थाएं और बड़े-बड़े नेता-अभिनेता इस अभियान से जुड़कर देश की दशा – दिशा बदलने के लिए निकल पड़े। देश की बेटियों को मान बढ़ाया, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ अभियान चलाया, सुकन्या समृद्धि योजना से बालिकाओं के बेहतर भविष्य के लिए कार्यक्रम चलाये। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना चलाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए विशेष योजना चलायी। जन-धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना चलाकर देश की गरीब जनता को एक नई आर्थिक ताकत दी, वहीं स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, डिजिटल इंडिया आदि चलाकर देश को हर स्तर पर संबल प्रदान करने की सफल कोशिश की। पहली बार बिना किसी भेदभाव के सबको एक साथ ले चलने की बात कही गयी, ये नहीं कि अल्पसंख्यक कहकर उन्हें बहुसंख्यक से अलग करने और दलित-पिछड़े कहकर उन्हें अन्य से भेदभाव करने का बीज रोपा गया। सबका साथ- सबका विकास के नारे के साथ सभी को बराबर का मौका देते हुए, सभी को देश बनाने के लिए उनके मनोबल को बढ़ाया गया, जिससे देश काफी आगे निकलने की कोशिश में है। जरा देखिये जहां पूरा विश्व आर्थिक मंदी का शिकार है, वहीं भारत की आर्थिक विकास दर आज भी 7.57 प्रतिशत है, जो पूरे विश्व को आश्चर्यचकित कर रहा है, ये सब नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता का कमाल है, ये कमाल है, उस व्यक्ति का जिसकी सोच पूर्णतः देश को समर्पित है, यहीं कारण है कि वर्तमान अमरीकन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इसी सोच पर टिप्पणी की थी कि यह व्यक्ति की पहली और अंतिम सोच भारत की प्रगति है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देना हो, लोगों की क्रय शक्ति बढ़ानी हो, देश की अर्थव्यवस्था को एक मुकाम देना हो, सब में प्रधानमंत्री का विजन क्लियर है। हाल ही में वे 24 अप्रैल को जमशेदपुर आये, मौका था राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन का, उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा था कि वे चाहते है कि गांधी के सपनों का भारत बनाएं, और ये तभी बनेगा जब गांव की पंचायत सशक्त होगी, जब गांव के पंचायत सही निर्णय लेने प्रारंभ करेंगे, वे एक साल में एक योजनाएं बनायेंगे और उसे मूर्तरूप देंगे, इसी से ग्रामोदय होगा और जब ग्रामोदय होगा तो भारत के उदय होने से कोई रोक नहीं सकता। आज का प्रधानमंत्री अपने बेटे या अपनी पत्नी को सुख प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नहीं बना है, उसकी विजन है, भारत निर्माण की, वह निकल पड़ा है, निर्माण के लिए, भारत बन रहा है, भारत बदल रहा है, आज का युवा भी अपने प्रधानमंत्री के साथ है, तभी तो बेंगलूरु के एक शिक्षण संस्थान में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने वहां उपस्थित युवाओं से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संबंधित कुछ सवाल पूछे तो उन्हें उनकी आशा के अनुरूप उत्तर नहीं मिले। ये घटना साफ बताती है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की युवाओं की सोच बदली है और जब युवा की सोच बदलेगी तो देश का तकदीर जरूर बदलेगा। मेरा भारत बदल रहा है, हमारा भारत बदल रहा है, इसमें कोई मत नहीं कि पहली बार हुआ है कि विश्व में कही भी भारतीय है, आज वह शान से बोल रहा है कि वह भारतीय है, वह जहां भी हैं, उसके दिल में भारत का दिल धड़क रहा है, और ये सब हुआ है मात्र दो वर्षों में, जरा सोचिये दो वर्षों में ये हाल है, तो पांच वर्षों में क्या होगा? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आप के इस बीते दो साल के लिए आपको दिल से बधाई।

Thursday, January 9, 2014

चाटुकारिता में आजतक ने देश के सारे चैनलों को पीछे छोड़ा, शीर्ष स्थान पर अपनी सीट बरकरार रखी.................

चाटुकारिता में आजतक ने देश के सारे चैनलों को पीछे छोड़ा, शीर्ष स्थान पर अपनी सीट बरकरार रखी। जी हां, ये सत्य हैं। अभी पूरे देश के सारे राष्ट्रीय चैनलों में एक-दो को छोड़कर, होड़ लगी हैं कि अरविंद केजरीवाल की चाटुकारिता में कौन किसको पीछे छोड़ता हैं। इसमें आज तक ने अपनी सीट पहले की तरह बरकरार रखी है। कल इस चैनल ने अरविंद की तुलना महात्मा गांधी से कर दी। इस चैनल ने इसके लिए रिचर्ड एटनबरो की गांधी फिल्म का सहारा लिया और व्ही. शांताराम की सुप्रसिद्ध फिल्म दो आंखे बारह हाथ का गाना - हम भलाई करे, वो बुराई करे, कभी बदले की न हो कामना गाने को अरविंद केजरीवाल के चरणों में समर्पित कर, स्वयं को धन्य - धन्य और भारतीय जनमानस के सामने ये भाव प्रस्तुत किया कि हे देशवासियों तुम्हारा तारणहार आ गया हैं।
याद करिए दूरदर्शन का जमाना, जब आज तक जैसे चैनल नहीं थे। इंदिरा जी का देहावसान हो चुका था। राजीव गांधी भारत के प्रधानमंत्री बने थे। दूरदर्शन राजीव गांधी को मि. क्लीन के रुप में इस प्रकार प्रस्तुत करता था जैसे लगता था कि राजीव गांधी नहीं तो कोई नहीं और इसे लेकर सारा विपक्ष दूरदर्शन की आलोचना करने से नहीं चूकता। किसी ने तो इसी पर दूरदर्शन का नाम बदलकर राजीव दर्शन कर दिया था। ठीक उसी प्रकार आज तक चैनल का नाम केजरीवाल तक कर दिया जाय तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस चैनल ने हद कर दी हैं। चाटुकारिता व ठकुरसोहाती के ऐसे - ऐसे बोल, ये बंदा बोल रहा हैं, जैसे लगता हैं कि इसने आम आदमी पार्टी से करार कर लिया हो, कि वो उनकी पार्टी को आगामी लोकसभा में सदन में बहुमत दिलाकर रहेगा। जबकि सच्चाई ये हैं कि इस पार्टी ने अब तक कोई ऐसा कार्य नहीं किया जो अनुकरणीय हो। इस अरविंद केजरीवाल से भी बेहतर और ईमानदार, सादगी में जीनेवाले मुख्यमंत्री हैं पर ये उन्हें स्थान नहीं देता। सिर्फ हरे राम हरे राम वाली महामंत्र की जगह हरे अरविंद हरे अरविंद जपता रहता हैं और पूरे देश से जपवाने की काम करता हैं। जिससे देश की पत्रकारिता को लोग संदेह की नजरों से देख रहे हैं।
हम आपको बता दें कि जिस प्रकार से इस चैनल ने अरविंद की तुलना गांधी से कर दी, ऐसी तुलना तो लाल बहादुर शास्त्री जैसे ईमानदार व सादगी के महान पुरोधा की भी नहीं की गयी थी। गांधी की तुलना, अरविंद से करना, गांधी का भी अपमान है। गांधी एकता के सूत्रधार थे, ये अलग बात थी कि गांधी के रहते, भारत तीन टुकड़ों में बंट गया। दो देश बने - भारत और पाकिस्तान। पर अरविंद केजरीवाल की पार्टी में ऐसे - ऐसे घटिया स्तर के लोग हैं जो इस खंडित देश को और भी खंड-खंड करने में लगे हैं। मानवाधिकार की आड़ में कश्मीर को भारत से अलग करने की बात कहते है। विपरीत परिस्थितियों में देश की आन-बान और शान के लिए लड़ रहे हमारे सैनिकों के कार्यों की नुक्ताचीनी करते हैं। फिर भी देश भक्त कहलाते हैं। आश्चर्य हैं कि  वातानुकूलित कमरों में बैठनेवाले आम आदमी पार्टी के घटियास्तर के नेता व आजतक के पत्रकारों को लज्जा नहीं आती। बड़ी ही बेशर्मी से आम आदमी पार्टी की जय जयकार में लगे हैं। भाई, भारत ऐसा देश ही हैं जहां पृथ्वी राज चौहान के समय जयचंद भी था, अकबर के शासनकाल में जब महाराणा प्रताप अकबर से लोहा ले रहे थे तो उसी वक्त मान सिंह भी मौजूद था। तो ऐसे समय में वर्तमान स्थिति में ऐसे लोग भी दिखाई पड़ रहे हैं तो क्या गलत हैं। फिर भी जो महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान को माननेवाले लोग हैं, उन्हें ध्यान रखना होगा कि इस बार जयचंदों की फौज जीत न सकें।

Saturday, May 4, 2013

बेचारा बंसल मामा, रेलमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देगा......

रेलमत्री पवन कुमार बंसल इस्तीफा नहीं देंगे। कांग्रेस भी कह चुकी हैं कि पवन कुमार बंसल इस्तीफा नहीं देंगे। भला बंसल इस्तीफा क्यों दे, इस्तीफा तो वो देता हैं, जिसके पास जमीर होती हैं। अब कांग्रेसियों के पास जमीर तो हैं नहीं, तो भला रेलमंत्री अपने पद से इस्तीफा क्यों दे। इस्तीफा तो दिया था, हमारे लाल बहादुर शास्त्री ने, जब उनके कार्यकाल में एक रेल दुर्घटना हो गयी थी। हम आपको बता दें कि लाल बहादुर शास्त्री इस घटना के लिए जिम्मेवार नहीं थे, फिर भी नैतिकता के आधार पर कि उनके कार्यकाल के दौरान इतनी बड़ी दुर्घटना हुई थी उन्होंने रेलमंत्रालय संभालने से ही इनकार कर दिया था।
आज पवन कुमार बंसल को देखिये। इसके भांजे विजय कुमार सिंगला को सीबीआई ने 90 लाख रुपये घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह रकम विजय को उन्हें बतौर रिश्वत दो दिन पहले ही रेलवे बोर्ड के सदस्य बनाये गये महेश कुमार ने भिजवाई थी। पूरी डील दो करोड़ की थी और फिर भी बेशर्मी से रेलमंत्री पवन कुमार बंसल कहता है कि वो इस्तीफा नहीं देगा। कांग्रेस भी पवन कुमार बंसल के बचाव में निर्लज्जता के साथ खड़ी हो गयी हैं, ऐसे भी निर्लज्ज को लज्जा कहा आती हैं। कांग्रेस अच्छी तरह भारतीय जनता की नब्ज टटोल चुकी हैं, वो जानती हैं कि इस देश में भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं बनता, इस देश में भारत की सीमा चीन छोटा क्यूं न कर दें, ये मुद्दा नहीं बनता। जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी, वो उतना बड़ा नेता, इसलिए भ्रष्टाचार में लिप्त रहो, चीन से अपने देश की सीमा छोटी कराते रहो और फिर निर्लज्जता के साथी तीसरे टर्म के लिेए वोट मांगने को तैयार रहो। 
जनता के पास विकल्प तो हैं ही नहीं, वो क्या करेगी, अंततः कांग्रेस के साथ ही खड़ी होगी। गर किसी कारण से बहुमत नहीं भी आया तो निर्लजज्ता की श्रेणी में खड़े होने के लिए लालायित नीतीश एक न एक दिन, उनके साथ खड़े हो ही जायेंगे। बिहार में लालू और रामविलास, यूपी में मुलायम और मायावती  तो पहले से ही सोनिया नाम केवलम् का मंत्र जाप कर रहे हैं, दक्षिण में करुणानिधि और बची खुची वामपंथी पार्टियां, ये क्या करेंगी, अतंतः उन्हीं के शरण में आयेगी। देश भाड़ में जाय, हमने थोड़ी ही ठीका ले रखा हैं, आराम से लूटेंगे, विदेश में पैसे रखेंगे और फिर पूरे परिवार के साथ विदेश में कहीं बस जायेंगे। ये देश कोई रहने का हैं। देश तो इटली हैं, जहां की सोनिया माता हैं, जिनकी कृपा से राहुल और प्रियंका जी हैं। देश तो अमरीका, इंगलैंड और स्विटजरलैंड हैं, उनकी सरकारों के जूतों पर अपना नाक रगड़कर, वहां का नागरिकता प्राप्त कर लेंगे, यानी जब तक जिंदा रहेंगे, मस्ती में रहकर, पूरा जीवन गुजार देंगे।
इसलिए पवन कुमार बंसल, उसी श्रेणी के नेता हैं। सर्वदा सोनिया-राहुल और प्रियंका में अपना सर्वस्व लूटाने, चाटुकारिता करने, चरणवंदना करने, गणेश परिक्रमा करने में बड़ी ही श्रद्धा दिखाते हैं। जिसके एवज में वरदान स्वरुप रेल मंत्रालय उन्हें संभालने को मिला। आपको याद होगा, जब वे पहली बार रेलमंत्री बने थे, तो अपने भाषण में सोनिया जी की बड़ी ही श्रद्धा से नाम लिया था, राजीव गांधी का बड़ा ही नाम लिया था। उन्हें दुसरा कोई नाम याद ही नहीं था, क्योंकि जब सोनिया और राहुल जैसे भगवन् की उनके उपर कृपा हैं, तो जरुरत क्या हैं, अन्य का नाम लेने की। धन्य हैं, आज के नेता, आज के रेलमंत्री पवन कुमार बंसल जो रेल मंत्री के पद पर रहते हुए, अपने भांजे से सुंदर - सुंदर कार्य कराते हुए, भ्रष्टाचार का नया रिकार्ड बनाते हैं, ऐसे ही नेताओं से तो भारत की सुंदर तस्वीर बनती हैं। हम चाहेंगे कि देश में एक निर्लज्जता का भी एवार्ड देने की परंपरा की शुरुआत हो, ताकि ऐसे निर्लज्जों को पुरस्कृत किया जा सके, क्योंकि इन्होंने निर्लज्जता का रिकार्ड बना रखा हैं।