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Wednesday, October 5, 2016

लो शुरू हो गया अपनी ढपली अपना राग..............

अरविंद केजरीवाल, अरुण शौरी, दिग्विजय सिंह के बाद संजय निरुपम और पता नहीं और कौन – कौन से लोग आयेंगे। इन सभी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मांग की है कि वे सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो जारी करें। इन्होंने प्रत्यक्ष रुप से ये भी कह डाला कि इस प्रकार के स्ट्राइक पूर्व में भी होते रहे पर किसी ने इस प्रकार से मीडिया के समक्ष इन बातों को नहीं उठाया, पर भाजपा की मोदी सरकार ने पालिटिकल माइलेज के लिए ऐसा किया। हमें पूरा विश्वास था कि कुछ दिनों के बाद इस प्रकार के बयान सुनने को मिलेंगे, इसकी संभावनाएं हमें पहले से थी, क्योंकि विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है, जहां देशद्रोहियों की एक परंपरा रही है। उन परंपराओं की ओर जायेंगे तो देखेंगे कि इसकी बहुत बड़ी लिस्ट है, पर मैं ज्यादा तो नहीं, पर कुछ महान देशद्रोहियों का नाम यहां जरुर रखना चाहेंगे। मो. गोरी के समय जयचंद, ब्रिटिश हुकुमत के समय जब महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ रही थी, तो सिंधिया परिवार ने लक्ष्मीबाई को मदद न कर, अंग्रेजों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसका वर्णन तो सुप्रसिद्ध कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने भी किया – यह कहकर कि अंग्रेजों के मित्र सिंधिंया ने छोड़ी रजधानी थी, खुब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी। सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी व देश की युवाओं के धड़कन भगत सिंह को फांसी के तख्ते तक पहुंचाने में सुप्रसिद्ध पत्रकार खुशवंत सिंह के पिता शोभा सिंह का बहुत बड़ा हाथ था। इसलिए जब हाफिज सईद जैसे आतंकियों को सईद जी कहकर संबोधित करनेवाला वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह जब ये कहता है कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसी चीज कुछ हुई ही नहीं तो हमें यह आश्चर्य नहीं होता और रही बात संजय निरुपम की तो फिलहाल शिव सेना से कैरियर शुरु करनेवाला अभी सेकुलर राजनीति का प्याज खा रहा है, अरविंद केजरीवाल तो दुनिया के एकमात्र ईमानदार नेता है, इसलिए उनकी ईमानदारी तो इसी में है कि वे प्रधानमंत्री के साथ – साथ भारतीय सेना पर भी अंगूली उठा दें। अरुण शौरी के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो वो बैंटिग की है कि उनका वश चले तो वे जयचंद को भी मात दे दें। ये तो रहा भारतीय पक्ष अब देखते है पाकिस्तान के क्या हाल है... पाकिस्तान भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर इतना घबराया हुआ है कि पाकिस्तानी सेना पिछले दिनों पत्रकारों का एक दल बार्डर के समीप ले गया। उसके इस हरकत पर फ्रांसीसी न्यूज एजेंसी एएफपी ने पाकिस्तान के इस हरकत को एक दुर्लभ कदम करार दिया। पाकिस्तानी मीडिया डॉन और द न्यूज इंटरनेशनल के मुताबिक वहां सर्जिकल स्ट्राइक के कोई निशान नहीं मिले पर एएफपी ने पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल असीम बाजवा का बयान छापा कि जिसमे बाजवा ने कहा कि उनका इलाका मीडिया के लिए खुला है, आप देख सकते है कि यहां शांति है, यहां कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई, हालांकि एएफपी ने यह भी लिखा बाजवा के दावों की पुष्टि करना संभव नहीं था कि भारतीय सेना ने उन क्षेत्रों में सर्जिकल स्ट्राइक नहीं की। इधर आतंकी दाउद इब्राहिम का समधी जावेद मियांदाद अपने स्वभावानुरुप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गालियों से नवाजा है। पाकिस्तान के पूर्व वायुसेना प्रमुख रह चुके एयर मार्शल असगर खान ने कहा है कि पाकिस्तान को भारत से कभी कोई खतरा नहीं रहा, सच्चाई यह है कि पाकिस्तान ने ही भारत पर ज्यादा हमले किये। इसी बीच भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इतनी विकट परिस्थितियों में भी मानवीय मूल्यों को तरजीह देकर दोनों देशों में सुर्खियां बटोर ली है, जब उन्होने पाकिस्तानी यूथ डेलिगेशन के साथ मित्रवत् व्यवहार किया। हुआ यह कि एक अक्टूबर को पीस फोरम आगाज दोस्ती की कन्वेनर आलिया हरीर ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से अपनी सुरक्षा को लेकर बात की। सुषमा ने आलिया को सुरक्षित वापसी को लेकर भरोसा दिलाया। सुषमा स्वराज ने इस टीम को हृदय को छू लेनेवाली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बेटियों के लिए कोई सरहद नहीं होती। बेटियों का ताल्लुक सबसे होता है।
इसी बीच यूनाइटेड नेशन में रूस के राजदूत और अक्टूबर महीने के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष ने पाकिस्तान को तगड़ा झटका दिया है। उन्होंने यूनाइटेड नेशन जैसी वैश्विक संस्था में कश्मीर मसले और भारत की सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा उठानेवाले पाकिस्तान को स्पष्ट तौर पर झिड़की लगायी है और कह दिया कि यह सुरक्षा परिषद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनावों पर चर्चा नहीं करने जा रहा। संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत विताली चर्किन ने तो मीडिया के द्वारा पूछे गये सवाल पर भी नो कमेंट्स कहकर निकल गये। कुल मिलाकर पूरे विश्व स्तर पर भारत को मिल रही साख और भारतीय सेना को मिल रहे साथ पर अब भारत के कुछ जयचंदों की फौज अंगूलियां उठानी शुरु कर दी है, वह भी क्षुद्रस्वार्थ के लिए। यही भारत की सही इमेज है, जो कभी भी खत्म नहीं हो सकती।
(यह आर्टिकल रांची से प्रकाशित समाचार पत्र आजाद सिपाही में आज के अंक में संपादकीय पृष्ठ 11 पर प्रकाशित है।)

Sunday, July 17, 2011

उस देश की हालत क्या होगी, जिस देश में डाकू चोर बसे


जब मुंबई में बम ब्लास्ट हुआ, लोगों की चीत्कार से समस्त देशवासी हिल गये। उस वक्त हमारे नेता किस प्रकार की बयानबाजी कर रहे थे, अपना समय कैसे गुजार रहे थे। जरा उस पर प्रत्येक देशवासी को विचार करना चाहिए। विचार ये भी करनी चाहिए कि जिनकी इतनी घटियास्तर की सोच हो। क्या उनके देख रेख में अपना देश सुरक्षित हैं, गर नहीं तो ऐसे हालात में हमें क्या करना चाहिए।
मुंबई ब्लास्ट के बाद सबसे पहले, इस देश के घटियास्तर के नेताओं का बयान सुनिये--------
घटियास्तर का नेता नं. एक – दिग्विजय सिंह – ये कहता है कि पाक में तो हर दिन धमाके होते हैं, हम उनसे बेहतर।
घटियास्तर का नेता नं. दो
– राहुल गांधी, जो खुद को युवराज, भविष्य का प्रधानमंत्री और पता नहीं क्या क्या विभूषित करा रखा हैं, इसका बयान आता हैं कि अफगानिस्तान, ईरान – इराक में भी होते हैं आतंकी हमले, आतंकी हमले को रोकना मुमकिन नहीं हैं।
घटियास्तर का नेता नं. तीन
– गृहमंत्री पी. चिदम्बरम – जो गृह मंत्रालय संभाल रहा हैं, कहता हैं कि खुफिया एजेंसी ने 31 महीने तक मुंबई को बचाये रखा।
घटियास्तर का नेता नं. चार – राज ठाकरे – महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का स्वयंभू- इसका देश महाराष्ट्र से शुरु होता हैं और महाराष्ट्र पर ही खत्म हो जाता हैं, कहता हैं कि इस आतंकी घटना के लिए उत्तर भारतीय जिम्मेवार।
घटियास्तर का नेता नं. पांच
– प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह – जो झूठी दिलासे दिलाते हुए कहता हैं सरकार भविष्य में आतंकी हमले नहीं होने देगी और इसी पार्टी का,
घटियास्तर का नेता नं. छः
– पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय, जिसकी आंखों में शर्म तक नहीं, उधर लोग चीख चिल्ला रहे थे, ये अर्द्धनग्न युवतियों के दृश्यों को अपने आंखों में कैद कर रहा था।
ये सारी घटनाएं बताती हैं कि हमारे देश के नेता कितने निर्लज्ज, बेहया और कायर है। इन्हें आतंकियों की आहट सुनायी नहीं देती। क्योंकि आतंकियों के धमाके, इनके परिवारों को प्रभावित नहीं करते। करेंगे भी कैसे। आतंकी इनके मेहमान और रिश्तेदार जो होते हैं। याद करिये, कि जब रुबिया सईद का अपहरण हुआ था तो हमारे देश के कर्णधारों ने कैसे पांच आतंकियों को ससम्मान छोड़ दिया था। ऐसे उदाहरण एक नहीं, अनेक है।
हम भारतीय भी इस आतंकी घटनाओं के लिए कम जिम्मेवार नहीं है। याद करिये, केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार, कारगिल युद्ध के बाद, एक भारतीय विमान का आतंकियों ने अपहरण किया। उस विमान में आतंकियों के गिरफ्त में जिनके परिवार के सदस्यों का जीवन खतरे में था, उन्होंने बलिदान की भावना को त्याग कर
देश हमारा भाड़ में जाये,
मेरा परिवार घर को आये,

इस भावना के तहत, प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय का घेराव कर दिया। नतीजा क्या हुआ, एक अरब का देश भारत, आतंकियों के आगे सर झूकाया। तीन पाकिस्तानी आंतकी छोड़े गये, और नतीजा सामने है। ये आंतकी हमेशा आतंक के बल पर हमें घिघियाने को विवश करता हैं, हम घिघियाते हैं, और उसके रहमोकरम पर रहने को विवश हैं।
वो देश जो हर पन्द्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी को ये गीत गाता हैं कि
"लाख फौजे लेके आये
अमन का दुश्मन कोई
रुक नहीं सकता,
हमारी एकता के सामने
हम वो पत्थर हैं, जिसे
दुश्मन हिला सकते नहीं.
अपनी आजादी को, हम हरगिज मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं, लेकिन सर झूका सकते नहीं।"
कमाल हैं ये गीत गानेवाला देश, जब – जब सर कटाने की बारी आयी। आतंकियों के आगे सर झूकाया हैं, वो सिर्फ मैंने ही नहीं, बल्कि पूरा विश्व देखा हैं कि भारत में अब महाराणा प्रताप, चाणक्य, गुरु गोविन्द सिंह जैसे महापुरुष नहीं पैदा हो रहे, अब शत प्रतिशत कायर और अपने पत्नी के लिए जीनेवाले, लोग पैदा हो रहे हैं और जिस देश में ऐसी पौध होगी, वो देश आतंकियो के रहमोंकरम पर ही जिंदा रहेगा। ये शाश्वत सत्य हैं और गर कोई इसे नकारने की बात करता हैं, तो उसकी मूर्खता पर हमें कुछ भी बातें नहीं करनी।
अब जबकि पूरा देश आतंकियों के गिरफ्त में है, तो हमें क्या करना चाहिए। ये यक्ष प्रश्न, उस हर देशवासी के हृदय में हैं, जो देश के लिए सोचता हैं। उनके लिए, कुछ सुझाव हैं
1. नेताओं के बातों पर ध्यान न दें, ये गद्दार है, गद्दारी करेंगे, और अंत में अपने लिए, अपने शव पर तिरंगा भी डलवा लेंगे। ऐसे लोगों से सावधान रहे।
2. जहां भी रहे, ये मन में ध्यान रखें कि ईश्वर आपके साथ हैं, गर आप दुनिया में नहीं भी रहेंगे तो आपके परिवार का भरण पोषण करनेवाला ईश्वर आपके परिवार को देखेगा। आप देश के लिए मरने को तैयार रहे, कहीं भी कोई आतंकी घटनाएं होती हैं, उस पर आंसू न बहाये, न रोए, उसका मुकाबला करें, किसी की हिम्मत नहीं कि इस देश और इसकी संस्कृति को मिटा सकें।
3. आतंकी विदेश में नहीं हैं, इसी देश में हैं, विदेश से तो इनके गिने चुने आका ही आते हैं, और हम सबकी नींद उड़ा देते हैं, आप अपने आसपास जहां रहते हैं, वहां जैसे ही बाहरी लोगों को देखे, सतर्क हो जाये।
4. आतंकी जब भय दिखाकर, हमें डिगा सकने का इरादा रखते हैं, तो हम भी उन्हें भय दिखाये कि यहां रहना तुम्हारे लिए मौत को आमंत्रण देना हैं, लेकिन आप जैसे ही इन आतंकियों को जिंदा पकड़ेंगे तो ये नेता उन्हें बचाकर विदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे, जैसा कि पूर्व में आतंकियों को छोड़कर और जेलों में आज भी कई आतंकियों की आवभगत कर हमारे देश के नेताओं ने एक सुंदर उदाहरण पूरे विश्व को दे दिया हैं।
5. हमारे देश के कानून में इतना दम ही नहीं कि कोई आतंकी बच कर निकल जाये, ये कानून सदियों पहले अंग्रेजों के द्वारा बनाये गये थे, जो अंग्रेज अपने लिए बनाये थे ताकि इसका फायदा उठाकर वे विदेश चले जाये। इन्हीं कानूनों को कांग्रेसी सरकार ने यथावत् स्वीकार कर लिया, जिसका दंश हमारा देश आज भी झेल रहा हैं।
6. जो नेता, आपको सांप्रदायिक कहकर, आपको नीचा दिखाने की कोशिश करें, उसे ही देश का सबसे पहला गद्दार माने, क्योंकि इनकी संख्या सुबाहु, मारीच की तरह बढ़ती जा रही है।
7. अपने घरों में महात्मा गांधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, सरदार पटेल, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सरोजिनी नायडू, लक्ष्मीबाई आदि महानायकों व महानेतृयों के विचारों को सुने और सुनाये। अपने बच्चों को ये जरुर बतायें कि इस देश की प्राचीन संस्कृति क्या रही हैं। कैसे ये देश सदियों से हमलावरों का दंश झेलते रहा हैं, कैसे इसी देश के गद्दारों ने दूसरे देश के लोगों के साथ मिलकर भारत के स्वाभिमान को बेच दिया और कैसे इतनी दुर्घटनाओं का दंश झेलने के बाद भी भारत आज भी खड़ा हैं, जबकि इस देश में गद्दारों की कमी नहीं हैं।
8. अपने बच्चों को कायर न बनाएं, देशभक्त बनाएं।
9. वंदे मातरम् और भारत माता की जय को हृदयंगम करें। कुछ नेताओं को इन नारों से चीढ़ होती हैं, ये चीढ़ क्यों होती हैं, आप खुद समझ सकते हैं। इसलिए इन बातों पर ध्यान न दें।
10. महत्वपूर्ण ये नहीं कि कौन कितने दिन जीया, महत्वपूर्ण ये हैं कि वो जितने दिन जीया, कैसे जीया। अंततः देश के लिए जीये और देश के लिए मरे।

Saturday, June 11, 2011

विनाशकाले विपरीतबुद्धि

शास्त्रों में एक बात आयी है – जिनको ईश्वर दुख देने को होते हैं – उनकी मति (ज्ञान) हर लेते है। शायद ये वाक्य सत्तारुढ़ कांग्रेस पर सत्य साबित होती है। दो साल पूर्व सत्ता में दोबारा आयी, इस सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी के नेताओं को लगता है – जनता ने उन्हें सदा के लिए सत्तारुढ़ होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया है और इसी मद (अहंकार) में चूर होकर, वो सब काम कर रही है, जिसे न तो धर्म इजाजत देता है और न ही सत्य (ईश्वर)। जबकि इस सरकार में शामिल सभी मंत्री ईश्वर की ही शपथ लेकर सत्ता का सुख भोग रहे है, पर इनके ज्ञान को देखिये कितनी निम्नस्तर की हो गयी कि इन्हें अभी तक पता ही नहीं चल पा रहा कि उन्हें आज की परिस्थितियों में क्या करना चाहिए।
फिलहाल ये एक संन्यासी से टकराने में अपना पुरुषार्थ समझ रहे है और सच पूछिये, तो उस संन्यासी से टकराने का खामियाजा उसे भुगतना भी पड़ रहा हैं पर उसे इसका अनुमान नहीं हो रहा, क्योंकि फिलहाल धृतराष्ट्रों की संख्या इस पार्टी में ज्यादा दिखाई पड़ रहा है। मुझे एक बात समझ में नहीं आ रहा कि बाबा रामदेव ने भारतीयों के विदेशी काला धन को, भारत में लाने और भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की बात कहकर क्या गलत कह दिया, जो कांग्रेसियों को रास नहीं आ रहा। इससे तो बिहार में प्रचलित लोकोक्ति की याद आ रही है कि – चोर के दाढ़ी में तिनका। इसका मतलब हैं कि कांग्रेसियों के ही धन विदेशी खातों में जमा है, जिससे भयभीत कांग्रेसी नहीं चाहते कि वो काला धन, भारत में आये और यहां की जनता उन पर थू – थू करें।
हालांकि बाबा रामदेव के आंदोलन पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बयान चालाकी भरा रहा हैं, जबकि उनके मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों और कांग्रेसी नेताओं का बयान अमर्यादित और संस्कारहीन आचरण को जन्मदेनेवाला रहा है। दूसरी ओर दिल्ली के विभिन्न राष्ट्रीय चैनलों ने तो हद कर दी है, वो तो फिलहाल इस दौड़ में शामिल हो गयी हैं कि कौन चैनल बाबा रामदेव को भ्रष्ट साबित करने में एक नंबर हैं ताकि कांग्रेसियों और सोनिया गांधी के द्वारा उपकृत हो सकें। मुझे तो इन चैनलों और ऐसे घटियास्तर के पत्रकारों की बुद्धि पर तरस आती है कि आखिर इनका आचरण इतना घटिया कैसे हो गया, पर चिंतन करने पर पता लगता है कि भला मुर्खों से विद्वता की अपेक्षा रखना भी, मुर्खता ही है।
जरा प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों और राष्ट्रीय चैनलों का बाबा रामदेव के आंदोलन के पूर्व का चरित्र और उनके आंदोलन को कुचलने के बाद के चरित्र को देखिये, पता लग जायेगा कि देशद्रोही कौन है। सबसे पहले रामदेव के आंदोलन के पूर्व का चरित्र पर ध्यान दीजिये ---------
1. प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल तथा कांग्रेस के सभी नेताओं का बयान, बाबा रामदेव के खिलाफ न होकर मर्यादित है, सभी चाहते हैं कि बाबा रामदेव आंदोलन पर न बैठे, उनके आमरऩ अनशन का आंदोलन किसी भी कीमत पर समाप्त हो, इधर राष्ट्रीय चैनल भी बाबा रामदेव को नायक के रुप में प्रदर्शित कर रहे हैं, सभी विदेशी काला धन को भारत में लाने की उनके आंदोलन को लेकर जय जयकार कर रहे हैं, परिचर्चा करा रहे हैं, सरकार को कटघरे में लाने का प्रयास कर रहे है. पर जैसे ही बात बनते बनते बिगड़ती है कांग्रेस अपना असली रुप अख्तियार करती है, कांग्रेस का साथ देने में राष्ट्रीय चैनल आगे आते हैं और फिर ये सत्तारुढ़ कांग्रेसियों के साथ सुर में सुर मिलाकर बाबा रामदेव के खिलाफ समाचार दिखाने का अभियान शुरु कर देती है, वो चैनल जिनकी हिम्मत नहीं थी बाबा रामदेव की आंखों में आंख डालकर बात करने की, वो उन्हें बाबा रामदेव से रामदेव और पता नहीं क्या क्या कह डालने में शेखी बघारते हैं।
और अब बाबा रामदेव के आंदोलन को कुचलने के बाद का चरित्र देखिये ------
जो कांग्रेसी और मनमोहन सिंह मंत्रिमंडल में शामिल मंत्री बाबा रामदेव के खिलाफ कुछ भी नहीं बोलते थे। आग उगलने शुरु करते है। कांग्रेसी दिग्विजय सिंह को आगे करते है और ये दिग्विजय वहीं करता हैं जो सोनिया माता उसे पूर्व में सिखाये रहती है, वो सोनिया के चरणों में, सर्वस्व समर्पित कर, एक संन्यासी के खिलाफ विषवमन करता है और सभी चैनल दिग्विजय सिंह जैसे नेता को एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत अपने चैनल में प्रोजेक्ट कर, बाबा रामदेव के आंदोलन पर कीचड़ उछालते हैं।
2. जनार्दन और दिग्विजय सिंह जैसे नेता, इस आंदोलन को भाजपा और संघ द्वारा प्रायोजित करार देता है। दिग्विजय सिंह जैसे नेता तो नेपाल और भारत के साथ चल रही मित्रता को भी आग में झोंक देना चाहता है, वो बालकृष्ण को नेपाली कहकर, संबोधित कर डालता है, बेशर्मी की हद तो ये है कि इस आड़ में देशभक्ति गीतों पर झूमनेवाली सुषमा स्वराज के चरित्र पर भी अंगूली उठाता हैं, वो दिग्विजय जिसमें छेद ही छेद हैं, वो कहावत हैं न कि चलनी दूसे, सुप के जिन्हें बहत्तर छेद।
3. इधर कुछ दिनों के बाद अपना गृहमंत्री को पता नहीं कहां से दिव्य ज्ञान हो जाता है, लगे हाथों वह भी अपना हाथ साफ करने लगता है, वो कहता हैं कि बाबा रामदेव के आंदोलन में भाजपा और संघ का हाथ है, पर यहीं गृह मंत्री को पता नहीं, उस वक्त दिव्य ज्ञान कहा चला गया था, जब इसके मंत्री, आंदोलन को कुचलने के पहले, बाबा रामदेव के आगे पीछे दौड़ लगा रहे थे। ये गृहमंत्री इतना नीचे गिरता हैं कि अपना गिरेबां न देखकर, बाबा रामदेव को ही भला बुरा कहते हुए, सारी मिशनरियों का दुरुपयोग करते हुए, बाबा के खिलाफ, वो हर प्रकार के कुकर्म करता हैं, जिसकी जितनी निंदा की जाय कम हैं और विभिन्न राष्ट्रीय चैनल, इस गृहमंत्री के आगे पीछे ठुमके लगाते हुए, वो खबरें दिखाता हैं, जो इस गृहमंत्री और कांग्रेसियों को पसंद होता हैं। ये हैं सत्तारुढ कांग्रेसियों और राष्ट्रीय चैनलों के चरित्र।
पर इसके विपरीत एक सामान्य संन्यासी, जिसे लोग बाबा रामदेव, संत रामदेव और पता नहीं क्या क्या नामों से संबोधित करते हैं। (जिन्हें मैं संत नहीं, बल्कि एक सामान्य व्यक्ति के अलग कुछ नहीं मानता) इस सतारुढ़ सरकार के नाक में ऐसा दम करता है – वो भी आमरण अनशन के माध्यम से कि इस सरकार की हालत सांप और छुछुंदर की तरह हो जाती है और लगे हाथों ये बयान प्रसारित करती हैं कि वो बाबा रामदेव के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन चलायेगी – बताईये ये कितना हास्यास्पद बयान है। एक सरकार, चुनी गयी सरकार, एक संन्यासी के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन चलाने की बात करें, तो उसे क्या कहेंगे। एक सामान्य निश्छल व्यक्ति से इसका जवाब पूछे तो ये ही कहेगा कि ये तो एक संन्यासी की शानदार जीत है, पर इस केन्द्र सरकार को कौन बताये कि उसने किस प्रकार अपना संचित सम्मान खो दिया है।
बाबा रामदेव पिछले आठ दिनों से आमरऩ अनशन पर है, केन्द्र सरकार को हिला कर रख दिया है, ये अलग बात हैं कि केन्द्र सरकार जिसको अपने सम्मान की चिंता नहीं, गलथेथरी बतिया रही हैं कि हम सही हैं, पर सच्चाई क्या हैं, सभी जानते हैं पर राष्ट्रीय चैनलों की गलथेथरी देखिये – वो बाबा रामदेव के अनशन पर ही सवाल उठा रही हैं कि बाबा ने ग्लूकोज ले लिया हैं तो भला अनशन कैसा। अनशन तो टूट गया। अरे बेशर्म पत्रकारों, तुम्हें पत्रकार किसने बना दिया, क्यूं कांग्रेसियों और सरकार के तलवे चाटने में समय जाया कर रहे हो, कम से कम, सच तो बोलों, नहीं तो जान लो, इन कांग्रेसियों और सरकार को तो आनेवाले समय में जनता सबक सिखायेंगी ही, तुम्हें भी तुम्हारी औकात बतायेगी। फिर तुम्हारे टीआरपी का क्या होगा, तुम जब जनता की नजर में गिरोगे तो क्या फिर उठ पाओगे, क्यों विनाशकाल की ओर आगे बढ़ रहे हो। क्या तुम नहीं जानते कि तुम्हारी विपरीत बुद्धि तुम्हें विनाशकाल की ओर ले जा रही हैं।

Tuesday, June 7, 2011

इन पत्रकारों और उन कांग्रेसियों को चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए...........................


इन पत्रकारों और उन कांग्रेसियों को चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए, जो देशभक्ति गीत पर नृत्य कर रही सुषमा स्वराज के चरित्र पर अंगूली उठाती है। कई चैनलों किस किस की बात करुं, वो सुषमा स्वराज के नृत्य पर ठुमके का प्रयोग कर रही है। कांग्रेसियों का चरित्र ही क्या हैं, वो तो मैं जानता हूं, वो तो अपनी मां – बहनों की कितनी इज्जत करते हैं, वो हम सब जानते हैं, इसलिए वो सुषमा स्वराज के बारे में, जनार्दन और दिग्विजय जैसे घटिया स्तर के नेता क्या बोलेंगे, हमें पता हैं। पर जरा इन पत्रकारों को देखिये – ये सुषमा स्वराज पर पिल पड़ें हैं, लगे उन्हें चरित्र का पाठ पढ़ाने। जैसे लगता हैं कि सुषमा स्वराज ने बहुत बड़ा पाप कर दिया हो, अरे मूर्खों तुम्हें क्या पता कि
ये देश हैं वीर जवानों का,
अलबेलों का मस्तानों का,
इस देश का यारों क्या कहना,
ये देश हैं, दुनिया का गहना........ पर इठलाने का क्या आनन्द है।
अरे कांग्रेसियों के तलवे चाटनेवालें पत्रकारों - देशद्रोहियों तुम्हें तो वंदे मातरम गाने से चिढ़ है, तुम क्या जानों की देशभक्ति गीतों पर थिरकने का क्या मतलब होता है। तुम्हें तो देशभक्ति गीतों पर थिरकना और शीला की जवानी जैसे गीतों पर डांस करना दोनों एक जैसा लगता हैं, ये तुम्हारे मानसिक दिवालियापन का घोतक है।
इधर दिल्ली के पत्रकारों की मर्दानगी देखिये, बड़े बड़े चैनलों के पत्रकार, उस व्यक्ति पर हाथ साफ करने लगे थे, जिसने प्रेस कांफ्रेस के दौरान, कांग्रेस द्वारा प्रायोजित संवाददाता सम्मेलन में, जनार्दन को जूते दिखाये थे। अरे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सारा हिन्दुस्तान कांग्रेसियों को जूते दिखाने को बेताब है। तुम दिल्ली में बैठे, कांग्रेस का तलवा चाटनेवाले पत्रकारों क्या जानो। जिस प्रकार से तुम पत्रकारों ने उस व्यक्ति पर हाथ छोड़ा, क्या तुमने कानून को हाथ में नहीं लिया। क्या तुम पत्रकारों को कानून हाथ में लेने की छूट है, अरे दिग्विजय और जनार्दन के सुर में सुर मिलानेवाले पत्रकारों, तुम्हें लज्जा नहीं आती, अरे कांग्रेस तो आज हैं, चली जायेगी, जिस देश का अन्न खाते हो, उसके प्रति तो ईमानदार बनो, पर तुम बनोगे कैसे, तुमने तो कांग्रेस और विदेशी ताकतों के पैसे से अपना तन – मन सब बेच रखा हैं, तुम क्या जानो कि देशभक्ति क्या चीज है। तुम जो कर रहे हो, करते रहो, देश की करोड़ों जनता देख रही हैं कि दिल्ली के पत्रकारों ने कैसे अपना जमीर कांग्रेसियों और विदेशी ताकतों के हाथों गिरवी रखा हैं, एक दिन करोंड़ो भारतीय जगेंगे और तुम जैसे तथाकथित लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से बदला लेंगे। वो दिन दूर नहीं, फिलहाल कांग्रेसियों के तलवे चाटते रहो, और विदेशी ताकतों के आगे सर झूकाकर गुलामीगिरी करते रहो।