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Wednesday, April 26, 2017

देश के मूर्धन्य पत्रकारों और चैनलों का महापाप.............

देश के मूर्धन्य पत्रकारों और चैनलों का महापाप...
दिल्ली नगर निगम चुनाव को देश का चुनाव बना दिया...
ये आज के पत्रकार है, ये नगर निगम की चुनाव को देश का चुनाव बना देते है, लोगों की मजबूरियां है, उनके पास कोई विकल्प नहीं है, इसलिए मजबूरी में दिल्ली नगर निगम के चुनाव परिणाम को देखने के मजबूर है। दिल्ली नगर निगम के चुनाव परिणाम का कोई असर, देश के दूसरे इलाकों में नहीं पड़ने जा रहा, पर देश के मूर्धन्य पत्रकार विभिन्न चैनलों पर स्वयं और देश की जनता के दिमाग का दही बनाने में लगे हुए है, इसमें उन्हें बहुत आनन्द भी आ रहा है।
आज किसी भी चैनल ने अपने मर्यादा का ख्याल नहीं रखा, चाहे वह कोई चैनल हो, सभी पागलों की तरह एमसीडी-एमसीडी का रट लगा रहे है, ठीक उसी प्रकार जैसे देश में लोकसभा के चुनाव परिणाम आ रहे होते हैं। देश की जनता को भी देखिये, वे कर ही क्या सकते हैं? मजबूरी में देखने को मजबूर है, वे झेल रहे है, इन चैनलों के महापाप को।
आखिर दिल्ली नगर निगम को इतना माइलेज ये चैनलवाले क्यों दे रहे है? इसके लिए भी कोई सर्वाधिक दोषी है तो वह है यहां के राजनीतिबाज। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिल्ली नगर निगम के चुनाव में दिलचस्पी लेना, आप के अरविन्द केजरीवाल का तो जवाब ही नहीं, उन्हें लगता है कि भगवान ने फुर्सत में बनाया है, कांग्रेस तो एक तरह से खत्म ही हो गयी और भाजपा ने जिस प्रकार से कांग्रेसियों और अन्य दलों के घटियास्तर के नेताओं का आयात करना प्रारंभ किया है, यकीन मानिये कांग्रेस को तो यहां की जनता ने 60 साल झेला, इन्हें पांच साल भी झेल पायेगी, कहना मुश्किल है। कमाल की बात है कि भाजपा जिन पार्टियों अथवा नेताओं को गाली दे रही होती है, वहीं पार्टी अथवा उसके नेता के लोग जब भाजपा का दामन थाम लेते है, तो वह पवित्र हो जाता है, पता नहीं भाजपा के पास कौन से नदी का पवित्र जल है, जिससे सभी का पाप धूल जाता है। उदाहरण के लिए झारखण्ड के बाघमारा विधानसभा सीट से जीता ढुलू महतो और हाल ही में दिल्ली में लवली नामक नेता जो कल तक कांग्रेस का झंडा ढोता था और आज भाजपाई बन गया। ज्यादा दूर मत जाइये, दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी को देखिये जो कल तक अटल बिहारी वाजपेयी को गरियाता था, गोरखपुर लोकसभा सीट से योगी के खिलाफ समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और आज भाजपा में जाकर, हर प्रकार के आनन्द को प्राप्त कर रहा है यानी पग-पग पर अपना जमीर बेचनेवाला, ऐसे नेता देश के भाग्य विधाता बन रहे और पत्रकारों का समूह ऐसे नेताओं के आधार पर समाचार की प्राथमिकता तय कर रहे है।
देश के हालात ऐसे है, कि पूछिये मत...
• हमारा पड़ोसी पाकिस्तान हमेशा हमें गरिया रहा है।
• चीन अरुणाचल प्रदेश को लेकर आंखे तरेर रहा है।
• नक्सली गुंडों का समूह हमारी आंतरिक व्यवस्था को चोट पहुंचा कर पूरे देश की आंतरिक व्यवस्था को बर्बाद कर, विदेशी ताकतों के हाथों को मजबूत कर रहा है।
• पूंजीपतियों का समूह केवल अपना लाभ देख रहा है और देश के आर्थिक हालात पर चोट पहुंचा रहा है।
• देश के संतों को उद्योगपति बनने का सनक सवार हो रहा है, और पत्रकारों का समूह ऐसे संतों की आरती उतार रहा है, उन पर पुस्तक लिख रहा है।
जरा सोचिये, ऐसे हालात में इस देश की हालात क्या होगी?  गुंडे पत्रकार बनेंगे, गुंडे नेता बनेंगे तो यहीं होगा, हमें बेवजह के नगर – निगम चुनाव परिणाम जबर्दस्ती देखने होंगे। आज तो देश के सारे चैनल यहीं कर रहे, कोई इससे अलग नहीं दीख रहा। हम ऐसी व्यवस्था और ऐसे चैनलों और ऐसे पत्रकारों की कड़ी भर्त्सना करते है।

Tuesday, February 16, 2016

बाकी सब गधे हैं...........

दुनिया में एक नई जाति व एक नये संप्रदाय का जन्म हुआ है जो खुद को सर्वाधिक एकमात्र बुद्धिमान जाति व संप्रदाय समझता है, जिसे वामपंथी कहते है...इन वामपंथियों के अनुसार दुनिया की सारी बुद्धि उनके गुलाम है...ये कुछ भी कहे,करे...जायज है...इनका विरोध या इनके खिलाफ कुछ भी कहने का किसी को अधिकार नहीं...इनके अनुसार वामपंथी सर्व गुण संपन्न...बाकी सब गधे है...इन्हें हर प्रकार की छूट मिल जानी चाहिए...देश के खिलाफ बोलने की...देश की बखिया उधेड़ देने की...हराम की कमाई और हराम की पढ़ाई करने के छूट की...ताकि ये सब को जी भरकर गरिया सकें...इन वामपंथियों के भजन कीर्तन मंडली में कांग्रेस का पप्पू राहुल, बिहार में गुंडागर्दी-बेहयाई को पुनर्स्थापित करनेवाले नीतीश, देश में एकमात्र ईमानदारी के भूत को अपने शरीर में डालनेवाले केजरीवाल शामिल हैं...अभी - अभी पता चला कि कोई प्रशांत भूषण, देशद्रोह का मुकदमा झेल रहे कन्हैंया का केस लड़ेगा...ये वहीं प्रशांत भूषण है, जो कई बार कश्मीर पर अपने बयानों को लेकर विवादों में रहा है, जो कहता है कि कश्मीर भारत का अंग नहीं हैं, जिसे लेकर उसकी कई बार पिटाई भी हो चुकी है...यानी देश के खिलाफ सारे के सारे घटियास्तर के लोग एक हो गये है...इन्होंने संकल्प कर रखा है कि इसी बहाने हम कश्मीर पाकिस्तान को सौंपेंगे, कश्मीरी अलगाववादी ताकतों और आतंकियों को हर संभव मदद करेंगे और भारतीय सेना का मनोबल तोड़ेंगे, साथ ही आतंकियों का सामना कर रहे कश्मीरी हिन्दूओं को एक - एक कर कश्मीर से निकाल कर रहेंगे...ये हैं हमारा देश...ये हैं हमारे देश के घटियास्तर के नेता...भारत का तो इतिहास ही रहा है कि यहां देश भक्त कम और गद्दारों-देशद्रोहियों की संख्या अत्यधिक रही हैं...तभी तो ये देश हजारों वर्षों तक गुलाम रहा...
जरा झलक देखिये...
1. पृथ्वी राज चौहान जब मुहम्मद गोरी का मुकाबला कर रहा था तो जयचंद, मुहम्मद गोरी का समर्थन कर रहा था...
2. बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए राणा सांगा ने पत्र लिखा था।
3. जब अकबर के खिलाफ महाराणा युद्ध लड़ रहे थे तो मान सिंह अकबर के साथ रिश्तेदारी में जुटा था।
4. जब रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों को धूल चटा रही थी, तब सिंधिया परिवार अंग्रेजों के साथ मित्रता निभा रहा था...तभी तो सुप्रसिद्ध कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने लिखा - अंग्रेजों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी, खुब लड़ी मर्दानी वो तो........
5.जब भगत सिंह देश में क्रांति का बीज बो रहे थे, तो उनके खिलाफ अदालत में गवाही देनेवाला शोभा सिंह आ खड़ा हुआ था...
6. जब महात्मा गांधी ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ किया, तो वामपंथियों ने महात्मा गांधी का साथ नहीं दिया...
7. इंदिरा गांधी ने जब 1975 में आपातकाल की घोषणा की तब उसके खिलाफ लोकनायक जयप्रकाश ने आंदोलन चलाया,सारी जनता लोकनायक के साथ थी, पर वामपंथी इंदिरा के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे...
एेसे कई उदाहरण मेरे पास है...जिससे पता चलता है कि हमारे देश में शुरु से ही गद्दारों की फौज चलती रही है...जो देश के लिए मरनेवालों के खिलाफ आंदोलनरत रहती हैं, ज्यादातर मामलों में ये गद्दार कामयाब हो जाते है...जैसा कि उपर के झलकियों से पता लग जाता है...और एक बार जेएनयू के मामले में भी ऐसा ही दीख रहा हैं, अब देखना ये है कि इस बार देशभक्त जीतते हैं या देश के गद्दार...