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Monday, January 21, 2013

ये गांधी-नेहरु-पटेल और शास्त्री की कांग्रेस नहीं, बल्कि सोनिया-राहुल की कांग्रेस हैं.................................

हमें बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा हैं, जिस कांग्रेस पार्टी में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरु, लाल बहादुर शास्त्री,  सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे नेताओं ने अपने वाकपटुता और चरित्र के माध्यम से पूरे देश ही नहीं बल्कि विश्व को प्रभावित किया। जिनके आचरण को उतारने की सीख हमारे माता -पिता आजीवन देते रहे। आज उस कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह, संजय निरुपम, मणिशंकर अय्यर और सुशील कुमार शिंदे जैसे नेताओं का बोलबाला हैं, जिनके चरित्र को उतारना तो दूर, उनके बोलचाल की भाषा को देख कोई भी माता - पिता अपने बेटे को, इनके भाषण को सुनने तक की इजाजत नहीं देगा। ऐसे हम आपको बता दें कि आज की कांग्रेस पार्टी को चला रही सोनिया व राहुल लाख कह लें कि वह पुरानी कांग्रेस को लेकर ढो रहे हैं, मैं मान नहीं सकता। क्योंकि पुरानी कांग्रेस पार्टी ने देश को चरित्र दिया, ताकत दी, महानता की सीख दी, आज की कांग्रेस सारी निर्लज्जता को पार कर चुकी हैं।
जरा दिग्विजय सिंह का बयान सुनिये -- ये कुख्यात आतंकवादी हाफिज सईद को जनाब कहके नवाजते हैं। जरा मणिशंकर अय्यर को देखिये - ये अपने प्रतिद्वंदियों को पशुओं से मिलान करते हैं।
जरा संजय निरुपम को देखिये -- अपने प्रतिद्वंदी पार्टी की एक महिला नेता को नाचनेवाली - ठुमके लगानेवाली कहकर संबोधित करते हैं।
पूर्व में गृह मंत्री और अब वित्त मंत्रालय संभाल रहे पी चिदम्बरम को तो केसरिया कलर में ही आतंकवाद नजर आता हैं, और इसी पार्टी के वर्तमान गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने तो भाजपा और संघ को हिंदू आतंकवाद से जोड़कर, एक नयी मिसाल कायम कर दी। 
जिस देश में ऐसे ऐसे लोग महत्वपूर्ण मंत्रालय सँभालते हो, जिस पार्टी के नेता, जो ये कहते नहीं थकते कि उनकी पार्टी ने देश को आजादी दिलवायी हो, उन पार्टी के नेता, अपने प्रतिद्वदिंयों के लिए सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग नहीं करते हो। उससे देश चलेगा, हम मानने को तैयार नहीं। ये दिखावे के लिए तो पाकिस्तान और वहां चल रहे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ खूब बोलते हैं, पर सच्चाई ये हैं कि आज इतनी इनकी ताकत नहीं कि वे पाकिस्तान से सीधे - सीधे युद्ध कर, उसकी हेकड़ी निकाल दें। हां ये इतना जरुर करते हैं कि अपना वोट बैंक, मुस्लिमों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए, संघ और भाजपा को गंदी गंदी गालियों से नवाज जरुर देते हैं, और जब इनकी देशव्यापी आलोचना होती हैं तो बड़ी ही बेशर्मी से ये कह देते हैं कि उनकी बातों को तोड़ मरोड़ कर पेश कर दिया गया।
सच्चाई ये हैं कि पूरे देश में महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहे हैं। इनके शासनकाल में भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड टूट गये हैं। महंगाई सुरसा की तरह मुंह बायें जा रही हैं। पूरे देश में पाकिस्तानी आईएसआई ने नक्सलियों के साथ मिलकर देश को निगलने को तैयार हैं जबकि बाहरी मोर्चे पर वो हरदम भारत को नीचा दिखाने की कोशिश करता हैं। आंध्रप्रदेश में तो कांग्रेस के साथ कदम से कदम मिलाकर चलनेवाली एक पार्टी के नेता ने तो देश के साथ बगावत करने की बात कहीं, जिसके भाषण यू टयूब पर बिखरे पडे हैं, जो सीधे - सीधे हिन्दूओं को गाली देता हैं, उसके लिए, इस पार्टी के नेता अथवा किसी भी मंत्री के जुबां नहीं खुले, पर इन नामर्दों को देखिये, पुरुषार्थ दिखाने के लिए भाजपा और संघ ही इन्हें मिलता हैं।
दंगा कहीं भड़का तो भाजपा और संघ ने करा दिया और कहीं विकास के कार्य हुए तो बस कांग्रेस ने किया। जबकि सच्चाई ये हैं कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेसी शासन में किस प्रकार पूरे देश में सिक्खों का कत्लेआम हुआ, वो पूरा देश जानता हैं। कैसे हाल ही में असम में कांग्रेसी सरकार के होते हुए मानवता की हत्या कर दी गयी। कैसे असम में बांगलादेशी घुसपैठियों को सुनियोजित तरीके से बसाया जा रहा हैं और वहां के मूल वाशिंदे को खदेड़ा जा रहा हैं। इस पर इन्हें शर्म नहीं महसूस होता, पर जैसे ही गुजरात विधानसभा का चुनाव आता हैं, नरेन्द्र मोदी के रुप में उन्हें दंगाई नजर आता हैं। ये अलग बात हैं कि इन कांग्रेसियों के खिलाफ, गुजरात की जनता आज भी नरेन्द्र मोदी के पीछे सशक्त रुप से खड़ी हैं और नरेन्द्र मोदी को अपना नेता मानती हैं। 
ऐसे एक बात पूरे देश को जान लेना चाहिए, कि कांग्रेसियों के इस चाल चरित्र को आगे बढा़ने में मुख्य भूमिका कांग्रेस भक्त पत्रकारों का भी हैं, जो समय - समय पर इन कांग्रेसियों के साथ मिलकर, देश को मिट्टी में मिलाने के लिए हर प्रकार का राग जनता के बीच अलापते हैं। जब कभी इन्हें मौका मिलता हैं, वे कांग्रेसियों के साथ हो लेते है। बदले में ये कांग्रेसी, कभी राज्यसभा तो कभी मुंहमांगी मुरादें देकर इन पत्रकारों को उपकृत करते रहते हैं और इसी में, यह देश मिट्टी में मिल रहा होता हैं। अब आगे देखिये कि कौन कांग्रेसी नेता, कब किस अन्य नेता को गाली देने के लिए अपना मुंह खोलता हैं। तब तक इंतजार करिये....................

Wednesday, December 28, 2011

बेशर्मों को शर्म कहां.............

पांच राज्यों में चुनाव हैं। कांग्रेस ने सुनियोजित साजिश रचकर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, अल्पसंख्यकों को धर्म के आधार पर आरक्षण दे दिया, जबकि संविधान इसकी इजाजत नहीं देता। इससे कांग्रेस को फायदे हैं, इसाई बहुल गोवा में कहेंगी कि वह इसाईयों को आरक्षण दे दी हैं, सिक्ख बहुल पंजाब में कहेगी कि उसने सिक्खों को आरक्षण दे दिया हैं, और मुस्लिम बहुल उत्तरप्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में वो इसी आधार पर मुस्लिमों को भी आकर्षित करते हुए वोट मांगेगी। संभव हैं, उसे फायदे मिले भी क्योंकि हमारे देश की जनता, कांग्रेस के इस लालीपाप पर आकर्षित हो कर, उसके पक्ष में भारी मतदान कर दे, तो इस पर किसी को आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए, क्योंकि यहां की जनता क्या हैं, वो इतिहास बताता हैं, जब अंग्रेज इस देश में आये और विदेशी बाबर इस देश में आया तो कैसे यहां की जनता ने उसका स्वागत करते हुए, अपने देश पर विदेशियों का शासन हंसते हंसते करवाया, और खुद गुलाम बनकर आनन्दित होते रहे, कमोवेश आज भी यहीं स्थिति हैं। भले ही आज की पीढ़ी न स्वीकारें, पर सच्चाई यहीं हैं। फिलहाल कांग्रेस की नजर सर्वाधिक उत्तरप्रदेश पर हैं। अल्पसंख्यकों के नाम पर मुस्लिमों को 4 प्रतिशत आरक्षण का लालीपॉप दिलाने के बावजूद भी, कांग्रेस और कांग्रेस भक्तो को लगता हैं कि अन्ना हजारे उऩके लिए शामत खड़ी कर सकते हैं. इसलिए कांग्रेस को पांच राज्यॉ में जीत सुनिश्चित करने के लिए, कांग्रेस और कांग्रेस भक्तों में धमा चौकड़ी चल रही हैं कि कौन सर्वाधिक सोनिया और राहुल की चरण वंदना करते हुए चाटुकारिता का रिकार्ड तोड़ता हैं। इनमें शामिल हैं - कांग्रेस के कार्यकर्ता-नेता, कांग्रेस भक्त पत्रकार और केन्द्र शासित प्रदेशों में कार्यरत प्रशासनिक उच्चाधिकारी जो कांग्रेसी नेताओं की कृपापात्र बनकर देश का सत्यानाश कर रहे हैं। एक बात मैं बता दूं कि मैं अन्ना, टीम अन्ना और उनके आंदोलन का कतई समर्थक नहीं हूं, गर ज्यादा जानकारी इस संबंध में लेना हैं तो इसी ब्लाग पर अन्ना के आंदोलन और उनके सदस्यों के प्रति हमारे विचार आज भी लिखे पड़े हैं, उन्हें पढ़कर, मेरे विचारों से अवगत हुआ जा सकता हैं, लेकिन अऩ्ना के खिलाफ कांग्रेसियों के आक्रामक रवैये ने हमे ये लिखने पर मजबूर कर दिया कि भारत में जितने भी पागलखाने हैं, उनमें कम से कम कांग्रसियों के लिए कुछ शायिका आरक्षित होने चाहिए क्योंकि ये सभी मानसिक दिवालियेपन के शिकार हो रहे हैं और गर इनका इलाज नहीं किया गया, तो ये पागल होकर भारत के विभिन्न शहरों मे घूमेंगे, जिससे हमें इन्हें देखकर दुख होगा, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि इनके परिवार, अपने इस पागल सदस्य को देख विधवा प्रलाप करे।
जरा सोनिया का बयान देखिये -- वो कहती हैं कि अन्ना पर व्यक्तिगत हमले नहीं होने चाहिए। सोनिया ये बतायें कि अऩ्ना पर व्यक्तिगत हमले कौन कर रहा हैं। अन्ना को भगोड़ा कौन कह रहा हैं, संघ का एजेंट कौन कह रहा हैं। गर नहीं उसे बूझा रहा तो ऐसी नेता को हम क्या कहें। जरा बेनी प्रसाद वर्मा का बयान देखिये -- ये कह रहे हैं कि अन्ना भाजपा के एजेंट हैं, और भारत पाक युद्ध के समय के भगोड़े भी हैं, तो बेनी जी, भारत सरकार और जिस सरकार में आप भी अपनी गाल लाल कर चुके हैं, बैठ कर क्या कर रहे थे, इसी दिन का इंतजार कर रहे थे क्या, कि कब सोनिया माता की जय बोलने का अवसर मिले, कब अपना सर राहुल के चरण कमलों पर रखने का मौका मिले। गर ऐसा हैं तो आपने सिद्ध कर दिया हैं - राहुल और सोनिया आप की हो गयी, क्योंकि आपने तो ऐसा बयान दे दिया कि आपने पागलपन में दिग्विजय और मणीष तिवारी को भी पीछे छोड़ दिया। इधर कांग्रेसियों को कहीं से पुराना चित्र मिल गया हैं, जिसमें नानाजी देशमुख के साथ अन्ना हजारे का फोटो हैं। इस पर वे बावेला मचाये हुए हैं और अपने कांग्रेस भक्त पत्रकारों को कह रहे हैं कि वे इस मु्ददे को उछालकर, अन्ना की हालत खराब कर दें, पर उन्हें पता नहीं कि जिसका जितना विरोध होता वो उतना ही शक्तिशाली बनकर उभरता हैं। मैं पूछता हूं कि --- नानाजी देशमुख की समाजसेवा व देशभक्ति पर कोई अंगूली उठा सकता हैं क्या। संघ क्या देशद्रोहियों की संस्था हैं क्या, गर संघ देशद्रोहियों की संस्था हैं, तो अटल बिहारी वाजपेयी तो संघ के प्रचारक भी थे, वो तो प्रधानमंत्री पद तक पहुंच गये। आपके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, हाल ही में उनके जन्मदिन पर, उनके घर पर पहुंचकर शुभकामनाएँ भी दी, तो क्या देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी संघ के एजेंट हैं क्या। देश के पूर्व प्रधानमत्री लाल बहादुर शास्त्री से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी संघ पर कई सकारात्मक टिप्पणी की हैं तो वे सभी संघ और भाजपा के एजेंट थे क्या। पता नहीं आजकल के नेताओं को क्या हो गया हैं, कि सभी संघ - संघ चिल्ला रहे हैं, गर संघ से इतनी ही चिढ़ हैं तो तुम्हारे पास सत्ता हैं, कर क्या रहे हो, औरंगजेब और बाबर की तरह संघ के कार्यालय जहां जहां हैं - ढहवां दो, प्रतिबंध लगा दो, संघ के लोगों को रासुका के तहत जेल में डलवा दो, पर ये भी तुम नहीं कर सकते, क्योंकि आपकी औकात यहां की जनता जिसके पास शर्म और हया बची हैं, वो जानती हैं। आपके घटियास्तर के बयानों के आधार पर ही शायद आप जैसे नेताओँ को छुटभैया, रीढ़विहीन, दलाल, राजनीतिबाज, चिरकुट आदि नामों से विभूषित किया जाता हैं।
और अब मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी का बयान देखिये जो यहां की सभी अखबारों में छपा हैं, उनका बयान ही बताता हैं कि उन्हें भी अन्ना के आंदोलन से चिढ़ और कांग्रेस को पुनः सर्वत्र स्थापित करने में कितनी दिलचस्पी हैं। उनका बयान मैंने एक अखबार में पढ़ा -- पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ अभियान करने के टीम अन्ना के प्रस्ताव के औचित्य और नैतिकता पर सवाल खड़ा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने रविवार को चेतावनी दी कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के रास्ते में जो कुछ भी आयेगा, उसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। सवाल ये हैं कि टीम अन्ना के कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन चलाने पर चेतावनी देने वाले, कुरैशी कौन होते हैं। उनका काम हैं चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से कराना। पर उन्हें अन्ना या अन्ना की टीम ऐसा करने से रोक रही हैं क्या और गर कोई गलत करेगा, तो उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा। आप संवाददाताओं के माध्यम से टीम अन्ना को धमकाना चाहते हैं कि वे कांग्रेस के खिलाफ बोलने से बचे। आजतक किसी मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस प्रकार से किसी समाजसेवी के खिलाफ बयान नहीं दिया पर इन्होंने बयान देकर बता दिया कि आखिर इनके मन में क्या हैं। सवाल तो ये भी उठता हैं कि उधर कांग्रेस धर्म आधारित आरक्षण की घोषणा करती हैं, और ठीक तुरंत बाद ये पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा करते हैं, आखिर ये सब क्या हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। हमें तो लगता हैं कि देश में हर चीज का कांग्रेसीकरण हो गया हैं, जो देश के लिए खतरा हैं। लोकतंत्र के लिए खतरा हैं, जरुरत हैं एक और लोकनायक जयप्रकाश की, जो ऐसी कांग्रेसी सत्ता को धूल चटाने और चुनाव आयोग जैसी संस्था और देश में अन्य प्रशासनिक विभागों में फैलें कांग्रेसी भूतों से देश को मुक्त कराये। हमें लगता हैं कि अब देर नहीं, जल्दी ही वो दिन आयेगा, जब देश कांग्रेसियों के अत्याचार और शोषण से, विदेशी ताकतों के कुचक्रों से, मुक्त होगा, बस थोडी़ मेहनत और लगन से देश सेवा करने की हैं।