ये बात जो लोग मीडिया में हैं। उन्हें अटपटा सा लगे, या वो मानने को तैयार न हो, पर सच्चाई यहीं हैं कि आज मीडिया से देश को खतरा उत्पन्न हो गया हैं, ऐसे में जरुरी हैं कि सरकार मीडिया पर लगाम लगाये, उन्हें नियंत्रित करें अथवा कुछ ऐसे उपाय ढूढें ताकि देश व समाज को मीडिया की खतरों से बचाया जाये। मीडिया से देश व समाज को कैसे खतरा उत्पन्न हो गया हैं। उसका एक नहीं अनेक उदाहरण हैं। जिस पर मीडिया के लोगों को ही खुद आत्ममंथन करने की जरुरत हैं।ज्वलंत उदाहरण -- आज ज्यादातर राष्ट्रीय चैनल, अपनी महत्वाकांक्षा को पाने के लिए, एकमात्र लक्ष्य रुपये कमाने के लिए आधे घंटे का या रुपये पर जितना मन चाहे, उतने घंटे का स्लॉट बेच दे रहे हैं और इन स्लॉटों में क्या होता हैं। आप खुद देखिये। एक ठग आता हैं। अपने को बाबा कहता हैं। और ठग विद्या द्वारा पूरे देश में अपना जादू चलाकर, खुद को प्रतिष्ठित कर लेता हैं। यानी कल तक जिस व्यक्ति को कोई नहीं जानता हैं,वो व्यक्ति पल भर में ही, पूरे देश में इस प्रकार अपनी धर्मसत्ता स्थापित कर लेता हैं कि, इन राष्ट्रीय चैनलों को मुंहमांगी रकम देकर, वो बाबा अपनी जयजयकार करवाता हैं। फिलहाल देश में दो बाबाओं ने ऐसी कमाल दिखायी हैं कि एक बाबा तो बनिये की दुकान से लेकर, चैनल और दवाओं की दुकान तक खोल दी हैं, जबकि दुसरा बाबा अपना थर्ड आई खोलकर, पल भर में अनारक्षित रेलवे टिकट को कन्फर्म तक करा देता हैं, यहीं नहीं खानेवाले बिस्कुट का कारोबार करने वाले व्यक्ति को वो सोने का बिस्कुट का कारोबार तक करनेवाला बनाने का दावा कर देता हैं, यहीं नहीं इस बाबा ने तो हद कर दी हैं.........हर प्रश्न का उटपुटांग जवाब देकर, स्वयं को प्रतिष्ठित कर देता हैं। ऐसे में इन बाबाओं को देख, गोस्वामी तुलसीदास की वो पंक्ति याद आ जाती हैं, वो पंक्ति जो श्रीरामचरितमानस में लिखा हैं -- पंडित वो हि सो गाल बजावा। यानी कलयुग में जो जितना गाल बजायेगा, वो उतना बड़ा ज्ञानी कहलायेगा। एक नहीं कई चैनल हैं -- जो इस प्रकार के गोरखधंधे में शामिल हैं, पर सरकार इन पर कार्रवाई नहीं करती। कमाल हैं इन बाबाओं ने इन चैनलों की टीआरपी भी बढ़ा दी हैं, यानी एक पंथ दो काज। पहला की बाबा से रुपये भी मिल गये और टीआरपी भी मिल गयी। जबकि ये चैनल, रजिस्ट्रेशन कराने के समय़ सिर्फ न्यूज चलाने की बात करते हैं, पर न्यूज के नाम पर ये क्या कर रहे हैं, सभी को पता हैं। आज देश के विभिन्न गांवों और शहरों में देश के महान संत -- कबीर, नानक, रविदास, नामदेव, तुकाराम, तुलसीदास, मीराबाई, नरसीमेहता, सुरदास, रसखान आदि के चित्र नहीं बिकते या इन्हें जाननेवाले लोगों की संख्या नगण्य हैं, पर टीवी वाले ठग बाबा के फोटो खूलेआम बिक रहे हैं, उन्हें लोग जानते हैं। हमारे देश में जितने भी संत हुए, उन्होंने देश को सिर्फ दिया, क्योंकि संत केवल देता हैं, वो देश से लेता नहीं। ठीक उसी प्रकार जैसे गंगा बहती रहती हैं, वो हमेशा उपकार करती हैं, चाहे लोग उसमें मैला बहाये अथवा उससे खुद को तृप्त करने का कार्य करें। ऐसे होते हैं संत। पर आज के संत को देखिये, बाबाओं को देखिये। ये बाबा टेंट - मार्चेंट के कारोबारियों से शादी में लगनेवाले एक कुर्सी पर बैठता हैं, तीन तसिया का जो खेल होता हैं, ठीक उसी प्रकार दस - बीस लोगों को जूगार करता हैं। जो बाबा के ट्रिक के अनुसार सवाल करता हैं और बाबा भी उसी प्रकार ट्रिक के अनुसार जवाब देता हैं, और इसी ट्रिक के जाल में, टीवी देख रहा, आम आदमी फंस जाता हैं, और अपनी जिंदगी के, मेहनत के सारे पैसे, इन ठगों पर लूटा देता हैं, वह भी जयजयकार कर। मैं जहां रहता हूं, वहां एक महिला रहती हैं, वो अपने माता - पिता को कभी सम्मान नहीं देती और न ही पति को सम्मान करती हैं, पर जरा देखिये इन्हें, जैसे ही सुबह होता हैं, ये टीवी खोलकर, उक्त ठग को देखने के लिए, सुनने के लिए दोनों हाथ जोड़कर बैठ जाती हैं। ये तो आजकल टीवी वाले इस ठग की प्रचार प्रसार भी कर रही हैं। एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि टीवी वाले थर्डआई वाले बाबा ने कहा है कि घर में शिवलिंग नहीं रखना चाहिए, जिसे सुनकर सभी टीवी देखनेवाले लोगों ने अपने घर के शिवलिंग मंदिर में रख दिये। मैंने अपनी पत्नी से पूछा - तुम्हारा क्या विचार हैं। उनका कहना था कि जब एकलव्य, द्रोणाचार्य की प्रतिमा बनाकर, स्वंय को प्रतिष्ठित करा लेता हैं, तो भला मैं, इस एकलव्य की गुणग्राही बातों को त्याग, एक ठग की बात पर क्यूं जाउं। मेरा हृदय प्रसन्न हो गया। चलों कोई तो हैं, जो इन ठगों से खुद को अलग कर रहा हैं, पर ऐसे लोगों की संख्या कितनी हैं। सवाल तो ये हैं......................।यहीं नहीं एक दक्षिण के चैनल से बाबा आते हैं, शनि के नाम पर खूब डराते हैं। पहले वे दिल्ली के राष्ट्रीय चैनलों पर आकर आम जनता को खूब डरा चुके हैं, पर हमारे घर के बच्चे, इनसे नहीं डरते। जैसे ही चैनल पर आते हैं। हमारे बच्चे, हमें बुलायेंगे, बाबा आ गये, देखिये- सुनिये और हंसते हंसते लोट पोट हो जाईये। सचमुच में, ये बाबा के हाव - भाव, फिल्मों में काम करनेवाले हास्य कलाकार, जगदीप, असरानी, धूमल व राजेन्द्रनाथ जैसे लगते हैं, और बात भी वहीं। यानी पूरे देश में आजकल टीवी चैनलों का एक ही कार्यक्रम बन गया हैं। देश व समाज भाड़ में जाये, पैसे कैसे कमाये जाये। ये ध्यान में रखकर स्लॉट बेचो, और अपने देश में धर्म कुछ ज्यादा ही बिकता हैं, और गर हिंन्दु हैं तो कहना ही नहीं, क्योंकि अन्य धर्मों में बाबाओं की उतनी पूछ नहीं, पर हिन्दुओं में बाबाओं की फौज हैं, किसी को पकड़ लो, पैसे ले लो, पूरे देश में बिकवाने का जिम्मा ले लो और शुरु हो जाओ। अभी तो थर्ड आई वाले बाबा खूब दिखाई पड़ रहे हैं, कल फोर्थ आई और फाइव तथा सिक्स आई वाले बाबा भी दिखाई पड़ जाये। तो इसे अतिश्योक्ति न समझेंगे। यहीं नहीं, आजतक हमें ये समझ में नहीं आया कि ये बाबाओं की फौज, शादी करा देती हैं, रेलवे टिकट कन्फर्म करा देती हैं, रोजगार दिला देती हैं, पर एक साधारण आदमी को प्रधानमंत्री क्यों नही बना देती। पूरे देश में जो गरीबी हैं, उसे फूंकमार कर दूर क्यों नहीं कर देती, देश में अशिक्षा जो फैली हैं, उसे फूंकमारकर दूर क्यों नहीं कर देती, या देश में जो भ्रष्टाचार पनपा हैं, उसे दूर क्यों नहीं करती और जब सारे समस्याओं का हल इन बाबाओं के पास हैं और टीवी वाले जो दिखाते हैं, वे टीवी वाले और बाबा इस समस्यारुपी शब्द को ही फूंकमार सदा क लिए क्यों नहीं मिटा देती। और जब ये ऐसा नहीं कर सकते तो समझ लीजिये कि पूरी दाल काली हैं। इसका मतलब हैं कि मीडिया, देश के लिए खतरा बन चुकी हैं और इन खतरों से देश की युवाओं को, दो दो हाथ करने के लिए तैयार रहनी चाहिए।आज से कोई बीस साल पहले, कोई जर्नलिज्म की डिग्री लेने के लिए हाय तौबा नहीं मचती थी, पर आज देश के युवा मीडिया में जाने को कुछ ज्यादा ही आतुर हैं। टीवी के ग्लैमर ने इन्हें मीडिया की ओर ज्यादा झूकाया हैं और जहां ग्लैमर होता हैं, वहां गंदगी होती ही हैं, क्योंकि ये देश व समाज की रक्षा के लिए आये ही नहीं, ये तो आये हैं - ग्लैमर के लिए। तो ग्लैमर आयेगा कहां से। पैसों से। और पैसे आयेंगे कहां से। इन्हीं ठगों से, जिन्हें हम आजकल टीवी वाले बाबा के नाम से जानते हैं। अब तो हम ईश्वर से यहीं प्रार्थना करेंगे, कि हे ईश्वर, अपने देश व समाज को, आसन्न मीडिया के खतरों से बचाओं, नहीं तो देश बनने से रहा। चीन और पाकिस्तान को क्या जरुरत हैं - भारत पर हमले की। भारत को खोखला करने के लिए यहां की मीडिया और ठग बाबाओं की गाढ़ी दोस्ती काफी हैं, इस देश को धूल में मिलाने के लिए, देश के मानमर्दन के लिए।
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Sunday, March 25, 2012
मीडिया से देश को खतरा -------------------------
ये बात जो लोग मीडिया में हैं। उन्हें अटपटा सा लगे, या वो मानने को तैयार न हो, पर सच्चाई यहीं हैं कि आज मीडिया से देश को खतरा उत्पन्न हो गया हैं, ऐसे में जरुरी हैं कि सरकार मीडिया पर लगाम लगाये, उन्हें नियंत्रित करें अथवा कुछ ऐसे उपाय ढूढें ताकि देश व समाज को मीडिया की खतरों से बचाया जाये। मीडिया से देश व समाज को कैसे खतरा उत्पन्न हो गया हैं। उसका एक नहीं अनेक उदाहरण हैं। जिस पर मीडिया के लोगों को ही खुद आत्ममंथन करने की जरुरत हैं।ज्वलंत उदाहरण -- आज ज्यादातर राष्ट्रीय चैनल, अपनी महत्वाकांक्षा को पाने के लिए, एकमात्र लक्ष्य रुपये कमाने के लिए आधे घंटे का या रुपये पर जितना मन चाहे, उतने घंटे का स्लॉट बेच दे रहे हैं और इन स्लॉटों में क्या होता हैं। आप खुद देखिये। एक ठग आता हैं। अपने को बाबा कहता हैं। और ठग विद्या द्वारा पूरे देश में अपना जादू चलाकर, खुद को प्रतिष्ठित कर लेता हैं। यानी कल तक जिस व्यक्ति को कोई नहीं जानता हैं,वो व्यक्ति पल भर में ही, पूरे देश में इस प्रकार अपनी धर्मसत्ता स्थापित कर लेता हैं कि, इन राष्ट्रीय चैनलों को मुंहमांगी रकम देकर, वो बाबा अपनी जयजयकार करवाता हैं। फिलहाल देश में दो बाबाओं ने ऐसी कमाल दिखायी हैं कि एक बाबा तो बनिये की दुकान से लेकर, चैनल और दवाओं की दुकान तक खोल दी हैं, जबकि दुसरा बाबा अपना थर्ड आई खोलकर, पल भर में अनारक्षित रेलवे टिकट को कन्फर्म तक करा देता हैं, यहीं नहीं खानेवाले बिस्कुट का कारोबार करने वाले व्यक्ति को वो सोने का बिस्कुट का कारोबार तक करनेवाला बनाने का दावा कर देता हैं, यहीं नहीं इस बाबा ने तो हद कर दी हैं.........हर प्रश्न का उटपुटांग जवाब देकर, स्वयं को प्रतिष्ठित कर देता हैं। ऐसे में इन बाबाओं को देख, गोस्वामी तुलसीदास की वो पंक्ति याद आ जाती हैं, वो पंक्ति जो श्रीरामचरितमानस में लिखा हैं -- पंडित वो हि सो गाल बजावा। यानी कलयुग में जो जितना गाल बजायेगा, वो उतना बड़ा ज्ञानी कहलायेगा। एक नहीं कई चैनल हैं -- जो इस प्रकार के गोरखधंधे में शामिल हैं, पर सरकार इन पर कार्रवाई नहीं करती। कमाल हैं इन बाबाओं ने इन चैनलों की टीआरपी भी बढ़ा दी हैं, यानी एक पंथ दो काज। पहला की बाबा से रुपये भी मिल गये और टीआरपी भी मिल गयी। जबकि ये चैनल, रजिस्ट्रेशन कराने के समय़ सिर्फ न्यूज चलाने की बात करते हैं, पर न्यूज के नाम पर ये क्या कर रहे हैं, सभी को पता हैं। आज देश के विभिन्न गांवों और शहरों में देश के महान संत -- कबीर, नानक, रविदास, नामदेव, तुकाराम, तुलसीदास, मीराबाई, नरसीमेहता, सुरदास, रसखान आदि के चित्र नहीं बिकते या इन्हें जाननेवाले लोगों की संख्या नगण्य हैं, पर टीवी वाले ठग बाबा के फोटो खूलेआम बिक रहे हैं, उन्हें लोग जानते हैं। हमारे देश में जितने भी संत हुए, उन्होंने देश को सिर्फ दिया, क्योंकि संत केवल देता हैं, वो देश से लेता नहीं। ठीक उसी प्रकार जैसे गंगा बहती रहती हैं, वो हमेशा उपकार करती हैं, चाहे लोग उसमें मैला बहाये अथवा उससे खुद को तृप्त करने का कार्य करें। ऐसे होते हैं संत। पर आज के संत को देखिये, बाबाओं को देखिये। ये बाबा टेंट - मार्चेंट के कारोबारियों से शादी में लगनेवाले एक कुर्सी पर बैठता हैं, तीन तसिया का जो खेल होता हैं, ठीक उसी प्रकार दस - बीस लोगों को जूगार करता हैं। जो बाबा के ट्रिक के अनुसार सवाल करता हैं और बाबा भी उसी प्रकार ट्रिक के अनुसार जवाब देता हैं, और इसी ट्रिक के जाल में, टीवी देख रहा, आम आदमी फंस जाता हैं, और अपनी जिंदगी के, मेहनत के सारे पैसे, इन ठगों पर लूटा देता हैं, वह भी जयजयकार कर। मैं जहां रहता हूं, वहां एक महिला रहती हैं, वो अपने माता - पिता को कभी सम्मान नहीं देती और न ही पति को सम्मान करती हैं, पर जरा देखिये इन्हें, जैसे ही सुबह होता हैं, ये टीवी खोलकर, उक्त ठग को देखने के लिए, सुनने के लिए दोनों हाथ जोड़कर बैठ जाती हैं। ये तो आजकल टीवी वाले इस ठग की प्रचार प्रसार भी कर रही हैं। एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि टीवी वाले थर्डआई वाले बाबा ने कहा है कि घर में शिवलिंग नहीं रखना चाहिए, जिसे सुनकर सभी टीवी देखनेवाले लोगों ने अपने घर के शिवलिंग मंदिर में रख दिये। मैंने अपनी पत्नी से पूछा - तुम्हारा क्या विचार हैं। उनका कहना था कि जब एकलव्य, द्रोणाचार्य की प्रतिमा बनाकर, स्वंय को प्रतिष्ठित करा लेता हैं, तो भला मैं, इस एकलव्य की गुणग्राही बातों को त्याग, एक ठग की बात पर क्यूं जाउं। मेरा हृदय प्रसन्न हो गया। चलों कोई तो हैं, जो इन ठगों से खुद को अलग कर रहा हैं, पर ऐसे लोगों की संख्या कितनी हैं। सवाल तो ये हैं......................।यहीं नहीं एक दक्षिण के चैनल से बाबा आते हैं, शनि के नाम पर खूब डराते हैं। पहले वे दिल्ली के राष्ट्रीय चैनलों पर आकर आम जनता को खूब डरा चुके हैं, पर हमारे घर के बच्चे, इनसे नहीं डरते। जैसे ही चैनल पर आते हैं। हमारे बच्चे, हमें बुलायेंगे, बाबा आ गये, देखिये- सुनिये और हंसते हंसते लोट पोट हो जाईये। सचमुच में, ये बाबा के हाव - भाव, फिल्मों में काम करनेवाले हास्य कलाकार, जगदीप, असरानी, धूमल व राजेन्द्रनाथ जैसे लगते हैं, और बात भी वहीं। यानी पूरे देश में आजकल टीवी चैनलों का एक ही कार्यक्रम बन गया हैं। देश व समाज भाड़ में जाये, पैसे कैसे कमाये जाये। ये ध्यान में रखकर स्लॉट बेचो, और अपने देश में धर्म कुछ ज्यादा ही बिकता हैं, और गर हिंन्दु हैं तो कहना ही नहीं, क्योंकि अन्य धर्मों में बाबाओं की उतनी पूछ नहीं, पर हिन्दुओं में बाबाओं की फौज हैं, किसी को पकड़ लो, पैसे ले लो, पूरे देश में बिकवाने का जिम्मा ले लो और शुरु हो जाओ। अभी तो थर्ड आई वाले बाबा खूब दिखाई पड़ रहे हैं, कल फोर्थ आई और फाइव तथा सिक्स आई वाले बाबा भी दिखाई पड़ जाये। तो इसे अतिश्योक्ति न समझेंगे। यहीं नहीं, आजतक हमें ये समझ में नहीं आया कि ये बाबाओं की फौज, शादी करा देती हैं, रेलवे टिकट कन्फर्म करा देती हैं, रोजगार दिला देती हैं, पर एक साधारण आदमी को प्रधानमंत्री क्यों नही बना देती। पूरे देश में जो गरीबी हैं, उसे फूंकमार कर दूर क्यों नहीं कर देती, देश में अशिक्षा जो फैली हैं, उसे फूंकमारकर दूर क्यों नहीं कर देती, या देश में जो भ्रष्टाचार पनपा हैं, उसे दूर क्यों नहीं करती और जब सारे समस्याओं का हल इन बाबाओं के पास हैं और टीवी वाले जो दिखाते हैं, वे टीवी वाले और बाबा इस समस्यारुपी शब्द को ही फूंकमार सदा क लिए क्यों नहीं मिटा देती। और जब ये ऐसा नहीं कर सकते तो समझ लीजिये कि पूरी दाल काली हैं। इसका मतलब हैं कि मीडिया, देश के लिए खतरा बन चुकी हैं और इन खतरों से देश की युवाओं को, दो दो हाथ करने के लिए तैयार रहनी चाहिए।आज से कोई बीस साल पहले, कोई जर्नलिज्म की डिग्री लेने के लिए हाय तौबा नहीं मचती थी, पर आज देश के युवा मीडिया में जाने को कुछ ज्यादा ही आतुर हैं। टीवी के ग्लैमर ने इन्हें मीडिया की ओर ज्यादा झूकाया हैं और जहां ग्लैमर होता हैं, वहां गंदगी होती ही हैं, क्योंकि ये देश व समाज की रक्षा के लिए आये ही नहीं, ये तो आये हैं - ग्लैमर के लिए। तो ग्लैमर आयेगा कहां से। पैसों से। और पैसे आयेंगे कहां से। इन्हीं ठगों से, जिन्हें हम आजकल टीवी वाले बाबा के नाम से जानते हैं। अब तो हम ईश्वर से यहीं प्रार्थना करेंगे, कि हे ईश्वर, अपने देश व समाज को, आसन्न मीडिया के खतरों से बचाओं, नहीं तो देश बनने से रहा। चीन और पाकिस्तान को क्या जरुरत हैं - भारत पर हमले की। भारत को खोखला करने के लिए यहां की मीडिया और ठग बाबाओं की गाढ़ी दोस्ती काफी हैं, इस देश को धूल में मिलाने के लिए, देश के मानमर्दन के लिए।
Monday, June 20, 2011
बोलिये झोलझाल महराज की जय...........
(व्यंग्य)
धर्मप्रेमी सज्जनों,
आज बड़ा ही शुभ दिन है................ कि श्रीश्री मूर्खापीठाधीश्वर 420 जी महाराज स्वामी झोलझाल जी, हमारे बीच में हैं.........................। ऐसे तो झोलझाल जी महराज की कृपा हम सब पर सदा बनी रहती हैं, पर इधर कुछ दिनों से महराज जी रांची आकर, कुछ पल हमलोगों के बीच व्यतीत करना चाहते थे। इसलिए स्वामी झोलझाल जी सत्संग समिति ने निर्णय लिया, कि महराज जी को यहां बुलाकर, इस रांची नगरी को धन्य धन्य कर दिया जाय। चूंकि अब हम सभी पर झोलझाल जी महराज की कृपा बरस रही हैं। अब हम, झोलझाल जी की कृपापात्र शिष्या खटेश्वरी जी से निवेदन करेंगे कि अपना खटेश्वरी राग सुनायें और हम सब को अपने राग से अभिभूत करें.................. बोलिये खटेश्वरी माता की जय............
जय जय जय झोलझाल बाबा की, जय जय जय
जय जय जय झोलझाल बाबा की, जय जय जय
एक हाथ में कलम विराजे,
दूजे हाथ कैमरा साजे
सब के नाम डूबावे ये नटखट री. जय जय जय..................
सारे नेता गिरगिट जैसा नाचे
उद्योगपति छिपकली जैसा लागे
पत्रकार की शामत री, जय जय जय...................
घोटाला करत, भ्रष्ट सम लागत
चोर चुहार के भैया लागत
एक नंबर के दुष्टन जी, जय जय जय............
नेह लगाकर जो कोई बोले
झोलझाल जी के भजन जो गावै
उनकर जन्म सफल होरी, जय जय जय..........
देश विदेश में अरबों नर नारी
भ्रष्ट समाज के हैं रखवारी
स्विस बैंक के उपकारी, जय जय जय..............
प्रातः सायं जो नाम हैं लीन्हा
करोंड़ों अरबों रुपये पहुचीन्हा
डॉलर में वो खेलिन्हा, जय जय जय.............................
बोलिये प्रेम से मूर्खपीठाधीश्वर, झोलझाल महराज की जय
प्यारे धर्मप्रेमी सज्जनों, आपने बड़े ही प्रेम और शांतिपूर्वक से माता खटेश्वरी जी के मुखारविंद से ललित ललाम, श्री झोलझाल जी महराज के भजन सुनें, अब आप सभी से अनुरोध हैं कि स्वामी झोलझाल जी महराज के मुखारविन्द से प्रवचन सुने.................
सभी बोले....................
मूर्खों की जय जय, सदा रहे
मूर्खों की......................
अज्ञानी सदा अरे फले फूले
अज्ञानी......................
जो जो घोटाला करत रहेंगे
देश में उनकी जय जय करेंगे
करेंगे, उनका अभिषेक हम दिल से
मूर्खों की जय जय, सदा रहे
हे धर्मप्रेमी सज्जनों,
जरा आप सोंचों क्या आप सौ साल पहले थे, उत्तर होगा – नहीं
क्या सौ साल बाद जिंदा रहोगे, उत्तर होगा – नहीं
तो फिर देश की चिंता करने के लिए तुम ही बने हो, अरे मूर्खों, तुम अपना जीवन हमें यानी झोल झाल को समर्पित कर दों, सब ठीक हो जायेगा.................
और एक बार फिर बोलो
मूर्खों की जय जय सदा रहे
मूर्खों की.......................
अरे बंधुओं, सुनने में आया हैं कि दिल्ली में धमाल हो रहा हैं, कुछ लोग भ्रष्टों के खिलाफ, आमरण अनशन पर तुले है, ये तो मूर्ख और भ्रष्ट समाज पर हमला हैं। क्यां हमनें कभी किसी विद्वत और संभ्रांत, देशभक्त ईमानदार पर हमला किया, जो हम पर हो रहा हैं, कभी हमनें विद्वत और संभ्रात व्यक्तियों के खिलाफ आमरण अनशन किया। उत्तर होगा – नहीं तो फिर ये लोग हम मूर्खों और भ्रष्टों के खिलाफ क्यों आमरण अनशन कर, हमें धमकी देते रहते है। ये सरासर गलत हैं। अब हमनें सोचा हैं कि इनके खिलाफ हमलोग – मिलकर संसद में सदबुद्धिविनाशक यज्ञ करेंगे। हमें आशा ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास हैं कि इस यज्ञ से देश की सारी जनता की सदबुद्धि नष्ट हो जायेगी और हमारे देश में एक सुंदर माहौल बनेगा, सभी घोटालायुक्त भारत बनाकर, देश का कल्याण करेंगे।
बोलिये झोलझाल महराज की जय
देखिये कितना सुंदर प्रवचन, हमारे स्वामी झोलझाल जी महराज ने दे दिया हैं, आशा ही नहीं, बल्कि आप सभी मिलकर स्वामी झोल झाल जी महराज के सपनों का भारत बनायेंगे। जिन्हें सदबुद्धिविनाशक यज्ञ में दिल खोलकर दान देना हैं वो कृपया बाबा झोलझाल के स्विस बैंक में खुले हुए खाते में अपनी राशि जमा करा दें ताकि बाबा और हम सब का सपना पूरा हो जाय। जो लोग सदबुद्धिविनाशक यज्ञ में शामिल होना चाहते है, वे अपना रजिस्ट्रेशन आज ही करा लें।
और अब सभी हृदय से बोले
स्वामी झोलझाल जी महराज की जय
फिलहाल बाबा झोलझाल जी, रांची प्रवास पर है, इसके बाद इनका भ्रमण सभी प्रदेशों में होगा। स्वामी झोलझाल जी सत्संग समिति के सदस्यों से विनम्र निवेदन हैं कि बाबा के कार्यक्रमों को अपने अपने प्रदेशों में सफल बनाने के लिए तन मन धन से जूट जाये, क्योंकि---
आज बड़ा ही शुभ दिन है................ कि श्रीश्री मूर्खापीठाधीश्वर 420 जी महाराज स्वामी झोलझाल जी, हमारे बीच में हैं.........................। ऐसे तो झोलझाल जी महराज की कृपा हम सब पर सदा बनी रहती हैं, पर इधर कुछ दिनों से महराज जी रांची आकर, कुछ पल हमलोगों के बीच व्यतीत करना चाहते थे। इसलिए स्वामी झोलझाल जी सत्संग समिति ने निर्णय लिया, कि महराज जी को यहां बुलाकर, इस रांची नगरी को धन्य धन्य कर दिया जाय। चूंकि अब हम सभी पर झोलझाल जी महराज की कृपा बरस रही हैं। अब हम, झोलझाल जी की कृपापात्र शिष्या खटेश्वरी जी से निवेदन करेंगे कि अपना खटेश्वरी राग सुनायें और हम सब को अपने राग से अभिभूत करें.................. बोलिये खटेश्वरी माता की जय............
जय जय जय झोलझाल बाबा की, जय जय जय
जय जय जय झोलझाल बाबा की, जय जय जय
एक हाथ में कलम विराजे,
दूजे हाथ कैमरा साजे
सब के नाम डूबावे ये नटखट री. जय जय जय..................
सारे नेता गिरगिट जैसा नाचे
उद्योगपति छिपकली जैसा लागे
पत्रकार की शामत री, जय जय जय...................
घोटाला करत, भ्रष्ट सम लागत
चोर चुहार के भैया लागत
एक नंबर के दुष्टन जी, जय जय जय............
नेह लगाकर जो कोई बोले
झोलझाल जी के भजन जो गावै
उनकर जन्म सफल होरी, जय जय जय..........
देश विदेश में अरबों नर नारी
भ्रष्ट समाज के हैं रखवारी
स्विस बैंक के उपकारी, जय जय जय..............
प्रातः सायं जो नाम हैं लीन्हा
करोंड़ों अरबों रुपये पहुचीन्हा
डॉलर में वो खेलिन्हा, जय जय जय.............................
बोलिये प्रेम से मूर्खपीठाधीश्वर, झोलझाल महराज की जय
प्यारे धर्मप्रेमी सज्जनों, आपने बड़े ही प्रेम और शांतिपूर्वक से माता खटेश्वरी जी के मुखारविंद से ललित ललाम, श्री झोलझाल जी महराज के भजन सुनें, अब आप सभी से अनुरोध हैं कि स्वामी झोलझाल जी महराज के मुखारविन्द से प्रवचन सुने.................
सभी बोले....................
मूर्खों की जय जय, सदा रहे
मूर्खों की......................
अज्ञानी सदा अरे फले फूले
अज्ञानी......................
जो जो घोटाला करत रहेंगे
देश में उनकी जय जय करेंगे
करेंगे, उनका अभिषेक हम दिल से
मूर्खों की जय जय, सदा रहे
हे धर्मप्रेमी सज्जनों,
जरा आप सोंचों क्या आप सौ साल पहले थे, उत्तर होगा – नहीं
क्या सौ साल बाद जिंदा रहोगे, उत्तर होगा – नहीं
तो फिर देश की चिंता करने के लिए तुम ही बने हो, अरे मूर्खों, तुम अपना जीवन हमें यानी झोल झाल को समर्पित कर दों, सब ठीक हो जायेगा.................
और एक बार फिर बोलो
मूर्खों की जय जय सदा रहे
मूर्खों की.......................
अरे बंधुओं, सुनने में आया हैं कि दिल्ली में धमाल हो रहा हैं, कुछ लोग भ्रष्टों के खिलाफ, आमरण अनशन पर तुले है, ये तो मूर्ख और भ्रष्ट समाज पर हमला हैं। क्यां हमनें कभी किसी विद्वत और संभ्रांत, देशभक्त ईमानदार पर हमला किया, जो हम पर हो रहा हैं, कभी हमनें विद्वत और संभ्रात व्यक्तियों के खिलाफ आमरण अनशन किया। उत्तर होगा – नहीं तो फिर ये लोग हम मूर्खों और भ्रष्टों के खिलाफ क्यों आमरण अनशन कर, हमें धमकी देते रहते है। ये सरासर गलत हैं। अब हमनें सोचा हैं कि इनके खिलाफ हमलोग – मिलकर संसद में सदबुद्धिविनाशक यज्ञ करेंगे। हमें आशा ही नहीं, बल्कि पूर्ण विश्वास हैं कि इस यज्ञ से देश की सारी जनता की सदबुद्धि नष्ट हो जायेगी और हमारे देश में एक सुंदर माहौल बनेगा, सभी घोटालायुक्त भारत बनाकर, देश का कल्याण करेंगे।
बोलिये झोलझाल महराज की जय
देखिये कितना सुंदर प्रवचन, हमारे स्वामी झोलझाल जी महराज ने दे दिया हैं, आशा ही नहीं, बल्कि आप सभी मिलकर स्वामी झोल झाल जी महराज के सपनों का भारत बनायेंगे। जिन्हें सदबुद्धिविनाशक यज्ञ में दिल खोलकर दान देना हैं वो कृपया बाबा झोलझाल के स्विस बैंक में खुले हुए खाते में अपनी राशि जमा करा दें ताकि बाबा और हम सब का सपना पूरा हो जाय। जो लोग सदबुद्धिविनाशक यज्ञ में शामिल होना चाहते है, वे अपना रजिस्ट्रेशन आज ही करा लें।
और अब सभी हृदय से बोले
स्वामी झोलझाल जी महराज की जय
फिलहाल बाबा झोलझाल जी, रांची प्रवास पर है, इसके बाद इनका भ्रमण सभी प्रदेशों में होगा। स्वामी झोलझाल जी सत्संग समिति के सदस्यों से विनम्र निवेदन हैं कि बाबा के कार्यक्रमों को अपने अपने प्रदेशों में सफल बनाने के लिए तन मन धन से जूट जाये, क्योंकि---
जो जितना योगदान करेगा, वो उतना ही सुख पायेगा
हृदय में बाबा झोलझाल को धारण कर, देश में एक भ्रष्ट वातावरण को तैयार कर, अपना और अपने परिवार का जीवन सफल करें।
हृदय में बाबा झोलझाल को धारण कर, देश में एक भ्रष्ट वातावरण को तैयार कर, अपना और अपने परिवार का जीवन सफल करें।
Tuesday, May 11, 2010
भगवान बचाए ऐसे टीवी वाले बाबाओं से------- विद्रोही
भगवान बचाए ऐसे टीवी वाले बाबाओं से------- विद्रोही
मै पिछले तीन दिनों से सो नहीं पाया हूँ, इतना बेचैन हूँ की पूछिए मत. आखिर बेचैन क्यों हूँ, आप जानना चाहते होंगे. दरअसल बात ये है की दिल्ली से प्रसारित एक राष्ट्रिय चेंनेल ने १३ मार्च की सुबह एक बाबा को अपने स्टूडियों में बुलाया. बाबा स्वयं को सामान्य मनुष्य बता रहे थे, पर स्टूडियों में बैठा एंकर, उन्हें असामान्य बताने पर तुला था और नीचे चल रही पट्टी बाबा को महा मंडलेश्वर बता रही थी, जो अपने आप में विरोधाभास था. बाबा का दावा था की उन्होंने जो भी अब तक कुछ कहा है, इश्वर की कृपा से सच साबित हुई है, ये बाबा ज्यादातर इसी राष्ट्रिय चेंनेल पर आते है और स्वयम को महिमामंडित करने के लिए ऐसी हाव भाव प्रकट करते है, की प्रथमदृष्टया एक सामान्य व्यक्ति सम्मोहन वश इनकी बातो में आकर वो सब करने लगेगा जो ये, बाबा कहते है.
जरा देखिये, ये बाबा १३ मार्च को क्या कह दिया, १३ मार्च की सुबह -------- बाबा बता रहे थे की मार्गी मंगल अब चलेगा, जो मंगल को खुश कर दिया, शनि उससे खुश हो गए. इसी दरम्यान इस बाबा ने एक राशिफल में बताया की कर्क राशिवालों को ८ किलो उड़द की दाल पानी में बहा देना चाहिए. इससे ये राशिवाले आनंदित हो जायेंगे. पता नहीं ऐसा करनेवाले खुश होंगे या नहीं. पर गर ऐसा लोगों ने करना शुरू किया तो आप सोचिये क्या स्थिति होगी, देश की. ऐसे ही इस बार दलहन का उत्पादन देश में प्रभावित हुआ है जिससे दालों के दाम आकाश को छूने लगे. देश की सरकार इस महंगाई को देख दुसरे देशों से दाल का आयात करने लगी फिर भी दाल का दाम घटने का नाम नहीं ले रहा. आज भी लोगों के थालियों से दाल गायब है, ऐसे में देश के ये राष्ट्रिय चेंनेल ऐसे ऐसे बाबाओं के माध्यम से देश का मान बढ़ा रहे है, या भूखमरी को बढ़ावा देने का काम कर रहे है. क्या ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी करवाई नहीं करनी चाहिए जो अनाजों को भुखमरी और कुपोषण के शिकार लोगो को न देकर ये पानी में बहाने का सन्देश दे रहे है.
मै भी ब्रह्मण घर में जन्म लिया हूँ, ज्योतिषी का ज्ञान मुझे भी है. किस पुस्तक में लिखा है की, अकाल और सूखे से प्रभावित तथा गरीबी से जूझ रहे देश के लोगो को खाने-पिने की अनाजो को पानी में बहा देना चाहिए. क्या देश के किसानों के श्रम से पैदा किया गया अनाज पानी में बहाने के लिए है.
क्या इन बाबाओं और पत्रकारों को मालूम नहीं की अपने देश में एक मन्त्र है जो अनाजों के सम्मान को दर्शाता है ---- अन्नेति परम ब्रह्म. क्या इन बाबाओं और पत्रकारों को वो कहानी मालूम नहीं जब कृष्ण ने द्रौपदी को शाक के माध्यम से अन्न के महत्व को समझाया था. लानत है ऐसी सोच पर जो ८ किलो दाल को पानी में बहा देने की बात करते हो. ऐसे ही बाबाओं - पत्रकारों और चैंनलों ने लगता है की इन्होने देश का सत्यानाश करने के लिए ठेका ले रखा है. इनकी जितनी आलोचना की जाये कम है.
आजकल धर्म के मूल स्वरुप को ये चेंनेल बताने का प्रयास नहीं करते, ये वही बात करते है, जिनमे इनका फायदा दिखाई देता हो. इसके लिए देश में तबाही ही क्यों न हो जाये.
मै पूछता हु की ये बाबा और चेंनेल बता सकते है की इस देश में स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष हुए, जिन्होंने भारतीय धर्म का पताका विदेशो में फहराया. श्री स्वामी प्रभुपाद जिन्होंने हरे कृष्ण आन्दोलन से अपने देश के अध्यातम का लोहा मनवाया. इन्होने कितने किलो अनाज नदी में प्रवाहित करने का सन्देश दिया. गर ये सन्देश ऐसे दिए होते तो इस देश का मान विदेशों में बढ़ा होता. ये छोटी सी बात इन चैन्नेलों और पत्रकारों को क्यों समझ में नहीं आती.
ऐसी ही एक घोर आश्चर्य एक दक्षिण के चैनलों में प्रसारित कार्यक्रम में मैंने देखी. एक जयपुर की महिला ने एक बाबा से पूछा की उसकी बेटी आस्ट्रलिया में है, बड़ी संकट में है, बाबा कुछ उपाय बताये, बाबा ने क्या उत्तर दिया जरा सुनिए --- आप अपनी बेटी को कहे की शुद्ध घी के चार लड्डू बना आस्ट्रलिया के एक हथिनी को खिला दे. अब जरा बाबा को कौन बताये की आस्ट्रलिया में हाथी नहीं कंगारू ज्यादा मिलते है, वो भी न तो हाथी और न कंगारू, दोनों में किसी को लड्डू पसंद नहीं है. अरे जिन्हें लड्डू पसंद है उन्हें तुम लड्डू नहीं देते और जिन्हें पसंद नहीं उन्हें लड्डू जबरदस्ती खिलाते हो, ऐसे में तुम किसी जिन्दगी में ख़ुशी नहीं प्राप्त कर सकते, क्योकि असली इश्वर तो तुम्हारे अंदर बैठा है, उसे क्यों नहीं जानने की कोशिश करते. क्यों घटिया स्तर के बाबाओं और चैनलों के चक्कर में पड़कर अपनी जिन्दगी तबाह करने में लगे हो, अभी भी वक्त है संभल जाओ.
मै पिछले तीन दिनों से सो नहीं पाया हूँ, इतना बेचैन हूँ की पूछिए मत. आखिर बेचैन क्यों हूँ, आप जानना चाहते होंगे. दरअसल बात ये है की दिल्ली से प्रसारित एक राष्ट्रिय चेंनेल ने १३ मार्च की सुबह एक बाबा को अपने स्टूडियों में बुलाया. बाबा स्वयं को सामान्य मनुष्य बता रहे थे, पर स्टूडियों में बैठा एंकर, उन्हें असामान्य बताने पर तुला था और नीचे चल रही पट्टी बाबा को महा मंडलेश्वर बता रही थी, जो अपने आप में विरोधाभास था. बाबा का दावा था की उन्होंने जो भी अब तक कुछ कहा है, इश्वर की कृपा से सच साबित हुई है, ये बाबा ज्यादातर इसी राष्ट्रिय चेंनेल पर आते है और स्वयम को महिमामंडित करने के लिए ऐसी हाव भाव प्रकट करते है, की प्रथमदृष्टया एक सामान्य व्यक्ति सम्मोहन वश इनकी बातो में आकर वो सब करने लगेगा जो ये, बाबा कहते है.
जरा देखिये, ये बाबा १३ मार्च को क्या कह दिया, १३ मार्च की सुबह -------- बाबा बता रहे थे की मार्गी मंगल अब चलेगा, जो मंगल को खुश कर दिया, शनि उससे खुश हो गए. इसी दरम्यान इस बाबा ने एक राशिफल में बताया की कर्क राशिवालों को ८ किलो उड़द की दाल पानी में बहा देना चाहिए. इससे ये राशिवाले आनंदित हो जायेंगे. पता नहीं ऐसा करनेवाले खुश होंगे या नहीं. पर गर ऐसा लोगों ने करना शुरू किया तो आप सोचिये क्या स्थिति होगी, देश की. ऐसे ही इस बार दलहन का उत्पादन देश में प्रभावित हुआ है जिससे दालों के दाम आकाश को छूने लगे. देश की सरकार इस महंगाई को देख दुसरे देशों से दाल का आयात करने लगी फिर भी दाल का दाम घटने का नाम नहीं ले रहा. आज भी लोगों के थालियों से दाल गायब है, ऐसे में देश के ये राष्ट्रिय चेंनेल ऐसे ऐसे बाबाओं के माध्यम से देश का मान बढ़ा रहे है, या भूखमरी को बढ़ावा देने का काम कर रहे है. क्या ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी करवाई नहीं करनी चाहिए जो अनाजों को भुखमरी और कुपोषण के शिकार लोगो को न देकर ये पानी में बहाने का सन्देश दे रहे है.
मै भी ब्रह्मण घर में जन्म लिया हूँ, ज्योतिषी का ज्ञान मुझे भी है. किस पुस्तक में लिखा है की, अकाल और सूखे से प्रभावित तथा गरीबी से जूझ रहे देश के लोगो को खाने-पिने की अनाजो को पानी में बहा देना चाहिए. क्या देश के किसानों के श्रम से पैदा किया गया अनाज पानी में बहाने के लिए है.
क्या इन बाबाओं और पत्रकारों को मालूम नहीं की अपने देश में एक मन्त्र है जो अनाजों के सम्मान को दर्शाता है ---- अन्नेति परम ब्रह्म. क्या इन बाबाओं और पत्रकारों को वो कहानी मालूम नहीं जब कृष्ण ने द्रौपदी को शाक के माध्यम से अन्न के महत्व को समझाया था. लानत है ऐसी सोच पर जो ८ किलो दाल को पानी में बहा देने की बात करते हो. ऐसे ही बाबाओं - पत्रकारों और चैंनलों ने लगता है की इन्होने देश का सत्यानाश करने के लिए ठेका ले रखा है. इनकी जितनी आलोचना की जाये कम है.
आजकल धर्म के मूल स्वरुप को ये चेंनेल बताने का प्रयास नहीं करते, ये वही बात करते है, जिनमे इनका फायदा दिखाई देता हो. इसके लिए देश में तबाही ही क्यों न हो जाये.
मै पूछता हु की ये बाबा और चेंनेल बता सकते है की इस देश में स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष हुए, जिन्होंने भारतीय धर्म का पताका विदेशो में फहराया. श्री स्वामी प्रभुपाद जिन्होंने हरे कृष्ण आन्दोलन से अपने देश के अध्यातम का लोहा मनवाया. इन्होने कितने किलो अनाज नदी में प्रवाहित करने का सन्देश दिया. गर ये सन्देश ऐसे दिए होते तो इस देश का मान विदेशों में बढ़ा होता. ये छोटी सी बात इन चैन्नेलों और पत्रकारों को क्यों समझ में नहीं आती.
ऐसी ही एक घोर आश्चर्य एक दक्षिण के चैनलों में प्रसारित कार्यक्रम में मैंने देखी. एक जयपुर की महिला ने एक बाबा से पूछा की उसकी बेटी आस्ट्रलिया में है, बड़ी संकट में है, बाबा कुछ उपाय बताये, बाबा ने क्या उत्तर दिया जरा सुनिए --- आप अपनी बेटी को कहे की शुद्ध घी के चार लड्डू बना आस्ट्रलिया के एक हथिनी को खिला दे. अब जरा बाबा को कौन बताये की आस्ट्रलिया में हाथी नहीं कंगारू ज्यादा मिलते है, वो भी न तो हाथी और न कंगारू, दोनों में किसी को लड्डू पसंद नहीं है. अरे जिन्हें लड्डू पसंद है उन्हें तुम लड्डू नहीं देते और जिन्हें पसंद नहीं उन्हें लड्डू जबरदस्ती खिलाते हो, ऐसे में तुम किसी जिन्दगी में ख़ुशी नहीं प्राप्त कर सकते, क्योकि असली इश्वर तो तुम्हारे अंदर बैठा है, उसे क्यों नहीं जानने की कोशिश करते. क्यों घटिया स्तर के बाबाओं और चैनलों के चक्कर में पड़कर अपनी जिन्दगी तबाह करने में लगे हो, अभी भी वक्त है संभल जाओ.
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