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Wednesday, May 8, 2013

वाह री कर्नाटक की जनता, तुम्हारा भी जवाब नहीं..............

सबसे सुंदर, सबसे प्यारा
मेरा देश, मेरा देश
भ्रष्टाचारी यहां पनपते
देशद्रोही यहीं पे बढ़ते
अपनी जमीन पर, देश के नेता
दूसरे देश से कब्जा करवाते
जब मीडिया, अरे शोर मचाती
तब चीन के आगे, नाक रगड़ते
सबसे सुंदर, सबसे प्यारा
मेरा देश, मेरा देश
यहां की जनता
मस्त हैं रहती
मुंहमांगी रकम से, वोट बेचती
भ्रष्टाचारियों को खूब जीताती
भ्रष्ट पार्टियों को बहुमत देती
कहती लूटो, मेरे नेता
जमकर शोषित कर लो नेता
कर्नाटक क्या, दिल्ली क्या
सब जगह, तुम  बढ़ते जाओ
अपने देश को रौंद रौद कर
अपने महल बनाते जाओ
लूट लूट कर अपने पैसे
विदेशी बैंकों में भरते जाओ
जब तक जिंदा रहो, लूटो तुम
तुम्हें मदद हम करते रहेंगे
वोटों से और दिल देकर
तुम्हारा स्वागत करते रहेंगे
मेरा एक ही सपना भैया
मेरे दादा, कभी गुलाम थे
मैं स्वतंत्र, क्यू अरे कहाया
मैं परतंत्र होना चाहता हूं
कैसे सपना  पूरा होगा
जब तुम, नीचे से उपर तक
भ्रष्ट न होगे, भ्रष्ट न होगे
इसी हेतु ईश्वरीय प्रार्थना
सब नेता अरे भ्रष्ट हो जाये
नेता क्या
डाक्टर, इंजीनियर
यहीं क्यूं
शिक्षक, छात्र भी 
भ्रष्ट हो जाये, भ्रष्ट हो जाये
ताकि हम भारतवासी
दिल खोल कहे,
संपूर्ण विश्व से
देखो हमने रिकार्ड बनाया
विश्व का नं. एक हैं देश 
भारत देश भारत देश
भ्रष्टाचारियों का हैं देश
भारत देश, भारत देश
बधाई हो कांग्रेस पार्टी को। कर्नाटक में वो सरकार बनाने जा रही हैं। बधाई कर्नाटक की जनता को, कि उसने क्या जनादेश दिया हैं। जातियता में बहकर, सारे के सारे भ्रष्टाचारियों को जीताया हैं। ऐसे भी कर्नाटक की जनता, अन्य प्रदेशों से अलग थोड़े ही हैं। भारतवंशीय हैं, इसलिए भारतवंशियों का खून तो इनमें भी होगा। इसलिए दिल खोलकर, चीन के आगे नाक रगड़नेवाली, सीबीआई को अपने हाथों नचाकर, विदेशों में अपने पैसे समायोजित करानेवाली पार्टी में अपना विश्वास व्यक्त किया। अब मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ये देश जरुर परतंत्र होगा। अरे परतंत्र होगा क्या, परतंत्र तो हैं ही। जो देश अपनी सीमा के अंदर 20 दिनों तक दूसरे देश की सेना का स्वागत करने के लिए पलक पावड़े बिछाये, उसे देश की औकात क्या। इस देश में कभी किसी मां के कोख से सुना हैं भगत सिंह पैदा हुआ करते थे। अब तो इस देश में येदियुरप्पा, राहुल, प्रियंका, मनमोहन, पवन  कुमार बंसल, ए राजा, दिग्विजय सिंह, कपिल सिब्बल, अरे कितनो का नाम लिखूं, ये पैदा ले रहे हैं। ये देश को कहां ले जा रहे हैं, ये किसी से छुपा नहीं हैं। बार -बार हमारे मित्र कहते हैं कि ये देश बहुत तरक्की करेगा, मैं बार - बार कहता हूं कि ये देश गर तरक्की करेगा, तो फिर चीन के आगे नाक कौन रगड़ेगा, अमरीका का पांव कौन पखारेगा। कम से कम इन देशों में गुलामों की नौकरी करनेवाला एक वर्ग भी तो चाहिए। ऐसे में ये काम करने के लिेए भारतीयों जैसा दूसरा, पूरे विश्व में फिलहाल कोई देश नहीं दीखता। इसलिए गर्व से बोलो हम भारतीय हैं।
हम भ्रष्टाचारियों को वोट देते हैं।
हम भ्रष्टाचारियों में विश्वास व्यक्त करते हैं।
जो देश हमे आंख दिखाता हैं, उसके आगे हम नाक रगडते हैं।
हम अपना जमीर बेचकर, जयचंद और मानसिंह बनने को लालायित रहते हैं।
हम भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद को मूरख और राहुल तथा प्रियंका में आदर्श ढुंढते हैं।
जय हो भारत की..........................जय हो कर्नाटक की जनता की।
जिसने भ्रष्टाचारियों को वोट देकर, उसमें विश्वास व्यक्त कर भ्रष्टाचारियों का मनोबल बढ़ाया। 

Saturday, September 22, 2012

हमारे प्रधानमंत्री डायलॉग बहुत अच्छा बोल लेते हैं......................

कल यानी 21 सितम्बर 2012 को अपने देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का हिंदी में भाषण सुनने को मिला। आमतौर पर अंग्रेजी में बोलनेवाले मनमोहन सिंह को शायद ये परमज्ञान हो गया होगा कि यहां की जनता अंग्रेजी थोड़ा कम जानती हैं, इसलिए हिंदी में पहले और बाद में उन्होंने अंग्रेजी का सहारा लिया, हालांकि आम तौर पर देखा गया हैं कि जब अंग्रेजी में ये बड़े बड़े महानुभाव भाषण दे देते हैं तो इनके भाषण का हिंदी अनुवाद ये कहकर पेश नहीं किया जाता कि उनके हिंदी भाषण को पढ़ा हुआ मान लिया जाय, और लोग पढ़ा हुआ मान लेते हैं। ऐसे भी, मेरा ये विषय भी नहीं कि उन्होंने किस भाषा में भाषण दिया, क्योंकि ये महाशय अपने देश की सम्मान के प्रति कितना गंभीर हैं, वो देश की जनता जानती हैं।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को अभी एफडीआई की जरुरत हैं। उन्होंने बड़ी ही बेशर्मी से ये भी कहा कि 1991 में जब आर्थिक सुधार कार्यक्रम देश में शुरु किये गये तो यहीं लोग जो आज विरोध कर रहे थे, उस वक्त भी विरोध करना शुरु किया था, पर आज उसका क्या फायदा मिला, सभी को ज्ञात हैं। उन्होंने ये भी बड़े बेशर्मी से कह दिया कि देश के ज्यादातर हिस्सों में ज्यादातर लोग एक साल में छह सिंलिंडर से ही काम चला लेते हैं, पर ये नहीं बताया कि उनके ( प्रधानमंत्री के ) घर में कितने सिलिंडर, एक साल में खर्च होते हैं। कल के भाषण में इतना तो स्पष्ट हो गया कि हमारे प्रधानमंत्री डायलॉग बहुत अच्छा बोल लेते हैं। इसलिए हम तो यहीं चाहेंगे कि जैसे उन्होंने ब्यूरोक्रेट में रहकर अपनी पोजीशन ठीक की। राजनीति में हाथ पांव मारकर बिना किसी लोकसभा चुनाव जीते, प्रधानमंत्री बन गये। अब उन्हें फिल्मी दुनिया में भी हाथ अजमाना चाहिए, निःसंदह वे तीनों शाहरुख खान, सलमान खान, आमिर खान को परास्त कर सुपर स्टार बन जायेंगे और इस प्रकार से एक रिकार्ड भी बना लेंगे, कि एक व्यक्ति जो हर जगह फिट हैं, वो सिर्फ और सिर्फ मनमोहन हैं। बेचारे प्रधानमंत्री ऐसे तो बहुत कम बोलते हैं, कम बोलने का रिकार्ड भी उन्ही के पास हैं, जब ममता बनर्जी ने जैसे ही एफडीआई मुद्दे पर, केन्द्र से अपना समर्थन वापस लिया, उनका मुंह खुल गया और जनता से सहयोग मांगने लगे।
इधर कल तक एफडीआई के विरोध में भारत बंद में शामिल होनेवाली समाजवादी पार्टी, जिसका चरित्र सदैव संदिग्ध रहा हैं। उसके बड़े नेता मुलायम सिंह यादव, सोनिया गांधी के चरण कमल पर लोटने के लिेए मजबूर हो गये। याद रखिये ये वहीं मुलायम हैं जो दो दिन पहले कोलकाता में कांग्रेस को कोस चुके हैं। ये वहीं मुलायम हैं जिनकी जीभ प्रधानमंत्री पद के लिए हमेशा लपलपायी रही हैं। ये वहीं मुलायम हैं, जिन्होंने अपने पुरे खानदान को राजनीति में घुसाकर, उन्हें अनुप्राणित किया हैं। ये वहीं मुलायम हैं, जिन्हें वामपंथी नेता एबी वर्द्धन, एनसीपी के कई नेता, थर्ड फ्रंड की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने में देर तक नहीं की हैं, और उतनी ही जल्दी, इस नेता यानी मुलायम ने कांग्रेस के गोद में बैठने में अपनी पुरुषार्थ दिखा दी। ये कहकर कि वे नहीं चाहते कि देश में सांप्रदायिक शक्तियां मजबूत हो। यानी देश मुलायम की जातिगत राजनीति के कारण और कांग्रेस की गलत आर्थिक नीतियों के कारण भले ही भाड़ में चला जाये, पर मुलायम  और सोनिया की बादशाहत किसी भी प्रकार से कम नहीं होने चाहिेये। ये हैं हमारे देश के नेताओं का दोहरे चरित्र को उजागर करती आज की राजनीति। ऐसे ऐसे नेता, हमारे देश को महान बनाने के लिए, आजकल पैदा लिेए हैं, जो देश को अमरीका और अन्य देशों के हाथों गिरवी रखकर, उऩके उपनिवेश शासक के तौर पर खुद को प्रतिष्ठित करने का सपना देख रहे हैं। क्या होगा, इस देश का, जहां ऐसे ऐसे घटिया स्तर के नेताओं की फौज आज विद्यमान हैं।
कल हमारे प्रधानमंत्री ये भी बोले कि अमरीका और अन्य पश्चिमी देशों में आयी आर्थिक मंदी का असर भारत में भी देखने को मिला हैं, पर हमारे उपर उतना बोझ नहीं पड़ा हैं। मैं कहता हूं की गर नहीं पड़ा तो डीजल का भाव क्यों बढ़ा दिया। यहीं नहीं हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में डीजल का उपयोग बड़े बड़े अमीर करते हैं, क्या देश के खेतों में काम करने वाले किसानों और खेतिहर मजदूरों के डीजल पंपिंग सेट, पेट्रोल पर चलते हैं। क्या हमारे देश के सारे के सारे किसान अमीर हो गये। क्या प्रधानमंत्री का इस प्रकार दिया गया बयान करोंड़ों किसानों के मुंह पर तमाचा नहीं हैं। प्रधानमंत्री जी, आम जनता से सहयोग मांगते हो, कठोर फैसले लेने की मजबूरी का हवाला देते हो, और खुद तुम्हारे मंत्रिमंडल के लोग जनता की गाढ़ी कमायी के अरबों - खरबों रुपये लूटकर विदेशों में जमा कर दे रहे हैं, साथ ही लूटने का क्रम जारी भी हैं। उस भ्रष्टाचार पर आप अंकुश नहीं लगाते और आम जनता को देश के लिए जीने की दुहाई देते हो यानी हम जिंदगी भर देश के लिए सब कुछ लुटाते रहे और आप जिंदगी भर प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर शान बघारते रहो और अंत में तिंरगा को लपेटकर, अपने सैल्यूट भी मरवाओ। क्या बात हैं। ये सिर्फ, इसी देश भारत में होता हैं और कहीं नहीं। दूसरा देश होता तो स्थिति कुछ और होती। बगल में चीन हैं -- देख लो। तुम्हारी - हमारी सदैव औकात बताता हैं और हमारी इतनी भी ताकत नहीं कि उसकी औकात बता दें। पूरा देश चीनी माल से अटा पटा हैं। मैं पूछता हूं हमारे प्रधानमंत्री ये तो बताये कि चीन के किस नगर में, मेरे देश की बनी सामग्रियां बिकती दिखायी दे रही हैं, गर नहीं तो इसके लिए जिम्मेवार कौन हैं। पिछले 65 सालों में दस साल निकाल दें तो कांग्रेस की ही सरकार रही हैं, और इस देश का बंटाधार कांग्रेस और इसको सहयोग करनेवाली पार्टियां के सिवा किसी और ने नहीं किया। ऐसे में आम जनता, आप के इस लल्लो - चप्पो वाली भाषण पर विश्वास क्यों करे। आप प्रधानमंत्री हैं -- 2014 तक आपको मिला हैं, शासन करने को। करते रहिये, देश को विदेशियों के हाथो लूटवाते रहिये। आगे देखते हैं कि 2014 के बाद कोई देश से प्यार करनेवाला सहीं व्यक्ति मिलता हैं या नहीं, जो प्रधानमंत्री पद पर रहकर, देश का सम्मान बढ़ा सके।