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Tuesday, March 8, 2016

इन महिलाओं को नमन........

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है...
इस दिन पूरे देश में महिलाओं को केन्द्र में रखकर कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं...पर हमारे लिए प्रत्येक दिन महिलाओं का हैं, क्योंकि कौन ऐसा दिन है, जिस दिन महिलाओं ने अपने कर्म से देश और समाज को नई दिशा न दी हों...हम ऐसी महिलाओं के प्रति आभार प्रकट करते है और नमन करते हैं...
1. सुमन गुप्ता – महिला आईपीएस अधिकारी, किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं, झारखण्ड में इन्होंने महिलाओं के सम्मान को आगे बढ़ाया, यहीं नहीं भ्रष्ट राजनीतिज्ञों के आगे कभी झूकी नहीं, कोई समझौता नहीं किया और अपने कर्मक्षेत्र में आज भी अडिग है...
2. रत्ना पुरकायस्था – आकाशवाणी से अपनी अलग पहचान बनानेवाली और फिलहाल दूरदर्शन केन्द्र पटना से जुड़ी रत्ना पुरकायस्था किसी भी पहचान की मोहताज नहीं, “सबकी दीदी” से मशहूर रत्ना जी, अनेक संघर्षों का सामना की है। हाल ही में जदयू के एक मंत्री ने उनके साथ अशोभनीय व्यवहार किया, धमकी दी, पर वह डरी नहीं, उस आततायी मंत्री का मुकाबला किया और वह अपने कर्तव्य क्षेत्र में आज भी अडिग है...
3. सीता सिन्हा – अवकाश प्राप्त शिक्षिका, उनकी आंखों में हमेशा प्रेम ही छलका। बच्चों को देख, वह भाव विह्वल हो जाती। बच्चों को इस प्रकार पढ़ाती, जैसे लगता कि एक मां अपने बच्चों का पोषण करती हैं। आज भी वह उन पढ़ाये हुए बच्चों को मिलती हैं तो घर ले जाकर, उन्हें बिना खिलाए, जाने नहीं देती...यानी इस प्रकार का प्रेम जैसे लगता हो कि उनका स्वयं का बेटा हो...पता नहीं वो दुनिया में है भी या नहीं, पर मैं उन्हें नहीं भूल सकता...
4. प्रमिला देवी – पटना, सगुना दानापुर में रहती है। एक आदर्श महिला। उनको मैंने आज तक नहीं देखा यह सोचते हुए कि कौन अपना है या कौन पराया...। जो भी मिला, सबको आदर, सबको सम्मान और सबको अपना समझा। किसी का दर्द देख लिया, तो वह बर्दाश्त नहीं कर पायेंगी और उनके पास जो भी कुछ होगा...वह मदद करने के लिए आगे निकल पड़ेंगी...सबका दर्द बांटा...पर इनका दर्द आज तक किसी ने बांटने की कोशिश नहीं की...ईश्वर इनकी बराबर परीक्षा लेता है...और मैं जानता हूं कि ये सारी परीक्षा में उत्तीर्ण होती रहती है...
5. दयामणि बारला – एक आदिवासी महिला, क्रांतिकारी महिला, जिनका जीवन ही संघर्ष के लिए बना है...कोई समझौता नहीं...केवल एक ही लक्ष्य, कहीं भी गरीबों के उपर किसी का जुल्म बढ़ा...ये सदैव आगे रहती है...हालांकि कई लोगों ने इनकी भावनाओं का गलत दोहन किया...पर वह इस पर ध्यान नहीं देती...वो सिर्फ अपने काम पर ध्यान देती है...।
6. रसना मरांडी – धनबाद की आदिवासी छात्रा, एनसीसी कैडेट्स – जिसने भारतीय वायुसेना के एएन32 विमान से हजारों मील दूर आकाश से चार बार छलांग लगायी यानी झारखण्ड की पहली महिला कैडेट, जिसे राज्य सरकार ने आज तक सम्मान नहीं दिया...जब मैं ईटीवी में था, तो इस महान बालिका पर एक समाचार भी बनाया था...उस वक्त के एनसीसी आफिसर कर्नल दीक्षित ने कहा था – मिश्रा जी मिलिये...झारखण्ड की महान आदिवासी बालिका से जिसने भारतीय वायुसेना के एएन32 विमान से अभूतपूर्व कारनामा कर दिखाया...

 7. डा. शिवानी झा - कतरास धनबाद की चर्चित महिला डाक्टर, सेवा भाव इतना कि पूछिये मत...कई बार स्थानीय विधायक द्वारा उन्हें धमकी दी गयी, पर वो अपने सेवा भाव से तनिक भी विचलित नहीं हुई...आज भी इनके यहां वंचितों, उपेक्षितों व आर्थिक रुप से बहुत ही कमजोर गरीब मरीज आते है और ये उन पर समान रुप से प्रेम लुटाती है, सेवा करती है...
8. डा. लीना सिंह - धनबाद में रहती है...एक आदर्श महिला डाक्टर...जिन्हें अपने आदर्शवादिता और भारतीय संस्कृति पर नाज है...ये गर्व से कहती है कि हमें भारतीय होने पर और खासकर भारतीय मूल्यों के साथ जीने में बहुत ही आनन्द आता हैं...साथ ही ये अन्य लोगों से भी अपने भारतीय मूल्यों के साथ जीने का अनुरोध करती है...

Monday, July 1, 2013

झारखंड की जनता की छाती पर मूंग दलने को मचलते झामुमो और कांग्रेस के पत्नीभक्त नेता...................................

झारखंड के कांग्रेस-झामुमो से जूड़े नेताओं-विधायकों की पत्नियां, बेटे-बेटियां, दामाद और उनके लटके - झटके दुखी है। जब से भाजपा-झामुमो-आजसू की खिचड़ी सरकार झारखंड में गिरी, तब से इनके हाल बेहाल हैं, क्योंकि इनके नेता बार-बार कहा करते थे, कि झामुमो आज भाजपा से नाता तोड़े और लीजिये कल झामुमो और कांग्रेस की सरकार बन कर तैयार, पर ये क्या राष्ट्रपति शासन के छह महीने बीतने को आये पर अभी तक झामुमो-कांग्रेस की राज्य में सरकार नहीं बनी। बेचारे हेमंत के हाड़ में हल्दी नहीं लगी, बेचारे मुख्यमंत्री नहीं बने, क्योंकि उनकी दिली तमन्ना हैं कि एक - दो महीने के लिए ही सही कम से कम मुख्यमंत्री की सूची में उऩका नाम तो अब लिख ही दिया जाना चाहिए, पर सफलता नही मिल रही, लेकिन कांग्रेस के पूर्व झारखंड प्रभारी शकील अहमद ने उनके अरमानों पर बड़ा ध्यान दिया और उनकी बाते अपने अन्नदाता राहुल तक पहुंचा दी, साथ ही ये भी बता दिया कि गर कांग्रेस ने हेमंत के हाड़ में हल्दी लगवा दी तो देर सबेर इसका फायदा कांग्रेस को 2014 के लोकसभा चुनाव में अवश्य मिलेगा। जैसे ही शकील के सरकार बनाने की हवा देने के बाद कांग्रेस - झामुमो के नेताओँ व विधायकों को मिली, बेचारे खुशी से पगला गये। इनकी पत्नियां, बेटे-बेटियां-दामाद खुशी से पागल हो गये। फिर सरकार बनेगी, दोनों हाथों में लड्डू होंगे, जैसे पूर्व की सरकार में शामिल मंत्रियों, विधायकों की पत्नियां, बेटे-बेटियां और दामाद विदेश यात्रा का आनन्द लेते थे, अब वे भी 18 महीनों में सारा कसर निकाल लेंगे। उन्होंने कोई पाप किया हैं क्या। उन्हें भी विदेश यात्रा और दुनिया का सारा सुख लेने का अधिकार हैं, जनता ने उन्हें मौका दिया हैं, इसका फायदा क्यों न उठाये। और लीजिये इन्हीं सारी तिकड़मों के लिए सरकार बनाने का दौर चलना शुरु हो गया हैं। हां एक बात और हम तो ये लिखना भी भूल रहे हैं, पर अब याद आ गया हैं, लिख देता हूं। यहां का मीडिया जगत भी चाहता हैं कि राष्ट्रपति शासन के बजाय जनता के प्रतिनिधियों का शासन हो, क्योंकि वो जानता हैं कि यहां के जनप्रतिनिधियों को अपनी अंगूलियों पर नचाकर, यहां के प्रशासनिक अधिकारियों से अपने हित में वो काम कराया जा सकता हैं, जो फिलहाल राष्ट्रपति शासन में होता नहीं दीखता, चाहे वो विज्ञापन से संबंधित ही मामला क्यूं न हो। राष्ट्रपति शासन में विज्ञापन मीडिया को उतने नहीं मिलते, जितना की अर्जुन मुंडा के शासनकाल मे अथवा कांग्रेस -झामुमो के शासनकाल में संभव है, और गर किसी कारण से विज्ञापन नहीं मिला तो फिर अपना ब्लैकमेलिंग का धंधा हैं ही। इसलिए यहां का मीडिया जगत भी दिलोजां से चाहता हैं कि यहां सरकार बने, चाहे वो पांच दिन के लिए ही क्यूं न हो।
इस सरकार बनाने में, जनहित और राज्यहित की बात खूब हो रही हैं, पर जरा सोचिये ये जनहित और राज्यहित की बात करनेवालों का चरित्र क्या हैं। सबसे पहले बात कांग्रेस की - यहां काँग्रेस के नेता राजेन्द्र प्रसाद सिंह हैं जो अर्जुन मुंडा के शासन काल में नेता प्रतिपक्ष थे। इनके गुट ने बी के हरिप्रसाद, प्रभारी, झारखंड कांग्रेस के रांची आगमन पर क्या गुंडागर्दी दिखायी ये बताने की जरुरत नहीं। इन्हीं के बेटे हैं - अनूप सिंह जो प्रदेश में एक बड़े पद पर हैं और अपने ही विधायक मन्नान मल्लिक को वो सबक सिखाया कि पूछिये मत। आज भी रांची कोतवाली थाना में इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हैं, जरा सोचिये ऐसे ऐसे लोग सत्ता में होंगे तो राज्य और जनता का कितना हित होगा। अब जरा झामुमो की बात कर ले। इनके सुप्रीमो है- दिशोम गुरु शिबू सोरेन। ये हमेशा गर्त में जा रहे कांग्रेस को संभालते हैं। पहली बार रिश्वत लेकर नरसिंहा राव की सरकार बचानेवाले शिबू सोरेन की महिमा निराली हैं। इन्हीं की बहू सीता सोरेन हैं, जो सीबीआई के शिकंजे में हैं, जिन्होंने वोट बेचने की अपनी पार्टी की परंपरा का खूब निर्वहण किया और उन पैसों से क्या किया। झारखंड की जनता को मालूम हैं। ऐसे तो इनके सारे विधायक वोट बेचने की परंपरा में पीएचडी हासिल कर ली हैं। इसी पार्टी की कृपा से कई राज्यसभा के सांसद बन गये और कई झारखंड को चारागाह समझ कर यदा कदा झारखंड का परिभ्रमण करते रहते हैं। 
सवाल उठता हैं कि जिस प्रांत के नेताओं का चरित्र इस प्रकार का हो। वहां सरकार बने अथवा न बने क्या फर्क पड़ता हैं। आखिर जनहित और राजहित में सरकार बनाने की बात करनेवाले ये जनता को इतना बेवकूफ क्यों समझते हैं, कि जैसे जनता जानती ही नहीं। अरे जनता यहां की सब जानती हैं तभी तो ऐसे लोगों को अपना नेता चूनती हैं ताकि वो विधानसभा पहुंचकर उनकी छाती पर मूंग दल सकें, और इधर कई महीनों से जनता की छाती पर मूंग नहीं दली गयी, इससे जनता भी परेशान हैं। भला एक व्यक्ति को जनता की छाती पर मूंग दलने का अधिकार जनता ने तो नहीं दिया, इसलिए यहां के सभी विधायकों और मंत्रियों को अधिकार हैं कि वे झारखंड की जनता के छाती पर मूंग दलकर, अपनी पत्नियों, बेटे-बेटियों और दामाद-बहूंओं के लिए सात पुश्तों तक पूंजी जमा कर लें, ताकि इनके मरने के बाद, इनकी आत्मा को कोई मलाल न हो, कि वे झारखंड में जन्म लिये पर झारखंड को मुहम्मद गोरी और गजनी की तरह लूट न सके।