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Tuesday, March 8, 2016

इन महिलाओं को नमन........

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है...
इस दिन पूरे देश में महिलाओं को केन्द्र में रखकर कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं...पर हमारे लिए प्रत्येक दिन महिलाओं का हैं, क्योंकि कौन ऐसा दिन है, जिस दिन महिलाओं ने अपने कर्म से देश और समाज को नई दिशा न दी हों...हम ऐसी महिलाओं के प्रति आभार प्रकट करते है और नमन करते हैं...
1. सुमन गुप्ता – महिला आईपीएस अधिकारी, किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं, झारखण्ड में इन्होंने महिलाओं के सम्मान को आगे बढ़ाया, यहीं नहीं भ्रष्ट राजनीतिज्ञों के आगे कभी झूकी नहीं, कोई समझौता नहीं किया और अपने कर्मक्षेत्र में आज भी अडिग है...
2. रत्ना पुरकायस्था – आकाशवाणी से अपनी अलग पहचान बनानेवाली और फिलहाल दूरदर्शन केन्द्र पटना से जुड़ी रत्ना पुरकायस्था किसी भी पहचान की मोहताज नहीं, “सबकी दीदी” से मशहूर रत्ना जी, अनेक संघर्षों का सामना की है। हाल ही में जदयू के एक मंत्री ने उनके साथ अशोभनीय व्यवहार किया, धमकी दी, पर वह डरी नहीं, उस आततायी मंत्री का मुकाबला किया और वह अपने कर्तव्य क्षेत्र में आज भी अडिग है...
3. सीता सिन्हा – अवकाश प्राप्त शिक्षिका, उनकी आंखों में हमेशा प्रेम ही छलका। बच्चों को देख, वह भाव विह्वल हो जाती। बच्चों को इस प्रकार पढ़ाती, जैसे लगता कि एक मां अपने बच्चों का पोषण करती हैं। आज भी वह उन पढ़ाये हुए बच्चों को मिलती हैं तो घर ले जाकर, उन्हें बिना खिलाए, जाने नहीं देती...यानी इस प्रकार का प्रेम जैसे लगता हो कि उनका स्वयं का बेटा हो...पता नहीं वो दुनिया में है भी या नहीं, पर मैं उन्हें नहीं भूल सकता...
4. प्रमिला देवी – पटना, सगुना दानापुर में रहती है। एक आदर्श महिला। उनको मैंने आज तक नहीं देखा यह सोचते हुए कि कौन अपना है या कौन पराया...। जो भी मिला, सबको आदर, सबको सम्मान और सबको अपना समझा। किसी का दर्द देख लिया, तो वह बर्दाश्त नहीं कर पायेंगी और उनके पास जो भी कुछ होगा...वह मदद करने के लिए आगे निकल पड़ेंगी...सबका दर्द बांटा...पर इनका दर्द आज तक किसी ने बांटने की कोशिश नहीं की...ईश्वर इनकी बराबर परीक्षा लेता है...और मैं जानता हूं कि ये सारी परीक्षा में उत्तीर्ण होती रहती है...
5. दयामणि बारला – एक आदिवासी महिला, क्रांतिकारी महिला, जिनका जीवन ही संघर्ष के लिए बना है...कोई समझौता नहीं...केवल एक ही लक्ष्य, कहीं भी गरीबों के उपर किसी का जुल्म बढ़ा...ये सदैव आगे रहती है...हालांकि कई लोगों ने इनकी भावनाओं का गलत दोहन किया...पर वह इस पर ध्यान नहीं देती...वो सिर्फ अपने काम पर ध्यान देती है...।
6. रसना मरांडी – धनबाद की आदिवासी छात्रा, एनसीसी कैडेट्स – जिसने भारतीय वायुसेना के एएन32 विमान से हजारों मील दूर आकाश से चार बार छलांग लगायी यानी झारखण्ड की पहली महिला कैडेट, जिसे राज्य सरकार ने आज तक सम्मान नहीं दिया...जब मैं ईटीवी में था, तो इस महान बालिका पर एक समाचार भी बनाया था...उस वक्त के एनसीसी आफिसर कर्नल दीक्षित ने कहा था – मिश्रा जी मिलिये...झारखण्ड की महान आदिवासी बालिका से जिसने भारतीय वायुसेना के एएन32 विमान से अभूतपूर्व कारनामा कर दिखाया...

 7. डा. शिवानी झा - कतरास धनबाद की चर्चित महिला डाक्टर, सेवा भाव इतना कि पूछिये मत...कई बार स्थानीय विधायक द्वारा उन्हें धमकी दी गयी, पर वो अपने सेवा भाव से तनिक भी विचलित नहीं हुई...आज भी इनके यहां वंचितों, उपेक्षितों व आर्थिक रुप से बहुत ही कमजोर गरीब मरीज आते है और ये उन पर समान रुप से प्रेम लुटाती है, सेवा करती है...
8. डा. लीना सिंह - धनबाद में रहती है...एक आदर्श महिला डाक्टर...जिन्हें अपने आदर्शवादिता और भारतीय संस्कृति पर नाज है...ये गर्व से कहती है कि हमें भारतीय होने पर और खासकर भारतीय मूल्यों के साथ जीने में बहुत ही आनन्द आता हैं...साथ ही ये अन्य लोगों से भी अपने भारतीय मूल्यों के साथ जीने का अनुरोध करती है...

Monday, June 1, 2015

मुख्यमंत्री रघुवर दास जी, बच्चे परिणाम चाहते हैं....

रघुवर जी, आखिर आप ये तो बताएं कि इन बच्चों ने कौन सा पाप किया है कि आपके वरीय पुलिस अधिकारी इनकी बात नहीं सुनते या इनकी वेदना पर अट्टहास करने से बाज नहीं आते..................
हम जहां रहते हैं, वहां एक बहुत ही गरीब घर का बच्चा रहता है, नाम है – लखू। उसने कुछ सपने देखे है, अपने परिवार के लिए, उसे लगता हैं कि अब सपने पूरे होनेवाले है, वह भी तब जब जैप विज्ञापन संख्या – 02/2011 के बोर्ड नं. 1 का मेरिट लिस्ट निकलेगा। लखू जैसे एक नहीं कई लड़के होंगे, जिनकी हैसियत या औकात नहीं कि दिल्ली या और किसी महानगर में जाकर हराम के पैसे कमानेवाले परिवार के बच्चों की तरह आईएएस व आईपीएस की तैयारी कर सकें। हां मैं एक बात दावे के साथ कह सकता हूं कि गर इन्हें मौका मिले और सरकार मदद कर दें, इन बच्चों की, तो यकीन मानिये हराम की कमाई खानेवाले इन बापों के बेटे किसी जिंदगी में अपने बाप के सपनों को पूरा नहीं कर पायेंगे, क्योंकि तब इन सभी पर इन गरीब ईमानदार बापों के बेटों का कब्जा होगा, पर जरा देखिये इन बच्चों के साथ क्या हो रहा हैं। ये बच्चे प्रतिदिन कभी पुलिस उप महानिरीक्षक जैप, कभी प्रभारी पुलिस उप महानिरीक्षक(कार्मिक), कभी सुमन गुप्ता, पुलिस उप-महानिरीक्षक, जैप, कभी महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक का कार्यालय, कभी न्यायालय तो कभी मुख्यमंत्री जनता दरबार, यानी कौन ऐसी जगह हैं, जहां इन बच्चों ने अपने हक के लिए दरवाजा नहीं खटखटाया, पर क्या मजाल कि जिन्हें अपने कार्यों को गति देना हैं, उनके कान पर जूं तक रेंगे। भला इनके बच्चों से संबंधित मामला थोड़े ही हैं, ये तो उन बच्चों का भविष्य हैं, जो जहां जन्म लेते हैं, वहीं मर जाते हैं.....इसलिए ऐसे भी मरेंगे, वैसे भी मरेंगे। राज्य सरकार के वरीय पुलिस कर्मियों की बेशर्मी देखिये, जब ये बच्चे सूचना के अधिकार के तहत, सूचनाएं मांगते हैं, तो उनका जवाब होता हैं, प्रक्रिया जारी हैं, अरे भ्राई ये प्रक्रिया आखिर कब समाप्त होगा। इसकी कोई समय सीमा भी हैं या नहीं, या ढपोर शंखी हो गये तुम लोग। गर तुम किसी समय सीमा पर कोई परिणाम नही दे सकते तो फिर इस प्रकार का विज्ञापन क्यों निकालते हो, मत निकालो विज्ञापन और जैसा तुम हमेशा करते हो, बैक डोर से पैसे लेकर वो सारे कुकर्म कर डालों, जिसके लिए झारखंड जाना जाता है....। क्या इसके लिए इन बच्चों ने मना किया था क्या। हद तो तब हो जाती हैं, जब बच्चे किसी अखबार के संवाददाता के पास पहुंचते हैं, और वो संवाददाता भी पैसे की बात कर देता हैं और नहीं देने पर उलजूलूल छाप देता हैं।
आखिर जिन बच्चों ने जैप विज्ञापन संख्या 02/2011 का परीक्षा दिया था, जिसमें तीन बोर्ड बनाये गये थे, उसमे बोर्ड -1 एक परिणाम कब आयेगा, क्या सरकार बतायेगी, या परिणाम निकलवाकर उन बच्चों के सपनों को पूरा करेंगी, उनके भविष्य सुधारेंगी या उनके हाल पर छोड़ देंगी.......मुख्यमंत्री रघुवर दास जी, इन बच्चों को आप से उत्तर चाहिए और ये उत्तर केवल उन बच्चों को ही नहीं, मुझे भी चाहिए ताकि मैं जान सकूं कि ये सरकार कितनी संवेदनशील है..................

Sunday, March 6, 2011

आखिर सुमन गुप्ता को जाना ही पड़ा........।

दसवीं का जब छात्र था, तो उस वक्त कहानी संकलन नामक पुस्तक चला करती थी। उसी में मैंने मुंशी प्रेमचंद की लिखित कहानी नमक का दारोगा पढ़ा था, जिसमें एक पिता अपने पुत्र को नौकरी में जाने के पूर्व हिदायत दी कि बेटा मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चांद हैं, उपरि आमदनी बहता हुआ स्रोत हैं यानी नाना प्रकार से व्यवहारिक जिंदगी अपनाने की बात, अपने बेटे से कहीं, पर बेटा नहीं माना। नमक का दारोगा बना। ईमानदारी से जिंदगी बितानी शुरु कर दी। एक समय ऐसा आया कि धन ने धर्म पर जीत दर्ज कर ली, पर अंततः कहानी के अंत अंत आते आते, धर्म की जीत हो जाती है। यहीं जीत बताती हैं, कि भारत का ध्येय वाक्य सत्यमेव जयते की सर्वदा जय होती है, इसीलिये भय नहीं करें, संघर्ष करें, आगे बढ़ते जाये, और देश व समाज को नयी दिशा दे दे।
सुमन गुप्ता जो पुलिस अधीक्षक के पद पर धनबाद में शोभायमान थी। आज वो वहां नहीं है, उन्हें राज्य सरकार ने रांची वायरलेस के एसपी पद पर स्थानांतरित कर दिया। धनबाद एसपी के रुप में आर के धान को पदभार ग्रहण करने के लिए कहा गया है। हम आपको बता दें कि सुमन गुप्ता जैसी वीरांगनाएं कई कभी कभार ही जन्म लेती है, जबकि आर के धान जैसे लोगों की संख्या झारखंड में बहुत है, आर के धान न कभी, सुमन गुप्ता बन सकते है और न उन्हें बनने की आवश्यकता है। ऐसे तो राज्य सरकार ने पहले ही सुमन गुप्ता को स्थानांतरित करने का फैसला ले लिया था पर पता नहीं क्या उनकी मजबूरी हो गयी, उन्होंने स्थानांतरण के फैसले को स्थगित कर दिया और अब अचानक, इसे इम्पलीमेंट करा दिया। हालांकि सामान्य जनता जानती हैं कि ऐसा क्यूं हुआ हैं, और हमें लिखने में कोई दिक्कत नहीं कि राज्य सरकार ने कुख्यात कोयलामाफियाओं और कोयलांचल के कुख्यात अपराधियों, सत्तापक्ष और संपूर्ण विपक्ष में शामिल भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, भ्रष्ट वरीय पुलिस पदाधिकारियों व भ्रष्ट पत्रकारों के आगे घूटने टेकते हुए, वो कर दिया, जिसकी आशा सामान्य जनता को पहले से ही थी। सामान्य जनता जानती थी कि जिस प्रकार से सुमन गुप्ता कोयलांचल के कोलमाफियाओं पर एक एक कर हमले करते हुए, उन्हें उनकी औकात बता रही हैं, वो ज्यादा दिनों तक धनबाद नहीं टिकेंगी। और आखिर वहीं हुआ भी, नहीं टिकी। ऐसे भी यहां कोई पुलिस पदाधिकारी वो भ्रष्ट ही क्यूं न हो, ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता, क्योंकि राज्य के वरीय पुलिस पदाधिकारी आईपीएस ही नहीं, यहां तक की आईएएस अधिकारी भी, जब झारखंड कैडर चुनते हैं तो उनकी पहली और अंतिम इच्छा होती हैं कि एक बार धनबाद संभाला जाये, क्योंकि धनबाद में वो सब कुछ है, जिसके कारण दुनिया की सारी सुख सुविधाएं, देखते ही देखते, उनके घर में आ जाती है। इसलिए हमारा मानना है कि महत्वपूर्ण ये नहीं कि धनबाद में कौन कितने दिन एसपी के रुप में रहा, महत्वपूर्ण ये हैं कि वो जितने दिन भी रहा, कैसे रहा। और हमें ये कहने में गुरेज नहीं कि, सुमन गुप्ता का कार्यकाल अद्वितीय रहा है और आज के बाद धनबाद में जो भी एसपी आयेंगे, उन्हें सुमन गुप्ता बनने में, पसीने छूट जायेंगे। धनबाद से सुमन गुप्ता का जाना, भ्रष्ट व्यवस्था के हावी होने और भ्रष्ट अर्जुन मुंडा सरकार का प्रत्यक्ष और सुंदर उदाहरण है। कुख्यात कोयला माफियाओं, कुख्यात अपराधियों, कुख्यात पुलिस पदाधिकारियों की फौज, इस वीरांगना के खिलाफ लगी थी, जिसमें ये एकमात्र महिला अपनी पूरी ताकत लगाकर, भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ रही थी, ठीक उसी प्रकार जब 1857 में सिंधिया परिवार अंग्रेजों से मित्रता करने की संधि कर रहा था, और उसी वक्त लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से चुन चुन कर बदला ले रही थी, संघर्ष कर रही थी। जिस पर सुप्रसिद्ध कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने लिखा है –
अंग्रेजों के मित्र सिंधिया,
ने छोड़ी रजधानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वो तो,
झांसी वाली रानी थी।
मैं भी कहना चाहता हूं, जब सुमन गुप्ता भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, भ्रष्ट पुलिस पदाधिकारियों, कुख्यात कोल माफियाओं, भ्रष्ट पत्रकारों को उनकी औकात बता रही थी, तब अर्जुन मुंडा की सरकार, इन भ्रष्ट लोगों के साथ सुर में सुर मिलाकर ये कह रही थी कि ऐ भ्रष्टाचारियों, चिंता मत करों, मैं हूं न। जल्द ही, उक्त महिला को, मैं वहां से हटाकर, उसे ऐसा शंट करुंगा कि तुम देखते रह जाओगे। और अर्जुन मुंडा की सरकार ने ये करके दिखा दिया। शर्म – शर्म।
इधर सुमन गुप्ता का स्थानांतरण पत्र आया, उधर उक्त महिला ने तनिक देर नहीं की और अपना बोरा बिस्तर बांध लिया, चल दी। इधर आम जनता को पता लगा कि सुमन गुप्ता जा रही हैं, आम जनता की भीड़ उनके आवास पर आ खड़ी हुई, किसी के हाथों में फूल मालाएं थी, तो कोई उनसे ऑटोग्राफ ले रहा था। आश्चर्य कोई पैसा कमाता हैं तो कोई यश। मैंने कोयलांचल में, कई एसपी को आते जाते देखा, पर आज तक किसी एसपी की, ऐसी विदाई नहीं देखी।
सचमुच मह्त्वपूर्ण ये नहीं, कि कौन कितने दिन जिया, महत्वपूर्ण ये हैं कि वो जितने दिन जिया, कैसे जिया। शेर की तरह या मच्छड़ की तरह। अब धनबाद में शायद ही कोई एसपी के रुप में शेर दिखेगा। शेर लिखने का मतलब, पुरुषार्थ से हैं। सुमन गुप्ता गर चाहती तो वो भी अन्य भ्रष्ट अधिकारियों और समझौतावादी व्यवहार, भ्रष्ट नेताओं की चाटुकारिता कर वो पद पा लेती, जिसकी चाहत यहां के आईएएस व आईपीएस अधिकारियों को होती हैं, पर जो रास्ता उन्होंने अपनाया है, ईश्वर से यहीं प्रार्थना हैं कि उस पर सदैव चलती जाये, क्योंकि ये मार्ग कठिन है, इस राह में नाना प्रकार की परीक्षाएं होती है और उन परीक्षाओं में सफल होना बहुत ही कठिन होता है। क्योंकि आईएएस व आईपीएस बन जाना आसां हो जाता है, पर इस पद को पाकर, एक अच्छा इंसान बनना, पुरुषार्थी इंसान बनना, लक्ष्मीबाई बनना, बहुत मुश्किल होता है। निरंतर संघर्ष करते जाईये, सुमन जी, आप खूब चमकेंगी, क्योंकि ईश्वर आपके साथ है।

Monday, November 29, 2010

स्थानांतरण एक एसपी का ......


जनता चाहती हैं, कि वो मेरे पास रहे, मेरे साथ रहे, मेरे हर दुख सुख में साथ दें, क्योंकि वो जब से आयी, तब से धनबाद में वो चीज थम गया, जिसके लिए धनबाद जाना जाता था। आखिर वो कौन हैं – जिसके बारे में धनबाद की जनता ने धनबाद बंद बुला दिया और यहीं नहीं सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार हो गयी। स्पष्ट हैं – वो नाम हैं, धनबाद के वर्तमान एसपी सुमन गुप्ता का। वो हैं महिला, पर पुरुषार्थ इतना भरा कि उनके सामने पुरुष की पुरुषार्थ भी फेल। जब वो धनबाद की एसपी बनी थी, तब मैं उस वक्त ईटीवी धनबाद का प्रभारी था। मनौज कौशिक एसपी की विदाई हो गयी थी और सुमन गुप्ता प्रभार ले रही थी। व्यवसायी वर्ग रोज रोज की रंगदारी से तंग था, कोल माफियाओं की तूती बोल रही थी। नेताओं-माफियाओं-भ्रष्टाचार में लिप्त कुछ पुलिसकर्मी और पत्रकारों का गठजोड़ अपने रंग में था। ऐसे में इन पर नकेल कसना और धनबाद को रास्ते पर लाना कोई सामान्य काम नहीं था। ऐसे भी कहा जाता हैं कि जो भी आईपीएस झारखंड आता है, और उसे पैसे कमाने होते हैं तो वो एक बार धनबाद की पोस्टिंग चाहता हैं, इसके लिए वो सत्ता में बैठे नेताओं को मुंहमांगी रकम देने को भी तैयार होता है। यहीं नहीं जब पैसे के बल पर, वो एसपी धनबाद आ जाता हैं, तब अपने मनमुताबिक, वो थाना प्रभारियों को नियुक्त करता हैं, सस्पेंड करने का नाटक करता हैं और जम कर पैसे कमाता हैं। ऐसे एसपी को कुछ करने की भी जरुरत नहीं पड़ती, धनबाद हैं, इसलिए पैसे खुद ब खुद इनके पास पहुंच रहा होता हैं, पर इसके बदले में एक सामान्य जनता को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती हैं। चाल धंसते हैं, सामान्य लोग मरते हैं, व्यवसायियों से रंगदारी मांगी जाती हैं, अपहरण उद्योग चलता हैं, रेलवे से लोहे और कोयले की चोरी नहीं, तस्करी होती हैं और अपना प्रांत व देश लूट रहा होता हैं। इधर, भ्रष्ट एसपी, आराम से सो रहा होता हैं, क्योंकि उसे सोने की कीमत हर महीने, कार्यालय, आवास अथवा मनमुताबिक जगहों पर पहुंचा दी जाती हैं।
सुमन गुप्ता, झारखंड का एक जाना पहचाना नाम हैं, इसलिए नहीं कि वो एसपी हैं, इसलिए कि वो अपने कामों से जनता का दिल जीती हैं, साथ ही दिल जीती हैं, उन पुलिसकर्मियों का जो ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ हैं, और उक्त जनता का, जिसे लटपट से कोई मतलब नहीं, सिर्फ उसे मतलब हैं कि चैन से जीने का। जब मैं ईटीवी धनबाद में था, तभी मैं समझ गया था कि इनकी नेताओं, माफियाओं, धनबाद में रह रहे कुछ भ्रष्टपुलिसकर्मियों और पीतपत्रकारिता में संलिप्त लोगों से नहीं बनेगी, और हुआ भी ऐसा ही। सुनियोजित साजिश के तहत शुरु से ही ऐसा ताना बाना बनाया जाने लगा, जैसे लगता हैं कि इनके आने से धनबाद में अमन चैन ही खत्म हो गया हो। और रही सही कसर निकाल दी, धनबाद में धीरेन्द्र प्रकरण ने, जो नेता ये मुद्दा उछाल रहे हैं, उन्हें धीरेन्द्र से कोई मतलब नहीं। मतलब हैं कि इसी की आड़ में, अपना उल्लू सीधा कर लें। यहीं नहीं रांची में बैठे सत्तासीन लोगों को भी पैसे की चाहत हैं, वे भी चाहते हैं कि धनबाद में अपने ऐसे लोगों को बिठा दें, जो आराम से उनके चौखट तक पैसे पहुंचा दे। ऐसे में जब तक धनबाद के एसपी सुमन गुप्ता को नहीं हटायेंगे, तो फिर मनचाहा आदमी कैसे बैठेगा। इसलिए उन्होंने तरकीब निकाली कि क्यूं नहीं, विपक्ष के इस हंगामें को आधार बनाकर, अपना उल्लू सीधा कर लिया जाय। हमें याद हैं कि जिस दिन विधानसभा अपना स्थापना दिवस मना रहा था, उस दिन धनबाद के कई पुलिसकर्मियों और पत्रकारों के फोन हमारे पास आये, उनका एक ही प्रश्न था कि धनबाद के एसपी सुमन गुप्ता का क्या हुआ। आज झाविमो विधायक समरेश सिंह और फूलचंद मंडल ने जो हंगामा किया, उसका कितना असर रहा। और जिस दिन आईपीएस अधिकारियों का तबादला हुआ, उसमें सभी समाचार पत्रों ने सुमन गुप्ता को ही प्रमुखता दे दी, जबकि तबादला सिर्फ सुमन गुप्ता का ही नहीं, औरों का भी हुआ था। ये बातें साबित करती हैं कि एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ महिला, कोलमाफियाओं, सत्ता में बैठे अथवा बाहर में रह रहे राजनीतिज्ञों, भ्रष्ट पुलिसकर्मियों और पीत पत्रकारिता करनेवाले पत्रकारों को किस प्रकार खटक रही हैं।
मैं ये भी नहीं कहता कि सुमन गुप्ता हमेशा धनबाद में ही रहे, ऐसी महिला, हर जगह जानी चाहिए, जिससे एक नये समाज की रचना हो, पर उक्त महिला का स्थानांतरण भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, कोलमाफियाओं, भ्रष्टपुलिसकर्मियों और भ्रष्ट पत्रकारों को खुश करने के लिए हो, तो इससे ज्यादा शर्मनाक दूसरा कुछ हो ही नहीं सकता। धीरेन्द्र सिंह प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, और इसके दोषियों को दंड भी मिलना चाहिए, पर इस प्रकरण को बहाना बनाकर, बिना जनता को विश्वास में लिए, स्थानांतरण करना, सरकार की नीयत पर भी सवाल खड़ें करता हैं? आखिर सरकार को सोचना चाहिए कि जो लोग रांची से धनबाद अथवा धनबाद से रांची तक ये मामला उठा रहे हैं, वे चाहते क्या हैं, उनका क्या स्वार्थ हैं, पर बिना इन सबकी जांच पड़ताल किये, स्थानांतरण कर देना, बहुत कुछ कह देता हैं। आखिर फुलचंद मंडल, ढुल्लू महतो और समरेश सिंह जैसे विधायक, धनबाद में क्या करते हैं, क्या चाहते हैं, क्या धनबाद की जनता नहीं जानती। कैसे पंचायत चुनाव के दौरान, अर्जुन मुंडा की सरकार ने आनन फानन में, सुमन गुप्ता का स्थानांतरण कर दिया, क्या इस सरकार के क्रियाकलापों को यहां की जनता नहीं जानती। सब जानती हैं, पर जनता करें क्या, यहां तो अंधेर नगरी, चौपट राजा, टके सेर भाजी और टके सेर खाजा वाली कहावत चरितार्थ हो रही हैं।