Showing posts with label मोदी. Show all posts
Showing posts with label मोदी. Show all posts

Monday, April 10, 2017

मोदी और नीतीश से अपील..............

मोदी और नीतीश से अपील...
प्रभात खबर को साधुवाद...
सचमुच चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे होने के अवसर पर प्रभात खबर ने जो दो पृष्ठों का विशेष परिशिष्ट, वह भी मुख्य पृष्ठ पर दिया है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम है। ऐसे अवसरों पर देश व राज्यों के बच्चों को यह बताना कि आज का दिन कितना महत्वपूर्ण है, इसकी जिम्मेवारी लेना बहुत बड़ी बात है। अच्छा होता कि देश व राज्य के सभी अखबार चंपारण सत्याग्रह के महत्व को समझते, पर ऐसा संभव नहीं हुआ है। हम बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी अनुरोध करेंगे कि चूंकि चंपारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का टर्निंग प्वाइंट है, इसलिए इसे सामान्य समझने का भूल न करें और इस समय का देशहित में सही फायदा उठाये, क्योंकि सच्चाई यह है कि चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे हो जाने के बाद भी नई पीढ़ी को यह पता ही नहीं कि चंपारण सत्याग्रह का स्वतंत्रता आंदोलन में क्या भूमिका रही है? जबकि इतिहासकार और स्वतंत्रता सेनानियों का दल स्वीकार करता है कि गांधी को गांधी बनाने में चंपारण की भूमिका प्रमुख रही। यहीं कारण रहा कि सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता रिचर्ड एटनबरो ने भी अपनी फिल्म गांधी में इसका खुबसुरती से चित्रण किया है।
अतः भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनुरोध है कि वे अपने-अपने स्तर पर देश व राज्य के विभिन्न स्कूलों व कॉलेजों में चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने के अवसर पर रिचर्ड एटनबरो की फिल्म गांधी अवश्य दिखाये, हो सके तो एक बार फिर दूरदर्शन पर इस फिल्म को पुनः दिखाया जाय, साथ ही गांधी के जीवनवृत्त, जिसमें चंपारण सत्याग्रह का विशेष जिक्र हो, इसकी एक लघु पत्रिका बनवाकर, जन-जन तक पहुंचाये जाये, ताकि लोग गांधी और चंपारण सत्याग्रह को आज के परिपेक्ष्य में कम से कम भूल न पायें...
यह समय की मांग भी है, क्योंकि वर्तमान में गांधी को भूलना, चंपारण को भूलना देश और बिहार दोनों के लिए आत्मघाती होगा।
#narendramodi #nitishkumar

Thursday, September 29, 2016

थाली में छेद..........

क्या होता है थाली में छेद?
आम तौर पर अगर किसी व्यक्ति को आप कहे कि वो तो जिस थाली में खाता है, उसी थाली में छेद करता है, बस देखिये जिसके बारे में कहा गया, वह व्यक्ति ये वाक्य बोलनेवाले व्यक्ति का किस प्रकार मुंह नोच लेता है, अगर मुंह नोचने की ताकत नहीं तो फिर उससे वह वो बदला लेगा, जिससे ये वाक्य बोलनेवाले की नानी – दादी याद आ जायेगी।
आम तौर पर इस लोकोक्ति का प्रयोग सर्वाधिक हो रहा है, खासकर तब, जब किसी को नीचा दिखाने की जरुरत हो। सर्वाधिक इस लोकोक्ति का प्रयोग वे लोग करते है, जो अपना जमीर बेच चुके होते है, भले ही उसका कारण कुछ भी हो।
आजकल बहुत सारे पत्रकारों का समूह अपना जमीर बेचकर विभिन्न संस्थानों में कार्य कर रहा है और अपने संस्थान के मालिक अथवा संपादकों के इशारे पर वह कुकृत्य कर रहा है, जिसकी इजाजत उसका जमीर भी नहीं देता, पर दूसरों को उल्लू बनाने के लिए वह इस डायलॉग का प्रयोग खुब करता है कि वह जिस थाली में खाता है, उस थाली में छेद नहीं करता, यानी उसके कुकृत्यों से देश का भले ही नुकसान हो जाये, या यो कहें कि देश की थाली में भले ही छेद हो जाये, पर उस संस्थान या मालिक की थाली में छेद नहीं होना चाहिए, जिसने देश का नुकसान करने का बीड़ा उठा लिया है।
जरा देखिये, एक से एक नमूने है...
पटना में एक संवाददाता है, खूब नीतीश की परिक्रमा करता है, उसे नीतीश में खुदा नजर आता है, कभी – कभी उसके सपने में नीतीश तीर लेकर राम के रुप में भी आ जाते है, इसलिए नीतीश के खिलाफ वो सुनना ही नहीं चाहता और चूंकि अब लालू भी नीतीश के साथ हो गये तो वह लालू को हनुमान के रुप में हृदय में धारण किये है, ये अलग बात है कि इनके कुकृत्यों से बिहार का जो नुकसान होना है, वो हो ही रहा है, पर चूंकि वह जिस संस्थान में काम करता है उसका मालिक स्वयं नीतीश की पार्टी से विधायक बना हुआ है, इसलिए वह लालू और नीतीश के बारे में कुछ सुनना ही नहीं चाहता, पर मोदी के खिलाफ विषवमन करने की बात हो तो देखिये वह अपने मालिक को खुश करने के लिए हद से भी गुजर जाता है। अब ऐसे लोगों से क्या बात करनी।
कल ही की बात है उक्त सज्जन को एक व्यक्ति ने उसे आइना देखाने की कोशिश की, तो उसका जवाब था कि झारखंड सरकार के पैसे पर अपना काम चलाने वाले लोग अगर नैतिकता की दुहाई दें तो यह शर्म की बात है?
हमारा उत्तर - क्या झारखण्ड सरकार में काम करना और उस काम का पैसे लेना अनैतिक है?
हम बताते है कि अनैतिक क्या है? झारखण्ड सरकार के आगे विज्ञापन के लिए नाक रगड़ना और उस विज्ञापन के पैसे से अपना पेट चलाना और उसके बाद अपना जमीर गिरवी रख देना, यह अनैतिक है। जो आजकल सभी कर रहे है। हमारे पास एक नहीं कई उदाहरण है। बिहार में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक चल रही थी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे। उन्होंने ईटीवी पर ऐसा जादू डाला कि रात्रि के नौ बजे के समाचार में 18 मिनट नीतीश का ही समाचार येन केन प्रकारेन चलता रहा और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की खबर तेल लेने चली गयी। ये कुछ उदाहरण है और मैं फिर ताल ठोंक कर कहता हूं कि बिहार में कई चैनल या अखबार है, पत्रकार है, जो नीतीश और लालू के दरबारी है। और अब हम आपको बताते है कि अनैतिक क्या है?
क. जमीर बेचना अनैतिक है।
ख. जमीर बेचकर अपने मालिक और संस्थानों के लिए सिर्फ जीना और इसकी आड़ में देश को नुकसान पहुंचाना अनैतिक है।
ग. अपने गिरेबां में नहीं झांकना और दूसरों पर झूठा आरोप लगाना अनैतिक है।
घ. कोई भी व्यक्ति कहीं भी काम कर सकता है, चाहे वह सरकारी सेवा में रहे या निजी संस्थाओं में, ध्यान यह रहे कि वह कहीं भी काम कर रहा है, पर अपना जमीर तो नहीं बेच रहा। अगर जमीर बेच दिया, देश को नुकसान किया, एकतरफा सोच रखा तो अनैतिक है।
ङ. हां, हर बात में अपने मालिक की हां में हां मिलानेवाला, देश का सबसे बड़ा शत्रु और अनैतिक है, क्योंकि वह सही मायनों में देश की थाली में छेद कर रहा है, जिससे अंततः उसका भी नुकसान होता है, क्योंकि वह देश से अलग नहीं है।

Tuesday, December 23, 2014

सब पर भारी, झारखंड की जनता हमारी। कोई नहीं भरमा पायेगा, जब जनता जग जायेगा।।..........

हां भाईयों, सब पर भारी, झारखंड की जनता हमारी। कोई नहीं भरमा पायेगा, जब जनता जग जायेगा।। – ये नारा सम-सामयिक हैं, क्योंकि कल तक सारे राजनीतिज्ञों, मीडियाकर्मियों और ज्योतिषियों की धड़कनें तेज थी कि पता नहीं जनता का जनादेश क्या होगा......सभी अपनी –अपनी कलाबाजियों का प्रदर्शन करते हुए, डींगे हांक रहे थे। सब की अपनी – अपनी दलीलें, कोई कह रहा था कि मेरे क्षेत्र में हमने इतने काम किये हैं कि वहां से कोई दूसरा जीत ही नहीं सकता, कोई कह रहा था कि हमने धूप में बाल थोड़ी ही सुखायें हैं, पत्रकारिता की हैं, इसलिए जो हम बोल रहे हैं, वहीं होगा और राजनीतिक भविष्यवाणी करनेवाले ज्योतिषियों की तो हवा निकल गयी हैं, बोलते ही नहीं बन रहा, कल तक अर्जुन मुंडा को पुनः प्रतिष्ठित करनेवाले यानी मुख्यमंत्री बनाने का दावा करनेवाले ज्योतिषी खोजते नहीं मिल रहे। एक दो राजनीतिक पंडितों से बात हमने करनी चाही तो वे अपनी मोबाइल बंद कर सोते हुए मिले....कुछ की पत्नियां फोन उठायी और बड़ी विनम्रता से बोली, पंडित जी महराज सो रहे हैं, कृपा कर बाद में फोन करें..............अब हम क्या बोले कि पंडित जी को आज सोना ही देना उत्तम होगा, क्योंकि आज का दिन उनके लिए सोने के लिए ही संदेश लेकर आया हैं................ आखिर क्या हुआ हैं – झारखंड में.................. झारखंड में वो हुआ हैं, कि ऐसा किसी प्रदेश में आज तक नहीं हुआ..... जनता ने एक साथ कई को सबक सिखाया हैं और कहा हैं कि अब ज्यादा चूं कि तो समझ लो, तुम्हारी खैर नहीं.................. झारखंड की जनता ने वो काम किया हैं कि जिसकी जितनी प्रशंसा की जाय कम हैं, गर मेरी चले तो तो मैं एक लाइन में कह दूं कि यहां की जनता ने झारखंड के साथ खिलवाड़ करनेवाले नेताओं के साथ - साथ मीडिया को भी बजा दिया हैं कि मन करता हैं जनता जनार्दन का हाथ चूम लूं.......... यहां की जनता ने पहली बार राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत निवर्तमान मुख्यमंत्री तक को पहले धूल चटाया हैं......... जैसे बाबू लाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा, हेमंत सोरेन ( बरहेट से जीते जरुर पर दुमका से हारे भी) को हराया............. यहीं नहीं..... आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो को भी बाहर का रास्ता दिखाया.......... काग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत और नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र प्रसाद सिंह को भी सदन में जाने से रोका............ झारखंड की पहली सरकार में कील ठोकनेवाले और गठबंधन की पहली सरकार को पटरी से उतारनेवाले लालचंद महतो और जलेश्वर महतो (प्रदेश अध्यक्ष जदयू) की औकात बता दी.......... राजद के प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह और राजद की तेज तर्रार नेता अन्नपूर्णा देवी को भी कह दिया कि इस बार आपकी सदन में जरुरत नहीं............ जो मीडिया हरे मोदी, हरे मोदी, हरे अमित शाह, हरे अमित शाह कहकर उनके मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा था उसे भी औकात बता दी और राज्य में एक मजबूत विपक्ष भी इस बार प्रदान कर दिया.........और अंत में कह डाला कि देश की राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां, ज्योतिषियों का झूंड और खुद को लोकतंत्र का 4था स्तंभ कहनेवालों झारखंड की जनता के इस निर्णय का सम्मान करें और सबक लें...नहीं तो जब भी मौका मिलेगा, हम अपना निर्णय सुनायेंगे और वो निर्णय ऐसा होगा, जिसकी परिकल्पना किसी ने नहीं की होगी............... अब जरा सोचिये किसी ने सोचा था क्या कि दो सीटों से चुनाव लड़नेवाले बाबू लाल मरांडी, खरसावां से चुनाव लड़नेवाले मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार अर्जुन मुंडा, दुमका से हेमंत सोरेन, मझगांव से मधु कोड़ा चुनाव हार जायेंगे, पर हुआ तो ऐसा ही....क्या किसी मीडियावालों ने सोचा था क्या कि इस बार सिल्ली से सुदेश हार जायेंगे, क्योंकि हर बात में मीडिया उनकी स्तुति गा दिया करता था..........पर हुआ तो ऐसा ही हैं............... मैं, जब एक महीने पहले जयपुर से रांची आया तो जनता के बीच गया, छटपटाहट देखी, वो छटपटाहट थी – बार बार दामन पर लगनेवाले दाग की, वो छटपटाहट थी की मीडिया और राजनीति में शामिल लोग उन्हें बार – बार बदनाम क्यों करते हैं, ये क्यों कहते हैं कि स्पष्ट जनादेश जनता ने नहीं दिया......आखिर चुनाव आयोग क्यों पांच चरणों में चुनाव कराता हैं, आखिर राज्यसभा में उनके चूने हए प्रतिनिधि क्यों पैसे लेकर वोट डाला करते हैं, क्यों उन्हीं के समय जन्म लिया छत्तीसगढ़, उत्तराखंड उनसे आगे निकल गया और हम पीछे रह गये, आखिर उनके नेता विकास की सीढ़ियां चढ़ते हुए उनसे आगे कैसे निकल गये और वे पीछे क्यूं रह गये....क्यों उनके नेता विदेशों में अपने परिवार का इलाज कराने के लिए उन्हीं के पैसों का इस्तेमाल करते हैं पर उनके बेटे-बेटियां अच्छे इलाज के लिए तरस जाते हैं और इन्हीं छटपटाहटों के बीच झारखंड की जनता ने स्पष्ट जनादेश देने का मन बनाया और साथ ही संकल्प लिया कि वे उन्हें सबक सिखायेंगे, जो उन्हें सबक सिखाने की सोचते हैं, लीजिये जनादेश सामने हैं, जनता ने अपना काम कर दिया...गर इस जनादेश को समझ कर भी किसी की समझ नहीं खुलती हैं तो ऐसे लोगों के लिए तो भगवान ही मालिक हैं.....................

Sunday, December 21, 2014

घोर आश्चर्य ?


झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद से लेकर मतदान संपन्न होने तक, मात्र चंद पैसों के लिए विज्ञापन के नाम पर --- हरे मोदी, हरे मोदी, मोदी- मोदी, हरे हरे, हरे अमित शाह, हरे अमित शाह, अमित शाह – अमित शाह, हरे हरे।। - का जाप करनेवाले, आज ताल ठोंक रहे हैं कि राज्य में उनके चलते मतदान की प्रतिशतता बढ़ी हैं, क्या ये शर्मनाक नहीं हैं, क्या ये खुद को ईश्वर बताने की, मानने की कुटिल चाल नहीं हैं, जनता ऐसे लोगों से, ऐसे अखबारों और चैनलों से सावधान रहें, क्योंकि कुछ ही दिनों में मतगणना होगी, और जिसकी सरकार बनेगी, ये मीडिया वाले, उनकी चरणवंदना करने में सबसे आगे रहेंगे, साथ ही अपने हक का झारखंड लूटने में प्रमुख भूमिका निभायेंगे, उसके बाद क्या होगा, होगा वहीं - जनता एक बार फिर अन्य दिनों की तरह मीडियावालों से छली जायेंगी। ये मैं इसलिए लिख रहा हूं कि आज सुबह जैसे ही मेरी नींद खुली। एक अखबार ने राज्य में भारी मतदान पर संपादकीय लिख डाली और ये मान बैठा कि उसके कारण ऐसा संभव हुआ हैं। उसने एक अभियान चलाया और जनता उस अभियान से प्रभावित होकर 9 प्रतिशत ज्यादा मतदान कर बैठी, जबकि सच्चाई ये हैं कि राज्य में मतदान की प्रतिशतता बढ़ने के दूसरे बहुत सारे कारण है। जनता की वर्तमान सरकार से नाराजगी सबसे बड़ा कारण हैं, साथ ही बार-बार गठबंधन की सरकार के कारण विकास कार्य प्रभावित होना भी एक कारण हैं। तीसरा सबसे बड़ा कारण मोदी के बार – बार झारखंड आने और खुद को विकास के एजेंडें तक सीमित रखने और विश्वास बनाने, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों का इस चुनाव के प्रति घोर निराशा का होना और मीडिया का मोदी के इर्द-गिर्द सिर्फ चंद पैसों के लिए जी – हुजूरी करना शामिल हैं। मीडिया ये नहीं भूले कि झारखंड को बर्बाद करने में गर नेताओं की अहम भूमिका हैं तो पत्रकारों की भी कम भूमिका नहीं हैं। झारखंड में पत्रकारों की एक बहुत बड़ी लंबी लिस्ट हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार के रिकार्ड बनाये हैं गर इसकी सूची प्रकाशित हुई तो बहुत सारे लोग नंगे हो जायेंगे। कोई किसी आर्गेनाइजेशन का संयोजक बनने के लिए तो कोई सूचना आयुक्त बनने के लिए, कोई सरकारी संस्थानों में अपने भाई-भतीजों को नौकरी दिलवाने के लिए, कोई कोयला और सोने के खदानों को पाने के लिए, कोई निजी संस्थानों में खुद को प्रतिष्ठित करने के लिए कैसे झारखंड की भोली – भाली जनता को लूटा हैं। वो सभी जानते हैं, पर अखबारों और इलेक्ट्रानिक मीडिया को देखे तो पता चलेगा कि दूनिया की सारी सच्चाई और ईमानदारी का ठेका, इन्हीं मीडियाकर्मियों ने ले रखा हैं। जिस प्रकार राष्ट्रीय चैनलों के मालिक और कई संपादक अपनी जमीर नेताओं के आगे गिरवी रखा हैं, उसी प्रकार झारखंड में भी वो चीजें देखने को मिल रही हैं, ऐसे में झारखंड की प्रगति का रोना-रोना मीडियाकर्मियों या उनके बॉस या उनके मालिक को शोभा नहीं देता। उनके इस रोने को घड़ियाली आंसू कहना, घड़ियाल तक का अपमान हैं। ये वे लोग हैं, जिन्हें ईश्वर ने दंडित करने का विशेष अभियान चलाने का शायद फैसला कर लिया हैं, जल्द ही वे इन फैसलों के अमल में आने के बाद दंडित होंगे, क्योंकि दो प्रकार के संविधान हैं। एक जिसे ईश्वर ने बनाया और एक वो जिसे मनुष्य ने अपनी सफलता और असफलता को सिद्ध करने के लिए खुद से संविधान बना डाली। मनुष्य के बनाये संविधान से तो वो बच जायेगा, पर ईश्वर के बनाये संविधान से बच पायेगा, हमें नहीं लगता। इन सभी ने शर्म बेच खाया हैं, इन सभी ने ईमान बेच खाया हैं, निर्मल बाबा और हनुमान यंत्र में भी इन्हें भेद नजर आता हैं, चूंकि निर्मल बाबा ने विज्ञापन के नाम पर माल नहीं दिया, तो उसे बदनाम कर ड़ाला, और जिसने विज्ञापने के नाम पर माल दिया, उसे मालोमाल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा दी। जबकि ईश्वर की अदालत में दोनों समान रुप से अपराधी हैं। ये तो एक प्रकार का उदाहरण, मैंने सामान्य जनता के सामने रखा हे। मैं झारखंड की जनता से यहीं कहूंगा कि आप स्वयं को इन अखबारों और चैनलों से बचा कर रखिये, क्योंकि इन पर विश्वास करना, खुद को धोखे में रखना, मूर्ख बनना और राज्य को गर्त में डालने के सिवा दूसरा कुछ भी नहीं..............