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Thursday, May 25, 2017

रघुवर दास का आम जनता के बीच अलोकप्रिय होने के प्रमुख कारण...

झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास का आम जनता के बीच अलोकप्रिय होने के प्रमुख कारण...
1. राज्य में कनफूंकवों के शासन की शुरुआत।
2. रघुवर शासन में लड़कियों और महिलाओं पर अत्याचार का बढ़ना, स्वयं जहां मुख्यमंत्री जन संवाद केन्द्र चलता है, वहां की लड़कियों ने राज्य महिला आयोग को पत्र लिखा कि यहां कार्यरत महिला संवादकर्मियों के साथ बराबर दुर्व्यवहार होता है। इन संवादकर्मियों को न्याय दिलाने के बजाय, इस पूरे मामले को ही मुख्यमंत्री जन संवाद केन्द्र चलानेवाले लोगों ने, मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ मिलकर उन लड़कियों का आवाज सदा के लिए दबा दिया। यहां तक कि राज्य महिला आयोग ने उन लड़कियों के द्वारा भेजे गये पत्र का संज्ञान तक नहीं लिया। यहीं नहीं ये लड़कियां सीएमओ तक गयी, सब ने कहां न्याय मिलेगा, पर न्याय तो दूर, उन लड़कियों की आवाज ही सदा के लिए दबा दी गयी।
3. एक पीड़ित पिता जब मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिला तब मुख्यमंत्री ने उसे भरी सभा में बेईज्जत कर दिया, इसका फूटेज आज भी बहुत लोगों के पास है, जिसे जब चाहे देखा जा सकता है।
4. अयोग्यों और बेवकूफों को सम्मान और योग्य तथा विद्वानों को अपमान करने की परंपरा की शुरुआत।
5. आम जनता की बात को दरकिनार कर जबर्दस्ती सीएनटी-एसपीटी कानून को जमीन पर उतारने की कोशिश।
6. निकम्मे अफसरों पर नकेल नहीं कसना और छोटे-छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराने की शुरुआत।
7. झारखण्ड लोक सेवा आयोग में भ्रष्टाचार चरम पर।
8. स्पष्ट नीति का अभाव, कई नीतियां बनी पर जमीन पर उतराने में नाकाम।
9. नक्सलियों को महिमामंडन करने की परंपरा की शुरुआत।
10.  डोभा निर्माण और वन लगाओं अभियान में बड़े पैमाने पर लूट।
11.  ठेकेदारों, अभियंताओं को लूट की छूट और आम जनता को अपमानित करने का काम प्रारंभ।
12.  आम जनता के प्रति मुख्यमंत्री रघुवर दास का नजरिया ठीक नहीं होना। जब सामान्य जनता इनसे मिलने की कोशिश करती है तो ये उससे इस प्रकार बाते करते  है, ऐसा इनका बॉडी लेग्वेंज होता है कि उनसे बात करनेवाला सामान्य नागरिक खुद को अपमानित महसूस करता है।
13.  भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री रघुवर दास का रवैया ठीक नहीं होना। स्थिति ऐसी है कि कोई भी भाजपा कार्यकर्ता आज की स्थिति में रघुवर दास को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है।
14.  संघ के स्वयंसेवकों से बढ़ती दूरियां। संघ के बड़े अधिकारियों ने मुख्यमंत्री की अक्षमता और स्वयंसेवकों के प्रति इनके द्वारा उठाये जा रहे कठोर रवैये की सूचना नागपुर और दिल्ली तक पहुंचाई।
15.  अपने विरोधियों के साथ दमनात्मक रवैया, तथा विपक्षी दलों के प्रमुख और शीर्षस्थ नेताओं को अपमानित करना।
16.  परिवारवाद को बढ़ावा देना।
17.  आत्मप्रशंसा के लिए अयोग्य कंपनियों पर करोड़ों लूटाना, उन कंपनियों पर जो राज्य के एक मंत्री अमर कुमार बाउरी को अमर कुमारी बना देता है, जो राज्य के नक्शे के साथ खिलवाड़ कर देता है और उस पर एक्शन तक नहीं लिया जाता, बल्कि उसे और बढ़ावा दिया जाता है।
18.  राज्य में आधारभूत संरचना का बुरा हाल। पूरे राज्य में अभूतपूर्व बिजली संकट, पेयजल संकट और सड़कों का बुरा हाल।
19.  झूठ बोलने की कला में माहिर। बोकारो के एक दो पंचायत को कैशलेस बनाने की घोषणा कर देना और बाद में पता चलता है कि वह पंचायत तो कैशलेस हुआ ही नहीं है।
20.  स्वच्छता अभियान की हवा निकल जाना।
21.  मोमेंटम झारखण्ड के नाम पर करोड़ों का खेल करना और उसका फायदा झारखण्ड को न के बराबर मिलना।
22.  दीपावली के दिन चीनी सामानों का विरोध और बाद में चीन तथा अन्य देशों के व्यापारियों को झारखण्ड बुलाकर उनकी आरती उतारने की शुरुआत।
23.  आत्ममुग्धता में बहने के कारण अच्छे और सही लोगों की बात नहीं सुनना और कनफूंकवों मे रमे रहना।
24.  आरती उतारनेवाले पत्रकारों की जय-जय और राह दिखानेवाले पत्रकारों पर प्राथमिकी और उसे अपमानित करने का कार्य प्रारंभ।

Saturday, February 4, 2017

सीएम ने खोला है देखो...............

सीएम ने खोला है देखो...
केन्द्र जनसंवाद...
जनता है परेशान मगर...
न मिलता उचित जवाब...
नाम रखा है सीधी बात...
पर होती उलटी बात...
181 नंबर लगाकर...
जनता हुई परेशान...
हर महीने, हर सप्ताह...
नहीं पता, क्या करता है...
जनता निरंतर मूर्ख बनती...
अधिकारी खूब हंसता है...
दुख से परेशान जनता...
तब नारा स्वयं बनाया...
और कहा, बस तीन साल तुम...
उल्लू हमे बना लो...
उसके बाद मिलेगा झटका...
ये तुम अब जानो...
और, एक स्वर में जनता...
जोर-जोर चिल्लाई...
ऐसे सीएम पर नहीं भरोसा...
करेंगे जल्द बिदाई...
क्योंकि, सीएम करते उलटी बात...
बढ़ गई दूरी...
उलझ गई बात...

Sunday, March 2, 2014

नीतीश के साथ अधिकारियों ने भी थाली पीटी, किया बिहार बंद और केन्द्र से कहा मेरी थाली में भीख दे दो.........

शनिवार की सायं सात बजे....सीएम आवास पर नीतीश अपने मंत्रिमंडल और राज्य के वरीय अधिकारियों के साथ थाली पीट रहे थे...इस थाली पीटने की आवाज को, वो दिल्ली तक पहुंचाना चाहते थे पर शायद उन्हें मालूम नहीं कि उनकी थाली पीटने की आवाज पटना की गलियों तक भी नहीं पहुंच पायी........। ये बाते मैं इसलिए लिख रहा हूं कि इनके प्रदेश कार्यालय में जहां थाली पीटी जा रही थी...वहीं के कई जेडीयू कार्यकर्ताओं को पता नहीं था कि ये थाली पीटी क्यूं जा रहीं हैं। हांलांकि नीतीश ने पूरे बिहारवासियों से थाली पीटने की गुजारिश की थी...पर ये थाली पीटने का कार्यक्रम जेडीयू का कार्यक्रम बन कर रह गया....बिहार की जनता की भागीदारी न के बराबर रही.....। याद करिये वो जमाना....जब पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भारत की जनता से अपील की थी और उस अपील को भारतीय जनता ने स्वीकार किया और उसके अनुरुप कार्य भी किया.....। पर नीतीश की ये अपील को बिहार की जनता ने पूरी तरह नकार दिया......। आज नीतीश ने सत्याग्रह की घोषणा के साथ - साथ बिहार बंद का ऐलान किया था. अपने बयान में ये भी कहा था कि उनके कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे पर जोर - जबर्दस्ती नहीं करेंगे.....पर उनके कार्यकर्ताओं ने किस प्रकार की गुंडागर्दी की..आगजनी की...किसी से छूपा नहीं हैं....। नीतीश के बंद को सफल बनाने के लिए तो पुलिसकर्मी भी आतुर दीखे....कई जगहों पर पुलिसकर्मियों ने खुद ही रस्सा बांध दिया...ताकि सड़कों पर आवागमन बाधित हो जाय। मैं नीतीश से अपील करुंगा...कि ऐसे पुलिसकर्मियों को वे महिमामंडित करें, पुलिस पदक दिलाये क्योंकि इन्होंने जेडीयू धर्म का पालन किया हैं......। नीतीश का बिहार बंद हैं....पर आम जनता कहीं नहीं दिख रही.... इनके पैसों से कुकुरमुत्ते की तरह उगे कार्यकर्ता सड़कों पर कुछ जगह दीखे और टायर जलाया....नीतीश जिंदाबाद के नारे लगाये और गायब हो गये.......। आम जनता कहीं इनके बंद में शामिल नहीं दिखी....। कहने को तो नीतीश और नीतीश भक्त पत्रकार ये भी कहेंगे कि बिहार बंद सफल रहा.......क्योंकि आज स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय, केन्द्र सरकार के कार्यालय, राज्य सरकार के कार्यालय, व्यापारिक प्रतिष्ठान, बैंक आदि सभी बंद रहे पर ये नहीं कहेंगे कि आज रविवार भी हैं.....क्योंकि बेशर्मों को भी शर्म होती हैं क्या.............. कमाल है, जब बिहार का बंटवारा हुआ था तब राबड़ी ने भी बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग की थी...तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बिहार को विशेष दर्जा देने को तैयार भीॉ थे पर खुद नीतीश अड़ंगा डालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी...ये बात सभी जानते हैं पर आज सीमांध्र और तेलंगाना दो राज्य अस्तित्व में आये हैं और केन्द्र ने सीमांध्र को विशेष राज्य का दर्जा दे दिया तो ये इस मुद्दे को बिहार के विशेष राज्य के मुद्दे से जोड़कर देखना और दिखाना चाह रहे हैं....यानी कड़वा - कड़वा थू - थू और मीठा - मीठा चप - चप। नीतीश को ये नहीं भूलना चाहिए कि त्रेतायुग में रावण था..जिसको बहुत घमंड था, क्योंकि उसे लगता था कि उसका साम्राज्य सुर और असुर लोकों मेंं हैं, कौन हैं जो उससे भयभीत नहीं हैं...पर उसका भी घमंड ज्यादा दिनों तक नहीं रहा.....। यहीं नहीं एक समय इसी बिहार में लालू यादव को भी घमंड हो गया था....आज लालू की क्या स्थिति हैं वो किसी से छुपा नहीं हैं....ऐसे भी जब सत्ता में कोई आता हैं तो उस पर सत्ता का नशा कुछ ज्यादा ही छा जाता हैं और इसी नशे में वो हर प्रकार की हरकतें करता हैं, जिसकी इजाजत धर्म नहीं देता...नीतीश अभी उसी सत्ता के नशे में चूर हैं....बस अब ज्यादा देर नहीं...उनका नशा जल्द ही उतरनेवाला हैं....क्योकि लोकसभा का चुनाव सर पर हैं और बिहार की जनता नीतीश को सबक सिखाने के लिए बस मौके का इंतजार कर रही हैं....फिर क्या...नीतीश का घमंड स्वाहा...उसका बड़बोलापन स्वाहा...........

Wednesday, May 8, 2013

वाह री कर्नाटक की जनता, तुम्हारा भी जवाब नहीं..............

सबसे सुंदर, सबसे प्यारा
मेरा देश, मेरा देश
भ्रष्टाचारी यहां पनपते
देशद्रोही यहीं पे बढ़ते
अपनी जमीन पर, देश के नेता
दूसरे देश से कब्जा करवाते
जब मीडिया, अरे शोर मचाती
तब चीन के आगे, नाक रगड़ते
सबसे सुंदर, सबसे प्यारा
मेरा देश, मेरा देश
यहां की जनता
मस्त हैं रहती
मुंहमांगी रकम से, वोट बेचती
भ्रष्टाचारियों को खूब जीताती
भ्रष्ट पार्टियों को बहुमत देती
कहती लूटो, मेरे नेता
जमकर शोषित कर लो नेता
कर्नाटक क्या, दिल्ली क्या
सब जगह, तुम  बढ़ते जाओ
अपने देश को रौंद रौद कर
अपने महल बनाते जाओ
लूट लूट कर अपने पैसे
विदेशी बैंकों में भरते जाओ
जब तक जिंदा रहो, लूटो तुम
तुम्हें मदद हम करते रहेंगे
वोटों से और दिल देकर
तुम्हारा स्वागत करते रहेंगे
मेरा एक ही सपना भैया
मेरे दादा, कभी गुलाम थे
मैं स्वतंत्र, क्यू अरे कहाया
मैं परतंत्र होना चाहता हूं
कैसे सपना  पूरा होगा
जब तुम, नीचे से उपर तक
भ्रष्ट न होगे, भ्रष्ट न होगे
इसी हेतु ईश्वरीय प्रार्थना
सब नेता अरे भ्रष्ट हो जाये
नेता क्या
डाक्टर, इंजीनियर
यहीं क्यूं
शिक्षक, छात्र भी 
भ्रष्ट हो जाये, भ्रष्ट हो जाये
ताकि हम भारतवासी
दिल खोल कहे,
संपूर्ण विश्व से
देखो हमने रिकार्ड बनाया
विश्व का नं. एक हैं देश 
भारत देश भारत देश
भ्रष्टाचारियों का हैं देश
भारत देश, भारत देश
बधाई हो कांग्रेस पार्टी को। कर्नाटक में वो सरकार बनाने जा रही हैं। बधाई कर्नाटक की जनता को, कि उसने क्या जनादेश दिया हैं। जातियता में बहकर, सारे के सारे भ्रष्टाचारियों को जीताया हैं। ऐसे भी कर्नाटक की जनता, अन्य प्रदेशों से अलग थोड़े ही हैं। भारतवंशीय हैं, इसलिए भारतवंशियों का खून तो इनमें भी होगा। इसलिए दिल खोलकर, चीन के आगे नाक रगड़नेवाली, सीबीआई को अपने हाथों नचाकर, विदेशों में अपने पैसे समायोजित करानेवाली पार्टी में अपना विश्वास व्यक्त किया। अब मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ये देश जरुर परतंत्र होगा। अरे परतंत्र होगा क्या, परतंत्र तो हैं ही। जो देश अपनी सीमा के अंदर 20 दिनों तक दूसरे देश की सेना का स्वागत करने के लिए पलक पावड़े बिछाये, उसे देश की औकात क्या। इस देश में कभी किसी मां के कोख से सुना हैं भगत सिंह पैदा हुआ करते थे। अब तो इस देश में येदियुरप्पा, राहुल, प्रियंका, मनमोहन, पवन  कुमार बंसल, ए राजा, दिग्विजय सिंह, कपिल सिब्बल, अरे कितनो का नाम लिखूं, ये पैदा ले रहे हैं। ये देश को कहां ले जा रहे हैं, ये किसी से छुपा नहीं हैं। बार -बार हमारे मित्र कहते हैं कि ये देश बहुत तरक्की करेगा, मैं बार - बार कहता हूं कि ये देश गर तरक्की करेगा, तो फिर चीन के आगे नाक कौन रगड़ेगा, अमरीका का पांव कौन पखारेगा। कम से कम इन देशों में गुलामों की नौकरी करनेवाला एक वर्ग भी तो चाहिए। ऐसे में ये काम करने के लिेए भारतीयों जैसा दूसरा, पूरे विश्व में फिलहाल कोई देश नहीं दीखता। इसलिए गर्व से बोलो हम भारतीय हैं।
हम भ्रष्टाचारियों को वोट देते हैं।
हम भ्रष्टाचारियों में विश्वास व्यक्त करते हैं।
जो देश हमे आंख दिखाता हैं, उसके आगे हम नाक रगडते हैं।
हम अपना जमीर बेचकर, जयचंद और मानसिंह बनने को लालायित रहते हैं।
हम भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद को मूरख और राहुल तथा प्रियंका में आदर्श ढुंढते हैं।
जय हो भारत की..........................जय हो कर्नाटक की जनता की।
जिसने भ्रष्टाचारियों को वोट देकर, उसमें विश्वास व्यक्त कर भ्रष्टाचारियों का मनोबल बढ़ाया। 

Monday, December 31, 2012

ये नया वर्ष हैं..................


कल भी आया, कल आयेगा भी,
हंसो, खेलो, ये नया वर्ष हैं
हंसो, खेलो, ये नया वर्ष हैं..................
भ्रष्टाचार-दुष्कर्म, निरंतर
भारत की दिन-रात भयावह
सिसकती, कराहती, जैसे-तैसे
जीने की ये नयी चाह हैं
हां हां, सुनो
ये नया वर्ष हैं.....................
कल दल-गण आंदोलन करती थी
अब, आंदोलन से पीछे हटती हैं
अब जनता आगे बढ़ कहती
हटो, अरे ये मेरा वक्त हैं
क्योंकि,
ये नया वर्ष हैं....................
गंगा – जमना, अब रोती कहती
कभी हरती थी, वो पापों को
अब खुद मैली होकर भी,
त्राहिमाम संदेश सुनाती
घाटों की सुनी दिन रातें
कलकल निनाद न, अब सुन पाती
फिर भी बोलो, कि हम खुब खुश हैं
झूठ बोल, मन को बहलाओ
और कहो
ये नया वर्ष हैं.............................