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Saturday, September 11, 2010

बधाई महामहिम फारुक साहब को…।


मैं अखबारों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में ढूंढ रहा हूं, एम ओ एच फारुक साहब को, पर वो मिल नहीं रहे, कल तक उनके नाम स्थानीय अखबारों और इलेक्ट्रानिक मीडिया में सुर्खियों में रहता था, पर अब वो दिखाई नहीं दे रहा। लोग कहते हैं कि ये देश ऐसा हैं कि यहां उगते सूर्य को ही नमस्कार किया जाता हैं, पर शायद लोग भूल रहे हैं कि ये देश ऐसा भी हैं कि डूबते सूर्य को सर्वप्रथम अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत प्रारंभ करता हैं, गर किसी को ध्यान नहीं हो, तो जरा कार्तिक शुक्ल रविषष्ठी व्रत जिसे छठ भी कहते हैं, उस ओर अपना ध्यान ले जाये।
चारों ओर जयजयकार हो रही अर्जुन मुंडा की। होनी भी चाहिए क्योंकि इस अर्जुन ने अपने तरकस से निकाल धनुष पर संधान कर ऐसी तीर छोड़ी हैं कि इस तीर से कई दिग्गज घायल हो गये, खुद जिस गुरु शिबू सोरेन ने राजनीतिक शिक्षा दी, वे खुद ही फिलहाल असहाय की स्थिति में हैं, जिस बाबु लाल मरांडी ने अर्जुन को पहली बार सत्ता सौंपी थी, वे सत्ता की चाहत में इधर से उधर भटक रहे हैं, पार्टी बना ली, फिर भी मुख्यमंत्री का पद नहीं मिला, पर जिसने कुछ भी नहीं किया, वो आज सत्ता के शीर्षस्थान पर हैं, कैसे। इस पर विचार करना चाहिए। विचार करना चाहिए, सत्ता की चाहत में बैठे, उन राजनीतिज्ञों को जो मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने की इच्छा रखते हैं। हम बता देना चाहते हैं कि सत्ता की राजनीति में मुख्यमंत्री पद की लालसा रखना कोई गलत बात नहीं, पर उसके लिए तिकड़म करना गंदी बात हैं। हालांकि बिना तिकड़म के राजनीति में कोई बात बनती ही नहीं। ऐसे भी साम दाम दंड भेद ये शब्द राजनीति के कोख से ही निकले हैं। चलिए झारखंड का बेटा अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री बन गया । ये आज का अर्जुन हैं, ये न तो तीर चलाता हैं और न धनुष रखता हैं, पर हां, गोल्फ खेलता हैं, जबकि दोनों में लक्ष्य का निर्धारण और उसे पाना महत्वपूर्ण होता हैं। चुनाव के परिणाम आने के बाद मात्र नौ महीने में इतनी आसानी से अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री इस बार बन जायेंगे, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। ऐसे भी इतिहास गवाह हैं कि इस अर्जुन को, सत्ता में आने के लिए कई बार संघर्ष भी करना पड़ा हैं, कभी राज्यपाल की भूमिका ने सत्ता से दूर इसे रखा तो कभी अपनों ने ऐसी तिकड़म लगायी कि इन्हें सत्ता मिलने में देर हो गयी, पर इस बार अर्जुन ने ऐसी जुगत लगायी, मीडिया और कारपोरेट जगत को ऐसा क्लच में लिया कि चारो ओर सिर्फ अर्जुन ही अर्जुन दिखाई पड़ने लगा, फिर क्या था, उधर भाजपा आलाकमान ने भी हरी झंडी दिखा दी, नतीजा सबके सामने हैं।
पर एक बात मैं कहे और लिखे बिना रुक नहीं सकता, जरा सोचिये कि आज एम ओ एच फारुक की जगह सैय्यद सिब्ते रजी या अन्य राज्यपाल होते तो क्या होता किसी ने इस बात का अंदाजा भी लगाया हैं। लोग को छोड़िये सत्ता किसी को मिले अथवा सत्ता न मिले उससे आम जनता की कोई दिलचस्पी नहीं होती पर मीडिया ने क्या किया, मीडिया ने उस शख्स को बधाई दी, अथवा दो शब्दों की उदारता दिखायी जिसने सचमुच में लोकतंत्र की मर्यादा रखी, खासकर ऐसे वक्त में जब चारों ओर लोकतंत्र का चीरहरण हो रहा है। बधाई झारखंड के राज्यपाल एम ओ एच फारुक को, जिन्होंने आज की राजनीति में, एक नया आयाम लिखा हैं, उन्होंने राजनीतिक परिपक्वता ही नहीं बल्कि शुचिता एवं शुद्धता की नयी परिभाषा लिखी हैं। याद करिये, जब इस राज्य में राज्यपाल सैय्यद सिब्ते रजी थे, उन्होंने क्या किया था, ये जानते हुए भी कि अर्जुन को बहुमत हैं, उन्होंने सत्ता से दूर रखकर उस वक्त शिबू को मुख्यमंत्री बनाने का न्यौता दे डाला था, पर एम ओ एच फारुक साहब को देखिये, जैसे ही अर्जुन मुंडा ने बहुमत जुटाई, बहुमत को राज्यपाल के समक्ष रखा। एम ओ एच फारुक ने तुरंत निर्णय लिया, राष्ट्रपति शासन हटवाने के लिए गृहमंत्री को अनुशंसा किया, ये ही नहीं जो उन्होंने राज्यहित में कुछ निर्णय ले रखे थे, उन्हें रोका, और नये सरकार पर फैसले छोड़ दिये। जल्द ही अर्जुन मुंडा को सत्ता भी सौंप दी। आज के युग में ऐसी मिसाल कहां मिलती हैं। बधाई हो एम ओ एच फारुक साहब। आपने एक नयी मिसाल कायम की हैं। राजनीति करनेवालों और राजनीति में रुचि रखनेवालों को आपने एक सबक दी हैं, आशा की जानी चाहिए कि लोग आपसे सबक सीखेंगे, हालांकि ये सच हैं कि मीडिया और कारपोरेट जगत जो अर्जुन मुंडा को सत्ता सौंपने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा था, आपके इस उदार चरित पर ध्यान देना उचित नहीं समझा, पर झारखंड में इमानदारी से राजनीति करनेवालों को आपका ध्यान हमेशा रहेगा।
आज के युग में सत्ता किसे अच्छी नहीं लगती, आप भी औरों की तरह तिकड़म लगा सकते थे, और कुछ दिन झेल सकते थे, विधानसभा को भंग करने की सिफारिश कर सकते थे, क्योंकि झारखंड विकास मोर्चा के कई नेता तो कह ही रहे थे, कि विधानसभा भंग कर दी जाये, पर आपने ऐसा नहीं किया, विधानसभा को निलंबित ही रहने दिया पर जैसे ही अर्जुन ने बहुमत का जुगाड़ किया आपने बिना किसी इफ-बट के वो फैसले लिये, जिस फैसले की आशा तो इतनी आसानी से न तो भाजपा को थी और न तो अर्जुन मुंडा को, मैं इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि मैं पत्रकार हुं और मुझे इसका अच्छी तरह अनुमान हैं। पर यहां की मीडिया जो अर्जुन के बयार में आपके इस उदार चरित को भूल गयी, एक शब्द भी आपके बारे में लिखना उचित नहीं समझा। ये देख व जानकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ, फिर भी, आपको मेरी ओर से महामहिम फारुक साहब आपको कोटिशः बधाई। आशा हैं आप अपनी इस प्रकार की उदारता से राजनीति में और भी मिसाल कायम करते रहेंगे। ऐसे भी आपने बहुत कम ही समय में, जो राष्ट्रपति शासन के दौरान जो झारखंड हित में निर्णय लिये हैं, उसकी परिकल्पना नहीं की जा सकती। सूखा झेल रहे, झारखंड और भ्रष्टाचार को रोकने में जो आपने मह्तवपूर्ण फैसले लिए, उसका पालन आनेवाली सरकार करेंगी, इसका मुझे उतना भरोसा नहीं और न ही आम जनता को हैं।