Showing posts with label हाथी. Show all posts
Showing posts with label हाथी. Show all posts

Thursday, May 18, 2017

झारखण्ड रघुवर के हाथों असुरक्षित............

आज राज्य के सभी समाचार पत्रों में मुख्यमंत्री रघुवर दास का भारी-भरकम विज्ञापन छपा हैं। मात्र 3 माह के भीतर, 20+ परियोजनाएं, शिलान्यास को तैयार। 21000 से अधिक नौकरियों के सृजन की क्षमता। 8 क्षेत्रों में साझेदारी, यानी एक बार फिर राज्य की जनता की आंखों में धूल झोंकने की तैयारी।
शायद कनफूंकवों ने राज्य की जनता को निरा बेवकूफ समझ रखा है कि वे जो मुख्यमंत्री रघुवर दास से बोलवायेंगे, जनता मान लेगी। हमें लगता है कि जो ऐसा सोच रहे हैं, वे मुगालते में है।
• पहली बात, एमओयू और शिलान्यास में कोई फर्क नहीं होता। जैसे एमओयू हो गया तो वो काम हो ही जायेगा, इसकी अनिश्चितता बरकरार रहती है, ठीक उसी प्रकार शिलान्यास होने पर काम हो ही जायेगा, इसकी भी अनिश्चितता बरकरार रहती है। उदाहरणस्वरुप रघुवर दास से पूछिये कि जब वे बाबूलाल मरांडी सरकार में मंत्री थे, तो उसी वक्त भाजपा के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने सुकुरहुट्टू में नई राजधानी बनाने के लिए एक शिलान्यास किया था, क्या रघुवर दास बता सकते है कि वो राजधानी वहां बनी है या नहीं बनी। अरे छोड़िये, कम से कम वो पत्थर ही लाकर दिखा दें, जिस पर शिलान्यास किया गया। हम मान लेंगे कि रघुवर की सारी योजनाएं सफल हो गयी या हो जायेंगी।
• दूसरी बात, व्यवसायियों को जमीन दिलाने का काम अब मुख्य सचिव का रह गया है क्या? मैं तो देख रहा हूं कि व्यवसायियों को जमीन दिलाने का काम अब सिर्फ मुख्य सचिव का रह गया है, क्योंकि वहीं आजकल जमीन देखने का काम कर रही है, यानी जो काम हलका कर्मचारी, सर्किल इंस्पेक्टर, अंचलाधिकारी, भूमिसुधार उप समाहर्ता, उपायुक्त, राजस्व सचिव का है, वह काम अकेले मुख्य सचिव देख रही है, यानी राज्य में सारा सिस्टम फेल।
• तीसरी बात, आज जो खेलगांव में कार्यक्रम रखा गया, जिसमें कहा जा रहा है सरकार के पिछलग्गूओं द्वारा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने खेलगांव से झारखण्ड के नवनिर्माण की नींव रखी तो ये बतायें कि इस प्रकार के शिलान्यासों को कराने के लिए व्यवसायियों ने इनको आमंत्रित किया था क्या? या खुद सरकार अपने विरोधियों को बताना चाहती है कि हम बहुत अच्छा कर रहे है, गर ऐसा ही है तो यह राज्य के लिए दुर्भाग्य की बात है, न की सराहनीय।
• सच्चाई यह है कि आज भी गोड्डा में अदानी परिवार को पावर प्लांट बनाने में पसीने छूट रहे है, ये अलग बात है कि एक अखबार ने अदानी को मजबूती प्रदान करने के लिए उसके पक्ष में समाचार छाप दिये है।
• आज भी रांची में सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल चलाने के लिए कोई तैयार नहीं है, जबकि रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर ढांचा बनकर तैयार है।
• जो भी कंपनी का आज नाम दिया जा रहा है, वो सिर्फ राज्य सरकार अपना लाज बचाने के लिए तथा विरोधियों को जवाब देने के लिए ऐसा कर रही है, क्योंकि सच्चाई सब को पता है।
आजकल जो विभिन्न चौक चौराहों पर रघुकुल रीति वाली जो होर्डिंग्स लगाई गयी है, उससे कई लोग अभी से ही कांप गये है, क्योंकि उनका रघुवर दास का रघुकुल जमशेदपुर में किस प्रकार आतंक फैला रहा है, वह किसी से छुपा नहीं।
हां एक बात की दाद दुंगा, कभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहा करते थे कि जब वे काला धन भारत लायेंगे तो प्रत्येक भारतीयों के खाते में पन्द्रह-पन्द्रह लाख रुपये स्वयं आ जायेंगे, जिसका शुभारंभ राज्य सरकार द्वारा कुंदन पाहन जैसे नक्सलियों के खाते में पन्द्रह लाख रुपये देकर कर दिया गया।
यानी समझते रहिये कि झारखण्ड, रघुवर दास के हाथों में कितना सुरक्षित है?

Monday, February 6, 2017

सीएम की ब्रांडिंग, कनफूंकवा और बेचारी जनता.....

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का समय जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे इस कार्यक्रम के लिए सीएम की ब्रांडिंग करनेवाले कंपनियों के हाथ-पांव फूलते जा रहे है। हर दो-तीन दिन पर कनफूंकवों की टीम, सीएम के कान में कुछ फूंक दे रही है और लीजिये ब्रांडिंग करनेवाली कंपनियां नये-नये होर्डिंग्स लगाकर सीएम को खुश करने में लग जा रही है, दूसरी ओर मंत्रियों के दल ने इस समिट से धीरे-धीरे दूरियां बनानी शुरु कर दी है। कुछ तो सीधे कहते है कि यह पैसे और समय की बर्बादी है। कुछ तो यह भी कहते है कि हम दूसरे की मांग लाल देखकर, अपना मांग लाल नहीं कर सकते। झारखण्ड, गुजरात या मध्य-प्रदेश नहीं है। यह नवोदित राज्य है, यहां की जनता सर्वाधिक गरीबी से पीड़ित है, ऐसे में इस प्रकार के आयोजन से गरीबी बढ़ेगी, पूंजीपति और संपन्न होंगे।
दूसरी ओर विरोधी दलों के नेता तो ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के नाम से ही भड़क उठते है। वे कहते है कि इस प्रकार के आयोजन से झारखण्ड को नुकसान छोड़, लाभ किसी जिंदगी में नहीं हो सकता, क्योंकि सर्वाधिक पूंजी निवेश का हाल यहां की जनता भुगत रही है। पूरा प्रदेश विस्थापन का दंश झेल रहा है, पर मुख्यमंत्री रघुवर दास केवल अपनी मन की कर रहे है और अधिकारियों के कुछ समूह ने बे-सिरपैर की बातें कर पूरे प्रदेश को भ्रमित कर दिया है। विरोधी दलों के नेताओं का समूह तो यह भी कहता है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास जो नित्य नये-नये होर्डिंग्स और विज्ञापन के माध्यम से जो अपनी ब्रांडिंग कर रहे है, उससे जनता का भला नहीं हो रहा, ये राज्य की जनता के पैसे का अपव्यय है, मुख्यमंत्री को समझ लेना चाहिए।
हम आपको बता दें कि फिलहाल राज्य के बाहर की तीन-तीन कंपनियां सीएम की ब्रांडिंग में लगी है, जबकि राज्य सरकार के क्रियाकलापों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पूर्व से ही राज्य में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग कार्यरत है, पर स्थिति ऐसी है कि ये विभाग फिलहाल चूं-चूं का मुरब्बा हो गया है।
यह विभाग जो सीधे मुख्यमंत्री के सम्पर्क में है, स्वयं मुख्यमंत्री को इस विभाग के अधिकारियों पर विश्वास नहीं है, क्योंकि कनफूकवों की टीम, ऐसा मुख्यमंत्री के कान में फूंक देती है कि मुख्यमंत्री को लगता है कि उनके कनफूंकवें सही है और विभागीय अधिकारी गलत है। यहीं कारण रहा कि यहां एक वन विभाग में कार्यरत अधिकारी को विभाग का कार्यभार सौंपा गया, जिसे विभागीय कार्य की जानकारी ही नहीं। जैसे-तैसे विभाग चल रहा है, जो निकम्मे और आलसी थे, आज स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे है। आश्चर्य इस बात की है कि जिसके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, उस अधिकारी को पुनः रांची मुख्यालय में महिमामंडित करने की तैयारी कनफूंकवों द्वारा शुरु कर दी गयी है। कुछ दिनों में ही वह अधिकारी जिसके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जल्द ही सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के मुख्यालय में दिखेगा, उसकी तैयारी पूरी कर ली गयी है। ...और इधर देखिये ब्रांडिग करनेवाले कंपनियों का हाल, कनफूंकवों ने इनका क्या हाल बना दिया है?
आपको याद होगा कि सर्वप्रथम धौनी द्वारा हाथी को उड़ाते हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को सफल बनाने के लिए जनता से सहयोग मांगा जा रहा था, कनफूंकवों ने जैसे ही सीएम के कान में ये बात कही कि हाथी के उड़ाने से मोमेंटम झारखण्ड का मजाक उड़ रहा है। झट से आनन-फानन में हाथी के उड़ानेवाले बैनर-पोस्टर की जगह केवल धौनी का बैनर-पोस्टर जारी हुआ, हाथी को उड़ानेवाला दृश्य गायब किया गया। इसके बाद फिर कनफूंकवों ने कंपनियों के उपर अँगूली उठाई कि इससे तो धौनी का ब्रांडिग हो रहा है, सीएम रघुवर दास तो कहीं है ही नहीं। तब ऐसे हालत में कंपनियों ने धौनी और रघुवर दास, दोनों का फोटो समेत बैनर-होर्डिंग्स लगानी शुरु की। इस बैनर-पोस्टर लगाने के बाद फिर कनफूंकवों ने कहा कि सीएम इस बैनर-पोस्टर से भी खुश नहीं। कुछ नया होना चाहिए, जिसमें धौनी नहीं, सिर्फ और सिर्फ सीएम होने चाहिए, रघुवर दास होने चाहिए। ब्रांडिंग कंपनियों ने फिर से नया बैनर-पोस्टर बनवाया और आज जगह-जगह केवल रघुवर दास ही अब नजर आ रहे है और धौनी धीरे-धीरे गायब होते दिख रहे है। ज्यादा दिन नहीं, कुछ दिन के बाद, लगता है कि धौनी पूरी तरह से बैनर-पोस्टर से गायब हो जायेंगे और इन बैनरों-पोस्टरों पर रघुवर ही रघुवर दिखेंगे। ऐसे में आनेवाला ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का क्या हाल होगा? समझ लीजिये। बेचारी ब्रांडिंग कंपनियों का क्या? वो तो अपने करार के अनुसार, पैसे लेंगे चल देंगे, ब्रांडिंग किसकी हुई?, झारखण्ड की या सीएम की, ये वक्त बतायेगा, पर इतना तो तय है कि जनता को नुकसान के सिवा कुछ भी हाथ नहीं आयेगा, क्योंकि हाथी उड़ता नहीं है, यह विशालकाय प्राणी जितना खाता है, उतना ही नुकसान भी करता है, पर यहां तो राज्य सरकार और उनके अधिकारियों ने इसे उड़ाने की कोशिश कर दी है, ऐसे में झारखण्ड आज सर्वत्र हंसी का पात्र बन गया है।

Saturday, February 4, 2017

नेता जी के लिए विधानसभा..........

नेता जी के लिए विधानसभा...
वकीलों के लिए हाईकोर्ट...
पत्रकारों के लिए प्रेस क्लब...
और आम जनता के लिए...
बाबा जी का ठुल्लू...
एक साल हो गये पहाड़ी मंदिर से तिरंगा गायब है...
बड़ी ताम-झाम से साहेब ने यहां तिरंगा फहराया था...
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को रांची बुलाया था...
आम जनता को सपने दिखाया था...
आज वहां खंभा तो दिखता है, पर तिरंगा गायब है...
आज देखिये...
इसी रास्ते से साहेब का काफिला निकलता है...
पर समय नहीं कि वो तिरंगा को पुनः वहां लहरा दें...
आम जनता को एक बार फिर वहीं खुशी दिला दें...
खूब हल्ला करते है...
खेल विश्वविद्यालय देंगे...
सीसीएल से एमओयू किये है...
दो साल हो गये...
एमओयू पड़ा है...
खेल विश्वविद्यालय के लिए सब कुछ है...
ढांचा भी है, पर इनके निर्णयों और निश्चयों से ये गायब है...
एंटी करप्शन ब्यूरो बनाये है...
ये ब्यूरो ऐसा है कि...
उसे थर्ड और फोर्थ ग्रेड के कर्मचारी ही घूसखोर दिखते है...
पर ए ग्रेड और बी ग्रेड के अधिकारियों को पकड़ने में...
इसको दादी और नानी याद आ जाती है...
शायद इसे लगता है कि यहां के सारे आइएएस-आइपीएस...
दूध के धूले है...
कमाल है, बलात्कारियों का दल...
पूरे झारखण्ड में खुला घूमता है...
वो मां-बहनों की इज्जत से खेलता है...
मां-बहनों की हत्या भी कर डालता है...
पर,
अपनी पुलिस उन दुष्कर्मियों को पकड़ने में असफल रहती है...
सरकार ने इन्हें बड़े-बड़े वाहन दिये है...
ये बिना नंबर के इस वाहन पर चढ़कर खूब ऐश करते है...
पर सच्चाई ये है कि अपराधियों से ये नैन-मटका करते है...
विधि-व्यवस्था का ये हाल है...
कि बड़े – बड़े शैक्षिक संस्थानों में भी अपराधिक घटनाएं घटती है...
पर नेता और उनके दलाल...
उन शैक्षिक संस्थाओं को बचाने में ही ज्यादा समय लगाते है...
आम जनता मरने को विवश है...
किसानों-मजदूरों के लिए बड़े-बड़े दावे है...
किसान अपनी मेहनत से कमाये फसल को...
सड़कों पर फेंकने को मजबूर है...
पर मजाल है कि सरकार और उनके नुमाइंदे...
किसानों के आंसू पोछने के लिए उनके घरों तक पहुंच जाये...
पूंजीपतियों को बुलाने और झारखण्ड लूटवाने को पूरा कुनबा तैयार हैं...
जनता बेहाल है, सरकार और सरकार के नुमाइंदे मालामाल है...
इस बार हाथी उड़वाने के लिए सीएम मचल रहे है...
मचल तो आइएएस और आइपीएस भी रहे है...
यहीं मौका है...
मिलकर लूटने का पर्व जल्द ही आनेवाला है...
इन अंधेरों को पत्रकार नहीं देख पाते है...
क्योंकि उनके आका को ये राजनीतिबाज...
पहले ही खरीद चूके है...
मेडिकल हब बनाने का शोर...
हर रोज सुनाई देता है...
पर रांची में ही बने अस्पताल सदर...
कब खुलेंगे...
इसका जवाब किसी के पास नहीं है...
हरमू के सौंदर्य नाम पर खूब ढिंढोरा पीटा...
वो हरमू जो कल नदी थी...
आज नाली रुप धर लिया...
आग लगे ऐसे सौंदर्यीकरण को...
जो नदी को नाली बना दें...
नेता-अधिकारी-ठेकेदार का पेट बहुत बढ़ा दें...
जन-वन योजना, डोभा योजना...
सब बनते अखबारों में...
यहां पेड़ भी जगमग करते...
सिर्फ-सिर्फ अखबारों में...
ढूंढते रह जाओगे, मोबाइल...
नहीं मिलेगा सड़कों पे...
अपना पैसा जेब निकालो
खा लो, तुम हर हालों में...
झूठ-झूठ ही, झूठ-झूठ अब...
हर जगह दिखाई देता है...
क्या तिलिस्म है...
इस सरकार का...
वाह-वाह सब करता है...
असली मजा तो इन नेताओं की...
खूब कटती है मस्ती में...
मर गई जनता, मरती जनता...
हर हाल मरेगी, झारखण्ड में...

Friday, January 27, 2017

अखबारों और चैनलों के होठ सील गये हैं..................

अखबारों और चैनलों के होठ सील गये हैं...
वरीय अधिकारियों के दल ने विज्ञापन का ऐसा लालच दिखाया है कि ये अखबार और चैनलवाले आम जनता के सामने नंगे हो गये है, फिर भी बेशर्म की तरह सीना तानकर खड़े है और कह रहे है कि हम लोकतंत्र के चौथे स्तंभ है, जबकि सच्चाई यह है कि ये इंसानियत के नाम पर कलंक है...
आपको मालूम होगा कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत दो बेटियों ने यहां हो रहे गलत कार्यों का विरोध किया, उनका कहना था कि मुख्यमंत्री जनंसवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार होता है, इन दोनों बेटियों ने इसकी जानकारी राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष को पत्र के माध्यम से दी, साथ ही इसकी प्रतिलिपि भारत के प्रधानमंत्री, झारखण्ड की राज्यपाल, झारखण्ड के मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महिला आयोग, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और सचिव को भेजी।
पर सवाल यह है कि जब यहां राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ही नहीं तो इन बेटियों के पत्र का संज्ञान कौन लेगा? हद हो गयी, क्या इस सरकार के पास, या इस राज्य में एक भी योग्य महिला नहीं, जो राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बन सकें। ऐसे में महिलाओं की समस्याओं का हल कौन निकालेगा? क्या ऐसे में उनलोगों का मनोबल नहीं बढ़ेगा, जो महिलाओं का अपमान करते है या उनके साथ दुर्व्यवहार करते है।
कमाल है, यहां संयोग देखिये महिला राज्यपाल है, वह महिला राज्यपाल जो बेटियों की समस्याओं को लेकर सजग है, पर वे इस मामले में सजग नहीं दिखी, जबकि इन बेटियों ने उनका भी दरवाजा खटखटाया, पर न्याय नहीं मिला... इन बेटियों ने स्वयं द्वारा लिखे पत्र की एक प्रतिलिपि राजभवन में भी दी... कमाल है राजभवन के वरीय अधिकारियों का दल जिस सूचना भवन में बैठता है, उसी के ठीक नीचे चलता है, मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र, फिर भी उसे न्याय नहीं मिलता...
गजब स्थिति है...राज्य की...
गलत करनेवाले मस्त और सहीं करनेवाले पस्त...
किसी ने ठीक ही कहा है कि जहां की सरकार हाथी उड़ाने में मस्त हो,
वहां, उसके पास वक्त कहां कि जो बेटियों को न्याय दिला सकें...
जरा देखिये...
मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र के हाल...
क. नियोक्ता लड़कियों को नियुक्ति पत्र नहीं देता, पर निलंबन पत्र अवश्य थमा देता है...
ख. उसने आंतरिक शिकायत समिति का गठन ही नहीं किया, जबकि ये ज्यादा जरुरी है, वह भी तब जहां बड़ी संख्या में लड़किया कार्यरत हो...
ग. श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन करता है, एक ही कार्य के लिए समान वेतन नहीं, बल्कि वेतन में भी असमानता है...
घ. राज्य सरकार बतायें कि यहां कार्यरत बड़ी संख्या में महिलाओं की सुरक्षा के लिए क्या विशेष व्यवस्था की है?
ऐसे कई प्रश्न है, जिसका जवाब न तो राज्य सरकार के पास है और न ही मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र चलानेवालों के पास...
यहां कार्य करनेवाले वरीय अधिकारियों का दल बहुत सारी बातें, इस शर्त पर बताता कि उनका नाम न प्रकाशित किया जाय...
वह कहता है कि
यह विभाग उसी दिन डूब गया था, जब ये विभाग सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से आइटी विभाग को दे दिया गया...
आइटी विभाग में जाते ही मनमानी शुरु हुई, महिलाओँ के साथ अपमान और दुर्व्यवहार का सिलसिला शुरू हुआ...
आइटी विभाग के वरीय अधिकारी यहां तक कि सचिव भी अपने कनीय अधिकारियों के साथ सही व्यवहार नहीं करते, जिसका परिणाम सामने है...
मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र के अधिकारियों का मनमाना रवैया...
और दोषपूर्ण कार्यप्रणाली का प्रमाण है ये सब दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं...
नाम का है, 181... ऐसी बहुत सारी शिकायतें है, जिसका हल न तो मुख्यमंत्री निकाल पाये और न ही अधिकारी, जबकि शिकायतकर्ता मारे- मारे फिर रहे है...
ऐसा मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र रहे या न रहे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता...
आम जनता को इससे कोई राहत नहीं...
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र चूं – चूं का मुरब्बा बन गया है...
राज्य की स्थिति ऐसी है कि
मूर्ख और चाटूकार – उपदेशक और सलाहकार बन रहे है...
और ईमानदार, अपनी इज्जत बचाने में ही ज्यादा समय बीता रहे है...
ऐसे में इन बेटियों को, राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास से या मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र से न्याय मिलेगा, इसकी संभावना कम ही दीखती है...
फिर भी निराश होने की जरुरत नहीं,
संघर्ष तो रंग लाता ही है...

Saturday, January 7, 2017

भला हाथी भी कहीं उड़ता है.......

ये हाथी कभी नहीं उड़ेगा, चाहे धौनी जितना भी उड़ाने का प्रचार क्यों न कर लें... धौनी चाहे जिस भी मिट्टी के बने हो, पर हमारा हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान की महक के रुप में जाना जानेवाला झारखण्ड अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं जानता और न ही ऐसे सपने देखता है, जो सपने कभी पूरे ही न हो...
झारखण्ड बढ़ेगा, अवश्य बढ़ेगा पर पंखों वाला हाथी से नहीं, बल्कि झारखण्ड के करोड़ों मेहनतकश-मजदूरों और उनके मजबूत इरादों और बुलंद हौसलों से... न कि परछाइयों के शहरों में रहनेवालों से...
धौनी कल क्रिकेट खेलते थे, बाद में विज्ञापनों से खेलने लगे, एक मोटरसाइकिल का प्रचार करते थे, कहते थे मैं तो दूध पीता हूं, ये तो कुछ भी नहीं पीता, फिर भी दौड़ता रहता है... बाद में हमारे धौनी दारु का भी प्रचार करने लगे, उस दारु का, जिसका प्रचार आज तक क्रिकेट के भगवान माने जानेवाले भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने नहीं किया...
ऐसे धौनी को राज्य सरकार ने मोमेंटम झारखण्ड का ब्रांड एंबेसडर बनाया है, इसका फायदा राज्य सरकार को कितना मिलेगा, ये तो वक्त बतायेगा, पर राज्य को नुकसान होना तय है... हम तो एक ही बात जानते है, कि गांधी ने ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना की थी... बार-बार गांधी की बात करनेवाली सरकार, उनके 150 वीं जयंती पर स्वच्छता अभियान की बात करनेवाली सरकार, उनके मूल वक्तव्य ग्राम स्वराज्य से भटक रही है और जिन विदेशियों को गांधी ने देश से बाहर किया, उन विदेशियों को पुनः भारत में लाने का हर प्रकार का नौटंकी कर रही है... जिसमें केन्द्र से लेकर राज्य सरकार भी शामिल है... संघ जिसकी राजनीतिक इकाई भाजपा है, वह भी इस हथकंडे से तौबा करती है, और ग्राम स्वराज्य-स्वदेशी की परिकल्पना को साकार करने की बात करती है, पर इन सबसे दूर, राज्य और केन्द्र सरकार ने पूंजी निवेश के नये तरीके ईजाद कर स्थिति ऐसी कर दी है जैसे लगता है कि बिना पूंजी निवेश के राज्य व देश आगे बढ़ ही नहीं सकता...
क्या ऐसे हालात में आप धौनी के इस अपील को स्वीकार करेंगे कि - " ये हाथी उड़ेगा, और झारखण्ड इंडिया का नंबर वन इंवेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनेगा। अब सवाल ये है क्या आप हमारे साथ होंगे?" मैं तो भाई, साफ-साफ कह देता हूं कि धौनी के इस बयान के साथ मैं तो नहीं हूं, क्योंकि मैं अच्छी तरह जानता हूं कि हाथी उड़ता नहीं है...

Wednesday, March 7, 2012

गुंडों को क्या हैं, हाथी से उतरे, साईकिल पर चढ़ गये ---------------


देश की नजर, 6 मार्च को होनेवाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों पर थी, पर मेरी नजर ज्यादातर उत्तरप्रदेश के चुनाव परिणाम पर थी, कि वहां की जनता क्या जनादेश देती हैं। जनता ने जनादेश दे दिया। पिछली बार मायावती की झोली भर दी थी, इस बार मुलायम की झोली भर दी। ऐसी झोली भर दी कि पांच सालों तक कोई किच किच न हो। कोई राजनीतिज्ञ उलाहना न दे कि जनता ने जनादेश तो दिया पर बहुमत नहीं। अब लो दे दिया, काम करो। इसके पहले बहुमत मायावती को दिया, पर मायावती को अपनी मूर्ति और हाथी को सजाने से, वक्त ही नहीं मिला कि वो उत्तर प्रदेश के बारे में सोचे। मायावती तो जानती हैं कि यूपी के दलित, हाथी को छोड़कर, दूसरे पर बटन दबा ही नहीं सकते और रही बात पंडितों और मुस्लिमों की, तो पंडितों को दक्षिणास्वरुप विधानसभा की टिकट और मुस्लिमों को भाजपा का भय दिखाकर, फिर से सत्ता हासिल कर लेंगे, पर ऐसा हो न सका। बसपा का नारा -- चढ़ गुंडे की छाती पर, बटन दबेंगी हाथी पर और ब्राह्मण शंख बजायेगा, हाथी दिल्ली जायेगा। काम नहीं आया और हाथी लखनउ तक, ही सिमट गया। इधर समाजवादी पार्टी की बल्ले बल्ले हैं, जनता ने पूर्ण बहुमत दे दिया। बांछे खिल गयी। बहुमत की बात तो समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव ने सपने में भी नहीं सोची होगी, पर आज बहुमत हैं। न कांग्रेस को मनाने का झंझट और न निर्दलीयों के आगे घूटने टेकने की जरुरत। बस सब बम - बम हैं। भाई यूपी की जनता ने एक बार भाजपा को भी पूर्ण बहुमत दे दिया था, पर राम मंदिर की आस्था और मंदिर निर्माण की दृढ़संकल्पिता, उसे कहीं की नहीं रखी और भाजपा आज तीसरे नंबर पर आकर अटक गयी। लगता हैं कि भाजपा फिर कभी सत्ता में नहीं आयेगी। लेकिन देश की राजनीति ऐसी हैं कि कब कौन उछलकर मुख्यमंत्री पद पर चला जायेगा या किस की फिर से बहुमत आ जायेगी, कहां नहीं जा सकता। एक समय था कि लोग जनसंघ( अब भाजपा ) और उसके नेताओं के बारे में बोलते थे कि ये पार्टी कभी सत्ता में नहीं आयेगी, पर ये पार्टी देश की बागडोर भी संभाली, कई प्रदेशों में इनकी सरकार हैं, इसलिए इस पर बोलना व लिखना बेकार हैं।
इधर जब जनादेश का परिणाम आ रहा था, तब देश के राष्ट्रीय समाचार पत्रों व राष्ट्रीय चैनलों में कार्यरत कांग्रेस भक्त पत्रकार, जो कल तक यूपी में कांग्रेस की शानदार सफलता का दंभ भरते आ रहे थे। अपना चेहरा छुपाते नजर आये। कुछ ऐसे बेशर्म कांग्रेस भक्त पत्रकार भी थे, जो बेशर्मी की सारी हदें पारकर, अपना चेहरा बार - बार चैनलों पर दिखा रहे थे। खैर कांग्रेस का जो होना था। हो गया। कांग्रेस पार्टी आज भी परिवारों की पार्टी हैं। हाई - फाई पार्टी हैं। जिसमें जनता की भागीदारी कम, नेताओं के खानदानों की भागीदारी ज्यादा होती हैं, और परिणाम सबके सामने हैं।
समाजवादी पार्टी -- नाम कितना सुंदर। समाज की बात करनेवाली यानी सामाजिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, देश व समाज को आगे ले जानेवाली पार्टी। पर क्या लगता हैं कि इस पार्टी से उत्तरप्रदेश का भला होगा। आज तो देश के सभी समाचार पत्रों में बड़े बड़े संपादक, और अन्य स्तंभकार, मुलायम पुत्र अखिलेश की जय जय कर रहे हैं। चाटुकारिता की सारी सीमाएं पार कर दी हैं। मुलायम को सही युवराज बता रहे हैं। राहुल पर फब्तियां कस रहे हैं। ये लिखनेवाले और बोलनेवाले वो लोग हैं, जो लाखों नहीं, करोड़ों में खेलते हैं। जो यूपी की गांवों और गलियों का इतिहास भूगोल भी नहीं जानते, पर बता रहे हैं कि यूपी को अखिलेश यादव नया मार्ग दिखायेंगे, अब यूपी बहुत आगे निकल जायेगा। सपा दिल्ली में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। हां हां क्यों नहीं निभायेगी, जनता ने भूमिका निभाने के लिए ही तो जनादेश दिया हैं। पर आज अखिलेश के आगे नतमस्तक होकर, अखिलेश यादव की चरणवंदना करनेवाले ये सारे पत्रकार, जब कांग्रेस दूसरे या तीसरे नंबर पर अथवा अपनी सीटें पूर्व के विधानसभा चुनाव के मुकाबले दुगनी कर लेती तो फिर देखते क्या होता। ये सारे के सारे पत्रकार राहुल शरणं गच्छामि कहकर, राहुल गांधी की चरणवंदना में लगे रहते। हम आपको ये भी बता दें कि भारतीय राजनीति और यहां की जनता कैसे जनादेश देती हैं, वो सबको पता हैं.............कल विदेशियों के हाथ में गर ये सत्ता सौंप दें तो इस पर भी किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि यहां किसे अपने देश और समाज की बढ़ोतरी की चिंता हैं, सभी अपने आप में लगे हैं। समाजवादी पार्टी को ही ले लो। ये समाजवाद की बात करते हैं। इंदिरा गांधी के शासनकाल के समय परिवारवाद की आलोचना करनेवाले इन समाजवादियों से पूछों कि तुम आज क्या कर रहे हो। जरा देखो -- मुलायम सिंह यादव, सांसद हैं अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं, बेटा अखिलेश यादव खुद सांसद हैं और मुलायम की बहु डिंपल ये भी सांसद बनने जा रही थी, पर जनता ने इन्हें जिताकर नहीं भेजा, गर भेज देती तो ये भी सांसद होती। जिस पार्टी की सोच, अपने परिवार पर आकर सिमट जाती हैं, वो समाजवादी कैसे हो सकता हैं। सवाल ये हैं।
सवाल ये भी हैं -- कि जिस पार्टी ने अभी सत्ता संभाला नहीं हैं। अभी तक अपना नेता चुना नहीं हैं। ये अलग बात हैं कि मुलायम ही मुख्यमंत्री होंगे और इनके बाद इनके बेटे, कांग्रेस की तरह अपनी पार्टी का झंडा ढोयेंगे, यूपी संभालेंगे। जब चुनाव परिणाम आते ही इनके गुड़ों ने अपनी औकात दिखानी शुरु कर दी तो आनेवाले समय में क्या होगा। क्या लोगों को मालूम नहीं कि गुंडों का क्या हैं, हाथी से उतरे और साईकिल पर चढ गये। समाजवादी पार्टी के लोगों ने क्या गुंडागर्दी दिखायी हैं जरा देखिये --- सपा के बहुमत की खबर आते ही यूपी के दस शहरों में सपा के गुंडों ने बवाल काटे। यूपी के संभल में सपा प्रत्याशी की जीत पर जीत में बौराएं गुंडों ने गोलियां चलायी, एक बच्चे की मौत हो गयी। झांसी में सपाईयों ने पत्रकारों को बाथरुम में बंद कर घंटों बंधक बनाये रखा। मेरठ, फैजाबाद, आगरा, संभल में स्थिति ऐसी हो गयी कि आंसूगैस के गोले छोड़ने पड़े। ये तो शुरुआत हैं, अभी पांच साल बाकी हैं। आप मानकर चलिये, कि सपा के राज में क्या होने जा रहा हैं............। पर इसके बावजूद हम चाहेंगे कि यूपी, अन्य विकसित हो रहे प्रदेशों की तरह विकसित हो, लेकिन ऐसा नयी सरकार कर पायेगी, क्योंकि गुंडे साइकिल पर बैठकर अभी से ही इतनी तेजी दिखा दी कि सारे सपने ही टूटते नजर आ रहे हैं। हां एक खुशखबरी हैं -- कांग्रेस व सपा भक्त पत्रकारों के लिए, कि वे मुलायम और अखिलेश का चरणवंदना कर अपनी किस्मत आजमायेंगे और अपने हिस्से का यूपी लूटकर, मुलायम और मुलायम के परिवार की तरह समाजवाद का असली चरित्र पत्रकारिता में दिखायेंगे।