Monday, June 13, 2011

बहुत कठिन है, डगर पनघट की..................................

जमशेदपुर लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। करीब हर छोटी – बड़ी पार्टियों ने अपनी ओर से उम्मीदवारी तय कर दी है। जिन बड़ी पार्टियों के बड़े नेताओं को टिकट मिलनी थी पर टिकट नहीं मिल पाया, उन्होंने अपनी पार्टी के खिलाफ शंखनाद भी कर दिया है, और एक तरह से ये कहकर ताल ठोक दिया कि अपनी पार्टी से न सहीं, दूसरे पार्टी का दामन थामकर वे चुनाव लड़ेंगे पर लड़ेंगे जरुर। जबकि कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अन्दर ही अन्दर टिकट न मिलने से नाराज है और अपने प्रत्य़ाशी की कब्र खोदने में लगे है। दूसरी ओर ऐसी भी पार्टियां हैं जो कल तक गठबंधन धर्म की दुहाई दे रही थी पर आज गठबंधन को ताक पर रख, एक दूसरे के खिलाफ उम्मीदवारी तय कर दी। हालांकि ये उपचुनाव आम तौर पर फ्रैंडली होगा, पर चुनाव संपन्न होने और परिणाम आने के बाद माहौल फ्रैंडली ही रहेगा, ये कहना मुश्किल है, क्योंकि जीत तो पचा ली जा सकती हैं, पर हार पचा पाना किसी भी पार्टी के लिए मुश्किल ही होगा। आश्चर्य इस बात की है जो झामुमो गठबंधन धर्म का दुहाई दे रही थी और भाजपा से सहयोग की बात कर रही थी, सुधीर महतो के टिकट की घोषणा के साथ ही नये नये झंझावातों को झेल रही हैं। उन्हीं की पार्टी से कभी लोकसभा का रास्ता तय कर चुकी सुमन महतो, तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम चुकी हैं। आजसू जो झामुमो की ही देन है, उसने भी अपनी पार्टी से आस्तिक महतो को उतार दियाहै। इधर कांग्रेस से बन्ना गुप्ता की उम्मीदवारी तय हो जाने से प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप बालमुचू और उनका कुनबा पूरी तरह से गुस्से में है, ये अलग बात हैं कि वो खुलकर नहीं बोल रहा, पर इतना तो तय हैं कि यहां भी सब कुछ ठीक नहीं है। कांग्रेस को लग रहा था कि गठबंधन के नाते, झाविमो के लोग उसकी मदद करेंगे, तो यहां झाविमो ने अजय कुमार को उतारकर, कांग्रेस की एकतरह से कमर ही तोड़ दी हैं, ऐसे में फिलहाल भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है, जहां विद्रोह की गुंजाईश कम दिखाई पड़ रही है, पर यहां भी सब कुछ ठीकठाक हैं, ऐसा नहीं कहा जा सकता। कई ऐसे लोग हैं जो इस दौड़ में थे, पर टिकट नहीं मिलने से नाराज भी चल रहे हैं। कुल मिलाकर देखे, तो सभी जगह कुछ न कुछ अनबन है, और इसका परिणाम सभी पार्टियों को भुगतना पड़ेंगा।साथ ही ये भी तय हैं कि जमशेदपुर लोकसभा का चुनाव आनेवाले झारखंड की राजनीति की दशा और दिशा भी तय करेगा क्योंकि जो चुनाव जीतेगा, उसके हौसले बुलंद रहेंगे, साथ ही वो झारखंड में मजबूत स्थिति में होगा और जो हारेगा, उसकी स्थिति बहुत ही कमजोर होती जायेगी, क्योंकि इसका प्रभाव इस रुप में पड़ेगा कि हारनेवाली पार्टियों में भगदड़ की स्थिति होगी, जबकि जीतनेवाले अपने कुनबे को स्थिर और मजबूत करने की स्थिति में होंगे। शायद राजनीति केजानकार, इसीलिए इस चुनाव को झारखंड की दशा और दिशा से जोड़ रहे हैं। खुशी इस बात की हैं कि सभी पार्टियों ने अपनी उम्मीदवार जमशेदपुर की जनता के समक्ष उतार दिये है, अब जमशेदपुर की जनता के सामने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के विकल्प है, अब जमशेदपुर की जनता की भी परीक्षा हैं कि वो इतने विकल्पों में से किसे चुनती हैं, क्योंकि अब वो ये भी नहीं कह सकती कि उनके पास विकल्प नहीं था, आज उनके पास विकल्पों की भरमार हैं। देखतेहैं कि किसके माथे जीत का सेहरा और किसके माथे हार का ठीकरा फूटता हैं, तब तक नजर बनाये रखिये कि जमशेदपुर की जनता किसे संसद में भेजने के लिए राजी होती हैं।

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