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Tuesday, March 21, 2017

उत्तर प्रदेश की जनता का अपमान बर्दाश्तयोग्य नहींं...........

उत्तर प्रदेश की जनता का अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं हैं...
जी हां, उत्तर प्रदेश की जनता का अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं है, चाहे वह देशी मीडिया हो या विदेशी मीडिया। जब से उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा को जनादेश दिया है, तथाकथित स्वयं को सेक्युलर कहनेवाले लोग और मीडिया उत्तर प्रदेश की जनता को अपमानित करने का कार्य प्रारंभ कर दिया। वर्षों पहले यहीं जनता बसपा को सत्ता सौंपी, फिर समाजवादी पार्टी को सत्ता सौंपी तो यह सांप्रदायिक नहीं थी, और जैसे ही भाजपा को सत्ता सौंपी तो ये सांप्रदायिकता की जीत हो गयी। कमाल तो यह भी है कि ट्रम्प को माथे पर चढ़ाकर घुमानेवाली अमरीकी जनता के खिलाफ, विदेशी मीडिया के सुर नहीं सुनने को मिलते पर भारत की बात हो तो देखिये, स्वयं भारतीय कहलानेवाले लोग भी विदेशी मीडिया के सुर में सुर मिलाते हुए भारतीय लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाते है। इन दिनों देशी - विदेशी मीडिया में उत्तर प्रदेश छाया हुआ है। उन मीडिया में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुब आलोचना हो रही है, जबकि उन्हें मालूम होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी बड़ा सांप्रदायिक क्यों न हो? उसे भारतीय संविधान के अंतर्गत ही भारतीय जनता की सेवा करनी है, ऐसा नही कि वह अपने मन से जो चाहे, जो कर देगा, जैसा कि विदेशों में देखने को मिलता है।
आज अमरीका में भारतीयों की क्या स्थिति है? वहां चून-चून कर भारतीय मारे जा रहे है, आखिर क्यों? ये भारतीय अमरीकियों के शिकार क्यों हो रहे है, जाहिर सी बात है कि इस्लाम के नाम पर, इन भारतीयों को शिकार बनाया जा रहा है, जबकि मरनेवाले भारतीयों में कोई भी इस्लाम को माननेवाला नहीं था।
ये तो वहीं बात हो गयी, चलनी दूसे सुप के जिन्हें बहत्तर छेद। सारी दुनिया अभी सर्वाधिक किसी से डरी हुई है तो वह है इस्लाम, जबकि मैं स्वयं जानता हूं कि इस्लाम एक शांतिप्रिय धर्म है, पर हो क्या रहा है, इस्लाम माननेवालों में कुछ लोगों के अंदर ऐसी कट्टरता आ गयी है कि उन्हें लगता है कि उनके धर्म से बड़ा दूसरा कोई धर्म ही नहीं, इसलिये इस्लाम के आगे किसी अन्य धर्म को रहने की आवश्यकता ही नहीं और इसी कट्टरता की आड़ में खून-खराबा का वह दौड़ चल पड़ा है कि जिससे मानवता ही कांप उठी है।
मैं भारत में ही देख रहा हूं कि इस्लाम माननेवालों में से कुछ मुट्ठी भर लोग भारत में भाजपा के लिए खाद – बीज का काम करते है, ये कौन है?  किसे नहीं पता।आप भारत में रहकर एक धर्म में फल-फूल रही सांप्रदायिकता को बढ़ावा दोगे और दूसरे धर्म को गाली दोगे तो यह नहीं चलेगा। मैं पूछता हूं कि
क. ओवैसी बंधुओं को किसने बढ़ावा दिया? जो धमकी देता है कि नरेन्द्र मोदी को हैदराबाद में घुसने नहीं देंगे, और जब हैदराबाद में नरेन्द्र मोदी घुसे तो उनकी सारी हेकड़ी निकल गयी। आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री बनने के पूर्व नरेन्द्र मोदी हैदराबाद पहुंचे, जहां लोगों ने टिकट खरीदकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भाषण सुना। यहीं नहीं इसी ओवैसी बंधुओं ने भगवान राम और हिन्दुओं के प्रति ऐसी-ऐसी नफरत फैलानेवाली बाते एक सभा में कहीं और उस सभा में मौजूद लोगों ने तालियां बजा-बजाकर उसका उत्साहवर्द्धन किया। क्या कोई बता सकता है कि इसकी निंदा किसने-किसने की?
ख. उत्तर प्रदेश के ही सहारनपुर का एक कांग्रेसी मुस्लिम नेता नरेन्द्र मोदी को कुट्टी-कुट्टी काटकर फेंक देने की बात करता है, कोई बता सकता है कि इसकी निंदा किसने-किसने की?
ग.  हाल ही में बिहार के एक मुस्लिम मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चित्र को जूते से पीटवाता है, वह भी अपने सामने। क्या कोई बता सकता है कि इसकी निंदा किसने-किसने की?
घ. ममता बनर्जी शासित बंगाल के हावड़ा में क्या हुआ? जिस स्कूल में पिछले 70 सालों से सरस्वती पूजा मनाई जा रही थी, वहां इस्लामिक गुंडों के कहने पर सरकार ने सरस्वती पूजा पर रोक लगा दी, हिन्दू छात्राओं पर बंगाल पुलिस ने बल प्रयोग किया।
ऐसे कई प्रमाण है, जो समाज को विघटन के कगार पर ले जा रहे है...
जरा देखिये, ओवैसी को, जो कहता है कि वंदे मातरम हम नहीं बोलेंगे, भारत माता की जय नहीं बोलेंगे, क्योंकि यह संविधान में नहीं लिखा है। उस मूर्ख को कौन बताये कि हर बात संविधान में नहीं लिखी जाती, चूंकि गलत बोलने से आदमी लोकप्रिय हो जाता है, वह ऐसी हरकते कर रहा है...
जरा देखिये इसी मुसलमानों में जावेद अख्तर साहब है, जिन्होंने ओवैसी की तीखी आलोचना ही नहीं की, बल्कि संसद में कड़े शब्दों में उसका प्रतिकार किया। ये होता है – मुसलमान।
यहीं नहीं, मैंने प्रख्यात मुस्लिम नेता मदनी साहब के साक्षात्कार को भी देखा है, जिन्होंने पाकिस्तानी पत्रकार का मुंह ही बंद कर दिया, वह भी यह कहकर, कि वे जाकर सबसे पहले अपने देश में देखकर आये कि वहां अल्पसंख्यकों के क्या हाल है? भारत में मुसलमान उनसे बेहतर स्थिति में है, पर हमारी स्थिति क्या है?
यहां के पत्रकारों और मीडिया के हालात क्या है? ऐसे लोगों को यह मीडिया सम्मान नहीं देती और न ही ऐसे लोगों के बयान को अपने अखबारों और चैनलों में जगह देते है, पर जैसे ही जाहिलों के जमात की ओर से जाहिलों वाली बात आ गयी, तो देखिये इनकी रंगत...
मैं तो दावे के साथ कहता हूं कि इस देश में सर्वाधिक नुकसान गर किसी ने पहुंचाया है तो वह हैं...
क. बीबीसी – इसमें ज्यादातर पत्रकार भारत विरोधी है, जिनकी भारत विरोध से सुबह होती है और भारत विरोध पर ही इनकी रात खत्म होती है।
ख. एनडीटीवी एवं एबीपी न्यूज – एनडीटीवी एवं एबीपी न्यूज को भारत विरोधी बयान के लिए ही जाना जाता है, भारत विरोधी और वामपंथियों की पैरवीकार के रुप में यह चैनल सर्वाधिक लोकप्रिय है, इसके संवाददाताओं की भाषा बेहद घटियास्तर की होती है, ये अपने विरोधियों के लिए गाली का भी प्रयोग करते है, पर इसी में एक एनडीटीवी लखनऊ के कमाल खान भी है, जिनकी भाषा और शब्द और पत्रकारिता की जितनी प्रशंसा की जाय कम है।
रही बात विदेशी मीडिया कि जैसे न्यूयार्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट, द न्यूज, रायटर्स, गार्जियन की, तो ये केवल यह बताये कि इसने कभी भी भारत की सकारात्मक तस्वीर दुनिया में पेश की है, उत्तर होगा – नहीं। ये तो हमेशा से ही भारत की गलत छवि प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते है। इन जगहों पर काम करनेवाले भारतीय पत्रकारों को उच्चे वेतनमान पर इसलिये रखा जाता है कि ये पैसे के लालच में भारत विरोधी आलेख प्रस्तुत करें।
हाल ही में चीन की सरकारी मीडिया के माध्यम से एक भारतीय ने चीनी सामानों के विरोध पर एक आलेख प्रस्तुत किया, जिसमें भारतीयों के देशभक्ति पर ही सवाल उठा दिये गये। अब आप इसी से समझ लीजिये कि ऐसा देश और विदेश में क्यों हो रहा है? उसका मूल कारण है कि बहुत दिनों के बाद कोई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रुप में आया है, जो सवर्ण नहीं है, पिछड़ा है, जिसने सभी देशद्रोहियों के नाक में दम कर रखा है, उनका जीना दुश्वार कर दिया है, ऐसे में ये लोग करेंगें क्या? बस दिन रात नरेन्द्र मोदी का विरोध और अब योगी का विरोध...
आप करते रहिये विरोध, भारत की जनता, अपना मताधिकार का प्रयोग करना जानती है, जो गलत करेगा, दंडित करेगी, और जो बेहतर करेगा उसे मौका देगी। आपलोग क्यों विधवाओं की तरह अपना छाती पीट रहे है...

Sunday, December 21, 2014

घोर आश्चर्य ?


झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद से लेकर मतदान संपन्न होने तक, मात्र चंद पैसों के लिए विज्ञापन के नाम पर --- हरे मोदी, हरे मोदी, मोदी- मोदी, हरे हरे, हरे अमित शाह, हरे अमित शाह, अमित शाह – अमित शाह, हरे हरे।। - का जाप करनेवाले, आज ताल ठोंक रहे हैं कि राज्य में उनके चलते मतदान की प्रतिशतता बढ़ी हैं, क्या ये शर्मनाक नहीं हैं, क्या ये खुद को ईश्वर बताने की, मानने की कुटिल चाल नहीं हैं, जनता ऐसे लोगों से, ऐसे अखबारों और चैनलों से सावधान रहें, क्योंकि कुछ ही दिनों में मतगणना होगी, और जिसकी सरकार बनेगी, ये मीडिया वाले, उनकी चरणवंदना करने में सबसे आगे रहेंगे, साथ ही अपने हक का झारखंड लूटने में प्रमुख भूमिका निभायेंगे, उसके बाद क्या होगा, होगा वहीं - जनता एक बार फिर अन्य दिनों की तरह मीडियावालों से छली जायेंगी। ये मैं इसलिए लिख रहा हूं कि आज सुबह जैसे ही मेरी नींद खुली। एक अखबार ने राज्य में भारी मतदान पर संपादकीय लिख डाली और ये मान बैठा कि उसके कारण ऐसा संभव हुआ हैं। उसने एक अभियान चलाया और जनता उस अभियान से प्रभावित होकर 9 प्रतिशत ज्यादा मतदान कर बैठी, जबकि सच्चाई ये हैं कि राज्य में मतदान की प्रतिशतता बढ़ने के दूसरे बहुत सारे कारण है। जनता की वर्तमान सरकार से नाराजगी सबसे बड़ा कारण हैं, साथ ही बार-बार गठबंधन की सरकार के कारण विकास कार्य प्रभावित होना भी एक कारण हैं। तीसरा सबसे बड़ा कारण मोदी के बार – बार झारखंड आने और खुद को विकास के एजेंडें तक सीमित रखने और विश्वास बनाने, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों का इस चुनाव के प्रति घोर निराशा का होना और मीडिया का मोदी के इर्द-गिर्द सिर्फ चंद पैसों के लिए जी – हुजूरी करना शामिल हैं। मीडिया ये नहीं भूले कि झारखंड को बर्बाद करने में गर नेताओं की अहम भूमिका हैं तो पत्रकारों की भी कम भूमिका नहीं हैं। झारखंड में पत्रकारों की एक बहुत बड़ी लंबी लिस्ट हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार के रिकार्ड बनाये हैं गर इसकी सूची प्रकाशित हुई तो बहुत सारे लोग नंगे हो जायेंगे। कोई किसी आर्गेनाइजेशन का संयोजक बनने के लिए तो कोई सूचना आयुक्त बनने के लिए, कोई सरकारी संस्थानों में अपने भाई-भतीजों को नौकरी दिलवाने के लिए, कोई कोयला और सोने के खदानों को पाने के लिए, कोई निजी संस्थानों में खुद को प्रतिष्ठित करने के लिए कैसे झारखंड की भोली – भाली जनता को लूटा हैं। वो सभी जानते हैं, पर अखबारों और इलेक्ट्रानिक मीडिया को देखे तो पता चलेगा कि दूनिया की सारी सच्चाई और ईमानदारी का ठेका, इन्हीं मीडियाकर्मियों ने ले रखा हैं। जिस प्रकार राष्ट्रीय चैनलों के मालिक और कई संपादक अपनी जमीर नेताओं के आगे गिरवी रखा हैं, उसी प्रकार झारखंड में भी वो चीजें देखने को मिल रही हैं, ऐसे में झारखंड की प्रगति का रोना-रोना मीडियाकर्मियों या उनके बॉस या उनके मालिक को शोभा नहीं देता। उनके इस रोने को घड़ियाली आंसू कहना, घड़ियाल तक का अपमान हैं। ये वे लोग हैं, जिन्हें ईश्वर ने दंडित करने का विशेष अभियान चलाने का शायद फैसला कर लिया हैं, जल्द ही वे इन फैसलों के अमल में आने के बाद दंडित होंगे, क्योंकि दो प्रकार के संविधान हैं। एक जिसे ईश्वर ने बनाया और एक वो जिसे मनुष्य ने अपनी सफलता और असफलता को सिद्ध करने के लिए खुद से संविधान बना डाली। मनुष्य के बनाये संविधान से तो वो बच जायेगा, पर ईश्वर के बनाये संविधान से बच पायेगा, हमें नहीं लगता। इन सभी ने शर्म बेच खाया हैं, इन सभी ने ईमान बेच खाया हैं, निर्मल बाबा और हनुमान यंत्र में भी इन्हें भेद नजर आता हैं, चूंकि निर्मल बाबा ने विज्ञापन के नाम पर माल नहीं दिया, तो उसे बदनाम कर ड़ाला, और जिसने विज्ञापने के नाम पर माल दिया, उसे मालोमाल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा दी। जबकि ईश्वर की अदालत में दोनों समान रुप से अपराधी हैं। ये तो एक प्रकार का उदाहरण, मैंने सामान्य जनता के सामने रखा हे। मैं झारखंड की जनता से यहीं कहूंगा कि आप स्वयं को इन अखबारों और चैनलों से बचा कर रखिये, क्योंकि इन पर विश्वास करना, खुद को धोखे में रखना, मूर्ख बनना और राज्य को गर्त में डालने के सिवा दूसरा कुछ भी नहीं..............

Wednesday, December 28, 2011

बेशर्मों को शर्म कहां.............

पांच राज्यों में चुनाव हैं। कांग्रेस ने सुनियोजित साजिश रचकर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए, अल्पसंख्यकों को धर्म के आधार पर आरक्षण दे दिया, जबकि संविधान इसकी इजाजत नहीं देता। इससे कांग्रेस को फायदे हैं, इसाई बहुल गोवा में कहेंगी कि वह इसाईयों को आरक्षण दे दी हैं, सिक्ख बहुल पंजाब में कहेगी कि उसने सिक्खों को आरक्षण दे दिया हैं, और मुस्लिम बहुल उत्तरप्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में वो इसी आधार पर मुस्लिमों को भी आकर्षित करते हुए वोट मांगेगी। संभव हैं, उसे फायदे मिले भी क्योंकि हमारे देश की जनता, कांग्रेस के इस लालीपाप पर आकर्षित हो कर, उसके पक्ष में भारी मतदान कर दे, तो इस पर किसी को आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए, क्योंकि यहां की जनता क्या हैं, वो इतिहास बताता हैं, जब अंग्रेज इस देश में आये और विदेशी बाबर इस देश में आया तो कैसे यहां की जनता ने उसका स्वागत करते हुए, अपने देश पर विदेशियों का शासन हंसते हंसते करवाया, और खुद गुलाम बनकर आनन्दित होते रहे, कमोवेश आज भी यहीं स्थिति हैं। भले ही आज की पीढ़ी न स्वीकारें, पर सच्चाई यहीं हैं। फिलहाल कांग्रेस की नजर सर्वाधिक उत्तरप्रदेश पर हैं। अल्पसंख्यकों के नाम पर मुस्लिमों को 4 प्रतिशत आरक्षण का लालीपॉप दिलाने के बावजूद भी, कांग्रेस और कांग्रेस भक्तो को लगता हैं कि अन्ना हजारे उऩके लिए शामत खड़ी कर सकते हैं. इसलिए कांग्रेस को पांच राज्यॉ में जीत सुनिश्चित करने के लिए, कांग्रेस और कांग्रेस भक्तों में धमा चौकड़ी चल रही हैं कि कौन सर्वाधिक सोनिया और राहुल की चरण वंदना करते हुए चाटुकारिता का रिकार्ड तोड़ता हैं। इनमें शामिल हैं - कांग्रेस के कार्यकर्ता-नेता, कांग्रेस भक्त पत्रकार और केन्द्र शासित प्रदेशों में कार्यरत प्रशासनिक उच्चाधिकारी जो कांग्रेसी नेताओं की कृपापात्र बनकर देश का सत्यानाश कर रहे हैं। एक बात मैं बता दूं कि मैं अन्ना, टीम अन्ना और उनके आंदोलन का कतई समर्थक नहीं हूं, गर ज्यादा जानकारी इस संबंध में लेना हैं तो इसी ब्लाग पर अन्ना के आंदोलन और उनके सदस्यों के प्रति हमारे विचार आज भी लिखे पड़े हैं, उन्हें पढ़कर, मेरे विचारों से अवगत हुआ जा सकता हैं, लेकिन अऩ्ना के खिलाफ कांग्रेसियों के आक्रामक रवैये ने हमे ये लिखने पर मजबूर कर दिया कि भारत में जितने भी पागलखाने हैं, उनमें कम से कम कांग्रसियों के लिए कुछ शायिका आरक्षित होने चाहिए क्योंकि ये सभी मानसिक दिवालियेपन के शिकार हो रहे हैं और गर इनका इलाज नहीं किया गया, तो ये पागल होकर भारत के विभिन्न शहरों मे घूमेंगे, जिससे हमें इन्हें देखकर दुख होगा, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि इनके परिवार, अपने इस पागल सदस्य को देख विधवा प्रलाप करे।
जरा सोनिया का बयान देखिये -- वो कहती हैं कि अन्ना पर व्यक्तिगत हमले नहीं होने चाहिए। सोनिया ये बतायें कि अऩ्ना पर व्यक्तिगत हमले कौन कर रहा हैं। अन्ना को भगोड़ा कौन कह रहा हैं, संघ का एजेंट कौन कह रहा हैं। गर नहीं उसे बूझा रहा तो ऐसी नेता को हम क्या कहें। जरा बेनी प्रसाद वर्मा का बयान देखिये -- ये कह रहे हैं कि अन्ना भाजपा के एजेंट हैं, और भारत पाक युद्ध के समय के भगोड़े भी हैं, तो बेनी जी, भारत सरकार और जिस सरकार में आप भी अपनी गाल लाल कर चुके हैं, बैठ कर क्या कर रहे थे, इसी दिन का इंतजार कर रहे थे क्या, कि कब सोनिया माता की जय बोलने का अवसर मिले, कब अपना सर राहुल के चरण कमलों पर रखने का मौका मिले। गर ऐसा हैं तो आपने सिद्ध कर दिया हैं - राहुल और सोनिया आप की हो गयी, क्योंकि आपने तो ऐसा बयान दे दिया कि आपने पागलपन में दिग्विजय और मणीष तिवारी को भी पीछे छोड़ दिया। इधर कांग्रेसियों को कहीं से पुराना चित्र मिल गया हैं, जिसमें नानाजी देशमुख के साथ अन्ना हजारे का फोटो हैं। इस पर वे बावेला मचाये हुए हैं और अपने कांग्रेस भक्त पत्रकारों को कह रहे हैं कि वे इस मु्ददे को उछालकर, अन्ना की हालत खराब कर दें, पर उन्हें पता नहीं कि जिसका जितना विरोध होता वो उतना ही शक्तिशाली बनकर उभरता हैं। मैं पूछता हूं कि --- नानाजी देशमुख की समाजसेवा व देशभक्ति पर कोई अंगूली उठा सकता हैं क्या। संघ क्या देशद्रोहियों की संस्था हैं क्या, गर संघ देशद्रोहियों की संस्था हैं, तो अटल बिहारी वाजपेयी तो संघ के प्रचारक भी थे, वो तो प्रधानमंत्री पद तक पहुंच गये। आपके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, हाल ही में उनके जन्मदिन पर, उनके घर पर पहुंचकर शुभकामनाएँ भी दी, तो क्या देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी संघ के एजेंट हैं क्या। देश के पूर्व प्रधानमत्री लाल बहादुर शास्त्री से लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी संघ पर कई सकारात्मक टिप्पणी की हैं तो वे सभी संघ और भाजपा के एजेंट थे क्या। पता नहीं आजकल के नेताओं को क्या हो गया हैं, कि सभी संघ - संघ चिल्ला रहे हैं, गर संघ से इतनी ही चिढ़ हैं तो तुम्हारे पास सत्ता हैं, कर क्या रहे हो, औरंगजेब और बाबर की तरह संघ के कार्यालय जहां जहां हैं - ढहवां दो, प्रतिबंध लगा दो, संघ के लोगों को रासुका के तहत जेल में डलवा दो, पर ये भी तुम नहीं कर सकते, क्योंकि आपकी औकात यहां की जनता जिसके पास शर्म और हया बची हैं, वो जानती हैं। आपके घटियास्तर के बयानों के आधार पर ही शायद आप जैसे नेताओँ को छुटभैया, रीढ़विहीन, दलाल, राजनीतिबाज, चिरकुट आदि नामों से विभूषित किया जाता हैं।
और अब मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी का बयान देखिये जो यहां की सभी अखबारों में छपा हैं, उनका बयान ही बताता हैं कि उन्हें भी अन्ना के आंदोलन से चिढ़ और कांग्रेस को पुनः सर्वत्र स्थापित करने में कितनी दिलचस्पी हैं। उनका बयान मैंने एक अखबार में पढ़ा -- पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के खिलाफ अभियान करने के टीम अन्ना के प्रस्ताव के औचित्य और नैतिकता पर सवाल खड़ा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने रविवार को चेतावनी दी कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के रास्ते में जो कुछ भी आयेगा, उसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। सवाल ये हैं कि टीम अन्ना के कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन चलाने पर चेतावनी देने वाले, कुरैशी कौन होते हैं। उनका काम हैं चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से कराना। पर उन्हें अन्ना या अन्ना की टीम ऐसा करने से रोक रही हैं क्या और गर कोई गलत करेगा, तो उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा। आप संवाददाताओं के माध्यम से टीम अन्ना को धमकाना चाहते हैं कि वे कांग्रेस के खिलाफ बोलने से बचे। आजतक किसी मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस प्रकार से किसी समाजसेवी के खिलाफ बयान नहीं दिया पर इन्होंने बयान देकर बता दिया कि आखिर इनके मन में क्या हैं। सवाल तो ये भी उठता हैं कि उधर कांग्रेस धर्म आधारित आरक्षण की घोषणा करती हैं, और ठीक तुरंत बाद ये पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा करते हैं, आखिर ये सब क्या हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। हमें तो लगता हैं कि देश में हर चीज का कांग्रेसीकरण हो गया हैं, जो देश के लिए खतरा हैं। लोकतंत्र के लिए खतरा हैं, जरुरत हैं एक और लोकनायक जयप्रकाश की, जो ऐसी कांग्रेसी सत्ता को धूल चटाने और चुनाव आयोग जैसी संस्था और देश में अन्य प्रशासनिक विभागों में फैलें कांग्रेसी भूतों से देश को मुक्त कराये। हमें लगता हैं कि अब देर नहीं, जल्दी ही वो दिन आयेगा, जब देश कांग्रेसियों के अत्याचार और शोषण से, विदेशी ताकतों के कुचक्रों से, मुक्त होगा, बस थोडी़ मेहनत और लगन से देश सेवा करने की हैं।