Saturday, March 12, 2016

वो तीर-धनुष उठायेंगे और हम घर छोड़कर भाग खड़े होंगे............

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के बड़बोले नेता हेमंत सोरेन पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के सुप्रीमो राज ठाकरे का गहरा प्रभाव है, जैसे राज ठाकरे समय – समय पर गैर मराठियों को उनकी औकात बताने के लिए नाना प्रकार के चिरकूटई टाइप के बयान देते रहते है, जिनके बयान आते ही, मनसे कार्यकर्ता गैर-मराठियों के खिलाफ मार-धाड़ करने के लिए निकल पड़ते है, ठीक उसी प्रकार हेमंत का बयान आज रांची से निकलनेवाले कमोवेश सभी अखबारों में पढ़ने को मिले। चूंकि हमारे देश के चिरकूट टाइप के बहुत सारे नेताओं को ये गलतफहमी हो गयी है, कि इस प्रकार के बयान देने से लोकप्रियता में बढ़ोत्तरी हो जाती है, इसलिए वे इस प्रकार का बयान देते रहते है।
अपने डेढ़ साल के मुख्यमंत्रित्व काल में हेमंत सोरेन ने इस प्रकार का बयान देने से खुद को बचा रखा था, शायद इस दौरान उन्हें दिव्य ज्ञान हासिल हो गया था कि मुख्यमंत्री पद पर रहकर ऐसा बयान नहीं दिया जाता। पर आज क्या हो गया...। हम आपको बता दें कि हेमंत को दिमाग देनेवाले बहुत सारे ऐसे लोग है, जिन्हें राजनीति की एबीसीडी नहीं आती...पर वो कहते है न, कभी – कभी मूर्खों और गधों की बातें भी दैवकृपा से सिद्ध हो जाती है...जिस के प्रभाव में आकर नेताओं का एक वर्ग, उन गधों और मूर्खों को दिव्य पुरुष मानकर, उसकी हर बातें इस प्रकार स्वीकार करता है, जैसे लगता है कि भगवान के श्रीमुख से निकली वाणी हो...
हेमंत को मालूम होना चाहिए कि इस प्रकार का बयान उनके भविष्य की राजनीति पर सदा के लिए प्रश्न चिह्न लगा देगा...हेमंत को जो लोग ओवैसी या राज ठाकरे बनने की सलाह दे रहे है...उन्हें नहीं पता कि वे आग से खेल रहे हैं...क्योंकि ये घटियास्तर की सलाह और चिरकूटई टाइप का बयान झारखण्ड को कहीं का नहीं छोड़ेगा...
झारखण्ड के लिए खुशी की बात है, कि इन दिनों पूरे देश में झारखण्ड की एक बेहतर तस्वीर गयी है...और ये झामुमो या हेमंत के चलते नहीं गयी...ये गयी है दीपिका और धौनी जैसे खिलाड़ियों की वजह से...अंशुता और सुमराई जैसे खिलाड़ियों की वजह से...। इनकी पार्टी ने तो झारखण्ड की वो दुर्गति कराई है कि सारा देश जानता है...। शायद हेमंत को पता नहीं कि झारखण्ड की जनता अभी तक भूली नहीं है कि इनकी पार्टी के नेताओं ने किस प्रकार रिश्वत लेकर नरसिंहा राव की सरकार बचाई थी...। जनता ये भी नहीं भूली है कि किस – किस को उनके लोगों ने पैसे लेकर राज्यसभा में पहुंचाया और बाद में वहीं व्यक्ति इनकी पार्टी और झारखण्ड को ठेंगा दिखाया...यानी ये तो वहीं बात हुई जो झारखण्ड को लूटवाया वो खुद को झारखण्ड का हितैषी बता रहा है...ये व्यक्ति जब सरकार में था, सत्ता में था तो डोमिसाइल समस्या हल नहीं किया...डोमिसाइल की फाइल को हाथ तक नहीं लगाया और जैसे ही भाजपा की सत्ता आयी, इसे डोमिसाइल पर प्रवचन करने की बात याद आ गयी...पता नहीं कैसे – कैसे नेता झारखण्ड में आ गये है जो अपनी ही माटी के दुश्मन बन गये....इनकी हरकत देख कर कौए और गीध तक शरमा जाय...।

Tuesday, March 8, 2016

इन महिलाओं को नमन........

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है...
इस दिन पूरे देश में महिलाओं को केन्द्र में रखकर कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं...पर हमारे लिए प्रत्येक दिन महिलाओं का हैं, क्योंकि कौन ऐसा दिन है, जिस दिन महिलाओं ने अपने कर्म से देश और समाज को नई दिशा न दी हों...हम ऐसी महिलाओं के प्रति आभार प्रकट करते है और नमन करते हैं...
1. सुमन गुप्ता – महिला आईपीएस अधिकारी, किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं, झारखण्ड में इन्होंने महिलाओं के सम्मान को आगे बढ़ाया, यहीं नहीं भ्रष्ट राजनीतिज्ञों के आगे कभी झूकी नहीं, कोई समझौता नहीं किया और अपने कर्मक्षेत्र में आज भी अडिग है...
2. रत्ना पुरकायस्था – आकाशवाणी से अपनी अलग पहचान बनानेवाली और फिलहाल दूरदर्शन केन्द्र पटना से जुड़ी रत्ना पुरकायस्था किसी भी पहचान की मोहताज नहीं, “सबकी दीदी” से मशहूर रत्ना जी, अनेक संघर्षों का सामना की है। हाल ही में जदयू के एक मंत्री ने उनके साथ अशोभनीय व्यवहार किया, धमकी दी, पर वह डरी नहीं, उस आततायी मंत्री का मुकाबला किया और वह अपने कर्तव्य क्षेत्र में आज भी अडिग है...
3. सीता सिन्हा – अवकाश प्राप्त शिक्षिका, उनकी आंखों में हमेशा प्रेम ही छलका। बच्चों को देख, वह भाव विह्वल हो जाती। बच्चों को इस प्रकार पढ़ाती, जैसे लगता कि एक मां अपने बच्चों का पोषण करती हैं। आज भी वह उन पढ़ाये हुए बच्चों को मिलती हैं तो घर ले जाकर, उन्हें बिना खिलाए, जाने नहीं देती...यानी इस प्रकार का प्रेम जैसे लगता हो कि उनका स्वयं का बेटा हो...पता नहीं वो दुनिया में है भी या नहीं, पर मैं उन्हें नहीं भूल सकता...
4. प्रमिला देवी – पटना, सगुना दानापुर में रहती है। एक आदर्श महिला। उनको मैंने आज तक नहीं देखा यह सोचते हुए कि कौन अपना है या कौन पराया...। जो भी मिला, सबको आदर, सबको सम्मान और सबको अपना समझा। किसी का दर्द देख लिया, तो वह बर्दाश्त नहीं कर पायेंगी और उनके पास जो भी कुछ होगा...वह मदद करने के लिए आगे निकल पड़ेंगी...सबका दर्द बांटा...पर इनका दर्द आज तक किसी ने बांटने की कोशिश नहीं की...ईश्वर इनकी बराबर परीक्षा लेता है...और मैं जानता हूं कि ये सारी परीक्षा में उत्तीर्ण होती रहती है...
5. दयामणि बारला – एक आदिवासी महिला, क्रांतिकारी महिला, जिनका जीवन ही संघर्ष के लिए बना है...कोई समझौता नहीं...केवल एक ही लक्ष्य, कहीं भी गरीबों के उपर किसी का जुल्म बढ़ा...ये सदैव आगे रहती है...हालांकि कई लोगों ने इनकी भावनाओं का गलत दोहन किया...पर वह इस पर ध्यान नहीं देती...वो सिर्फ अपने काम पर ध्यान देती है...।
6. रसना मरांडी – धनबाद की आदिवासी छात्रा, एनसीसी कैडेट्स – जिसने भारतीय वायुसेना के एएन32 विमान से हजारों मील दूर आकाश से चार बार छलांग लगायी यानी झारखण्ड की पहली महिला कैडेट, जिसे राज्य सरकार ने आज तक सम्मान नहीं दिया...जब मैं ईटीवी में था, तो इस महान बालिका पर एक समाचार भी बनाया था...उस वक्त के एनसीसी आफिसर कर्नल दीक्षित ने कहा था – मिश्रा जी मिलिये...झारखण्ड की महान आदिवासी बालिका से जिसने भारतीय वायुसेना के एएन32 विमान से अभूतपूर्व कारनामा कर दिखाया...

 7. डा. शिवानी झा - कतरास धनबाद की चर्चित महिला डाक्टर, सेवा भाव इतना कि पूछिये मत...कई बार स्थानीय विधायक द्वारा उन्हें धमकी दी गयी, पर वो अपने सेवा भाव से तनिक भी विचलित नहीं हुई...आज भी इनके यहां वंचितों, उपेक्षितों व आर्थिक रुप से बहुत ही कमजोर गरीब मरीज आते है और ये उन पर समान रुप से प्रेम लुटाती है, सेवा करती है...
8. डा. लीना सिंह - धनबाद में रहती है...एक आदर्श महिला डाक्टर...जिन्हें अपने आदर्शवादिता और भारतीय संस्कृति पर नाज है...ये गर्व से कहती है कि हमें भारतीय होने पर और खासकर भारतीय मूल्यों के साथ जीने में बहुत ही आनन्द आता हैं...साथ ही ये अन्य लोगों से भी अपने भारतीय मूल्यों के साथ जीने का अनुरोध करती है...

Friday, February 26, 2016

क्या आप जानते हैं..............

क्या आप जानते है, कि भारत में कौन सा अखबार या चैनल किस पार्टी या दल का आरती उतारता है/या भोपू है...गर नहीं जानते तो आज ही जानिये...ये देश के लिए और आपके लिए अत्यंत आवश्यक है....
जानिये अपने अखबारों और चैनलों को, वे कितने गिरे हुए हैं और किस पार्टी/दल की भक्ति में लग कर, भारत की एकता व अखंडता को चोट पहुंचा रहे हैं, अपने बच्चों को भी बताइये...क्योंकि ये बच्चे बहुत ही कोमल है, जो आज सीखेंगे, वहीं युवा होकर देश को देंगे...बच्चों पर किसी भी दल के विचार को मत थोपिये, उन्हें जो अच्छा लगे, करने दें, बस उनका मार्गदर्शन करते रहे...उन्हें वामपंथी बनना है, या दक्षिणपंथी बनना है, या विशुद्ध रुप से मानवीय मूल्यों को आत्मसात करना है...उन्हें इसकी खुली छूट दीजिये...हालांकि वामपंथी गुंडों का एक दल नहीं चाहता कि देश में समरसता रहे, इसके लिए हर प्रकार के छल -प्रपंच का वो शुरुआत कर चुका है...उसके बाद भी अब देखिये....
1. हिन्दुस्तान - ये अखबार अपने स्थापना काल से कांग्रेस प्रेम के लिए प्रसिद्ध है, ये आज भी कांग्रेस का गुण गाता है...उदाहरण 25 फरवरी का अखबार देख लीजिये... ज्यादातर अखबार स्मृति ईरानी के धुंआधार भाषण से पटा है, पर ये ज्योतिर्दित्य सिंधिया में देश ढूंढ रहा है...इसके मालिक कई बार कांग्रेस से उपकृत होकर राज्यसभा सदस्य भी बन चुके है...इसलिए कांग्रेस इसकी पहली पसंद और दूसरे में नीतीश और लालू को ये अपना सब कुछ समझता है...
2. प्रभात खबर - ये अखबार जदयू का खास अखबार है... इसे नीतीश कुमार में भगवान नजर आता है...इसका प्रधान संपादक हाल ही में जदयू का सांसद बना है...इसके अखबारों में जदयू के नेताओं व सांसदों के वैचारिक आलेख खुब छपते है, फिलहाल लालू व राहुल भक्ति में आकंठ डूबा है, भाजपा से इसकी नहीं पटती...
3. दैनिक जागरण - विशुद्ध रुप से भाजपाई अखबार है, इसके मालिक भाजपा से उपकृत होकर कभी सांसद भी बन चुके है...ये भाजपा के खिलाफ सुनने को तैयार नहीं, पूर्णतः पत्रकारिता को व्यवसाय मानकर ये चलता है...मिशन इसके लिए कुछ भी नहीं....
4. दैनिक भास्कर - ये अखबार पूर्णतः कांग्रेस और भाजपा का सम्मिश्रण है...समयानुसार कभी मिशन तो कभी व्यवसायिक दृष्टिकोण अपनाता है...इसके लिए अखबार ही सब कुछ है...जनता का मिजाज भांपता है, वहीं दृष्टिकोण अपनाता है...यानी जस जैसा, तस तैसा...हर जगह इसकी पकड़ है, हर वर्ग के नेताओं की यह जय जय करता है, ताकि जब कभी किसी की सत्ता आये तो उसका व्यवसायिक लाभ ये उठा सकें...

5. बीबीसी - इसका सारा समाचार भारत विरोध से शुरु होता है और भारत विरोध पर ही खत्म हो जाता है....
6. द टेलीग्राफ - कट्टर वामपंथ समर्थक...
7. द टाइम्स आफ इंडिया - कांग्रेस और वामपंथ समर्थक....
8. हिन्दुस्तान टाइम्स - कट्टर कांग्रेस समर्थक...
9. हिन्दु - कट्टर भाजपा आलोचक/वामपंथ समर्थक...
7. आनन्द बाजार पत्रिका - कट्टर वामपंथ समर्थक....
8. एनडीटीवी - कट्टर भाजपा आलोचक, इसका वश चले तो भाजपाइयों को देखते ही गोली मार दें...कट्टर वामपंथी....उसका उदाहरण देख लीजिये...24 फरवरी को स्मृति ईरानी संसद में विपक्षी दलों का जवाब दे रही थी...भाजपा के कट्टर विरोधी होने के कारण ये स्मृति ईरानी का लाइभ की जगह इंटरनेशनल एजेंडा दिखा रहा था, जबकि सारे चैनल अपने सारे कार्यक्रम रद्द कर स्मृति ईरानी का लाइभ दिखा रहे थे...देश में किसानों ने आत्महत्या की...देश में भ्रष्टाचार का कई मुद्दा छाया रहा, जिससे देश के सम्मान में बट्टा लगा...इसे शर्म नहीं आयी...पर जैसे ही एक कन्हैया की गिरफ्तारी हुई...इसने भाजपा विरोध के नाम पर, वामपंथियो के समर्थन के नाम पर अपना मुंह काला करते हुए अपना प्रसारण कुछ समय के लिए ब्लैक कर दिया...इसका एकमात्र सिद्धांत वामपंथ को भारत में स्थापित करना और दिल्ली के लाल किले पर लाल झंडा लहराता हुआ देखना है....
9. आजतक - कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समर्थक....
10. एबीपी - कट्टर कांग्रेसी और वामपंथी समर्थक...
11. आईबीएऩ 7 - भाजपा समर्थक...
12. टाइम्स नाउ - न्यूट्रल....
13. जीटीवी - विशुद्ध भाजपाई....
14. ईटीवी - इन दिनों भाजपा के समर्थन में....
15. इंडिया टीवी - भाजपा समर्थक...
जो देश में रहकर, देश के लिए पत्रकारिता नहीं करता हो...वो ज्यादा देशद्रोही है...जो एक दल के प्रति समर्पित रहता है...वो ज्यादा देशद्रोही है...पत्रकार किसी दल का नहीं होता...अखबार/चैनल किसी दल का नहीं होता...उसे तो पूर्णतः निरपेक्ष होते हुए, सत्य का आश्रय लेना चाहिए...पर यहां तो कोई भाजपाई तो कोई कांग्रेसी तो कोई वामपंथी पायजामा पहन कर दिये जा रहा है....ऐसे लोगों की हम कड़ी भर्त्सना करते हैं.....

Sunday, February 21, 2016

एनडीटीवी ने अपना नकाब उतारा.........

भारतीय संस्कृति में एक वाक्य बार-बार सुनने को मिलता है...
जो होता है, अच्छे के लिए होता है...
जेएनयू की घटना ने भी बहुत सारे लोगों के चेहरे पर से नकाब उठा दिया है...
नकाब उठने के बाद, क्या होता है...आप सभी जानते है , फिर सामने वाले से शर्म और हया सब खत्म...
एनडीटीवी ने स्पष्ट कर दिया कि वह विशुद्ध रुप से वामपंथी है...न तो उसे कांग्रेस से मतलब है और न ही भाजपा या उसके अन्य आनुषांगिक संगठन से...
उसने यह भी दावा ठोक दिया कि जो वामपंथ से टकरायेगा तो फिर एनडीटीवी भी उसे नहीं छोड़ पायेगा...
ऐसे तो सारा बुद्धिजीवी वर्ग जानता था कि ये चैनल वामपंथी चैनल है, पर सामान्य जनता नहीं जानती थी, आज सामान्य जनता जान गयी है...
वो अगर सारे चैनलों की सूची बनायी है कि कौन चैनल किस पार्टी का भोंपू है,तो एनडीटीवी के लिए भी उसने सूची दर्ज कर ली कि ये विशुद्ध वामपंथी चैनल है...
इसका भी मकसद कश्मीर को पाकिस्तान के हाथों सौंप देना, अमरीका को साम्राज्यवादी बताना और चीन को अपना दोस्त बताना, हिन्दूओं को गाली देने का तो उसकी पुरानी आदत है, जरा देखिये एनडीटीवी के संपादक ने क्या शिगुफा छोड़ा है, जिस शिगुफे को आजकल वामपंथी नेता छाती से लगाकर फेसबुक पर शेयर किये जा रहे है...वो है...
एनडीटीवी इंडिया के संपादक ऑनिंद्यो चक्रवर्ती के मुताबिक यह जेएनयू बनाम जनेऊ की लड़ाई है...ये महापंडित ऑनिंद्यो चक्रवर्ती, तोगड़िया टाइप भाषण तो लिख दिया पर उसे पता हैं कि गांव में रहनेवाले उन लाखों गरीबों पर क्या गुजरेगी...जब उसके इस भाषण टाइप का इस्तेमाल करना वामपंथी गुंडे शुरु कर देंगे...
जैसा कि केरल के कन्नूर जिले में हुआ वामपंथी गुंडों ने सुजीत की हत्या उसके माता-पिता के सामने ही निर्ममता से कर दी...
ऐसे हम आपको बता दें कि एनडीटीवी के भी कई संवाददाता और कैमरामैन कोई दुध के धुले नहीं, बल्कि ये भी एक नंबर के बदमाश है...और इसकी जानकारी प्राप्त करनी हो तो हमसे संपर्क करें...हम आपको प्रमाण के साथ बतायेंगे...

Tuesday, February 16, 2016

बाकी सब गधे हैं...........

दुनिया में एक नई जाति व एक नये संप्रदाय का जन्म हुआ है जो खुद को सर्वाधिक एकमात्र बुद्धिमान जाति व संप्रदाय समझता है, जिसे वामपंथी कहते है...इन वामपंथियों के अनुसार दुनिया की सारी बुद्धि उनके गुलाम है...ये कुछ भी कहे,करे...जायज है...इनका विरोध या इनके खिलाफ कुछ भी कहने का किसी को अधिकार नहीं...इनके अनुसार वामपंथी सर्व गुण संपन्न...बाकी सब गधे है...इन्हें हर प्रकार की छूट मिल जानी चाहिए...देश के खिलाफ बोलने की...देश की बखिया उधेड़ देने की...हराम की कमाई और हराम की पढ़ाई करने के छूट की...ताकि ये सब को जी भरकर गरिया सकें...इन वामपंथियों के भजन कीर्तन मंडली में कांग्रेस का पप्पू राहुल, बिहार में गुंडागर्दी-बेहयाई को पुनर्स्थापित करनेवाले नीतीश, देश में एकमात्र ईमानदारी के भूत को अपने शरीर में डालनेवाले केजरीवाल शामिल हैं...अभी - अभी पता चला कि कोई प्रशांत भूषण, देशद्रोह का मुकदमा झेल रहे कन्हैंया का केस लड़ेगा...ये वहीं प्रशांत भूषण है, जो कई बार कश्मीर पर अपने बयानों को लेकर विवादों में रहा है, जो कहता है कि कश्मीर भारत का अंग नहीं हैं, जिसे लेकर उसकी कई बार पिटाई भी हो चुकी है...यानी देश के खिलाफ सारे के सारे घटियास्तर के लोग एक हो गये है...इन्होंने संकल्प कर रखा है कि इसी बहाने हम कश्मीर पाकिस्तान को सौंपेंगे, कश्मीरी अलगाववादी ताकतों और आतंकियों को हर संभव मदद करेंगे और भारतीय सेना का मनोबल तोड़ेंगे, साथ ही आतंकियों का सामना कर रहे कश्मीरी हिन्दूओं को एक - एक कर कश्मीर से निकाल कर रहेंगे...ये हैं हमारा देश...ये हैं हमारे देश के घटियास्तर के नेता...भारत का तो इतिहास ही रहा है कि यहां देश भक्त कम और गद्दारों-देशद्रोहियों की संख्या अत्यधिक रही हैं...तभी तो ये देश हजारों वर्षों तक गुलाम रहा...
जरा झलक देखिये...
1. पृथ्वी राज चौहान जब मुहम्मद गोरी का मुकाबला कर रहा था तो जयचंद, मुहम्मद गोरी का समर्थन कर रहा था...
2. बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए राणा सांगा ने पत्र लिखा था।
3. जब अकबर के खिलाफ महाराणा युद्ध लड़ रहे थे तो मान सिंह अकबर के साथ रिश्तेदारी में जुटा था।
4. जब रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों को धूल चटा रही थी, तब सिंधिया परिवार अंग्रेजों के साथ मित्रता निभा रहा था...तभी तो सुप्रसिद्ध कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान ने लिखा - अंग्रेजों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी, खुब लड़ी मर्दानी वो तो........
5.जब भगत सिंह देश में क्रांति का बीज बो रहे थे, तो उनके खिलाफ अदालत में गवाही देनेवाला शोभा सिंह आ खड़ा हुआ था...
6. जब महात्मा गांधी ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ किया, तो वामपंथियों ने महात्मा गांधी का साथ नहीं दिया...
7. इंदिरा गांधी ने जब 1975 में आपातकाल की घोषणा की तब उसके खिलाफ लोकनायक जयप्रकाश ने आंदोलन चलाया,सारी जनता लोकनायक के साथ थी, पर वामपंथी इंदिरा के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे...
एेसे कई उदाहरण मेरे पास है...जिससे पता चलता है कि हमारे देश में शुरु से ही गद्दारों की फौज चलती रही है...जो देश के लिए मरनेवालों के खिलाफ आंदोलनरत रहती हैं, ज्यादातर मामलों में ये गद्दार कामयाब हो जाते है...जैसा कि उपर के झलकियों से पता लग जाता है...और एक बार जेएनयू के मामले में भी ऐसा ही दीख रहा हैं, अब देखना ये है कि इस बार देशभक्त जीतते हैं या देश के गद्दार...

Thursday, February 11, 2016

पैसे से कलम सधे,पैसा बावन बीर...........

हाहाहाहाहाहाहाहाहाहा......
संपूर्ण समाज और व्यवस्था को चौपट करके रख देनेवाला और प्रतिदिन अपने कारगुजारियों से सामाजिक व्यवस्था को चोट पहुंचानेवाला रांची के एक अखबार का संपादक आज विनय महतो प्रकरण पर त्वरित टिप्पणी के नाम पर प्रवचन लिख रहा है...
हाहाहाहाहाहाहाहाहाहा......
रांची पुलिस लगता है कि मुंबईया फिल्म ज्यादा देखती है, जरा ध्यान दीजिये फिल्म - हेट स्टोरी 3 और फिल्म - दृश्यम्, इन दोनों की कहानियां के कुछ प्रमुख अंश, आपको विनय महतो प्रकरण में भी मिल जायेंगे...
हाहाहाहाहाहाहाहाहाहा......
विनय महतो प्रकरण में छह दिनों तक अखबारबाजी और चैनलबाजी होती रही, पर इतने महत्वपूर्ण विषय पर न तो भाजपा, न ही कांग्रेस, न ही झामुमो, न ही आजसू, न ही राजद, न ही झाविमो, न ही भाकपा, न ही माकपा, न ही भाकपा माले के किसी बड़े नेता के बयान आये, सभी ने होठ सील रखे थे, हमें लगता है कि इस पर ज्यादा कुछ लिखने की जरुरत नहीं, आप सभी बुद्धिमान है, समझ लीजिये...
हाहाहाहाहाहाहाहाहाहा......
ध्यान दीजिये, विनय महतो दुनिया से चला गया, पर रांची पुलिस ने ऐसा तरीका निकाला कि सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे। यानी सफायर इंटरनेशनल स्कूल में लग रहे दाग को भी रांची पुलिस ने बचा लिया, जो उसकी प्राथमिकता में थी, जो विनय महतो हत्याकांड प्रकरण में पकड़े गये, जिन पर आरोप है, वे भी जल्दी ही कानूनी पचड़ें से मुक्त हो जायेंगे, क्योंकि हत्याकांड में दो आरोपी नाबालिग है, ऐसे में इन पर जुवेनाइल के तहत मामला चलेगा, जिसमें ज्यादा दिन और कड़ी सजा मिलनी मुश्किल है। शिक्षिका के पति आरिफ पर सबूत मिटाने का आरोप है, जो घटनास्थल पर था ही नहीं, इसी प्रकार का आरोप शिक्षिका नाजिया पर है, यानी हत्या का सीधा मामला नहीं और पूरा परिवार कुछ ही सालों बाद आरोप से मुक्त और लीजिये सारा मामला टायं-टायं फिस्स। सचमुच पैसे में बहुत ताकत होती है...
हाहाहाहाहाहाहाहाहाहा......
पैसे होने पर नेताओं की बोली बंद हो जाती है, पैसे होने पर पुलिस भी आपके समक्ष रामायण गाती है, पैसे होने पर पत्रकारों की टीम भी विज्ञापन धर्म निभाते हुए, आपकी आरती गाती है...
इसलिए, मैं कहता हूं -
पैसा में गुण बहुत है, सदा कमाओ वीर।
क्योंकि पैसा है तो सब है, खाएं मक्खन वीर।।
पैसा से नेता सधे, पैसे से वर्दी चीर।
पैसे से कलम सधे,पैसा बावन बीर।।

Sunday, January 17, 2016

प्रभात खबर की गलथेथरई.......

अमर शहीद परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की पवित्र मिट्टी झारखण्ड पहुंच चुकी है। 44 साल बाद अपने वीर सैनिक की मिट्टी को देख सभी अभिभूत है, सभी ने मिलकर स्वागत किया है। राज्य के सारे अखबार (प्रभात खबर को छोड़कर) प्रसन्न है, इस अवसर पर विशेष पृष्ठ दिये है। राज्य सरकार के अधिकारी व राज्य सरकार संतुष्ट है, जिसने अपना पति गवांया, वो बलमदीना खुशी से फूली नहीं समा रही, अलबर्ट एक्का का सारा परिवार आनन्दित है, जो लोग मिट्टी लाने के लिए त्रिपुरा गये थे, उस टीम में शामिल सभी लोगों की आंखे, इस खुशी के पल को देखकर छलक रही हैं पर प्रभात खबर को प्रमाणिक दस्तावेज चाहिए कि ये जो मिट्टी आयी है, उसका क्या सबूत है कि ये मिट्टी अलबर्ट एक्का की ही है...
प्रभात खबर ने टीम में शामिल एक सदस्य से ऐसे – ऐसे सवाल पूछे है, जिसे पढ़कर आपको उस अखबार की घटिया मानसिकता का पता चल जायेगा...
अखबार ने बलमदीना के आंचल में पड़े शहीद की मिट्टी के प्रमाणिक दस्तावेज के बारे में पूछा है...
जबकि सारे लोग जानते है, वो अखबार खुद जानता है कि जहां युद्ध होते है, वहां वीरों के शव को किस प्रकार सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है, पर प्रभात खबर को दस्तावेज चाहिए...
जबकि वो अखबार अच्छी तरह जानता है कि ढुलकी गांव के सारे लोग, वो व्यक्ति भुवन दास जिसने वीरों के शव को दफनाया था, कहा है कि यहीं वह जगह हैं, जहां उसने दफनाया था, जहां आज एक मकान बन गया है, जो मकान गोपाल चंद्र दास का है, गोपाल चंद्र दास अपने मकान के आंगन को खुद ही अपने हाथों से खोद डालते है और विन्सेंट एक्का अपनी मां के आंचल में वो पवित्र मिट्टी डाल देता है...इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है...
और जो प्रभात खबर मिट्टी मंगवाया था, वहां से 100 मीटर की दूरी से लाई गयी मिट्टी थी...यानी गलत पर गलत प्रभात खबर किये जा रहा है और ढिठई से खुद को औरो से बेहतर बताने की असफल कोशिश किये जा रहा है। जिसके कारण उसकी लगातार जगहंसाई होती जा रही है...
पर बेशर्म को शर्म कहां...वाली कहावत बार बार उसके साथ चरितार्थ हो रही है...
आज एक बार फिर दैनिक भास्कर ने प्रभात खबर की पत्रकारिता पर ही सवाल उठा दिया है, जो सही भी है...
प्रभात खबर बताये कि क्या एक शहीद की मिट्टी इसी तरह लायी जाती है, जैसा कि उसने लाकर किया...अरे एक सामान्य व्यक्ति की मौत हो जाने पर भी उसके परिवार वाले भी उसके मिट्टी को इस प्रकार नहीं लाते और न ले जाते है, जैसा कि प्रभात खबर ने किया...प्रभात खबर को इस कुकर्म के लिए अविलम्ब सारे झारखण्डवासियों से माफी मांगनी चाहिए...पर वो माफी क्यूं मांगेगा, उसे तो लगता है कि दुनिया की सारी अच्छाइयां उसी में समायी हुई है...
जरा प्रभात खबर से पूछिये कि 3 दिसम्बर को उसी के द्वारा आयोजित रथ को रांची के अलबर्ट एक्का चौक से प्रस्थान करने वक्त उसके कितने लोग मौजूद थे...वो तो पुष्प वृष्टि कराने का निवेदन भी किया था...पर निवेदक की पूरी टीम पुष्पवृष्टि के समय ही गायब थी, जिसका वर्णन में पूर्व के एपिसोड में कर चुका हूं...
चलिए...अब तो जगजाहिर हो चुका है...कि प्रभात खबर क्या है? उसे गलथेथरई करने दीजिये...क्योंकि गलथेथरई में उसे महारत हासिल है...
प्रभात खबर ने ओछेपन में सवाल भी दागे है, वो क्या है, जरा देखिये...
प्रभात खबर के अनुसार...
अनुत्तरित सवाल
रतन तिर्की ने 30 नवंबर को संवाददाता सम्मेलन कर मिट्टी पर सवाल उठाते हुए मिट्टी की जांच की मांग की थी, तो क्या इस बार मिट्टी की जांच कर उसे लाया गया है. क्या यह संभव है कि जमीन से छह-आठ फीट खुदाई कर मिट्टी ली जाये.
अंतत:
प्रभात खबर का मानना है कि ऐसे सवालों का कोई अंत नहीं है. यह पवित्र मिट्टी है. जिसमें अलबर्ट एक्का के परिवार की आस्था हो, जो वे चाहते हैं, वही होना चाहिए, राजनीति नहीं. बेहतर है सब मिट्टी मिला कर उनके गांव में समाधि बने, ताकि परमवीर अलबर्ट एक्का के प्रति श्रद्धा और बढ़े.
प्रभात खबर को हमारा जवाब...
रतन तिर्की ने 30 नवंबर को संवाददाता सम्मेलन कर, प्रभात खबर द्वारा लायी गयी मिट्टी पर सवाल उठाकर, जांच की मांग कर यह पूछने की कोशिश की थी कि आखिर कैसे ये मान लिया जाय कि ये जो मिट्टी लाई गयी है, वो अलबर्ट एक्का की कब्र की है, इसका उत्तर उस वक्त न तो प्रभात खबर के पास था और न ही अन्य के पास...
लेकिन आज जो मिट्टी आयी उसका जवाब सभी के पास है...
वो व्यक्ति जिसने दफनाया यानी भुवन दास साफ बताया कि गोपाल चंद्र दास का जहां मकान बना है, वहीं दफनाया गया और डेढ़ महीने जो पहले मिट्टी लाई गयी थी, वो उस जगह की है ही नहीं...तो फिर ये अनुत्तरित सवाल कैसे रहा...ये तो वहीं बात हुई कि रस्सी जल गई पर बल नहीं गया...
अंततः अरे जब बलमदीना संतुष्ट है, पूरा झारखण्ड संतुष्ट है तो प्रभात खबर के चीखने – चिल्लाने से क्या होगा? उसके चीखने – चिल्लाने से झूठ सच थोड़े ही हो जायेगा...चीखते रहो भाई प्रभात खबर...
इतिहास लिखा गया...
कि 44 साल बाद परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की मिट्टी 16 जनवरी 2016 को रांची लाई गयी थी, जिसका सभी ने शानदार स्वागत किया और प्रभात खबर ने परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का के मिट्टी लाने के नाम पर डेढ़ माह पहले झारखण्ड की जनता की आंखों में धूल झोकने की कोशिश की थी, जिस पर परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना ने सदा के लिए विराम लगा दिया।
ये घटना उन पत्रकारों और अखबारों के लिए सबक भी है, जो खुद को सर्वश्रेष्ठ बनाने के चक्कर में गलत पर गलत करते चले जाते है...प्रभात खबर को मानना होगा कि उसने अलबर्ट एक्का की मिट्टी लाने के प्रकरण पर अपनी सारी प्रतिष्ठा पूरी तरह से गंवा चुकी है...

Saturday, January 16, 2016

प्रभात खबर की हालत पस्त, बलमदीना का अभुतपूर्व स्वागत अर्थात् अलबर्ट एक्का को हृदय से सम्मान...

आज रांची से प्रकाशित होनेवाले प्रभात खबर को छोड़कर सभी अखबारों ने हृदय को आह्लादित व भावविभोर कर देनेवाली खबर, प्रथम पृष्ठ पर छापी है। खबर है – 44 साल बाद परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना, वीर शहीद की मिट्टी ला रही है। रांची के कई सामाजिक संगठनों ने उक्त मिट्टी का तहेदिल से स्वागत करने का फैसला ही नहीं लिया, बल्कि स्वागत करने के लिए निकल पड़े है, भारतीय सेना का तो जवाब ही नहीं, त्रिपुरा में जिस प्रकार से भारतीय सेना ने बलमदीना और उनके साथ गयी टीम का स्वागत किया। वह अदभुत है। बलमदीना का तो त्रिपुरा के मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने जिस प्रकार से स्वागत किया। उस स्वागत के संस्मरण से आज प्रभात खबर को छोड़कर सारे अखबार पटे हुए है, पर प्रभात खबर में इस खबर को वो तवज्जो नहीं मिली है। शायद प्रभात खबर को लगता है कि यह खबर उनके लिए उतनी कोई मायने नहीं रखती। मायने रखेंगी भी कैसे?, क्योंकि उसे लगता है कि गर ये खबर छापेंगे तो उसकी पोल खुल जायेंगी, जबकि सच्चाई ये है कि प्रभात खबर ये खबर छापे या न छापे, उसकी पोल व कलई एक तरह से झारखण्ड की समस्त जनता के सामने खुल गयी है कि वो कैसा अखबार है?
हम आपको बता दें कि जिस प्रकार का घमंड आज प्रभात खबर ने पाल रखा है, ठीक इसी प्रकार का घमंड कभी बिहार से प्रकाशित होनेवाली अखबार आर्यावर्त को भी था, पर आज आर्यावर्त कहां चला गया, सभी को पता है। हम आज दावे के साथ कह सकते है कि जिस प्रकार आर्यावर्त अखबार का सूर्य सदा के लिए अस्त हो गया, ठीक इसी प्रकार प्रभात खबर का भी सूर्य अब सदा के लिए अस्त होने चला है...
हम इस अवसर पर दैनिक भास्कर अखबार का तहेदिल से स्वागत करना चाहेंगे, जिसने शुरुआत से ही प्रभात खबर की झूठी खबर और उसकी ढोंग का वो आपरेशन किया, जिस आपरेशन से प्रभात खबर की बची-खुची सम्मान भी समाप्त हो गयी। प्रभात खबर ने परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का के नाम पर 3 दिसम्बर 2015 को किस प्रकार का ढोंग व पाखंड किया। उस ढोंग व पाखंड को मैंने भी उजागर किया था। इसे आप मेरे ही फेसबुक पर या www.vidrohi24.blogspot.in पर पढ़ या देख सकते है। अब तो एक तरह से स्पष्ट हो गया कि प्रभात खबर ने अमर शहीद परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का के नाम पर किस प्रकार झारखण्ड के लोगों का भावनात्मक शोषण किया और अमर शहीद का अपमान किया। सवाल एक बार फिर क्या प्रभात खबर को उसके इस हरकत के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए? इस सवाल पर मेरा उत्तर होगा – इसकी सजा, उसे ईश्वर देगा, जो उसकी सजा पर निर्णय कब का सुना चुका है।
हम तहेदिल से मुख्यमंत्री रघुवर दास का भी अभिनन्दन करना चाहेंगे, जिन्होंने प्रभात खबर की बातों में न आकर, बिना देर किये, त्वरित निर्णय लिया और अलबर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना की भावनाओं का कद्र करते हुए, एक टीम गठित कर, वो कर दिखाया कि आज दूध का दूध, पानी का पानी हो गया। ऐसे ही मुख्यमंत्री की झारखण्ड को जरुरत है, जो अखबार के इशारों पर न चलकर, स्वविवेकानुसार निर्णय करता है, यहीं नहीं अमर शहीद के परिवारों का सम्मान ही नहीं, बल्कि उसके आदेश को सर माथे लगाता है...
रघुवर दास जी, सचमुच आप प्रशंसा के पात्र है...
आपने वो कार्य कर दिखाया, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती...
आपने एक अखबार के ढोंग व पाखंड को भी उजागर कर दिया...
सही मायनों में आपने झारखण्ड का सम्मान रखा है...
उन वीर पुत्रों की मां, पत्नियां, बेटे- बेटियां आपको जरुर दुआएं देंगी, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व खो दिया...
या देश के लिए आज भी सर्वस्व खोने को तैयार हैं...

Wednesday, January 13, 2016

ऐसे ही युवा मंत्री की झारखण्ड को जरुरत है......

ऐसे ही युवा मंत्री की झारखण्ड को जरुरत है...
जो इसकी परवाह नहीं करें कि उसका भाषण सुननेवालों की संख्या कितनी है...
या हैं भी या नहीं...
वो डंके की चोट पर अपने इरादे को स्पष्ट रुप से रखे...
और वहीं करें, जिसका संकल्प लेकर वो घर से निकला है...
आज सुबह – सुबह एक अखबार पर नजर पड़ी है, प्रथम पृष्ठ पर राज्य के पर्यटन मंत्री अमर कुमार बाउरी का भाषण देते हुए तस्वीर है, जिसमें दिखाया गया है कि अमर कुमार बाउरी भाषण दे रहे हैं, पर उन्हें सुननेवाला कोई नहीं...
मेरा मानना है,
कि हम भारत में रहते हैं...
भारत के शब्द है ये, जो कहते है कि आप को जो करना है, करो...
क्योंकि सुक्ष्मावस्था में बहुत सारे ऐसे जीव है, जो आपको देख व सुन रहे है...
बधाई अमर कुमार बाउरी जी, आपने वो कर दिखाया, जो बहुत कम ही लोग करते है...
दूसरा नेता रहता या उस अखबार का ही कोई प्रतिनिधि होता तो भाग खड़ा होता...यह कहकर कि यहां तो कोई हैं ही नहीं, तो भाषण किसको सुनाऊँ...
खैर,
इसी घटना को देख व सुनकर मुझे ईटीवी धनबाद याद आ गया...। जब मैं ईटीवी धनबाद कार्यालय में कार्यरत था, तब उसी दौरान ईटीवी हैदराबाद मुख्यालय से एंटी टूबैको कंपेन चलाने को कहा गया। संभवतः जून का महीना था, जिस दिन से एंटी टूबैको कंपेन चलना था, संयोग से ठीक उसके एक दिन पहले विश्व हिन्दू परिषद ने भारत बंद का ऐलान कर दिया। हैदराबाद से फोन आया कि चूंकि विश्व हिन्दू परिषद ने भारत बंद का ऐलान कर दिया है, इसलिए एंटी टूबैको कंपेन दूसरे दिन से चलाया जायेगा। मैंने तुरंत सवाल खड़ा किया कि घर में शादी- विवाह होता, और उसी दिन कोई संगठन बंद का कॉल कर देता तो क्या आनन-फानन में शादी – विवाह का दिन भी बदल जाता क्या? हैदराबाद वालों ने कहा कि आप पूर्व निर्धारित तिथि अनुसार कार्य करें, बाकी जगहों पर एक दिन बाद शुरु होगा और मैंने पूर्व निर्धारित तिथि और समयानुसार कार्यक्रम को संपन्न कराया। कहीं कोई दिक्कत नहीं। जिनको भारत बंद करना था, वे भारत बंद किये और हमें एंटी टूबैको कंपेन चलाना था, मैंने एंटी टूबैको कंपेन चलाया। इसी बीच इस कार्यक्रम के उद्घाटन के लिए, हमें एक आदमी की तलाश थी, जिसने कभी टूबैको को यूज नहीं किया हो। संयोग से पता चला कि धनबाद रेल मंडल के तत्कालीन मंडल रेल प्रबंधक अम्बरीश कुमार गुप्ता इन सबसे वंचित है। मैने उनसे उद्घाटन के लिए आग्रह किया, मेरे आग्रह को स्वीकार करते हुए, वे ठीक समय पर पहुंचे। उस वक्त भी मेरे उद्घाटन कार्यक्रम के समय एक भी व्यक्ति मौजूद नहीं था, फिर भी चूंकि समय निर्धारित था, मैंने बिना किसी के परवाह किये, कार्यक्रम का उद्घाटन करवाया, क्योंकि मैं जानता था कि समय का क्या महत्व है?
और ऐसे भी, कोई रहे या न रहे...आप जो करने जा रहे है, उसकी धमक जहां तक पहुंचनी है, पहुंचेगी ही, गर आपका चरित्र और लक्ष्य सही है, लीजिये और हम इसमें कामयाब भी हुए।
इस कार्यक्रम को संपन्न कराने में जिन्होंने हमारी दिल से मदद की, उन्हें मैं भूल नहीं सकता। वे थे जगदीश राव, जो आजकल वाराणसी में हैं और दूसरे रहमान भाई जो धनबाद क्रिकेट से जूड़े है...सचमुच आप दोनों एक बार फिर याद आ गये...मैं आप दोनों को भूल नहीं सकता, भाई।

Monday, January 11, 2016

जब भी “हिन्दुस्तान” और “दैनिक जागरण” अखबार......

जब भी “हिन्दुस्तान” और “दैनिक जागरण” अखबार देखता हूं, तो हृदय पुलकित हो जाता है, साथ ही इस अखबार के दिल्ली से लेकर रांची तक के संपादकों को हृदय से आभार व्यक्त करने का दिल करता है...
क्योंकि एकमात्र यहीं दोनों अखबार है, जो युवाओं के लिए प्रेरणापुंज हैं...
युवाओं के लिंग कैसे बढ़े?, उनके लिंग में कैसे जोश आये?, इस पर नाना प्रकार के विज्ञापन ये दोनों अखबार प्रत्येक दिन प्रकाशित करते हैं...
जापानी तेल से लेकर लिंगवर्द्ध यंत्र तक के विज्ञापन इनके पास है...बस इनके अखबार पढ़िये और अपने लिंग में आज ही जोश भरिये या लिंग इतना बड़ा कर लीजिये कि आपको देखकर कोई कहे, वाह क्या इनका लिंग है?
ज्यादा जानकारी के लीजिए आज का ही “दैनिक जागरण” का पृष्ठ संख्या 10 वर्गीकृत और पृष्ठ संख्या 15 पर नजर दौड़ाइये और “हिन्दुस्तान” का वर्गीकृत पृष्ठ संख्या 8 और पृष्ठ संख्या 15 देख लीजिये...गर आपकी सेक्स संबंधी सारी समस्याओँ का समाधान नहीं हो गया तो फिर कहियेगा...हां जब सेक्स संबंधी सारी समस्याएं समाप्त हो जाये तो एक धन्यवाद संबंधित पोस्टकार्ड इन संपादकों को जरुर भेजिये...ताकि वे इस प्रकार का विज्ञापन और दूगुने उत्साह से छाप कर अपने कोषागार को और समृद्ध कर सकें और युवाओं का सही मार्गदर्शन कर सकें...और जिनका इस विज्ञापन से भला नहीं हुआ या जिन्हें लगता है कि इससे समाज व देश को खतरा है, उनका रांची से प्रकाशित होनेवाले सभी अखबारों से कुछ सवाल...
क. आप हमें ये बताएं कि इस प्रकार के विज्ञापन से आप समाज को क्या दे रहे हैं?
ख. क्या आपका सामाजिक दायित्व नहीं बनता?
ग. क्या आप समाज व देश से बड़े हैं?
घ. क्या आपको कोई पैसे देगा और उसके लालच में आप सामाजिक मर्यादा को तार – तार कर देंगे?
ङ. क्या आपको मालूम नहीं कि जब सबेरा होता है तो ये अखबार नन्हें- मुन्नों के हाथों में भी पहुंचते हैं? ऐसे में आप बताएं कि उनके मन पर इस प्रकार के विज्ञापन कैसा प्रभाव डालता होगा?
च. आपसे नम्र निवेदन, शर्म करिये और ऐसे विज्ञापनों से खुद को अलग करिये...क्योंकि ये मत भूलिये कि ये अखबार आपके बच्चों के हाथों में भी होता है। ये समाज व देश आपका भी हैं, इसका नमक खाया है तो इसका कर्ज अदा करिये?
पत्रकारिता देश हित में
लालच में पत्रकारिता नहीं...
देश हमारा, हम देश के
ये नारा कभी भूले नहीं...

Monday, January 4, 2016

वाह रे ढुलू, तेरी तो निकल पड़ी...............

आज रांची से प्रकाशित “प्रभात खबर” ने पृष्ठ संख्या 7 पर “ढुल्लू पर मुकदमा
वापसी के फैसले पर उठे सवाल” नामक शीर्षक से जो आलेख प्रकाशित करते हुए एक विशेष पेज दिया है। उनमें जितने भी सवाल उठाये गये। उन सवालों को मैंने अपने फेसबुक और ब्लॉग के माध्यम से 30 अक्टूबर को ही उठा दिया था, जो आज भी मेरे फेसबुक और ब्लाग www.vidrohi24.blogspot.in पर मौजूद है। मैंने 30 अक्टूबर को लिखा था “कानून को ठेंगा दिखानेवाले विधायक ढुलू महतो को बचाने का प्रयास...
मनमुताबिक मंतव्य लेने के लिए, लोक अभियोजक का तबादला...
प्रभार लेने के पूर्व ही, सरकार के मनमुताबिक रिपोर्ट, धनबाद डीसी को भेजा ए के सिंह-2 ने...”
गर उस आलेख को ध्यान से देखें अथवा पढ़े तो सब कुछ स्पष्ट हो जायेगा...
चलिये सवाल किसी ने भी उठाया हो, वो सवाल पहले उठाया गया अथवा बाद में...यह महत्वपूर्ण नहीं...
गर सवाल में ताकत है तो उसका जवाब सरकार की ओर से आनी ही चाहिए, क्योंकि सरकार ने कई बार कहा है कि वह भ्रष्टाचार मुक्त झारखंड बनाना चाहती है...
अब सरकार ही बताये...
कि जो व्यक्ति अथवा विधायक
1. पुलिस की वर्दी फाड़ दे...
2. संभ्रांत नागरिकों को चोर – चुहाड़ बोले...
3. जिसके भय से डीएसपी कांपने लगे...
4. जिसके भय से बीसीसीएल के वरीय अधिकारी इस्तीफा देने की पेशकश करें...
5. जो स्थानीय पुलिस के समानान्तर एक टाइगर सेना बना लें...
6. जो अपने विरोधियों को भगवान के पास भेजने का बयान जारी करें...
और ऐसे लोगों को सरकार बचाने का प्रयास ही नहीं, बल्कि उसे बचा लें तो क्या ऐसे में झारखंड भ्रष्टाचार मुक्त बनेगा...

Wednesday, December 30, 2015

नया वर्ष अब आयेगा.............

नया वर्ष अब आयेगा
मुर्गा खूब कटायेगा...
बकरा पर बन आयेगा
न्यू इयर डे कहलायेगा...
एक दिन के लिए ही सही
सभी मस्त हो जायेगा...
कोई गरीब न रहेगा दुनिया में
सब टन टन हो जायेगा...
कंबल लेनेवाला और
कंबल देनेवाला...
एक ही होटल में बैठकर
साथ ही पैग बनायेगा...
ऐसा दिन देख के लोगों
जी मेरा भर जायेगा...
छोटे – छोटे कपड़ों में
डांस बार सज जायेगा...
एक ही नशा
नये साल का
ऐसा सब पर छा जायेगा...
एक ही रायफल से चलेगी गोली
धायं धायं हो जायेगा...
बुढ़ा-बुढ़िया जो ठंड कांप रहे
उसकी मस्ती चढ़ जायेगी...
होली आने में दो – तीन महीने
आज ही होली हो जायेगी...
कोई न होगा
छोटा बड़ा
सभी होंगे समान...
एक बोतल से दारु गटगट
सुबह होगी या शाम...
ऐसा ही भारत में
नया साल मनता है...
कौन कहता है
भूखा भारत
सभी झूठ कहता है...
अरे देखना है भारत की अमीरी
एक जनवरी को देखो...
सड़क पर ही नंगे हो गये
औरत-मर्द तुम देखो...

Tuesday, December 29, 2015

हेमंत का दिव्यज्ञान........

झारखण्ड का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य, यहां एक से बढ़कर एक नेता है...
जब ये सत्ता में रहते हैं तब इनका दिव्यज्ञान घास चरने चला जाता है और जब विपक्ष में होते है तब इनका दिव्यज्ञान पुनः इनके मनमस्तिष्क में दिव्यता के साथ आ धमकता है...फिर जब ये देना शुरु करते है तो जैसे लगता है कि दुनिया की सारी बुद्धि गर किसी के पास हैं तो इन्हीं के पास है...।
जरा देखिये आज के अखबारों को, हेमंत सोरेन जो शिबू सोरेन के बेटे है, वहीं शिबू सोरेन जिन्होंने घूस लेकर कांग्रेस के नरसिम्हा राव सरकार को जीवनदान दिया था, वहीं शिबू सोरेन जो झारखण्ड बनने के क्रम में पहला मुख्यमंत्री बनने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चरण स्पर्श किये और गणेश परिक्रमा की थी, वहीं शिबू सोरेन जो कभी भाजपा के वोट से राज्यसभा भी पहुंचे थे, वहीं शिबू सोरेन जो अपने परिवार के सभी सदस्यों को राजनीति के माध्यम से उनका जीवन सफल करने में लगे रहते है, जिनके परिवार के सदस्यों के पीछे सीबीआई हमेशा लगी रहती है, वहीं शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन ने बयान दिया है कि खतियान हो स्थानीयता का आधार। मैं पूछता हूं – भैया हेमंत, जो स्थानीयता पर आज बयान दिये जा रहे हो, इसी प्रकार का बयान तो कभी कांग्रेस की विधायक गीताश्री उरांव ने दिये थे, जब आप मुख्यमंत्री थे। उस वक्त आपने स्थानीयता का मुद्दा क्यों नहीं हल किया? उस वक्त तो सत्ता आपके हाथ में थी...अगर आपकी सरकार इस मुद्दे पर चल भी जाती, फिर भी आप पूर्ण बहुमत में आते...। इसके बावजूद इस स्थानीयता के आग से खेलने की रुचि क्यों नहीं दिखाई? उस वक्त आप के आज का दिव्यज्ञान कहां चला गया था?
हे खतियान भक्त नेता हेमंत जी, आज आप जो अपने प्रिय हिमांशु शेखर चौधरी को झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के सहयोग से सूचना आयुक्त बनाया, क्या आप बता सकते हो कि राज्य के कितने आदिवासी बच्चों का इसी प्रकार आपने कल्याण कराया?, वह भी तब जबकि आप राज्य के मुख्यमंत्री थे। आप बता सकते हैं कि झामुमो के दिग्गज नेता हेमलाल मुरमू और सायमन मरांडी जैसे नेताओं को भाजपा का दामन क्यों पकड़ना पड़ा? आपके पिता और आपकी पार्टी तो के डी सिंह जैसे लोगों को महान बनाती है और कैसे बनाती है?, वो राज्य की जनता से छूपी हैं क्या?
जरा आप अपने पिता शिबू सोरेन से ही पूछिये कि आखिर क्या वजह है कि रघुवर सरकार की वे प्रशंसा करते नहीं थक रहे, आज भी अखबारों में आया कि शिबू ने रघुवर सरकार की प्रशंसा की और आप रघुवर दास की सरकार के खिलाफ दिये जा रहे है...कहीं कोई डीलिंग वाली बात तो नहीं हैं न...गर कोई डीलिंग करनी हैं और डीलिंग की राजनीति कर रहे हैं तो फिर तो बात ही नहीं करनी...क्योंकि झारखंड की राजनीति तो डीलिंग ही प्रधान है...। मैंने तो कई नेताओं और विधायकों को देखा कि वे सदन में और सदन के बाहर बाबू लाल मरांडी की आलोचना करते थे, और जब बाबू लाल मरांडी के मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचते थे, तो डीलिंग करने लगते थे, जिस पर बाबू लाल मरांडी हंस भी दिया करते थे और कहते थे कि यार राजनीति करनी है या झारखंड का विकास करना है... अच्छी तरह पहले सोच लो, तो फिर बात करो...
तो लगे हाथों आप भी बता ही दीजिये... कि स्थानीयता के खतियान वाले बयान से रघुवर सरकार को आप ब्लेकमेल कर रहे है या सचमुच आपको झारखंड के विकास की चिंता है...
हालांकि मैं जानता हूं कि आप को झारखंड के विकास की कितनी चिंता है? असली बात तो यह हैं कि आपको जो चाहिए, वो मिल गया... कम से कम कहने में आता हैं न कि आप राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री है...आपको विकास से क्या मतलब? और रही बात रघुवर दास सरकार के काम-काज की...। तो कम से कम आपकी सरकार से तो यह बेहतर ही काम कर रही है और इसका सर्टिफिकेट आपके पिताश्री शिबू सोरेन एक नहीं, दो बार दे चुके हैं...

यहां तो हर जगह विभीषण ही दिखता है भाई...

जब से रघुवर दास झारखंड के मुख्यमंत्री क्या बने ? भाजपा के वरिष्ठ नेता, स्वयं को भाजपा के थिंक टैंक कहनेवाले, नीतीश भक्त सरयू राय की नींद ही गायब है। कोई ऐसा समय ये नहीं चूकते, जिसमें वे रघुवर सरकार को कटघरे में न रखते हो। अब लीजिये कल की ही बात है। मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने आवास में अपना वार्षिक प्रगति रिपोर्ट पेश कर रहे थे और राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय जमशेदपुर में सिसक रहे थे, वे बता रहे थे कि राज्य में अभी तक कुछ नहीं हुआ, ये इस प्रकार बोल रहे थे, जैसे लगता हो कि अगर ये मुख्यमंत्री होते तो राज्य में निश्चय ही राम राज्य आ चुका होता...
भाई मुख्यमंत्री बनने का सपना देखना, कोई गलत बात नहीं, देखना चाहिए...। पर इससे भी अच्छा रहता कि जो आपको काम मिला, उसमें आप कार्य कर सिद्ध करते कि आप सबसे बीस हैं, उन्नीस नहीं। यहां तो काम न धाम और चले बाबाधाम वाली कहावत सिद्ध हो रही है। सरयू राय दिन प्रतिदिन इस बात को लेकर घूलते जा रहे है कि भाई छतीसगढ़ का आदमी झारखंड का मुख्यमंत्री और बिहार से आनेवाले तीव्रबुद्धि का आदमी, क्षत्रियकुलभूषण खाद्य आपूर्ति मंत्री, ये तो बड़े ही शर्म की बात है...
सच पूछिये तो कोई भी व्यक्ति तभी बड़ा बनता है, जब उसे कोई जिम्मेवारी दी जाती है और वो जिम्मेवारी को ईमानदारी पूर्वक निर्वहण करता है, यहां तो जिम्मेवारी का निर्वहण तो दूर, बस एक ही काम करना है, सरकार में रहकर सरकार को ही खोदते रहना है...कि ये नहीं किया, वो नहीं किया...और खुद कुछ नहीं करना है...
सच्चाई यह है कि राज्य में एक समय था कि श्रम मंत्री को कोई जानता नहीं था और न ही इस विभाग में दिलचस्पी लेता था, पर आज देखिये झारखंड का श्रम मंत्रालय का तू-ती बोल रहा है। विश्व बैंक ने संपूर्ण भारत में झारखंड के इस श्रम विभाग को पहले स्थान पर रखा है...बधाई दीजिये श्रम मंत्रालय संभाल रहे नवोदित युवा मंत्री राज पालिवार को जिसने वो कर दिखाया, जो कूबत किसी में नहीं थी...पर जरा सरयू राय के विभाग का हाल देखिये...100 प्रतिशत फिसड्डी। गर आज का प्रमुख अखबार पढ़िये तो पता लग जायेगा कि सरयू राय ने जो विभाग संभाला है, उसकी सही स्थिति क्या है?
मेरा मानना है कि आखिर जो गलत कार्य आप कर रहे हैं, जिसके कारण राज्य सरकार की छवि खराब हो रही है, उसकी जिम्मेवारी मुख्यमंत्री या सरकार पर न देकर खुद इसे स्वीकार करते हुए, सरयू राय को मंत्रिमंडल से अलग हो जाना चाहिए और नीतीश की पार्टी में शामिल होते हुए, जदयू को मजबूत करना चाहिए...क्योंकि ऐसे भी जदयू में बहुत सारे पद झारखंड के लिए खाली है। नीतीश ऐसे भी सरयू राय को बहुत मानते है, प्यार करते है, जरुर ही कृपा लूटायेंगे, ठीक उसी प्रकार जैसे क्षत्रियकुलभूषण, प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश पर लूटाया...तो सरयू देर क्यों कर रहे है... हमें समझ में नहीं आ रहा...यही मौका है मुख्यमंत्री बनने के लिए सही निर्णय लेने का।

Monday, December 28, 2015

कहीं मोदी जी, जवाब कर न लगा दें...........

एक स्कूल में...
मैडम – बच्चों से,
बच्चों बताओं भाजपा व कांग्रेस के शासनकाल में क्या समानता है?
बच्चे – मैडम,
1. कांग्रेस राहुल और राबर्ट वाड्रा के लिए काम करती है और भाजपा अंबानी और अडानी के लिए...
2. कांग्रेस ने भी महंगाई का रिकार्ड बनाया, और भाजपा ने भी रहर दाल और तेल के माध्यम से महंगाई का रिकार्ड बना चुकी है...
3. कांग्रेस के समय भी पाकिस्तान भारत को लतियाता था, उसके वीर बांकुड़ों का सर काट कर ले जाता था फिर भी कांग्रेस के लोग पाकिस्तान की जय-जय करते थे, आज भाजपा के समय भी पाकिस्तान हर बार सीज फायर का उल्लंघन कर भारत को लतियाता है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नवाज शरीफ के मां का चरण छू कर गदगद हो जाते है...
4. कांग्रेस भ्रष्टाचार के कारण ही गयी, भाजपा भी जायेगी, क्योंकि अरुण जेटली जैसे लोगों ने भाजपा को मिट्टी में मिलाने के लिए हर संभव कार्य करना प्रारंभ कर दिया है...
5. कांग्रेस शासनकाल में कांग्रेसी अपने कार्यकर्ताओं को अपने पास फटकने नहीं देते थे और उन्हें गरियाने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे तथा अपने चापलूसों और चरणोदक पीनेवालों को धन-धान्य से परिपूर्ण कर देते थे, अब भाजपावाले भी उसी का अनुसरण कर रहे है...
6. और सबसे बड़ी बात कांग्रेस में भी अनुशासनहीनता का रिकार्ड बनानेवालों की कोई कमी नहीं, ठीक उसी प्रकार भाजपा में भी अनुशासनहीनता का रिकार्ड तोड़नेवालों की कोई कमी नहीं...
मैडम – वाह बच्चों, तुमने सही उत्तर दिये...
तुम्हें मिलते है, दस में दस अंक...
मैडम – बच्चों से, एक और सवाल...
क्या अच्छे दिन आ गये?
बच्चे – जी हां...अच्छे दिन आ गये...
भाजपा शासित राज्यों में अंबानी और अडानी के समूह उदयोग लगा रहे है, और उन्हें हर प्रकार की सुविधा मिल रही है और जनसामान्य दो रोटी के लिए तरस रही है...
रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेलयात्रियों को सब्जबाग दिखाकर प्रतिदिन लूट रहे हैं कभी सुरक्षा व स्वच्छता के नाम पर तो कभी तत्काल टिकट के दाम बढ़ाकर, यानी जनसामान्य तो अब रेल का नाम सुनते ही डर जाती है, ये कहकर कि पता नहीं कब रेलमंत्री जेबकतरे की तरह आसानी से उनके पाकेट से रुपये निकाल लें और वे देखते रह जाये...
बच्चे – मैडम अब छोड़ दीजिये, और सवाल मत पूछिये, नहीं तो हो सकता है कि जवाब देने पर भी मोदी भाई, सेवा कर के जैसा, जवाब कर न वसूलने लगे...
शिक्षक – हा हा हा हा...................

Monday, December 14, 2015

गुड़ खाये पर गुलगुल्ले से परहेज...........

गुड़ खाये पर गुलगुल्ले से परहेज...
वे गुड़ खुब खाते हैं...
पर गुलगुल्ले से परहेज करते हैं...
खुद के अखबारों में अपना नाम नहीं छपवाते हैं...
नाम क्या पद भी नहीं दिलवाते हैं...
शायद खुद को इससे चरित्रवान शो करते हैं...
पर कभी – कभी...
खुद के ही अखबारों से निकलनेवाले किताबों में...
एडिटर इन चीफ बन धूम मचाते हैं...
टीवी में अपनी सुविधानुसार कभी नेता...
तो कभी पत्रकार बन जाते हैं...
राज्य सरकार की दूरभाष – निर्देशिका में...
अखबार के प्रधान के रुप में दीख जाते हैं...
खुद को जेपी व चंद्रशेखर के चेले के रुप में...
दिखलाने का खुब यत्न करते हैं...
अरे क्या कहूं...
आजकल जनाब...
गुड़ खुब खाते हैं...
पर गुलगुल्ले से परहेज करते हैं...

Friday, December 11, 2015

अरविंद और नरेन्द्र मोदी में बेशर्म कौन............

अरविंद और नरेन्द्र मोदी में बेशर्म कौन ?
हमारे देश में बेशर्मों की कमी नहीं, उन्हीं बेशर्मों में से एक है –अरविंद केजरीवाल। ईमानदारी का ढोल पीटकर, दिल्ली की 70 सीटों में से 67 सीटों पर कब्जा कर लिया और अपने 67 विधायकों का वेतन 400 फीसदी बढ़ा लिया। क्या अरविंद केजरीवाल बता सकता है? कि उसने अपने राज्य के कर्मचारियों और कामगारों को 400 फीसदी वेतन बढ़ायी, जैसा कि खुद के लिए कर लिया...उत्तर होगा नहीं। क्या दिल्ली में आम आदमी की हैसियत बढ़ी? अगर नहीं बढ़ी तो फिर अरविंद केजरीवाल किस हैसियत से अपना और अपने मातहतों विधायकों का जीवन स्तर सुधारने के लिए स्वयं के वेतन में अप्रत्याशित वृद्धि कर ली।
यह है 100 प्रतिशत सत्ता का चरित्र...सत्ता खुद को ईमानदार घोषित करने से मिलती है और जब सत्ता मिल जाये तो अपने परिवारों और अपने शुभचिंतकों का ख्याल रखों, जनता जाये भाड़ में....और मजाक उड़ाओ, उनका जो कभी तुम्हारा मजाक उड़ाया करते थे, ये कहकर कि रह गये न...
ये है हमारे देश के नये – नये नेता अरविंद केजरीवाल, कभी बोलता था कि उसकी पार्टी आम आदमी की पार्टी है, इसलिए पार्टी का नाम रखा – आम आदमी पार्टी। जरा पूछो अरविंद केजरीवाल से कि क्या आम आदमी की सैलरी उतनी है?, जितनी उसकी है...क्योंकि वो तो आम आदमी का नेता है...
जब कथनी और करनी में अंतर होता है, तभी भ्रष्टाचार का जन्म होता है। भ्रष्टाचार केवल धन लोलुपता ही नहीं, भ्रष्टाचार आचरण की मर्यादा को तोड़ना भी है, पर हम ऐसे घटियास्तर के नेताओं से उसकी आचरण की मर्यादा के बारे में भी बात नहीं कर सकते, क्योंकि ज्यादा दिनों की बात नहीं है, वो हाल ही में भ्रष्टाचार शिरोमणि सजायाफ्ता लालू प्रसाद के भी गले मिल चुका है, शायद वो दिखलाना चाहता हो कि लालू तुम क्या जानते हो? भ्रष्टाचार में हम तुम्हारे भी बाप सिद्ध होंगे। सत्ता का स्वाद भी चखेंगे, खूब पैसे भी कमायेंगे, जनता को लूटेंगे भी, फिर आनन्द से उपर भी जायेंगे और बाद में दिल्ली या देश की सड़कों पर अपनी मूर्ति बनवाकर सदा के लिए खुद को पूजवायेंगे भी...
लेकिन इस के विपरीत सत्ता में ही रहकर सत्ता का सुख लेने से वंचित त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार को देखिये, इन सबसे अलग उन्हें क्या करना है?, वे करते जा रहे है?
ठीक उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देखिये, उनके उपर लगातार छीटाकशीं व हमले जारी हैं, पर इनसे बेफिक्र, वे देश सेवा में लगे है, हालांकि नरेन्द्र मोदी की सत्ता जल्द समाप्त हो, इसके लिए तो कांग्रेस के कई नेता पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ के तलवे तक चाट चूके है, ऐसे –ऐसे बयान दिये है, जिसे पढ़ व सुनकर शर्म महसूस होती है कि ऐसे नेता इस भारत में ही क्यों पैदा होते है?, अन्य जगहों पर क्यों नहीं? कुछ दिनों पूर्व, एक कांग्रेसी ने नेपाल संकट पर जो बयान दिया, उस बयान से एक बात फिर पुष्ट हो गयी कि कांग्रेस सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है, पर फिलहाल उसका वश नहीं चल रहा...
दूसरी ओर जरा अरविंद केजरीवाल का बड़बोलापन देखिये, अपने प्रधानमंत्री का किस प्रकार मजाक उड़ाते है...विधानसभा में अपने मंत्रियों और विधायकों की सैलरी में 400 फीसदी का इजाफा करनेवाले अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर उनकी सैलरी को लेकर उनका मजाक उड़ाया था। कहा था कि ओबामा यदि मोदी से उनकी सैलरी पूछेंगे, तो क्या बतायेंगे कि उन्हें 1.60 लाख रुपये मिलते है। मोदी जी को अपनी सैलरी बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक कर लेनी चाहिए...पर शायद अरविंद केजरीवाल और उनके पिछलग्गूओं को पता नहीं कि...
देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसा व्यक्तित्व कहीं नहीं...
अरविंद जान लो, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में और उनके वेतन के बारे में...
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ज्यादातर सैलरी दान कर देते है।
गुजरात के सीएम थे, तब भी ऐसा ही करते थे।
गुजरात से दिल्ली चले, तो 21 लाख रुपये गुजरात की बेटियों के नाम कर दिया, ताकि वह पढ़े और आगे बढ़े।
इस महीने की तनख्वाह चेन्नई में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए देंगे।
मई में अपने हिस्से की सैलरी नेपाल पीड़ितों के नाम की थी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टेक होम सैलरी भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी कम है। मनमोहन सिंह की टेक होम सैलरी करीब 48,000 रुपये होती थी।
अब निर्णय जनता करें...
कि बेशर्म और बदतमीज कौन है?
अरविंद केजरीवाल या नरेन्द्र मोदी?

Friday, December 4, 2015

परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना ने प्रभात खबर को धूल चटाया...............

परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना ने प्रभात खबर को धूल चटाया...
इसे कहते है, नहले पे दहला...
प्रभात खबर अखबार ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसकी इतनी भद्द पीटेगी, पर ये तो सत्य है, उसकी भद्द पिटी है, और वह भी अमर शहीद परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना एक्का के द्वारा, जब बलमदीना एक्का ने प्रभात खबर के इस नौटंकी पर ही यह कहकर विराम लगा दिया कि ये मिट्टी मेरे शहीद पति की ही है यह मैं कैसे मान लूं। मैं इसे छुऊंगी भी नहीं...
अलबर्ट एक्का के बेटे विनसेंट एक्का का कहना था कि बाबा की मिट्टी आ रही है हमन के जानकारी नखे...
क्या बात है?
हर जगह राजनीतिबाजी...
और इस बार राजनीतिबाजी कर दी, रांची से प्रकाशित प्रभात खबर ने, वह भी परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का के नाम पर...
फिलहाल हम आपको बता दें कि सच्चाई यहीं हैं कि बलमदीना एक्का ने प्रभात खबर द्वारा आयोजित और राज्य सरकार द्वारा प्रभात खबर को अप्रत्यक्ष रुप से समर्थित इस कार्यक्रम में लाए गये माटी को अस्वीकार कर दिया और फिलहाल ये माटी गुमला के उपायुक्त के पास रख दी गयी है...
इतना होने के बावजूद भी प्रभात खबर का घमंड टूटा नहीं है...उसने आज भी अपने किये पर पर्दा डालने की झूठी कोशिश की है, जबकि सभी अखबारों ने उसके झूठ की पोल खोलकर रख दी है...
जरा गौर करिये...
रांची से प्रकाशित हिन्दुस्तान ने हेडिंग दी – “कलश लेने से किया इनकार”
दैनिक जागरण ने हेडिंग दी – “समाधि की मिट्टी लेने से परिजनों का इनकार”
दैनिक भास्कर ने लिखा – “ये मिट्टी मेरे शहीद पति की ही है यह मैं कैसे मान लूं। मैं इसे छुऊंगी भी नहीं”
और प्रभात खबर ने लिखा – मुख्यमंत्री ने शहीद अलबर्ट एक्का की पवित्र मिट्टी सौंपी – अरे यार किसको सौपी ये तो बताओ, यानी झूठ पर झूठ...
एक बार फिर प्रभात खबर ने दूसरा झूठ छापा, आज का प्रथम पृष्ठ देखिये –जिसमें लिखा है – अलबर्ट एक्का चौक से सुबह सात बजे उपायुक्त और एसएसपी ने किया सजे रथ को रवाना और इसी का संवाददाता पृष्ठ 11 पर लिखा है कि डीसी और एसएसपी ने सुबह 8 बजे रथ को रवाना किया, वह भी उस हालात में, जबकि प्रभात खबर निवेदक बना हुआ था...ये सारा कार्य उसी के द्वारा चलाया जा रहा था...तब ये हालात है इस अखबार के, खुद को लिखता है, अखबार नहीं आंदोलन...ये कैसा आंदोलन चला रहा है भाई...भगवान ही मालिक है इस अखबार का...खुद निवेदक होता है और जहां से रथ रवाना होता है, जहां रथ की सबसे पहले स्वागत होनी चाहिए, पुष्पवृष्टि करनी चाहिए, वहां से इसकी पूरी टीम ही गायब रहती है...
हे ईश्वर, इस अखबार के प्रधान संपादक, कारपोरेट एडीटर, कार्यकारी संपादक और संपादक को सद्बुद्धि दें, पर उसे सद्बुद्धि मिलेगी कैसे? उसका तो प्रधान संपादक महागठबंधन के नेताओं का पूजा-अर्चना करने में लगा है...

Thursday, December 3, 2015

प्रभात खबर के इस आचरण को देख अलबर्ट एक्का भी शरमा गये होंगे....

आज सुबह आंख खुलते ही, प्रभात खबर अखबार पर नजर पड़ी...
प्रभात खबर ने निवेदन किया था...
“फूल बरसाइए
शहीद अलबर्ट एक्का की समाधि की पवित्र मिट्टी तीन दिसम्बर को रांची से जब जारी गांव (गुमला) की ओर बढ़ेगी, जगह-जगह पर आप कलश पर फूल बरसा कर अपने नायक का सम्मान करें.
निवेदक
प्रभात खबर”
यात्रा का समय भी दिया गया था...
सुबह 7 बजे
अलबर्ट एक्का चौक से प्रस्थान...
पर क्या आप जानते है?
कि जिस प्रभात खबर अखबार ने निवेदन किया था, उसका एक भी आदमी रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर मौजूद नहीं था, वह भी तब, जब रांची के अलबर्ट एक्का चौक से रथ प्रस्थान करनेवाला था, यहीं नहीं रथ की अगुवानी करने की दिलचस्पी भी इन प्रभात खबर वालों ने नहीं दिखाई यानी
फूल बरसाने का निवेदन करनेवाला, खुद ही फूल बरसाने से अपने आप को अलग कर लिया था...शायद उसे सुबह में ठंड लगने का खतरा था या देर से उठने की आदत, मुझे समझ नहीं आया...
मैं पूछता हूं, प्रभात खबर के प्रधान संपादक से, कि जहां कारपोरेट एडीटर, कार्यकारी संपादक और संपादक यानी संपादकों की ही लंबी फौज रखने की परंपरा है वहां इनमें से किसी एक संपादक या आपके यहां कार्यरत अन्य लोगों में से किसी एक व्यक्ति को छुट्टी नहीं थी कि वो रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर शहीद अलबर्ट एक्का की माटी का सम्मान करें...अरे आप निवेदनकर्ता थे, निवेदक थे, कम से कम इसका तो ख्याल रखना चाहिए था आपको...
आज ही देखिये आपके कार्यकारी संपादक अनुज कुमार सिन्हा ने क्या लिखा है – “छोटी और ओछी राजनीति, आलोचना, नकारात्मकता से समाज का भला नहीं होता. यह शहीद की समाधि की माटी है. इसकी पवित्रता को समझें और नमन करें. कर्म और दायित्व को प्रमुखता दें”
अनुज जी, झारखंड की जनता कर्म और दायित्व को प्रमुखता देने के अपने संकल्प को हृदय से लगाकर रखती है, उसे आपके ज्ञान की जरुरत नहीं...
जरुरत तो आप जैसे प्रभात खबर में कार्य कर रहे उच्च स्थानों पर बैठे लोगों को है, जो शहीद अलबर्ट एक्का चौक की आड़ में प्रभात खबर को चमकाने में लगे है... जो शर्मनाक है...
खुशी इस बात की है कि यहां की जनता जाग चुकी है...शायद यहीं कारण है कि आपके इस निवेदन की कम से कम रांची की जनता ने अनसुनी कर दी...शायद उसे पता था कि जो निवेदन किया है, वो खुद ही नहीं होगा...तो ऐसे जगह जाने से क्या मतलब...अलबर्ट एक्का तो हृदय में रहते है...उन्हें हमेशा नमन है...दुनिया को दिखाने की क्या जरुरत...
शायद यहीं कारण भी रहा कि अलबर्ट एक्का चौक पर जब रथ आया तो उस पर पुष्पांजलि देने के लिए तीन ही हाथ बढ़े, दो आदिवासी महिलाओं के और एक भाजपा नेता प्रेम मित्तल के...चौथा मैं ढूंढता रहा कोई नहीं मिला और खोजा प्रभात खबर के उन कर्णधारों को भी, जो पिछले कुछ दिनों से अलबर्ट एक्का के नाम पर प्रभात खबर – प्रभात खबर का ढिंढोरा पीट रहे थे... पर वे रांची से गायब थे, मैंने पूछा आखिर क्यों...तो एक पत्रकार ने मजाक में कहा कि बड़ा ठंडा है न और अखबार में रात में बहुत काम रहता है...इसलिए रांची में ये महापुरुष नहीं दिखेंगे, ये सभी महापुरुष है, इसलिए जारी गांव में मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ दीखेंगे...क्योंकि कल ही तो मुख्यमंत्री ने कहा था कि पत्रकारिता प्रभात खबर जैसी करनी चाहिए...और फिर वह ठठा कर हंसने लगा...
सचमुच अलबर्ट एक्का के नाम पर जिस प्रकार लोगों का भावनात्मक शोषण प्रभात खबर ने किया है...हमें लगता है कि इसे देख स्वर्ग में बैठे अलबर्ट एक्का भी शरमा गये होंगे...

Wednesday, December 2, 2015

अरे वाह नीतीश भाई......

अरे वाह नीतीश भाई...
बहुत बढ़िया सरकार चला रहे है...
इसी तरह आप सरकार चलाते रहे, तो बिहार सचमुच बहुत आगे निकल जायेगा...
कल पता चला कि आपको सहयोग दे रहा, आपका बड़ा भाई लालू प्रसाद अपनी पत्नी रावड़ी देवी को विधानमंडल दल का नेता बना दिया है और अपने दोनों बेटों को तो पहले ही मंत्रियों की श्रेणी में लाकर खड़ा दिया, जिसकी अवहेलना करने की आप में ताकत ही नहीं थी...
आज पता चला कि अभी तो आपकी सरकार बने दो हफ्ते भी नहीं हुए और अपराधियों ने अब तक पूरे बिहार में आधे दर्जन बैंक लूट लिए...
कल कटिहार में बंगाल से आये एक मक्का व्यापारी को लूट लिया...
शायद ये लूट का क्रम तब तक चलता रहेगा, जब तक आपके जीते हुए विधायक और मंत्रियों का समूह सामाजिक न्याय नहीं ला देता और इसके तहत अपनी गरीबी नहीं समाप्त कर लेता...
यहीं नहीं अपराधियों ने तो जमुई से भगवान महावीर की अतिप्राचीन और बेशकीमती मूर्ति भी लूट ली...
और
बधाई इसके लिए भी आपके एक विधायक के समर्थकों ने तो भागलपुर के जिला मुख्यालय में तैनात डीएसपी को ही गंगा में फेंक देने की कोशिश की
और राजद के एक विधायक ने तो एक पुलिसकर्मी को ही ठिकाने लगाने की बात कर दी...
बस अब क्या...
सामाजिक न्याय आ गया...
प्रभात खबर के प्रधान संपादक और जदयू के सांसद हरिवंश का सपना साकार हो गया...